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टाइप करवंता,नित्य नचंता,
आखर आता,छळकंता।
मनड़ौ मुस्काता,टुन टणकाता,
झन झनकाता,आ पड़ता।
मैसेज घणेरै, तेरे मेरे,
सांझ सवेरे,दिख जावै।
अंतस री वाणी,कुल री कांणी,
आंख्यां पांणी,झट लावै॥(१)
बैलेंस झपीड़ा,करै हबीड़ा,
बात बतीड़ा,करवा दे।
ओ नेट नवेलो,होय झमेलो,
झट दण हैलो,करवा दे।
रंगां सू रंगियां,कूड़ वीडिया,
बणा सीड़िया,बपरावै।
ओ मिनखपणै नै,रीतपणै नै,
प्रीतपणै नै, भरमावै॥(२)
- महेन्द्रसिंह सिसोदिया(छायण)
जठे आई माँ रो धाम रे, ङुगरीयो रलियावणो ||
ऊँचे ङुगर ओर लो ज्यारी धजा उङे असमान रे |
जोत जगामग जगमगे माँ रा नामी धूरत निशान रे ||1||
ङुगरियो रलियावणो...........
पग धरिया इण पैङिया म्हारा दुखङा हुयग्या दूर रे|
दरस कर्यो जगदम्ब रो म्हारे सुख रो उग्यो सूर रे||2||
ङुगरियो रलियावणो...........
इण ङूगर पर आय कर कोई धरे रे भगत जन ध्यान रे |
आणंद उर मे ऊपजे बाने आतम होवे ओलखान रे ||3||
ङुगरियो रलियावणो.........
हल तो सिन्धु हाकङो ज्यारो पानी बिन परवाण |
आवङ सोख्यो एकलां जे रो नीर न बचीओ निवाण रे ||4||
ङुगरियो रलियावणो.........
भुजंग ङस्यो निज भ्रात ने अम्बा लोवङ रोक्यो भाण रे |
अमरापुर सूं आवङा माँ इमरत दीनो आण रे ||5||
ङुगरियो रलियावणो.......
मारयो राकस तेमङो माँ इण ङूगर पर आय रे |
ऊंङो दर में दाटियो माँ अधर शिला अटकाय रे ||6||
ङुगरियो रलियावणो..........
दीज्यो थारे दास ने अम्बा भगती रो वरदान रे |
सोहन चरणां शरण मे म्हारो मात राखिजे मान रे ||7||
ङुगरियो रलियावणो......
भूलचूक -क्षमाप्रार्थी
👏👏टाईप - प्रेम चारण भाखराणी👏👏
सिध्ध कुंजीका सांतरी, करण सकळ सुभ काज।
गुरु चावि गढवी तणी, मेहाई महाराज ॥265
चंडी जाप है चारणी, तारण भव जळ मां ज।
अवस नाम आनंदघन, मेहाई महाराज ॥266
कवच अरगला कीलकां, रो सब है मा राज।
रिधू राज राजेसुरी, मेहाई महाराज ॥267
सुकत ध्यान अर न्यास सब, अरचन वंदन आ ज।
सरस नाम सुखरुप है, मेहाई महाराज ॥268
कथन नाम किनीयाण रो, फळै पाठ दुरगा ज।
जपौ निरंतर जोगणी, मेहाई महाराज ॥269
मारण वश अर मोहनं, सबरा सच्चा राज।
डणंकंती डाढाळ है, मेहाई महाराज ॥270
थंभण उच्चाटन थुं ही, रहस सकळ रिधू राज।
किनीयाणी करुणाकरा, मेहाई महाराज ॥ 271
नमो नमो रुद्रांणी ने, मधु मारण थुं मां ज।
अभयंकर अखिलेशरी, मेहाई महाराज ॥272
खळ कैटभ खप्पर भखा, मारण मां महिखा ज।
आई आनंदा उमा , मेहाई महाराज ॥273
हणणी शुंभ निशुंभ खळ, जागत जोगण मां ज।
महादेवी महाकालिका, मेहाई महाराज ॥274
ऐं ह्रीं क्लीं मंत्रात्मिका,अवनि पालिका आ ज।
काम रुपिणी कामदा, मेहाई महाराज ॥275
बीज रुप बीजांकुरी ,नमन नमन माता ज।
सृजन पाळ संहारिणी, मेहाई महाराज ॥276
चामुंड घाती चंड री, यें कारी वरदा ज।
अभय प्रदा विच्चै उमा , मेहाई महाराज ॥277
मंत्र रुपिणी मावडी, जंत्र रुप पण मां ज।
तंत्र रुप तुं त्रंबका, मेहाई महाराज ॥278
धां धीं धूं तुं धूरजटी, शगति रुप शिवाज।
धरा ध्रुजाणं धा वडी, मेहाई महाराज ॥279
वां वीं वूं वागीशरी, विण वादनी वा ज।
कविता री कमनीयता, मेहाई महाराज ॥280
क्रां क्रीं क्रूं तुं काळका, शवारुढ शिवा ज।
अवर न अब उचर सकूं, मेहाई महाराज ॥281
शां शीं शूं शुभ कारिणी, सारा सारे काज।
चारण री चिंता मणि, मेहाई महाराज ॥282
हुं हुं हुं हुंकारिणी, तुं ही है त्रिपूराज।
जं जं जं जंभ नादिनी, मेहाई महाराज ॥283
भ्रां भ्रीं भ्रूं तुं भद्रका,भैरवी आप भवा ज।
भव भय भंजणि भगवती, मेहाई महाराज ॥284
अं थुं अंबा रुप है, कं रुपां करूणा ज।
चं टं है थुं चंडिका, मेहाई महाराज ॥285
तं रुपा तुं तंत्र है, पं परिपूरण मां ज।
यं रुपा यशदायिनी, मेहाई महाराज ॥286
शं रुपा मां शाम्भवी, विं सुं दस विधा ज।
दुं रुपा दूरगा सदा, मेहाई महाराज ॥287
ऐं ऐश्वर्य अपावणी,वीं वरदाई मां ज।
हं रुपा हंस वाहिणी, मेहाई महाराज ॥288
क्षं रुपा खय कारणी, धीजाग्रणी वड धा ज।
तोड तोड मन तिमिर हर, मेहाई महाराज ॥289
सरळ ह्दय री स्वामिनी, गरळ रुप खळ गाज।
मन रा कलिमल मेटणी, मेहाई महाराज ॥290
मन रा सब शंशय मिटै, दिल जगमग दिवलाज।
अंतस आलोकित ईहग, मेहाई महाराज ॥291
पां पीं पूं थुं पार्वती, पियूष वरषिणी मां ज।
अवल नाम आनंदघन, मेहाई महाराज ॥292
खां खीं खूं थुं खेचरी, रहो अगोचर राज।
काज भगत करता रहो, मेहाई महाराज ॥293
सां सीं सूं सिध सतसती, रटत नाम रिधू राज।
मंत्र सिद्ध म्हारा हुवै, मेहाई महाराज ॥294
टूमण कामण टोटका, मंत्र तंत्र सब मां ज।
वड थड म्हारै विसहथ, मेहाई महाराज ॥295
नमो तंत्र नारायणी, मंत्र रुप हे मां ज।
यंत्र रुप आरासुरा, मेहाई महाराज ॥296
स्वरचित
मेहाई सतसई से
छम छम करती पांव अठे।
आव गज़ल थुं आव अठे।
मन री बातां थनें सुणादूं,
नहीं कपट रा दाव अठे।
दाद ,कहकहा ,वाह वाह री,
अपणायत अणमाव अठे।
मन रा सुर थुं मांड मुळकती,
लय री झांझ बजाव अठे।
थाकी व्हैतो थुं सुस्ता लै,
बड पीपळ री छांव अठे।
जाजम जूनी महफिल माडां,
कोड करे अणमाव अठे।
लय री गहरी लहरी ठहरी
एहडा है घण गांव अठे।
रखसां थानै सिर रे माथै,
वळै पळोटूं पांव अठे।
आवै तो जाजै मत पाछी,
कर मन में ठहराव अठे।
नरपत रे मन रहै निरंतर,
मिळसी आदर भाव अठै॥
वैतालिक
रेत रौ घर दे भलांई छाज देनाज़ दे मिनखापणौ दे लाज दे
छापरौ फाटै भली कर छौ फटै
मारुवां नै मेह दे घण गाज दे
कैद में पंछी हुयौ अधगावळौ
दे सकै तो आभ दे परवाज़ दे
भोग भोग्या ई सरै नरदेह रा
तूं तँदूरै तांण दे सुर साज दे
मुलक री सगळी जबानां जाम क्यूं
गूंगलां नै शब्द दे आवाज दे
जूण किम जमगी हिमाळै बर्फ ज्यूं
अंतसां में ओज अगनी दाझ दे
राज में मिनखापणौ लवलेस नीं
दे कदै तो मिनख नै ई राज दे
आँगळी रौ अेक टपकारौ दियौ
औरुं भुगत्या, साँडियां नै ताज दे
आपणी जूणी अटाळै सारखी
धार बँगला थूं म्हनै गैराज दे
बेङियां बेजा जङी रे साँवरा
देय झटकौ साँतरौ पण आज दे
⊙⊙⊙⊙
--- नवल जोशी
भली चुणी रे भायलां,लोकतंत्र सरकार ॥
लोकतंत्र सरकार , देश नै दी बरबादी ।
म्हैनतकश नै मार,चोरटां नै आजादी ॥
मजा करै मरदूद,करणिया धंधा काळा ।
खुलतां ई दब जाय,फाइलां में घोटाळा ॥१॥
भ्रष्टाचारी म्हैकमा,भ्रष्टाचारी राज ।
भ्रष्टाचारण रै बिना,सरै न कोई काज ॥
सरै न कोई काज,नौकरी लगै न सोरी ।
नोट टेकियां टाळ,बदळियां व्हैणी दोरी ॥
क्रोङौं खर्च चुणाव लङै जिथ सत्ताधारी ।
डूबै मुलक भलाय,न धापै भ्रष्टाचारी ॥२॥
राजा अफसर माफिया,भूमि हङपणहार ।
तस्करिया आतंकिया,चौङा फिरै बजार ॥
चौङा फिरै बजार,संत भोपा बटमारा ।
नोटां री थपकार सुणै ,नाचै दरबारा ॥
बिकै मीडिया न्यूज,बजाय र थोथा बाजा ।
मूंडै मांग्या दाम लेय,बिकजावै राजा ॥३॥
सिंघ विसा राजा कठै,रजवट रापटरोळ ।
पद पाय र पसरै पदा, ठाला गाडर टोळ ॥
ठाला गाडर टोळ,साख चट जाय समूळी ।
मिनखां नै गिट जाय,समझ कर गाजर मूळी ॥
कोयक जे कानून रुखाळा मिळै कदीसा ।
अेकाधौ पज जाय,जियां पजिया सिंघवी सा ॥४॥
--- नवल जोशी
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐ - ॐगणपतयै नमः *ॐ
गणेश स्तुति (छन्द त्रिभंगी में)
(नवल जोशी कृत )
ॐॐॐॐॐॐॐ
जय हे गणनायक सिद्धिप्रदायक
सब सुखदायक वरदायक ।
भक्तन प्रतिपालकविघ्नविदारक
सकल सुधारक फलदायक ॥
लम्बोदर देवा सिमरथ सेवा
जगत कुटेवा हर लेवा ।
भव संकट तारण पाप विदारण
पत रखवाळण सुर देवा ॥
हे रिधसिध दाता प्रकट विधाता
जगविख्याता शुभ दाता ।
प्रथमः आराध्यं जीवन साध्यं
विकट विबाध्यं हर त्राता ॥
हे गवरीनंदन नमो निरंजन
भव भय भंजन सूंडाळा ।
मूषक असवारी जय असुरारी
गजतनधारी विरदाळा ॥
मोदक तव अर्पण भाव समर्पण
सिरधा सिमरण आप ग्रहो ।
अंतस उजियाळा कर सूंडाळा
मम ह्रिदयाळा आन रहो ॥
--- नवल जोशी
अरण रुणीचौ ऊजळौ,(जिथ)तपै त्रिलोकी देव ॥
हुकम टाळ हलणौ कियां,रामदेवरै होय ॥
दूहा रामापीर रा ,जबर रच्या जगदीश ॥
आय र मेटै आपदा,राम रुणीचा नाथ ॥
रामदेव राखै जिनैं,रुणीचै रम जाय ॥
रामदेव राजी हुयां,जग जाळा कट जाय ॥
रजी रुणीचै राज री,भाल लगाय र भाळ ॥
राम रुणीचै राज रौ,ध्यान लगाय र देख ॥
रामदेव रा जातरू,रामदेव री जात ॥
घन्न धणी रै देवरै,जमधारा थम जाय ॥
हाथ जोङ हाजर हुवै,देव धणी रै देश ॥
रामसरोवर राम रौ,मानसरोवर मान ॥
पीर पगलिया पूज नर,तिर जावै तिरकाल ॥
भजै रामसा पीर सो,नर पावै निरवांण ॥
हरजस जुम्मा जागरण,रामसरोवर तीर ॥
राम धणी रौ ध्यान धर,रामसरोवर न्हाय ॥
अंतस दीजै आस्था,उर दीजै उजळास ।
बाबा थारै बेरणै,अथ इतरी अपदास ॥
-- नवल जोशी
जुलमी जुलम कियो घणो,गिरी गुलामी गाज। बैरण बण गौरों तणी,लिसमी रखली लाज।।
मरहट्ठी हट्टी नही, दटी रही कर घाव।
औ राणी अंग्रेज सूं, बूंदेली घण चाव ॥
सबसूं उपर देश हित, मन में मरण उछाह।
करण निछावर प्राण निज, वाह! मराठण वाह!॥
लियां हाथ शमसीर,चढ़ी रँग तुरँगज तातां।
अमर रैवसी लिछमी थारे जस री बातां।
खण्ड भलौ बुन्देल,देश मरहट्ठ उप्पज्जि।
झांसी जस ल्यो जीत जठै लिच्छमीज निप्पज्जि। जोर लड़े घनघोर बड़ो बलशील अबै चकरावत भारी
वेग प्रहार करे रजनीचर हाथ घुमाय कियो जुध भारी
फेर कियो गिद्धराज तबै पग नाखुन से हमलो अति भारी
रावण क्रोध कियो तब आकर काट दिए पंख ज्यु आरी देख जटायु सिया हरती झट जाय तहाँ भड़ जाय पुकारी
रे दुष्ट आज अनीत करी छल से हरली यह राजकुमारी
मैं न तुझे अब जावन दूँ भल प्राण हमार चढ़े बलिहारी
चोंच उठाय प्रहार कियो अब रावण काढत है तरवारी
मराठण मर्दानीह । फिरंग दळ घण फोरिया ।।
रंग लिछम राणीह । दीप्यो जस दुनियाण में ।।
आज थें कह दियो तो काले मांगूला हरि कने घोड़ी ,मालिक ने घोड़ी मांगतां थकां गीत में अरदास करी जिका आपरी समक्ष पेश कर रह्यो हूं !
अवल्ल में याद करूं ईल्लाही आपने ,
ईल्ललाह नांमरी लखुं अरजी !!
मुहम्मद मुस्तफा आपरी मदद सूं ,
महर कर रहम री करो मरजी !!१
सांई अरजी विचारो दिल वसे,
थरू सम्पत मोहे घरे थोड़ी !!
गफूरा रहीम गुण आपरा गावंतां,
घाटोड़ी समापो ऐक घोड़ी.!!२!!
वेहे रैवाळ थोड़ा घणी वरीखे ,
हेफरड़ां करंतां वाग हाथां !!
ऐक पल फरूंको व्हे घर आवतां ,
जेज लागे नहीं गांम जातां !!३!!
सुरंगावान समझे बोहो सुलखणी ,
लड़ंग ठावका ठांण लावें!!
पावरो खाय चरवा जाय प्रभाते ,
आथम्या भांण री घरे आवें !!४!!
वके धनराज मुंगा घण वछेरा ,
नगद ध्रब हाथ में वधे नांणां !!
रकम कळदार आवे घर रूपिया ,
लाभ जो होवे तो कटे लेणां !!५!!
सच्ची पुकार मालिक तुंही सांभळे ,
ओळभो आपने लखुं आछो !!
वार जो करो तो पाळ मोरा वचन ,
पत्र अरजी तणो मेल पाछो !!६!!
वडाई आपरी जगत सोहे वखांणे ,
कैक संतां तणा काम कीधा !!
बंध छोड़ाविया असंखां बापजी ,
दुखियां घणांने सुख दीधा !!७ !!
खरो विश्वास मों तुमारो खुदावीन ,
दुथियां दान तूं समप्प दौला !!
अभ्यागत आपरो मीर ताजु आखे ,
मन तणी उम्मीद पूर मौला !!८!!
झाड़ और बेट करे तेरी जिकर ,
धरणी अंकाश दृढ एक धारा !!
जीव जंतु पंछी नाम तोरा जपे ,
तुंही तुंही भणे नवलाख तारा !!९!!
...........................................,
मच्छीयां भजे जल बीच माळा !!
.............................................,
पल पल ऐतां तणी करे पाळा !!१०!!
वळे लेखण होय वनराय की ,
सात समुद्रां तणी होय स्याही !!
अल्लापुर लखूं ऐहड़ा कथन तो ,
नाम रो गुण तणो पार नांहीं !!११!!
दुजे तीजे दिन ऐक गांव रे ठाकुरसा घरे आय ताजु मीर ने घोड़ी दिनी पण उणमें ऐप कुलखण हो जिका ताजु मीर सोरठे में कह्यो ,
त्रीकम राखी टेक , मन मांगी घोड़ी मिळी !!
(पण) उणमें कुलखण ऐक , जाती वाजे जाड़ीये !!१!!
टंकन मीठा मीर डभाल
सुचित्त नित्त प्रत्ति व्है शिवा सकत्ति सम्भरै
सुधर्म कर्म ज्ञान ध्यान मर्म खोजते फिरै
तमाम रात दीह जाम नाम ले बितात है
सुपात मात आवड़ा जगत्त में विख्यात है।१।
बहन्न सात एक साथ व्योम पाथ ऊतरी
अछेह नेह देह मामड़ा सुगेह में धरी
कथा अशेष देश देश में विशेष गात है
सुपात मात आवड़ा जगत्त में विख्यात है।२।
असाध्य आधि व्याधियाँ उपाधियाँ उड़ाहई
कली कराल काल की कुचाल को छुड़ा दई
महान ज्योतिवान थान तेमड़ा सुहात है
सुपात मात आवड़ा जगत्त में विख्यात है ।३।
कनिष्ठ भ्रात गात पै कुघात सर्प घालियो
निदान प्रान हानि जान भानु छीर छालियो
सुधा प्रभात पूर्व स्वर्ग जात
ला पिलात है
सुपात मात आवड़ा जगत्त मे विख्यात है।४।
विदारि सृष्टि तेमड़ो अरिष्ट सृष्टि को हर्यो
अपार भूमि भार को उतार दूर तें कर्यो
अरिन्द फन्द मेटके स्वच्छन्द तू लखात है
सुपात मात आवड़ा जगत्त में विख्यात है।५।
पदारविन्द पै मलिन्द भक्त वृन्द मोहते
उद्योत जोत प्रेम श्रोत मग्न होत जोहते
विपत्ति काल में तुहीज तात मात भ्रात है
सुपात मात आवड़ा जगत्त में विख्यात है।६।
अथाह सिन्धु हाकड़ो उमाह राह रोकियो
विलम्ब अम्ब त्यागि कै समस्त अम्बु सोखियो
विहीन नीर क्षीन हीन आज लों दिखात है
सुपात मात आवड़ा जगत्त मे विख्यात है।७।
मया विचार के दया मया अवश्य कीजिये
अज्ञान जोगीदान को महान ज्ञान दीजिये
भवा तने मुरारि को तनै विनय सुनात है
सुपात मात आवड़ा जगत्त में विख्यात है।८।
श्री जोगीदान जी कविया सेवापुरा कृत।
जय श्री तेमड़ा राय
जय श्री तनोट राय
जय श्री देशाण राय
🙏🙏🍄🍄🙏🙏 ंटंकन भूदेव आढा।






