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भासा राजस्थान री, रहियां राजस्थान।

Rao GumanSingh Guman singh

भासा राजस्थान री, रहियां राजस्थान।
राजस्थानी रै बिना, थोथो मान 'गुमान'॥

आढो दुरसौ अखौ, ठाढ़ा कवि टणकेल।
भासा बिना न पांगरै, साहित वाळी बेल॥

पीथल बीकाणै पुर्णा, जाणै सकल जिहान।
पातल नै पत्री पठा, गहर करायौ ग्यान॥

सबद बाण पीथल लगै, मन महाराणा मोद।
अकबर दल आयो अड़ण, हलदी घाट सीसोद॥

धर बांकी बांका अनड़, वांका नर अर नार।
इण धरती रा ऊपना, प्रिथमी रा सिंणगार॥

धन धरती धन ध्रंगड़ो, धन धन धणी धिणाप।
धन मारु धर धींगड़ा, जपै जगत ज्यां जाप॥

रचदे मेहंदी राचणी, नायण रण मुख नाह।
जीतां जंग बधावस्यां, ढहियां तन संग दाह॥

नरपुर लग निभवै नहीं, आज काल री प्रीत।
सुरपुर तक पाळी सखी, प्रेम तणी प्रतीत॥

मायड़ भासा मान सूं, प्रांत तणी पहिचांण।
भासा में ईज मिलैह, आण काण ऒळखांण॥

मायड़ भासा जाण बिण, गूंगो ग्यान 'गुमान'।
तीजा गवरा होळीका, हुवै प्रांत पहिचांन॥

भाइ बीज राखी बंधण, गीत भात अर बान।
बनौ विन्याक कामण्या, विण भासा न बखान॥

Rajasthani Language Idioms and Phrases

Rao GumanSingh Guman singh

अ-अः
अकल बिना ऊंट उभाणा फिरैं ।
अक्खा रोहण बायरी, राखी सरबन न होय । पो ही मूल न होय तो, म्ही दूलन्ती जोय ।।
अगम् बुद्धी बाणियो पिच्छम् बुद्धी जाट । तुर्त बुद्धी तुरकड़ो, बामण सपनपाट ।।
अग्रे अग्रे ब्राह्मणा, नदी नाला बरजन्ते ।
अगस्त ऊगा, मेह पूगा ।
अटक्यो बोरो उधार दे ।
अठे किसा काचर खाय है
अदपढ़ी विद्या धुवै चिन्त्या धुवे सरीर
अनहोणी होणी नहीं, होणी होय सो होय
अभागियो टाबर त्युंहार नै रूसै ।
अम्बर कै थेगळी कोनी लागै ।
अम्मर को तारो हाथ सै कोनी टूटै ।
अम्मर पीळो में सीळो ।
अमरो तो मैं मरतो देख्यो, भाजत देख्यो सूरो । चोधर तो मैं खुसती देखी, लाछ बुहारी कूडो ।। आगै हूँ पाछो भलो, नांव भलो लैटूरो ।।। (देखें - नाम में क्या रखा है)
अय्याँ ही रांडा रोळा करसी अर अय्याँ ही पावणा जिमबो करसी ।
अरड़ावतां ऊँट लदै ।
अरजन जसा ही फरजन ।
अल्ला अल्ला खैर सल्ला ।
असलेखा बूठां, बैदां घरे बधावणा । अर्थ - असलेखा नक्षत्र में वर्षा हो तो बैद-हकीमों के घर बधाई बँटे, मतलब रोग बढ़ते हैं ।
असवार तो को थी ना पण ठाडां करदी - किस्सा यों है कि एक औरत को एक डाकू जबरदस्ती उठा कर ले जा रहा था. ऊँट तेजी से दोड़ रहा था. रास्ते में उस औरत का एक परिचित मिल गया. उसने पूछा, 'आरी तू ऐसी सवार कब से हो गयी जो ऊँट को इतने जोरों से भगा रही है ?' तब उसने उत्तर में ऊपर की कहावत कही जिसका अर्थ है कि मैं सवार तो नही थी, जबर्दस्तों ने मुझे सवार बना दिया ।
असाई म्हे असाई म्हारा सगा, बां कै टोपी न म्हारे झगा ।
असी रातां का अस्सा ही तड़का ।
असो भगवान्यू भोळो कोनी जको भूखो भैसां में जाय ।
अस्सी बरस पूरा हुया तो भी मन फेरां में रह्या ।
आंध्यां की माखी राम उडावै ।
आलकसण ने रोट्याँ रो साग ।
आठ फिरंगी नो गोरा लड़ें जाट के दो छोरा ।
आसोजां का पड्या तावडा जोगी बणग्या जाट ।
उधार दियोड़ो आवै घर लेखै, नींतर हर लेखै ।
ऊन'रै को जायेड़ो बिल ही खोदै ।
अछूकाळ कादा में पीवै ।
आदर खादर बाजे बाव , झूंपङ पङिया झोला खाय ।
आँख कान को च्यार आंगळ को फरक है ।
आंख गयी संसार गयो, कान गया हँकार गयो ।
आँख फड़कै दहणी, लात घमूका सहणी ।
आँख फड़कै बांई, के बीर मिलै के सांई ।
आँख फुड़ाई मूंड मुन्डायो, घर को फेरयो द्वार । दोन्यू बोई रै बूबना, आदेश न जुहार ।।
आँख मीच्यां अंधेरो होय ।
आंख्याँ देखी परसराम, कदे न झूठी होय ।
आंख्याँ में गीड पड़ै, नांव मिरगानैणी ।
आंख्याँ सै आन्धो, नांव नैनसुख ।
आंगल्याँ सूं नूं परै कोनी हुवे ।
आंधा की गफ्फी, बहरा को बटको । राम छुटावै तो छूटै नहीं सिर ही पटको ।।
आंधा सुसरा सैं क्यांकी लाज ।
आंधी आई ही कोनी, सूंसाट पैली ही माचगो ।
आंधी भैंस बरू में चरै ।
आई ही छाय ने, घर की धिराणी बन बैठी ।
आक को कीड़ो आक में, ढाक को कीड़ो ढाक में ।
उठो राणी, काढो बुहारी, आंगण आया, किरसन मुरारी।
उत्तम धरती मध्यम काया, उठो देव, जंगळ कूं आया।
उन्नाळै खाटु भळी सियाळे अजमेर। नागाणौ नितको भळो सावणं बिकानेर॥
ऊंट मिठाई इस्तरी, सोनो गहणो शाह। पांच चीज पिरथी सिरै, वाह बीकाणा वाह । अर्थ - काव्य पंक्तियां मरुधरा की ऐसी पांच विशिष्टताओं को उल्लेखित करती है जिनकी सराहना समूची दुनिया में हो रही है।
क-घ
क ख ग घ ड़, काको खोटा क्यों घडै ।
कपूत हूँ नपूत भलो ।
कमाऊड़ै नै घी, खाऊड़ै नै दुर छी! अर्थात - कमाने वाले का सर्वत्र सम्मान होता है और उड़ाने वाले को सभी अवज्ञा की नजर से देखते हैं।
कर रै बेटा फाटको, खड्यो पी दूध को बाटको ।
करम लिखा कंकर तो के करै शिव शंकर ।
करमहीण किसनियो, जान कठै सूं जाय । करमां लिखी खीचड़ी, घी कठै सूं खाय ।।
करमहीण खेती करे, के हळ भागे के बळद मरे ।
काणी के ब्याह में सौ टेड ।
काणी भाभी पाणी प्याई, कै लक्खण तो दूधआळा है।
काम का ना काज का ... ढाई मण अनाज का ।
काळी बहू अर जल्योड़ो दूध पीढ्याँ ताईं लजावै ।
काळी हांडी रै कनै बैठयाँ काळस न सरी काट तो लाग्यां सरै ।
काळो कै काळो न जलमे तो किल्ड काबरो जरुर जलमै ।
कौड़ी बिन कीमत नहीं सगा नॅ राखै साथ, हुवै जे नामों (रूपया) हाथ मैं बैरी बूझै बात।
खरी कमाई घणी कमाई ।
खाणै में दळिया, मिनखां में थळिया।
खेती करै नॅ बिणजी जाय, विद्या कै बल बैठ्यो खाय ।
खोखा म्हांने चोखा लागै, खेजड़लो ज्यूं खजूर। निंबोळी-अंबोळी सिरखी, रस देवै भरपूर’ अर्थ - इसमें खेजड़ी को खजूर से बेहतर और निंबोळी को आम से मीठी व रसीली मानने का लेख है.
खोखा व्है तो खावां, गीत व्है तो गावां। अर्थात जैसी परिस्थिति हो उसी के अनुसार चलना चाहिए।
खुपरी जाण खोपरा, बीज जाण हीरा, बीकाणो भंडार रा मीठा हुवै मतीरा । अर्थ - बीकानेरी मरुधरा की वनस्पतियों के राजा मतीरे की तुलना हीरे-जवाहरातों से की गई हैं।
गंगा रो गटोळियो, लोटो पाणी ढोळियो, धोया कान अर होया सिनान।
गंडक की पूंछ तो बांकी ही रहसी ।
गरज दीवानी गूजरी नूंत जिमावै खीर, गरज मिटी गूजरी नटी, छाछ नही रे बीर ।
गरजवान री अकल जाय, दरदवान री शक्कल जाय ।
गरज सरी अर वैद बैरी ।
गरीब री हाय, जड़ामूल सूं जाय ।
गादड़ै की मोत आवै जणा गांव कानी भागै।
गाँवहाला कूटै तो माईतां कनै जावै, माईत कूटै तो कठै जावै ।
गोदी मैं छोरो गळी मैं हेरै ।
घणी सुधी छिपकली चुग चुग जिनावर खाय ।
घणूं खाय ज्यों घणों मरै ।
घणों सयाणों कागलो दे गोबर में चांच ।
घर का टाबर काणा भी सोवणा ।
घर की खांड किरकिरी लागै, गुड चोरी को मीठो ।
घर की डाकन घर का नै ही खाय ।
घर को जोगी जोगणूं आन गाँव को सिद्ध ।
घर नै खोवाई साळो ।
घर बळतो कोनी दीखै, डूंगर बळतो दीखै
घायल गत घूमैह, रै भूमी मारवाड़ री। राळो रुं रुं मेह, साहित इमरत सूरमों॥
घी सुधारै खीचड़ी, और बड्डी बहू का नाम ।
घैरगडी सासू छोटी भू बडी ।
च-झ
च्यार चोर चौरासी बाणिया, बाणिया बापड़ा के करँ ।
च्यार पाव चून चौबारे रसोई
चढ्योड़ो जाट तूम्बो ई चबा जावै ।
चोरी जैड़ो रुजगार नीं, जे पड़ती व्है मार नीं ।
छड़ी पड़ै छमाछम, विद्या आवै धमाधम।
ज्यादा स्याणु कागलो गू मैं चांच दे ।
जाओ लाख रैवो साख, गई साख तो बची राख ।
जांन में कुण-कुण आया? कै बीन अर बीन रो भाई, खोड़ियो ऊंट अर कांणियो नाई।
जंगल जाट न छोड़िये,हाटां बीच किराड़। रांगड़ कदे न छोड़िये,ये हरदम करे बिगाड़।।
जमीन ऍर जोरु जोर की नहीं तो कोई और की।
जळ ऊँड़ा थळ उजळा नारि नवळे वेश। पुरुष पट्टाधर निपजे आई मरुधर देश॥ अर्थ - गहरे पानी और गहरी सोच वाले यहां के पटादर पुरुष सिर्फ इंसानों से ही नहीं मरुभूमि की उपज से भी प्यार करते हैँ.
जाट ओर जाट भाई॥
जांटी चढे जको सीरणी बाँट - अर्थ: जो समी के पेड़ पर चढ़ता है, वही खतरे के निवारण हेतू देवता का प्रसाद बोलता है ।
जाट करै ना दोस्ती, जाट करै ना प्यार जो साचा इंसान हो, वो-ए इसका यार । चुगलखोर और दुतेड़े दुश्मन इनके खास चाहे पायां पड़े रहो, कोन्यां आवैं रास
जाट पहाडा: एक जाट-जाट, दो जाट-मौज, तीन जाट-कंपनी, चार जाट-फौज
जाट की बेटी और काकोजी की सूं - अर्थ: छोटा भी जब ज्यादा नजाकत दिखाने लगता है तब प्रयोग किया जाता है ।
जाट जंवाई भाणजो, रेवारी सुनार । ऐता नहीं है आपणा, कर देखो उपकार ।।
जाट जंवाई भाणजा, रैबारी सुनार । कदे न होसी आपणा, कर देखो व्योहार ।।
जाट जठे ठाठ ।
जाट जडूलै मारिये, कागलिये ने आळै । मोठ बगर में पाडि़ये, चोदू हो सो बाळै - अर्थ:जाट जब तक वयस्क नहीं हो जाता, कौवा जब तक उड़ना नहीं सीख लेता तब तक ही ये वश में आते हैं । मोठों पर जब तक बगर आया रहता है तब तक ही उपाड़ना ठीक है ।
जाट कहे सुण जाटणी, इसी ना कदे होय । चाकी पीसे ठाकरां, भांडा मांजै जोय ।।
जाट कहे सुण जाटणी, इणी गाँव में रणों, ऊंट बिलाई लेगई हांजी हांजी कहणों ।
जाट की छोरी र' फलकै बिना दोरी ।
जाट को के जजमान, राबडी को के पकवान ।
जाट गंगाजी नहा आयो के ? कह, खुदाई कुण है ।
जाट जाट तेरो पेट बांको, कह, मैं ई मैं दो रोटी अलजा ल्यूंगो ।
जाट न जायो गुण करै, चणैं न मानी बाह, चन्नण बिड़ो कटायकी, अब क्यों रोव बराह ।
जाट बलवान जय भगवान ।
जाट डूबै धोळी धार, बानियों डूबै काळी धार ।
जाट मरा जब जानिये जब चालिसा होय ।
जाट रे जाट ! तेरे सिर पर खाट, कह, मियाँ रे मियाँ ! तेरे सिर पर कोल्हू, कह, तुक तो मिली ना, कह, बोझ्याँ तो मरैगा ।
जीभड़ल्यां इमरत बसै, जीभड़ल्यां विष होय। बोलण सूं ई ठा पड़ै, कागा-कोयल दोय।।
जीम्या जिनै जीमांणा ई पडे ।
जीमण अर झगड़ौ, पराये घरां आछो लागै ।
जीमाणों सोरो जीमाणो दोरौ ।
जीम्यां छोडै पांवणौ, मरयाँ छोडै ब्याज ।
जैं करी सरम, बैंका फूट्या करम ।
जो गुड़ सैं मरै बी'नै जहर की के जरुरत।
जाट और घोयरा तावडॆ मॆ ही निकला करे।
ट-ढ
टका दाई ले गी अर कून्डो फोड़गी ।
टकै की हांडी फूटी, गंडक की जात पिछाणी ।
टपकन लागी टापरी, भीजण लागी खाट ।
टको टूंसी एक न यार, तोरण मारण होग्यो त्यार ।
ठाकर री गोळी, गांवरी सिरमोळी ।
ठाकरण भागो किसाक ? कह, गैल की मार जाणिये ।
ठाडै को डोको डांग नै फाड़ै ।
ठाडो मारै अर रोवण भी कोन्या दे ।
ठाली ठुकराणी को पेई में हाथ जाय ।
ठाली बैठी डोकरी, घर में घाल्यो घोड़ो ।
ठालै बैठ्याँ सूँ बेगार भली ।
ठिकाणे ठाकुर पूजीजै ।
ठिकाणै सैं ई ठाकर बाजै ।
ठोकर खार हुन्स्यार होय ।
डाकण बेटा ले क दे ।
डाकणां के ब्यावां में नूतारां का गटका ।
डाकणां सै गाँव का नळा के छाना है ।
दिग्मरां के गाँव में धोबी को के काम ।
डूंगर चढ़तो पांगळो, सीस अणीतो भार ।
डूंगर बळती दिखै, पगां बळती कोनी दिखै ।
डूबतो सिंवाळां न हाथ घालै ।
डेड घड़ो'र डीडवाणू पाऊँ ।
ढक्योड़ो मत उघाड़ और भू घर तेरो ई है ।
ढबां खेती,ढबां न्याव ।
ढल्यो घोटी, हुयो माटी ।
ढेढ़ को मन ल्याह्वड़ै में ही ।
ढेढ़ नै सुरग में भी बेगार ।
ढेढ़ रे साथे धाप'र जीमो भांवै आंगळी भर कर चाखो ।
ढेढ़ रो पल्लो लगावो, भांवै बाथे पड़ो ।
ढेढ़ां की दुर्सीस सूं दाव थोड़ा ई मरै ।
ढेढणी और रावळै जा आई ।
ढोली गावतो अर टाबर रोवतो चोखो लागै ।
त-न
तंगी में कुण संगी ?
तरवार को घाव भरज्या बात को कोनी भरै ।
तवै की काची नै, सासरै की भाजी नै कठैई ठोड़ कोनी ।
तवै चढ़ै नै धाड़ खाय ।
ताता पाणी सैं कसी बाड़ बळै ।
तातो खावै छायाँ सोवै, बैंको बैद पिछोकड़ रोवै ।
ताळी लाग्यां ताळो खुलै ।
तावळो सो बावळो ।
तिरिया चरित न जाणे कोय, खसम मार के सत्ती होय ।
तीज त्युंहारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर ।
तीजां पाछै तीजड़ी, होळी पाछै ढूंढ, फेरां पाछै चुनड़ी, मार खसम कै मूंड ।
तीतर कै मूंडै कुसळ है ।
तीतर पंखी बादळी, विधवा काजळ रेख । बा बरसे बा घर करै, ई में मीन न मेख ।।
तीन तेरा घर बिखरै ।
तीन बुलाया तेरा आया, भई राम की बाणी । राघो चेतन यूँ कहै, द्यो दाळ में पाणी ।।
तीन सुहाळी, तेरा थाळी । बांटण वाळी सतर जणी ।।
तीसरे सूखो आठवैं अकाळ - राजस्थान के लिए प्रयोग किया गया है ।
तुरकणी कै रान्ध्योड़ा में के कसर ।
तुरकणी रे कात्योडे में ही फिदकड़ो ।
तूं है देसी रूंखड़ो, परदेसी लोग, म्हांने अकबर तेड़िया तूं किम आयो फोग। अर्थ - दूर देस में अपनी भूमि के पौधे फोग को देखकर अपनापन जताना महज देस से दूरी का वियोग नहीं है अपितु अपनी हर उपज का सम्मान यहां के लोग बड़े सलीके से करते हैं।
दियो लियो आडो आवै ।
दूध पीती बिलाई गंडका कै मायं पड़गी ।
दूसरे की थाळी मँ घी ज्यादा दीखॅ।
दूसरे की थाळी में सदा हि ज्यादा लाडू दीखैं ।
धणी बिना गीत सूना तो सिरदार बिना फौज निकांमी।
धणी रो धन नीं देखणों, धणी रो मन देखणों ।
धरती करिया बिछावणा, अम्बर करिया गलेफ। पोढो राजा भरतरी, चोकी देवै अलेख।
धरती माता थूं बड़ी, थां सूं बड़ो न कोय। उठ संवारै पग धरां, बाळ न बांका होय।।
धन्‍ना जाट का हरिसों हेत, बिना बीज के निपजँ खेत।
नट विद्या आ जावै, जट विद्या कोनी आवै।
नानी फंड करै, दोहितो दंड भरै ।
नेपॅ की रुख खेड़ा'ई बतादें ।
प-म
पावणां सूं पीढ़ी कोनी चालै, जवायाँ सूं खेती कोनी चालै ।
पेड़ की जड धरती और लूगाई की जड़ रसोई ।
पूत का पग पालणें में ही दीख जा हीं ।
पत्थर का बाट - जत्ता भी तोलो, घाट-ही-घाट ।
पीसो हाथ को, भाई साथ को ही काम आवै ।
फूटेड़ो ढोल अर कूटेड़ो ढोली चीं नीं करै ।
फूहड़ रो मैल फागण में उतरै।
फोग आलो ई बळै, सासू सूदी ई लड़ै।
फोगलो फूट्यो, मिणमिणी ब्याई। भैंस री धिरियाणी, छाछ नै आई।
फोगलै रो रायतो, काचरी रो साग। बाजरी री रोटड़ी, जाग्या म्हारा भाग
बड़ सींचूं बड़ोली सींचूं, सींचूं बड़ की डाळी, राम झरोखै बैठ कर सींचै सींचण वाळी
बड़ी रातां का बड़ा ही तड़का ।
बहुआं हाथ चोर मरावै, चोर बहू का भाई ।
बाड़ में मूत्यां कसौ बैर नीकळै ।
बाड़ में हाथ घालण सैं तो काँटा ही लाग ।
बातां रीझै बाणियूं, गीतां सै रजपूत । बामण रीझै लाडुवां, बाकळ रीझै भूत ।।
बात में हुंकारो, फौज में नंगारो ।
बाप ना मारी मांखी, बेटो तीरंदाज ।
बाबो सगळां'नॅ लड़ॅ, बाबॅ'न कुण लड़ॅ ।
बामण नै दियां पीछै गाय पराई हो जावै, परबारे हाथां में गयां पीछै रकम पराई हो जावै, पर्णीज्यां पीछै बेटी पराई हो जावै ।
बायेड़ो उगै अर लिखेड़ो चूगै ।
बावाड़ेड़ो पाहुणों भूत बिरौबर ।
बिना बुलाया पावणा, घी घालूं कॅ तेल ।
बिना रोऍ तो मा'ई बोबो कोनी दे ।
बीन कॅ'ई लाळ पड़ँ जणा बराती के करँ ।
बींद मरौ बींदणी मरौ, बांमण रै टक्कौ त्यार। ठाकर ग्या ठग रिया, रिया मुळक रा चोर॥
बूढळी रै कह्यां खीर कुण रांधै?
बैठणो छाया मैं हुओ भलां कैर ही, रहणो भायां मैं हुओ भलां बैर ही ।
भोजन में लाडू अर सगाँ में साडू ।
भौंकँ जका काटँ कोनी ।
मन का लाडु खाटा क्यों ।
मन सूं रान्धेड़ो खाटो ई खीर लागै ।
म्हानैं घडगी अ'र बेमाता बाड़ मैं बड़गी ।
मँगो रोवे ऐक बार, सस्तो रोवे सो बार ।
मन मीठो तो सै मीठा, मन खाटो तो सै खाटा ।
मरद की कूब्बत राड़ में, लुगाई की कूब्बत रान्धणें में |
मरु रो पत माळवो नाळी बिकानेर। कवियाँ ने काठी भळा आँधा ने अजमेर॥
मानो तो देव नहीं तो भींत को लेव।
मां, घोड़ा री पूंछ पकड़ूं, कांईं दे'सी कै घोड़ो मतै ई दे दे'सी। अर्थात - गलत काम का अंजाम हमेशा बुरा होता है।
मां कैवतां मूंडो भरीजै।मां, मायड़भोम अर मायड़भासा रौ दरजौ सुरग सूं ईं उचौ हुवै.
मां री गाळियां, घी री नाळियां। अर्थ - मां की गालियां, घी की नालियां। मां ललकारती-फटकारती है तो संतान के भले की खातिर। उसके मन में दूर-दूर तक कोई दुर्भावना नहीं रहती। मां की गालियां ममता का ही दूसरा रूप है।
मिनख कमावै च्यार पहर, ब्याज कमावै आठ पहर ।
मिनख बाण रो गोलौ ।
मेवा तो बरसँता भला, होणी होवॅ सो होय ।
मेह की रुख तो भदवड़ा'ई बता दें ।
मुंडै सूं नीसरी बात, कमाण सूं नीसरयो तीर, अर परमात्मा री पोळ गयोड़ा पराण पाछा नीं बावडै ।
मुंह करे है छाछ सो
मोटो ब्याज मूल नै खावै ।
मोर जंगल में नाच्योहो पण कुण देख्यो
य-व
रजपूत की जात जमी ।
राजपूती धोरां में रळगी, ऊपर चढ़ गई रेत ।
राजा री आस करणी, पण आसंगो नीं कारणों ।
रांड आग गाळ कोनी ।
रांड कै मारयोड़ै की अर गाँव में फिरयोड़ै की दाद-फिराद कोनी ।
राई का भाव रात ही गया ।
राई बिना किसो रायतो ।
राजा करै सो न्याव, पासो पड़ै सो डाव ।
राजा जोगी अगन जळ, इण की उलटी रीत । डरता रहियो परसराम, ये थोडी पाळै प्रीत ।।
राड़ को घर हांसी, रोग को घर खांसी ।
राड़ सैं बड़ भली ।
रात आगै उँवार कोनी ।
रात च्यानणी, बात आंख्या देखी मानणी ।
राबड़ी को नांव गुलसफ्फा ।
राबड़ी बी कहै मन दांतां सै खावो ।
राबड़ी में गुण होता तो ब्या में नां रान्धता ।
राबड़ी में राख रांधै, चून पाटै पीसती । देखो रै या फ़ूड रांड, चालै पल्ला घींसती ।।
रिण अर बैर कदैई जूनां नीं व्है ।
रांड स्याणी हुवै पण कसम मरयां फेर ।
रूप की रोवै करम की खावै ।
रूपयो होवै रोकड़ी सोरो, आवै सांस, संपत होय तो घर भलो, नहीं भलो परदेस।
रोता जां बै मरेडां की खबर ल्यावैं ।
रोती रांड सासरे में क्ये न्याहल करेगी ।
लालबही छप्पन रो पानो, बोहरो रोवै छानो-छानो ।
श-ह
संपत हुवै तो घर, नींतर भलो परदेस।
सरलायो छूंदरो, बद्दां बंध्यो जाट । मदमाती गूजरी, तीनों वारां बाट ।।
साबत रैसी सर तो घणाई बससीं घर।
सात घर तो डाकण भी छोड दिया करै है।
सावण भलो सूर'यो भादुड़ो पिरवाय, आसोजां मैं पछवा चाली गाडा भर भर ल्याव ।
सासरौ सुख आसरौ, जे ढबै दिन चार । जे बसै दिन दस बीस, हाथ में खुरपी माथै भार ।।
सासरौ सुख बासरौ, चार दिनां को आसरौ, जै रवे मास दो मास, देस्याँ खुरपी खुदास्याँ घास ।
सूखै घसीजै हळबांणी, आलै घसीजै चवू। सांवण घसीजै डीकरी, काती घसीजै बहू।।
हाँसी-हाँसी में हो-ज्यासी खाँसी ।
हिल्योडो चोर गुलगुला खाय ।

समर चढै़ काठां चढै़, रहै पीव रै साथ

Rao GumanSingh Guman singh

समर चढै़ काठां चढै़, रहै पीव रै साथ।
एक गुणा नर सूरमा, तिगुण गुणा तमय जात॥

चन्द ऊजाळै एक पक, बीजै पख अंधिकार।
बळ दुंहु पाख उजाळिया, चन्द्रमुखी बळिहार॥

खाटी कुळ रो खोयणां, नेपै घर घर नींद।
रसा कंवारी रावतां, वीर तिको ही वींद॥

ऊंघ न आवै त्रण जणां, कामण कहीं किणांह।
उकडू थटां बहुरिणां, बैर खटक्के ज्यांह॥

एक्कर वन वसंतड़ा, एकर अंतर काय।
सिंघ कवड्डी ना लहै, गँवर लक्ख विकाय॥

Ratan Singh Shekhawat,

बिरखा बिंनणी ( वर्षा वधू )

Rao GumanSingh Guman singh

Ratan Singh Shekhawat,
मानसून पूर्व की वर्षा की बोछारें जगह-जगह शुरू हो चुकी है | किसान मानसून का बेसब्री से इंतजार करने में लगे है | और अपने खेतो में फसल बोने के लिए घास,झाडियाँ व अन्य खरपतवार काट कर (जिसे राजस्थान में सूड़ काटना कहते है ) तैयार कर वर्षा के स्वागत में लगे है | बचपन में सूड़ काटते किसानो के गीत सुनकर बहुत आनंद आता था लेकिन आजकल के किसान इस तरह के लोक गीत भूल चुके है |

जटक जांट क बटक बांट क लागन दे हब्बिडो रै,
बेरी धीडो रै , हब्बिडो |

इस गीत की मुझे भी बस यही एक लाइन याद रही है | जिन गांवों के निवासी पेयजल के लिए तालाबों,पोखरों व कुंडों पर निर्भर है वहां सार्वजानिक श्रमदान के जरिए ग्रामीण गांव के तालाब व पोखर आदि के जल संग्रहण क्षेत्र (केचमेंट एरिया ) की वर्षा पूर्व सफाई करने में जुट जाते है व जिन लोगों ने अपने घरों व खेतो में व्यक्तिगत पक्के कुण्ड बना रखे है वे भी वर्षा पूर्व साफ कर दिए जाते है ताकि संग्रहित वर्षा जल का पेयजल के रूप में साल भर इस्तेमाल किया जा सके |
शहरों में भी नगर निगमे मानसून पूर्व वर्षा जल की समुचित निकासी की व्यवस्था के लिए जुट जाने की घोषणाए व दावे करती है | ताकि शहर में वर्षा जल सडको पर इक्कठा होकर लोगों की समस्या ना बने हालाँकि इनके दावों की पहली वर्षा ही धो कर पोल खोल देती है |
कुल मिलाकर चाहे किसान हो या पेयजल के लिए वर्षा जल पर निर्भर ग्रामीण या शहरों की नगर पलिकाए या गर्मी से तड़पते लोग जो राहत पाने के लिए वर्षा के इंतजार में होते है , सभी वर्षा ऋतु के शुरू होने से पहले ठीक उसी तरह वर्षा के स्वागत की तैयारी में जुट जाते है जैसे किसी घर में नई नवेली दुल्हन के स्वागत में जुटे हो | शायद इसीलिए राजस्थान के एक विद्वान कवि रेवतदान ने वर्षा की तुलना एक नई नवेली दुल्हन से करते हुए वर्षा को बरखा बिन्दणी ( वर्षा वधू ) की संज्ञा देते हुए ये शानदार कविता लिखी है :


लूम झूम मदमाती, मन बिलमाती, सौ बळ खाती ,
गीत प्रीत रा गाती, हंसती आवै बिरखा बिंनणी |
चौमासै में चंवरी चढनै, सांवण पूगी सासरै,
भरै भादवै ढळी जवांनी, आधी रैगी आसरै
मन रौ भेद लुकाती , नैणा आंसूडा ढळकाती
रिमझिम आवै बिरखा बिंनणी |

ठुमक-ठुमक पग धरती , नखरौ करती
हिवड़ौ हरती, बींद पगलिया भरती
छम-छम आवै बिरखा बिंनणी |
तीतर बरणी चूंदड़ी नै काजळिया री कोर
प्रेम डोर मे बांधती आवै रुपाळी गिणगोर
झूंटी प्रीत जताती , झीणै घूंघट में सरमाती
ठगती आवै बिरखा बिंनणी |

घिर-घिर घूमर रमती , रुकती थमती
बीज चमकती, झब-झब पळका करती
भंवती आवै बिरखा बिंनणी |
आ परदेसण पांवणी जी, पुळ देखै नीं बेळा
आलीजा रै आंगणै मे करै मनां रा मेळा
झिरमिर गीत सुणाती, भोळै मनड़ै नै भरमाती
छळती आवै बिरखा बिंनणी |


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चेतावनी रा चुंग्ट्या : कवि की कविता की ताकत

Rao GumanSingh Guman singh

Ratan Singh Shekhawat,
1903 मे लार्ड कर्जन द्वारा आयोजित दिल्ली दरबार मे सभी राजाओ के साथ हिन्दू कुल सूर्य मेवाड़ के महाराणा का जाना राजस्थान के जागीरदार क्रान्तिकारियो को अच्छा नही लग रहा था इसलिय उन्हे रोकने के लिये शेखावाटी के मलसीसर के ठाकुर भूर सिह ने ठाकुर करण सिह जोबनेर व राव गोपाल सिह खरवा के साथ मिल कर महाराणा फ़तह सिह को दिल्ली जाने से रोकने की जिम्मेदारी क्रांतिकारी कवि केसरी सिह बारहट को दी | केसरी सिह बारहट ने "चेतावनी रा चुंग्ट्या " नामक सौरठे रचे जिन्हे पढकर महाराणा अत्यधिक प्रभावित हुये और दिल्ली दरबार मे न जाने का निश्चय किया |और दिल्ली आने के बावजूद समारोह में शामिल नहीं हुए |

पग पग भम्या पहाड,धरा छांड राख्यो धरम |
(ईंसू) महाराणा'र मेवाङ, हिरदे बसिया हिन्द रै ||1||

भयंकर मुसीबतों में दुःख सहते हुए मेवाड़ के महाराणा नंगे पैर पहाडों में घुमे ,घास की रोटियां खाई फिर भी उन्होंने हमेशा धर्म की रक्षा की | मातृभूमि के गौरव के लिए वे कभी कितनी ही बड़ी मुसीबत से विचलित नहीं हुए उन्होंने हमेशा मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है वे कभी किसी के आगे नहीं झुके | इसीलिए आज मेवाड़ के महाराणा हिंदुस्तान के जन जन के हृदय में बसे है |
घणा घलिया घमसांण, (तोई) राणा सदा रहिया निडर |
(अब) पेखँतां, फ़रमाण हलचल किम फ़तमल ! हुवै ||2||

अनगिनत व भीषण युद्ध लड़ने के बावजूद भी मेवाड़ के महाराणा कभी किसी युद्ध से न तो विचलित हुए और न ही कभी किसी से डरे उन्होंने हमेशा निडरता ही दिखाई | लेकिन हे महाराणा फतह सिंह आपके ऐसे शूरवीर कुल में जन्म लेने के बावजूद लार्ड कर्जन के एक छोटे से फरमान से आपके मन में किस तरह की हलचल पैदा हो गई ये समझ से परे है |
गिरद गजां घमसांणष नहचै धर माई नहीं |
(ऊ) मावै किम महाराणा, गज दोसै रा गिरद मे ||3||

मेवाड़ के महाराणाओं द्वारा लड़े गए अनगिनत घमासान युद्धों में जिनमे हजारों हाथी व असंख्य सैनिक होते थे कि उनके लिए धरती कम पड़ जाती थी आज वे महाराणा अंग्रेज सरकार द्वारा २०० गज के कक्ष में आयोजित समरोह में कैसे समा सकते है ? क्या उनके लिए यह जगह काफी है ?
ओरां ने आसान , हांका हरवळ हालणों |
(पणा) किम हालै कुल राणा, (जिण) हरवळ साहाँ हंकिया ||4||

अन्य राजा महाराजाओं के लिए तो यह बहुत आसान है कि उन्हें कोई हांक कर अग्रिम पंक्ति में बिठा दे लेकिन राणा कुल के महाराणा को वह पंक्ति कैसे शोभा देगी जिस कुल के महाराणाओं ने आज तक बादशाही फौज के अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं को युद्ध में खदेड़ कर भगाया है |
नरियंद सह नजरांण, झुक करसी सरसी जिकाँ |
(पण) पसरैलो किम पाण , पाणा छतां थारो फ़ता ! ||5||

अन्य राजा जब अंग्रेज सरकार के आगे नतमस्तक होंगे और उसे हाथ बढाकर झुक कर नजराना पेश करेंगे | उनकी तो हमेशा झुकने की आदत है वे तो हमेशा झुकते आये है लेकिन हे सिसोदिया बलशाली महाराणा उनकी तरह झुक कर अंग्रेज सरकार को नजराना पेश करने के लिए आपका हाथ कैसे बढेगा ? जो आज तक किसी के आगे नहीं बढा और न ही झुका |
सिर झुकिया सह शाह, सींहासण जिण सम्हने |
(अब) रळनो पंगत राह, फ़ाबै किम तोने फ़ता ! ||6||

हे महाराणा फतह सिंह ! जिस सिसोदिया कुल सिंहासन के आगे कई राजा,महाराजा,राव,उमराव ,बादशाह सिर झुकाते थे | लेकिन आज सिर झुके राजाओं की पंगत में शामिल होना आपको कैसे शोभा देगा ?
सकल चढावे सीस , दान धरम जिण रौ दियौ |
सो खिताब बखसीस , लेवण किम ललचावसी ||7||

जिन महाराणाओं का दिया दान,बख्शिसे व जागीरे लोग अपने माथे पर लगाकर स्वीकार करते थे | जो आजतक दूसरो को बख्शीस व दान देते आये है आज वो महाराणा खुद अंग्रेज सरकार द्वारा दिए जाने वाले स्टार ऑफ़ इंडिया नामक खिताब रूपी बख्शीस लेने के लालच में कैसे आ गए ?
देखेला हिंदवाण, निज सूरज दिस नह सूं |
पण "तारा" परमाण , निरख निसासा न्हांकसी ||8||

हे महाराणा फतह सिंह हिंदुस्तान की जनता आपको अपना हिंदुआ सूर्य समझती है जब वह आपकी तरफ यानी अपने सूर्य की और स्नेह से देखेगी तब आपके सीने पर अंग्रेज सरकार द्वारा दिया गया " तारा" (स्टार ऑफ़ इंडिया का खिताब ) देख उसकी अपने सूर्य से तुलना करेगी तो वह क्या समझेगी और मन ही मन बहुत लज्जित होगी |
देखे अंजस दीह, मुळकेलो मनही मनां |
दंभी गढ़ दिल्लीह , सीस नमंताँ सीसवद ||9||

जब दिल्ली की दम्भी अंग्रेज सरकार हिंदुआ सूर्य सिसोदिया नरेश महाराणा फतह सिंह को अपने आगे झुकता हुआ देखेगी तो तब उनका घमंडी मुखिया लार्ड कर्जन मन ही मन खुश होगा और सोचेगा कि मेवाड़ के जिन महाराणाओं ने आज तक किसी के आगे अपना शीश नहीं झुकाया वे आज मेरे आगे शीश झुका रहे है |
अंत बेर आखीह, पताल जे बाताँ पहल |
(वे) राणा सह राखीह, जिण री साखी सिर जटा ||10||

अपने जीवन के अंतिम समय में आपके कुल पुरुष महाराणा प्रताप ने जो बाते कही थी व प्रतिज्ञाएँ की थी व आने वाली पीढियों के लिए आख्यान दिए थे कि किसी के आगे नहीं झुकना ,दिल्ली को कभी कर नहीं देना , पातळ में खाना खाना , केश नहीं कटवाना जिनका पालन आज तक आप व आपके पूर्वज महाराणा करते आये है और हे महाराणा फतह सिंह इन सब बातों के साक्षी आपके सिर के ये लम्बे केश है |
"कठिण जमानो" कौल, बाँधे नर हीमत बिना |
(यो) बीराँ हंदो बोल, पातल साँगे पेखियो ||11||

हे महाराणा यह समय बहुत कठिन है इस समय प्रतिज्ञाओं और वचन का पालन करना बिना हिम्मत के संभव नहीं है अर्थात इस कठिन समय में अपने वचन का पालन सिर्फ एक वीर पुरुष ही कर सकता है | जो शूरवीर होते है उनके वचनों का ही महत्व होता है | ऐसे ही शूरवीरों में महाराणा सांगा ,कुम्भा व महाराणा प्रताप को लोगो ने परखा है |
अब लग सारां आस , राण रीत कुळ राखसी |
रहो सहाय सुखरास , एकलिंग प्रभु आप रै ||12||

हे महाराणा फतह सिंह जी पुरे भारत की जनता को आपसे ही आशा है कि आप राणा कुल की चली आ रही परम्पराओं का निरवाह करेंगे और किसी के आगे न झुकने का महाराणा प्रताप के प्रण का पालन करेंगे | प्रभु एकलिंग नाथ इस कार्य में आपके साथ होंगे व आपको सफल होने की शक्ति देंगे |
मान मोद सीसोद, राजनित बळ राखणो |
(ईं) गवरमेन्ट री गोद, फ़ळ मिठा दिठा फ़ता ||13||

हे महाराणा सिसोदिया राजनैतिक इच्छा शक्ति व बल रखना इस सरकार की गोद में बैठकर आप जिस मीठे फल की आस कर रहे है वह मीठा नहीं खट्ठा है |
इन सौरठों की सही सही व्याख्या करने की राजस्थानी भाषा के साहित्यकार आदरणीय श्री सोभाग्य सिंह जी से समझकर भरपूर कोशिश की गई फिर भी किसी बंधू को इसमें त्रुटी लगे तो सूचित करे | ठीक कर दी जायेगी |


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म्हारे आलीजा री चंग

Rao GumanSingh Guman singh

म्हारे आलीजा री चंग, बाजै अलगौजा रे संग,
फागण आयो रे !

रूंख-रूंख री नूंवी कूपळा, गीत मिलण रा अब गावै।
बन-बागां म काळा भंवरा, कळी-कळी ने हरसावै।
गूंझै ढोलक ताल मृदंग, बाजे आलीजा री चंग।।
फागण आयो रे !

आज बणी हर नारी राधा, नर बणिया है आज किसन।
रंग प्रीत रो एडो बिखर्यो, गली-गली है बिंदराबन।
हिवडै-हिवडै उठे तरंग, बाजे आलीजा री चंग।।
फागण आयो रे !

रानाबाई के पद

Rao GumanSingh Guman singh


वारी वारी वारी वारी वारी वारी म्हारा परम गुरूजी ।
आज म्हारो जनम सफल भयो , मैं गुरुदेवजी न देख्या । टेक ।

भाग हमारा हे सखी, गुरुदेवजी पधारया ।
काम, क्रोध, मद, लोभ, ने ये, म्हारा दूर निवारया ।।1।।

सोव्हन कलश सामेलसा ये, मोतीड़ा बधास्यां ।
पग मंद पधरावस्यां ये, मिल मंगल गास्यां ।।2।।

बंदन वार घलावस्यां ये, मोत्यां चौक पुरावस्यां ।
पर दिखानां परनाम स्यूं ये, चरनां शीश निवास्यां ।।3।।

ढोल्यो रतन जड़ावरो ये, रेशम गिदरो बिछावस्यां ।
सतगुरु ऊंचा बिराजसी ये, दूधा चरण पखास्यां ।।4।।

भोजन बहुत परकार का ये, कंचन थाल परोसां ।
सतगुरु जीमे आंगणे ये, पंखा बाय ढुलास्यां ।।5।।

चरण खोल चिरणामृत ये, सतगुरुजी का लेस्यां ।
तन मन री हेली बातड़ली ये, म्हारा गुरूजी ने कह्स्यां ।।6।।

आज सुफल म्हारा नेणज ये, गुरुदेवजी ने निरखूं ।
कान सुफल सुन बेणज ये, दूरी नहीं सरकूं ।।7।।

आज म्हारे आनंद बधावणा ये, बायां मन भाया ।
'राना' रे घरां बधावणा ये, गुरु खोजीजी आया ।।8।।


रसना बाण पड़ी रटबा की ।

बिसरत नहीं घड़ी पल छिन-छिन, स्वांस स्वांस गाबा की ।।1।।

मनड़ो मरम धरम ओही जाण्यो, गुरु किरपा बल पा की ।।2।।

लख चौरासी जूण भटकती, मोह माया सूं थाकी ।।3।।

समरथ खोजी 'राना' पाया, जद यूँ काया झांकी ।।4।।


म्हारो म्हारो करतांई जावै ।

मिनख जमारो ओ हे अमोलक, कोडी मोल फिंकावै ।।1।।

गरभ वास में कौल कियो तूं, जिणनै क्यों बिसरावै ।।2।।

पालनहार, करतार,विसंभर, तिरलोकी जस छावै ।।3।।

जिणने थां छिटकाय दियो जद, कुण थांने अपनावै ।।4।।

वाल्मकि सुक व्यास पुराणां, बेद भेद समझावै ।।5।।

कैं म्हारो तू थारो करतां, मिनख जमारो गमावै ।।6।।

'राना' सतगुरु खोजी सरणै, आवागमन मिटावै ।।7।।


ऐ तो जाबाला ऐ बाई थारा, मन में निरख निरधार ।
कुण थारा साथी कुण थारा बैरी, कुण थारा गोती नाती ।।1।।

कुण थारा भाई बाप ये मायड़, किस्या जनम की जाती ।
सुरतां सूरत पिछाणी नाही, भाभी भरम में गेली ।।2।।

कुण रोवे कुण हँसे बावळी, कुण किण रो भरतार ।
गया सू आवणा का है नांही, रया सू जावाण हार ।।3।।

दस दरवाजा इण पिंजरा के, पलक पंखेरू जैले ।
चेतन नौबत बजे जठा तक, अंत पछै कुण बौलै ।।4।।

हर सूं हेत चेत मन करलै, मिनख जमारो आयो ।
गुरु खोजी 'राना' रंग रीझी, भरम भूत बिसरायो ।।5।।


करसण होरयो रे बीरा, भूल्यो जग जंजाळ
काया खेत में रे बीरा, पाप पुण्य री नाळ ।।टेक।।

खाद खुटे नहीं रे बीरा, बीज तणी पैछाण ।
जोड़ सागै बणी रे बीरा, हलधर जोय निनाण ।।1।।

भावणी बीजणी रे बीरा, पाणी पाल परमाण ।
रूंखड़ी रोपणी रे बीरा, धरणीधर री छांण ।।2।।

गाज गरजै घणी रे बीरा, बरसै कठेक जाय ।
साख सूखै नहीं रे बीरा, जल जमना रो पाय ।।3।।

चतुर खोजी मिल्या रे पाकी, साख सराई लोग ।
जतन 'राना' करे रे बीरा, स्याम अरोगे भोग ।।4।।


चूंदड़ मैली न होय म्हारी बाया, चूंदड़ मैली न होय ।

नौ दस मास रही आ ऊंडी, अब सिणगार करण लागी ।
चूंदड़ चिमक चतुर साजन री, निजरया में गौरी आगी ।।1।।

कर मनुहार बुलाई पिवजी, चूंदड़ घणी सराई ए ।
मन की बात करी हित चित सूं, हिवडे घणी लगाई ए ।।2।।

जुग जुग चूंदड़ करे झिलामिल, जतन रतन अनमोल ए ।
'राना' सतगुरु खोजी सरणै, निरभै निसदिन बोला ए ।।3।।


जह हरि-भक्त चरण पधरावै ।
तीरथ एक कहा कहिये, तहां भुवन चतुर्दश धावै ।।टेक।।

भृगुजी क्रोध विवश जायो तज, हरि के लात लगावै ।
प्रभु की प्रभुताई का बरणो, जाकै चरण पुजावै ।।1।।

चतरो बिप्र साथ संगत रहे, बीरा बैर करावै ।
पितृ फूल दे जबरन ताको, हर पेड़ी पठवावै ।।2।।

जहाँ तिरथन को गुरु पुष्कर, सतगुरु धून रमावै
डेरा की धणयाप करता, छत्री मद चकरावै ।।3।।

कथा कीर्तन भंग पड़ता, काम्बल आग बंधावै ।
गठड़ी बंधी देखकर जोड्या, अब तो सकलां नावै ।।4।।

भगवत भक्त निराली लीला, पार कोई न पावै
'राना' सतगुरु तीरथ खोजी, अमरापुर चली आवै ।।5।।


कोई दिन साथनियाँ संग रमती
रमती रमती हीजे रहती, चिरम्या ज्यूं ही गमती ।।टेक।।

म्हारो राम संदेशो भेज्यो, सतगुरु नूत बुलाया ।
हरजी सत सनेह सूं पोखी, नहीं तो काया गमती ।।1।।

मानव पास उदार में राखी, बाबल लाड लडाया ।
जनम जनम रो वर संवरियो, मिनख धार क्यों टलती ।।2।।

काची काया मन मनसौबा, रमती मोह संग माया ।
काहन कुंवर ही मोही 'राना', परम्परा सूं चलती ।।3।।

आज्यो म्हारे देस

Rao GumanSingh Guman singh


बंसीवारा आज्यो म्हारे देस। सांवरी सुरत वारी बेस।।
ॐ-ॐ कर गया जी, कर गया कौल अनेक।
गिणता-गिणता घस गई म्हारी आंगलिया री रेख।।
मैं बैरागिण आदिकी जी थांरे म्हारे कदको सनेस।
बिन पाणी बिन साबुण जी, होय गई धोय सफेद।।
जोगण होय जंगल सब हेरूं छोड़ा ना कुछ सैस।
तेरी सुरत के कारणे जी म्हे धर लिया भगवां भेस।।
मोर-मुकुट पीताम्बर सोहै घूंघरवाला केस।
मीरा के प्रभु गिरधर मिलियां दूनो बढ़ै सनेस।

म्हारां री गिरधर गोपाल
म्हारां री गिरधर गोपाल दूसरां णा कूयां।
दूसरां णां कूयां साधां सकल लोक जूयां।
भाया छांणयां, वन्धा छांड्यां सगां भूयां।
साधां ढिग बैठ बैठ, लोक लाज सूयां।
भगत देख्यां राजी ह्यां, ह्यां जगत देख्यां रूयां
दूध मथ घृत काढ लयां डार दया छूयां।
राणा विषरो प्याला भेज्यां, पीय मगण हूयां।
मीरा री लगण लग्यां होणा हो जो हूयां॥

दरद न जाण्यां कोय
हेरी म्हां दरदे दिवाणी म्हारां दरद न जाण्यां कोय।
घायल री गत घाइल जाण्यां, हिवडो अगण संजोय।
जौहर की गत जौहरी जाणै, क्या जाण्यां जिण खोय।
दरद की मार्यां दर दर डोल्यां बैद मिल्या नहिं कोय।
मीरा री प्रभु पीर मिटांगां जब बैद सांवरो होय॥

नित उठ दरसण जास्यां
माई म्हां गोविन्द, गुण गास्यां।
चरणम्रति रो नेम सकारे, नित उठ दरसण जास्यां।
हरि मन्दिर मां निरत करावां घूंघर्यां छमकास्यां।
स्याम नाम रो झांझ चलास्यां, भोसागर तर जास्यां।
यो संसार बीडरो कांटो, गेल प्रीतम अटकास्यां।
मीरा रे प्रभु गिरधरनागर, गुन गावां सुख पास्यां॥

भजणा बिना नर फीका
आली म्हाणो लागां बृन्दावण नीकां।
घर-घर तुलती ठाकर पूजां, दरसण गोविन्द जी कां।
निरमल नीर बह्या जमणां मां, भोजण दूध दहीं कां।
रतण सिंघासण आप बिराज्यां, मुगट धर्या तुलसी कां।
कुंजन-कुंजन फिर्या सांवरा, सबद सुण्या मुरली कां।
मीरा रे प्रभु गिरधरनागर, भजण बिना नर फीकां॥

म्हारे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई॥
जाके सिर मोर मुगट मेरो पति सोई।
तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई॥
छाँडि दई कुद्दकि कानि कहा करिहै कोई॥
संतन ढिग बैठि बैठि लोकलाज खोई॥
चुनरीके किये टूक ओढ लीन्हीं लोई।
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई॥
अंसुवन ज8 सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई।
अब तो बेल फैल गई आणँद फल होई॥
भगति देखि राजी हुई जगत देखि रोई।
दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोही॥
मीराबाई के भजन संग्रह से यह पद उद्धृत है।
परसि हरि के चरण
मन रे परसि हरि के चरण।
सुभग सीतल कँवल कोमल, त्रिविध, ज्वाला हरण।
जिण चरण प्रह्लाद परसे, इंद्र पदवी धरण॥
जिण चरण ध्रुव अटल कीन्हें, राख अपनी सरण।
जिण चरण ब्रह्मांड भेटयो, नखसिखाँ सिरी धरण॥
जिण चरण प्रभु परसि लीने, तरी गोतम-घरण।
जिण चरण काद्दीनाग नाथ्यो, गोप लीला-करण॥
जिण चरण गोबरधन धारयो, गर्व मघवा हरण।

सूनी हवेली

Rao GumanSingh Guman singh


हवेली री पीड़

आँख्या-गीड़, उमड़ती भीड़
सूनी छोड़ग्या बेटी रा बाप !
बुझाग्या चुल्है रो ताप
कुण कमावै, कुण खावै
कुण चिणावै, कुण रेवै !
जंगी ढोलां पर चाल्योड़ी तराड़
बोदी भींता रा खिंडता लेवड़ा
भुजणता चितराम
चारूंमेर लाग्योड़ी लेदरी
बतावै भूत-भविस अ’र वरतमान
री कहाणी ! कीं आणी न जाणी !
आदमखोर मिनख
बैंसग्या पड्योड़ा सांसर ज्यूं
भाखर मांय टांडै
जबरी जूण’र जमारो मांडै !
काकोसा आपरै जींवतै थकां
ई भींत पर
एक कीड़ी नी चढ़णै देवतां
पण टैम रै आगै कीं रो जोर ?
काकोसा खुद कांच री फ्रेम में
ऊपर टंगग्या
पेट भराई रै जुगाड़ मैं
सगळो कडुमो छोड्यो देस
बसग्या परदेस,
ठांवा रै ताळा, पोळ्यां में बैठग्या
ठाकर रूखाळा।
टूट्योड़ी सी खाट
ठाकरां रा ठाट
बीड्यां रो बंडल, चिलम’र सिगड़ी
कुणै में उतर्योड़ो घड़ो
गण्डक अ’र ससांर घेरणै तांई
एक लाठी
अरड़ावै पांगली पीड़ स्यूं गैली
बापड़ी सूनी हवेली !

-डॉ. एस.आर.टेलर

मारवाड़ का साफा यानी ‘डॉक्टरी पगड़ी’

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जोधपुर. प्राचीन काल से ही पाग और साफों को आन, बान और शान का प्रतीक माना जाता है। यही नहीं स्वास्थ्य के लिहाज से भी पाग की उपयोगिता साबित हो गई है। एक शोध में वैज्ञानिकों ने मारवाड़ी पाग को स्वास्थ्य के लिहाज से उपयुक्त पाया है।

उदयपुर के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीटीएई) के वैज्ञानिक अब मारवाड़ी पाग की तर्ज पर ऐसी पगड़ी डिजाइन करने में जुटे हैं, जो तेज गर्मी में खेतों में काम कर रहे किसान और मजदूरों का बचाव करेगी। सीटीएई के वैज्ञानिकों ने इस शोध में विभिन्न क्षेत्रों की पगड़ियों और साफों के विवरण, उनकी कार्यक्षमता, पगड़ी या साफा पहनने से काम पर असर, काम के प्रकार, क्षेत्रवार तापमान आदि का भी सर्वे किया।

सीटीएई के डॉ. अशोक मेहता के नेतृत्व में शुभकरणसिंह द्वारा किए जा रहे शोध में प्रारंभिक अध्ययन के बाद पाया गया कि मारवाड़ी साफे (बंटदार गुंथे हुए) किसानों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। इनमें भी सफेद पगड़ी स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे बेहतर है। ये खासकर बाड़मेर, नागौर व जैसलमेर जिले के ग्रामीण इलाकों में बांधे जाते हैं।

बनाई जाएगी नई पगड़ी: डॉ. मेहता ने बताया कि फील्ड वर्क के बाद कॉलेज में मारवाड़ी पाग की तर्ज पर एक विशेष प्रकार की पगड़ी डिजाइन की जाएगी, जो किसानों की कार्य क्षमता बढ़ाएगी। साल भर में यह पगड़ी किसानों को मुहैया करा दी जाएगी।

खिड़किया पाग: जोधपुर की प्रचलित खिड़किया पाग बांधने के लिए पीतल व तांबे के तारों का एक सांचा बनाया जाता है। रुई की तहें और सिलाई के जरिये उसको आकार दिया जाता है। कपड़ा चाहे बंधेज या खीनखाब हो, उस पर लपेटने के बाद मोतियों से उसकी सजावट की जाती है। खिड़किया पाग के सामने का सिरा ऊंचा होता हैं और पीछे से नीचा।

समझ्यौं भोळौ, पण निकल्यौं गजब रौ गौळौ

Rao GumanSingh Guman singh

थळी रौ अेक वासी अेकर नेड़ा रा गांव में आयौ। उठै रौ थाट देखनै वौ तौ हाक्यौ-बाक्यौं व्हैगौ। वौ अेक बेरा माथै आयौ तौ उणरी अकल ई कह्यौं को करियौं नीं। थळियौं चकन-बकन व्हियौ। वै बेरा रा सागड़ी कनै आयौ। वो सागड़ी ने इचरज सूं पूछ्यौ-आ घड़लिया रौ तौ सेड़ौ ई कोंनी। कितीक लाबीं हैं ? सागड़ी कोतकियौ हौ। थळिया री बात सुणनै वौ जोर सूं हंसियौ। कह्यौं-थनै ईती ई ठाह कोनी ? घड़लिया री आ माळ तौ सात पंयाळ उंडी हैं, पछै किकर सेड़ौ आवै। बात सुणनै थळिया रौ तौ माथै ई चकरीजगौ। बेरा माथै उणीगंाव रा च्यार पांच मिनख बैठा हा। थळियां री भौळप माथै वै ई हंसिया। फरे पूछ्यौ-पण आं घड़लिया बौल्यौ-घड़लिया भरे थारौ बाप। थारा बाप नै घड़लिया भरण सारू राख्या हूं। थळियौं कह्यौं-म्हारो बाप मांय बैठौ सीयां नी मरतौ व्हैला ? सागड़ी कह्यो-थनै बाप माथै दया आवती व्है तौ थ्हारी कांगल दे दै। थळियौं लप उतारनै सागड़ी नै आपरी कांबल झिलाय दीवी। मिनख हंसिया तौ कह्यौ-बाप सूं बती कांबल थोड़ी ई हैं। थळियौं कांबळ गमायनै राजी-खुसी व्हीर व्हैगौ। सागड़ी कह्यौ-थळिया कितरा नाढ़ व्हैं। फागण उतरतां वौ थळियौं पाछौ उण बेरा माथै आयौ। सगळा लोग बेरा माथै पूगा। थलियौं कह्यौ-म्हारा बाप घड़लिया नीं भरतौ तौ गवूं रौ अेक दांणौ ई नीं व्हैतौ। इण सारू साख री आधी पांती रौ हकदार म्हैं हूं। थळियां रीबात सुणतां पांण सागड़ी रौ मूंड़ौ थाप खायग्यौं। म्हारौ बात कित्तौ दौरौ दिनां तक घड़लिया भरी, अबै औ पांती देवतौ दौरौ क्यंू व्है ? बेरा रो धणी छान सूं काबळ लायनै थळिया रै साम्ही करतौ बौल्यौ-आ लै थारी कांबली, म्हैं तौ कोगत करी ही। थळिये कह्यौ-अबै मानूं जैड़ौ म्हैं ई कोंनी। म्हैं तौ माथौ बाढ़िया ई म्हारी पाती नी छौड़ूं। इण गांव में मिनख बसता व्हैला तौ म्हारा न्याव करैला, नीतर म्है खुद निवेड़ लेस्यू। मरणौ तेवड़नै ई अठै आयौ हूं। लोग कह्यौ-बात तौ न्याव री कैवै हैं। पैला ठागौ करियौं जकौ अबै भुगतै। तेवड़ी कांबळ लेवती वगत उणनै आ बात सोच लेवणी हीं। बस्ती रा सगळा मिनख थळिया रै विळू रहया। सागड़ी घणौ ई रौयौ-रीक्यौं के म्हारी धूड़ खांणी व्हैगी, माफी चांवू। पण थळियौं तौ अेक ई सुणी नीं। झख मारनै आपरै हाथ छुरी-छैक आधौ आध पांती करनै थळियां सूं नीठ आपरौ लारौ छुड़ायौ।


थारै बस री बात कोनी तो म्हारै भी कोनी

Rao GumanSingh Guman singh

एक सेठाणी बेरा माथै पांणी सींचण गई। वा डोली उरायनै उंची खांचै तौ डोली खाली-री-खाली। डोली भरीजी कोनी। वा लुळ नै मांय झांक्यौं तौ उणनै किणी मिनख रौ झबकौ पड़ियौ। बोली-ओ मांय कुण बैठौ मायं कुण बैठौ म्हारी डोलिया खाली करे ? रसोई रौ अबैठौ व्है। वौ भूत हौ। कह्यौ, म्हैं भूत हूं। बेरा रौ भंवणिया चरराटा घणा करै। म्हनै इणरी चूं-चूं सूं नींद नीं आवै। म्है म्हारै हाथां इणनै गावा घी रौ वांगण देवूंला। थूं म्हनैं अेक कटोरौ भरने घी लायदै। सेठाणी कह्यौ - घी तो तौ कटौरौ भरनै घी लायदै। सेठाणी कह्यौ-घी तो कटौरा री ठौड़ कूड़ियौं भरने लाय दूं। पण पछै ई थूं डोलियां खाली करे तौ। म्हनै बचन दे, के आज पछै म्हारी डोलियां खाली नीं करैला, अर म्हारौं कीं बिगाड़ नीं करैला। भूत कह्यौ - थूं म्हनै कचोळा री ठौड़ कूड़ियौं धांमियौं, इण सूं म्हैं राजी हूं। थूं घी नीं लावै तौ ई थारज्ञै कीं बिगाड़ नीं करूलां। पक्कों बचन दूं हूं। थूं म्हनै चैथै-पांचवै वांगण सारू गावा घी रौ कटौरौ डोली रै मांय धरनै पुगाय दिया कर। सेठाणी जांणियौं के अबै तौ औ वाचा में बंधग्यौं। घी नीं लावूं तौ ई म्हारी बिगाड़ नीं करै। पछै फालतू आ वांगण री लाग क्यूं भरू। वां कह्यौ, घी तौ म्हारै घणौं ई है। पण लावण सारू म्हारै कनै बासण कोंनी। थूं म्हनैं हीरा मौत्या रौ अेक कचोळौ लाय दै तौ म्हंै रोजीना थारै वांगण पुगावती रैवूंला। भूत उणरै हीरा मौत्या रौ अेक अमोलक कचोलौं सूंच दियौ। सेठाणी कचोळौ घरे लायनै जाब्ता सूं धर दियौ। पण घी लावणौं तो अगळौं वा तौ पाछी उणरी बातई नीं करी। भूत रोज वांगण सारूघी मांगतौ पण सेठांणी पिछतावौं करनै कैवती-पांतर गी। घी-घी घोखूं तौ ई मौका भूल जावूं। कालै जरूर लावूंला। भूत नै गावा घी री भावड ़अणहूंती ही। वौ राजीना सेठाणी नै पूरी-पूरी भुळावण दैवतौ। पण सैठाणी तौ टाळमटोळ करती रेई। सेवट अेक दिन वो काठौ आंती आयनै बौल्यौ-सेठाणी, धायौ थारा वांगण सूं, म्हनैं म्हारौ कचैळी तौ पाछौ दे। सेठाणी हसती थकी जबाब दियौ - आज नीं कालै जरूर लावूंला। भूत कह्यौ - थारै इण कालै रौ तौ अंत ई कोनीं। सेठांणी बोली था में अेड़ी करामंत व्है तौ थूं काळै पछै इण आज नै पाछौ मत आवण दै। जिण दिन थूं औ कांम कर दियौ तौ म्हैं उणी दिन थनै ढुळढुळतौं कचैळौं गावा घी सू भरनै लाय देवूंला। भूत कह्यौ, आ तौ म्हारा बस री कोंनीं। सेठाणी कह्यौ-जद थारै बस री बाता कोनीं तौ पछै जावणौ म्हारै बस री ई बात कोनीं।


घूटियों भर नै बचाय लिया राज

Rao GumanSingh Guman singh

एक नटणी आपरै झीणा करतबां सू सगळा मुलक में चावीही। एकर उदैपुर में उण री रांमत मंडी। राणौजी नटणी ने कह्यौं-एड़ी रांमत बता जिकी ली कोंई नीं देखी व्हैं। नटणी कह्यौं-बड़ौं काम, म्हैं तौ करतब जाणूं, पण देखण वाळा री ई सरधा चाहीजे। आप देखी चावौं तौ म्हैं भरत माथै पीछोला पार कर जावूं। रांणौजी नै विसवार नीं व्हियौ। अंचभा सूं पाछै खरायौ, कंाई पीछोला ? नटणी कह्यो-हां, पीछौला। आपनै दीखै आ पीछौला।अेकर छोड, भरत माथै चार वळा फिर जावूं। रांणौजी जांणियौ के आ बात ई कोई व्हैणी हैं ! वै कह्यौं - थे, थूं पीछौला भरत माथै अेक वळा ई पार कर जावै तौ मैवाड़ रौ आधौ राज थारै नांव कर दूं। जे पार नीं व्हीं तौ म्हारौ राज छौड़नै किणी दूजा रजवाड़ा में थू रांमत नीं मांड़ सकेला। पीछोला री इण तीर सू उण तीर भरत बांधीजी। नटणी रांतम करण सारू भरत माथै चढी। अलेखूं निजरां नटणी रै पगां साम्हीं पड़ी। ओ कंाई! व तौ जमीं माथै चालै ज्यूं भरत माथै चालण ढूकी।देखण वाळां रा सांस ऊंचा चढग्या। रांणौजी रौ काळजौ उंचै चढग्यौं। ठाकर ठेठर कह्यो-हजारूं माथा दियां जकां नै ई मेवाड़ री पांती नीं मिळी अर आप इण नटणी री रांमत माथै आधौ राज देवणौ कबूल कर लियौ, अंदाता जुलम हैं। रांणौजी देखियौ के नटणी तो आधेटै पूगण वाळी हैं। नटणी तौ पीछोला पार जावैला। पार करियां आधौ राज देवणौ पड़ैला। नटे ई कीकर! मेवाड़ री आंन माथै पांणी फिर जावैला। जबांन में बंधग्यौ। पाखती ई अेक जाट उभौ हौ। कह्यौं-अनदांता कोप नीं करै तौ म्है उपाव कर दूं। जाट कह्यौ-जे इण सूं बांजी अर आंन रैवती व्हैला तौ म्है राख देवूंला। वौ तीर रै पाखती ई नटिया रै डैरै पूंगौ। नटणी आधेटा सूं सली पार व्हेगी। उणरै हांचळा में फेर पांनौ आवण ढूकौ हौ। वा आपरा बेटा रौ ध्यांन करियौ। वा फेर खाथी सिरकण ढूकी। पांणी रै हिबोळां रै टाळ कोई आवाज नीं ही। जांणै आवाज खुद सूं चिराळी सुणीजी। चिराळी नटणी रै कानां पूगी। वा तुरंत आपरै बैटठा री चिराळी ओळख लीवी। रांमत करती मां रौ ध्यान चूकौ। नटणी तौ भरत माथा सूं पीछौला री लैरां मंे पडग्यी। चैधरी रै पाखती आतां ई ठाकर ठेठर कह्यौ-तरवारां सूं राज नीं बचै जकौ औ जाट बाळक रै चूंटिया भरनै बचाय लिया।


मिनख रौ बोदौ जीव, इण तरै व्हियौ इलाज

Rao GumanSingh Guman singh

बात घणी पुराणी है। उण समै दवाखाना नीं खुलिया हा। लोग इलाज करण सारू हकीमा अर झाड़-फंूक करण वाळा रै अटै ही जावता हा। अेकर अेक मिनख नै कांळिंदर सरप डसग्यौ। झाड़ौ दिरावण सारू वौ झाड़ागर रै पाखती गियौ। झाड़ागर गोरियावर रैझाड़ा रौ अेक रिपियौ अर कांळिंदर रै झाड़ा रा पांच रिपिया लेवतौ हौ। मिनख रो जीव रौ बोदौ घणौं हो। मन में सोच्यौं झाड़ा-झाड़ा तो सगळा अेक सरीख व्है। दुनिया ने ठागौ बतावण सारू अै झाड़ागर ढपला करै। अै तौ फगत रिपिया कमावण री अटकंळा है। वो उणी समे अेक अटकल विचारी की इणनै गोरियावर कै दूं तो भी म्हारौ तौ इलाज व्है जावै ला। वो झाडा़गर ने कळदार अेक रिपियौ पकड़ायनै कह्यौ-गोरियावर सरप डसग्यौ, नांमी झाडौ दे दै। झाड़ागर पैचाण भी पूछी तौ वौ गोरियावर ही बताई। झाड़ागर झाड़ौ देवण लागौ। झाड़ौ देवतां थोडी ई ताळ व्हींके मिनख रा मन में डर वापरियौ-जे कदास न्यारा-न्यारा झाड़ा व्हैता व्है तौ। घर में साची बात तौ आ हैं कि खायौ तो कंळिंदर, गोरियावर रौ नांव तौ कूड़ौ लियौ। झाड़ौ गुण करियौ तौ हकनाक मारियौ जावैला। उणरै मन मं डर अणहूंतौ घर करगियौ। पण झाड़ागर नै आ बात कैवै तौ चार रिपिया ओर देवणा पड़ैला। उणरै मळीच जीव सूं वत्ता चार रिपिया देवणी नीं आवै। वौ यूं ई उपरवाड़ी कांम सारणी चावतौ हौ। वौ पाछी अटकल विचारी झाड़ागर ने कह्यौं-भाईड़ा, म्है निजरा तौ गोरियावार देख्यौ, पण मिनखा देह है, भूल व्है सकै। थने कांई खरच लागै, भेळमभेळ अंकाध नांव काळियौं रा ई परा लेई। झाड़ागर भी अणहूंतौं हौ, वौ मिनख रै मन री बात जाण ली। वौ कह्यौ-गोरियावर अर काळिंया रा नांव लूं, पण मिनख देह है, एकाध आध नांव उपर नीचे व्हियौ तौ कैंनीं सकूं। यूं करा जीव री बात हैं, म्हैं पैला गोरियावर रौ पछै काळियां रौ झाड़ौ दे दूं, ताकि किणी बात री चिंता नी व्हैं। अबै तौ मिनख री हालत फेर बिगड़ गी, वौ सौचियौ अटकळ में एक रिपियौ बिगड़ियौं अर जान जावै जकौ नैरी। उणरै सागै उारी लुगाई आई ही। वा कह्यौ-झाड़ागरजी, थ्हैं मानळौ इणनै गोरियावर अर काळियौं दोनूं साप डस लिया अे लोग पांच रिपिया फरे थ्हैं दोनूं झाड़ा लगाय लियौ। इण तरै मिनख नै लालच में एक रिपियौं गमावनौं पड़ियौै।


म्हारा बकरा नै ई औ बोबाड़ियौ रोग लागौ हौ

Rao GumanSingh Guman singh

एक गांव में अेक गवैयौ रैवतौं हौ। अेक दिन गांव में रात रा गीत-संगीता रो नूंठौ आयोजन व्हियौ। वो पक्की राग में गांणौ गावतौ हौ। रांगा रा मोटा-मोटा जांणकार सुणणिया उणरै, औळू-दोळू बैठा हां। भीड़ देखने अेक मिनख ई उठै जमग्यौ। वौ देखियौ गवैयौ घंाटी हिलाय-हिलाय अर बाकौ फाड़-फाड़नै उंचा सुर में गावती हौ। सुणण वाळा सगळा ई मस्त व्हैगा। घणा दिनां बाद इण तरै रौ आयोजन व्हियौ हौ। सगळा लोग मस्त हा। वै गवैया री तारीख कर रिया हा। पण इण सब में एक मिनख वां सगळा सूं उंचै रह्यौ। वौ गवैया रौ असंली जांणकर हौ, जेड़ौ दूजा आज तांई मिळियौ। वौ गांणौ सुणतौ-सुणतौ जोर-जोर सू रोवण लागौ। गवैयौ मिनख रो घणौ-घणौ औसांण जतावतां कह्यौ-म्हनै आज अणहूंती खुसी है के म्हारी राग आपरे माथै इतौ असर करियौ कै आपरी आंख्या में आसुवां री झड़ी मचगी। इण दुनिया में हाल पक्की रांगा आप जैड़ा असली जांणकर बैठा तौ है, आ बात जाणनै म्हनैं घणौं मोद व्है। घणी खुसी व्हिई की आप जेड़ा राग रा जानकार इण आयोजन में पधारिया। सब एक दूजा कानी देखण लागा। इता में मिनख रोवतौ-रौवतौ ई कह्यौं-अबै मोद गुमेज री बातां छोड़ौ अरले सकौ तो आखरी वगत रांतजी रो नांव लेलौ। मोद-फोद तौ सगळौ लारै धरियां रैय जावैला, फगत रांमजी रौ नांव साथै चालैला। अबै आपरौ घड़ी-पलकां रौ सांस हैं। म्हारा बकरा नै ई औ बोबाड़िया रौग लागो हौ। बापड़ौ बोबाड़ा करती-करती उणी सांयत प्रांण छोड़ दिया। आपनै ई बकरा वालौ सागै रोग लागौ हैं। अबै धन्तर वेद ई आपनै बचा नीं सके। परारा री साल म्हारौ बकरौ भूंडै ढाळै दौरौ घणौ मरियौ हौ। आपनै उणी भांत बोबाड़ा करतां देख म्हनै बकरा री याद आयगी। इण सूं म्हनै रोज आयग्यौ। म्हारौ कैणौ मानौं, ले सकौ तौ दोय-च्यार राम रा नांव लेलौ। अबारूं आपनै मरणौ पड़ेला। मिनख री बात सुणनै सगळां नै ई हंसी छूटगी। तद मिनख आंख्या पूछतौ फैर कह्यौ-अबारूं हंसौ भला ई, सेवट रोवणौ पड़ैला। मरिया पछै थानै म्हारी बात रौ साच आवैला। म्हारौ बकरौ भी इण तरै घणौ दुखी हो। सगळा उणनै राग रौ मतलब समझायौं पण उणनै तो इतरौ हीं समझ मं आयौ के गवैया नै नै ई औ बोबाड़िया रोग लागौ हौ।


बापू---कन्हैयालाल सेठिया

Rao GumanSingh Guman singh

महात्मा गांधी रै सुरगवास माथै देस री कांई दसा व्ही। सगळै जीव जगत माथै उण महान आत्मा रै गमन रौ कांई असर व्हीयो, उणरौ वर्णन कवि सेठिया री रचना मे घणौ मर्मस्पर्शी शब्दां में मिळै। जात-पांत रा भेद नै मेटण वाळौ, मिनख मातर रौ सांचो मींत, महात्मा गांधी जैड़ा अवतारी इण धरती माथै आया न कोई आवै। एक गांधी रै मिटण सूं सगळा री आँख्यां में आँसू है। मरतो-मरतो ई गांधी एकता रौ पाठ पढ़ाय ग्यौ।



आभै में उड़ता खग थमग्या
गेलै में बैंता पग थमग्या
हाको सो फूट्यो धरती पर
बै कुण गमग्या, बै कुण गमग्या?

ओ मिनख मरयो'क मरयो पाखी?
सै साथै नाड़ कियां नाखी?
बा सिर कूटै है हिंदुआणी
बा झुर झुर रोवै तुरकाणी।

इसड़ो कुण सजन सनेही हो
सगळां रा हिवड़ा डगमगग्या।
बै कुण गमग्या, बै कुण गमग्या?

मिनखां रो रुळग्यो मिनखपणो
देवां री मिटगी संकळाई,
बापूजी सुरग सिधार गया
हूणी रै आडी के आई?

जीऊंला सौ'र पचीस बरस
बिसवास दिरा'र किंया ठगग्या?
गिगनार पडै़ लो अब नीचै
सतवादी वचनां स्यूं डिगग्या
बै कुण गमग्या, बै कुण गमग्या?

बापू सा मिनखां देही में
धरती पर मिनख नहीं आया,
आगै री पीढ्यां पूछै ली-
के इस्या नखतरी जुग जाया?

ई एक जोत रै पळकै स्यूं
इतिहास सदा नै जगमगग्या
ईं एक मौत रै मोकै पर
सगळां रा आंसू रळ मिलग्या,
बै कुण गमग्या, बै कुण गमग्या?

सेठ सेठाणी रा पाछा फेरा रे फेर में आयौ चोर

Rao GumanSingh Guman singh

एक चोर एक सेठां रै घरै घुसियौ पण, सेठ पांणी पीवण नै जागया सो उण री निजर चोर माथै पड़गी। सेठ मांचा माथै बैठग्या। चोर थांभा रै लारै उभौं रह्यौ। सेठ दो-तीन हेला पाड़नै सेठांणी नै जगाई। कह्यौं-ब्याव नै बीसेेक बरस व्हैगा। आज कांई जची के फेरा पाछा नवा करलां। सेठाणी सानी में समझगी, तौ ई वा अण जांण बणनै कह्यौं-माथा में धोळा आया हैं अर हाल टाबरपणा री बातां करौ। फेरा खावण री मन में आवै तौ अेकला खायलौ। सेठ बोल्या,-थे रांजी व्हौ भंलाई बैराजी। म्है तौ पांतरग्यौं के फेरा कीकर खाया हा। सेठांणी बोली-थारां आगै म्हारीं जोर नीं चाले। पण पाड़ौसियां रै साम्हीं अैड़ी बातां मत करज्यौ। लो, नवा फेरा खावणा व्है तौ अबै झट खायलौ। चोर सेठ सेठाणी री बातां सुणनै मन में जांणियौ के अेड़ौ भौळौ सेठ तौ मुलकां में ई नीं लाधै। परिंड़ा माथै सींचणियौ पड़ियौ हौ। सेठ डोली खोलनै सींचणियौ पड़ियौ हौ। सेठ डोली खोलनै सींचणियौ लाया। अेक मूंड़ौ सेठाणी ने झिलयानै कह्यौ-म्हनै साचैला फेरा तो खावण नी है। पाछा याद करणाहै जकौं इणसींचणिया सूं याद व्है जावैला। लौ, थैं इणरौ मूंड़ौ झेलौ। आ कैयनै सेठ उणी थांभा सू चिपियोड़ौ ऊभग्यौ। दोनूं धणी लुगाई थांभा रै चारूकांनी फेरा खावण लागा। चोर रै साम्हीं तौ वै भळियौ ई कोनीं। तीन फेरां रै पछै सेठाणी कह्यौ-लो, अबै म्हनै लारै आवण दौ। सेठ हौळै-हौळै चालता ई रह्या। चोर नै गिरियां सूं लेयनै ठेठ गळा तंाई आटां में पळेट लियौ। सेठ, सेठांणी नै थांभा रै पाखती बैठांणनै खुद डागळै चढ्या। जोर सूं हेलौ मारियौ-पाडिसियां, सावळ कांन देयनै सुण लीजौ, म्हैं चोरी करण सारू आवूं हूं। जाब्तौं करणौं व्है जकों कर लीजों। तीन चार बार वौ औ ई हेलौ मारियौ। चैथी वळा उणरौ हेलौ सुणनै अेक लड़कीलौ आदमी कह्यौ-सेठां, चोरी करोला तो माथा में अणगिणती रा जूत पड़ैला। सेठ पड़ूतर दियौ-चैरियां करण सूं जूत पड़ता व्है तो आवौ, चोर म्हारै घरै बंधियोड़ौ त्यार है। सगळा आड़ौसी पाड़ौसी जूता अब गेड़िया लेयनै दौड़ता आया। सेठ चोर नै बताया कह्यो-चोरां रै जूत पड़ता व्है तौ औ कोरौ क्यूं जावै ? अबै चूकजौ मती। पाड़ौसी लिगतरां सूं मार मारनै उणरौ पोखाळौ कर दियौ। वौ तौ सेठां रै नवा फेरा खावण रौ खिलकौं आखी ऊमर नीं पातरैला।


सेठा-सेठानी करिया, चोरां सूं दो-दो हाथ

Rao GumanSingh Guman singh

सीयाळा रा दिन हा। सेठ-सेठांणी सूता हा। आधी रात रा सेठांणी नै तिरस लागी। सेठांणी आड़ौ खोलनै थळी रै बारै पग धरियौ तौ साम्हीं डागळा सूं दो चोर उतरता दिख्या। वा तौ डरी, पर झट पाछौ आड़ौ देयनै आगळ जड़ दी। सेठा रा कांन में डरती-डरती हौळै सूं बोळी, गींगला रा भायजी, घर में चोर घुसग्या है। सेठ कह्यौ, डरण री जरूरत कोनी। सेठांणी पाछी सूय तौ गी पण डर नीं मिट्यौ। काळजौ धक-धक करण लागौ। सेठ सेठांणी रौ पुणचै दबायनै केवण लागा, सेठांणीजी, सुणौ कोंनीं, काई। बताळयनै कायौ व्हैगौ पण थांरी तौ आंख ई नीं उघड़े। सेठांणी बोली क्यूं, जीव खावौ। थे तोै रैय-रैयनै चमकौ। दूजा नै ई सावळ नीं सूवण दौ। हाका मत करौ। साळ रौ तौ आड़ौ दियड़ौ हौ। मांय सेठ-सेठांणी नै बातां करता सुणिया तौ चोर आड़ा रै पाखती कांन लगायनै उभग्या। जांणियौ के धन री की सोय लागैला। सेठ कह्यौं, आज थानै नांणौ लायनै दियौ जकौ सावळ जाब्ता सूं धर दियौ कांई ? सेठांणी चिड़ती बोली, थांने तो दिन रात धन हीं दिखे। सावळ आंख में कस ई नीं लेवण दौ। सेठ कह्यौं, अेकर पूछणा में थाने इती रीस क्यूं आवै ? धन कमावणौ दोरौ घणौ है। हजार-हजार रा नग जड़ियोड़ी बींटियां अर सौ मोहरां थारा हाथ में झिलाई। सेठांणी कह्यौ-म्हनै किसौ धन खारौ लागै। अैड़ौ जाब्ता सूं धरियौ हूं के चोर रा बाप रै ई हाथ नीं आवे। चोर काठा कांन अड़ायनै ध्यानं सूं बात सुणाण लागा। सेठांणी कह्यौ-बीटियां तौ बेक कुलड़ी में घालने सावळ माथै ढकणी देयनै चैक रा उखल माथै धरी हूं अर मोहरां सगळी अेक काळी चूंदड़ी में पळैटनै बाड़ां रै नींबड़ा रा डाळा में टेर दी हूं। बतावौ, थे अेड़ी जुगत कर सकता। चोर मन में कह्यौं के अबै घणा दिन रोवौला के कोई चोर मिळिया तौ हा। बेक तुरत मोहरां लावण सारू गियौ। वठै सांचांणी ई कुलड़ी पड़ी हीं। लप ढकणी उघाड़ी अर हाथ घालियौ। हाथ मांय घालतां ई जोर सूं हाकौ करियों-अरै, खायग्यौ रै। चोर रा सगळा डील में लाय-लाय फूटगी ही। बिच्छुवां रा ओळबां चढ़िया पण चढिया। सेठांणी नै सिंझया रा ऊखळ कनै दौ बिच्छु लाध्या हा। वा वांनै कुलड़ी में घाल दिया। उठीनै दूजौड़ौ चोर चूंदड़ी में बंधियोड़ी मोहरा लेवण सारू नींबड़ा माथै चढ़ियौ। डाळां माथै टिरती चूंदड़ी दिखी। देखतां ई वौ जोर सूं हचीड़ दियौ। हचीड़ देवतां ई अलेखूं मधु मखिया ठोड-ठोड डस न्हाकियौ। हैटै पड़ग्यौ। चोरां री गत देख सेठ सेठांणी हंसण लागा।


बे माता रा अछर झूठा नीं होवै

Rao GumanSingh Guman singh

एक सेठ एक मातामा री घणी सेवा करी। सेवा करता करता घणा दिन व्हैगिया। एक दिन मातमा को सेठ रै हाथ में रेखावां दिखी जो मातमा नै बड़ौ पिछतावौ व्हियौं कै सेठ म्हारी इतरी दिन सेवा करी पण म्हैं इण नै कुछ नीं दे सकियौ। दो दिन बाद ही इण री उमर पूरी व्है जावैला। सेठ पूछ्यौं तो मातमा ने आपरै पछतावै रौ कारण बता दियो। सेठ घणी चिंता करी पण उण नै भी मातमा रै माथै भरौसौ हौ। मातमा सेठ नै सागै लेयर ब्रहमाजी रै कनै गिया। ब्रहमाजी मातमा रौ घणौ आदर सत्कार कर्यौ, पण सेठ री उमर बढावण री बात टाल गिया। जद दोंनू विष्णुं जी कनै पूगा। विष्णु जी रै उठै मातमा रौ घणौं आदर सत्कार व्हियौ, पण उमरा बढ़ावण री बात टाल गिया। व्है कह्यौं, महादेवजी चावै तौ सेठ री उमर बढ़ा सके, म्है तौ इण री उमर नीं बढ़ा सकू। पछै वै महादेवजी रै कनै केलास परवत माथै पूंगा। वठै माता पारवतांजी शिवजी री पूजा कर रैयी ही। महादेवजी तपस्यां में लागोड़ा हा। मातमा आया तो उण रौ घणों सतकार करियौ। आवण रौ कारण पूछियौं। मातमा पूरी बात बतलाई तो महादेवजी भी लारै हट ग्या। महादेवजी कह्यौं, उमर रा अछर बेमाता डालै हैं, इण सारू वे ही इणमें हेर-फेर कर सकें। दूजौ कोई की नीं कर सकैं। अब वै बेमाता कनै रवाना व्हिया। बेमाता एक भाखर माथै रेवजी ही। भाखर में घुसण सारू एक छोटा खाड़ा सू व्हैणै गुजरणौ पड़तौ हौ। मातमा तो खाड़ा सूं व्है नै भाखर में चला गिया, पण सेठ रै माथै एक मोटो भाटौ पड़ियौं, अर उणरी उणी टैम मौत व्हैगी। जिण टैम मातमा बैमाता कनै पूगा। बेमाता जोर जोर सूं रो रैयी ही, पण उण नै देखतां ही हसण लागी। मातमा इणरौ कारण पूछियौं, बेमाता कह्यौं, इण सेइ रे माथै म्हैं लिख्या हैं कै ओ सेठ एक मातमा रै सागै अठै आवैला जद भाखर रौ भाटा गिरण सूं इणरी मौत व्हैला। पछै म्हैं सोच्या ओ कीकर व्हैला, इण वास्तै म्हैं रो रैयी हीं, आज म्हारा अछर झूठा व्है जावैला, क्योंकि अेड़ा बानक बणना घणा दौरा हैं। भला आतमा अेक मिनख नै लेयर अठै किकर आवैला, पण अब आप अठै आय गिया हौ तो सेठ री मौत व्है ग्यी। म्हारा अछर साचा व्हिया, इण सारू म्हैं हंस री हूं। बेमाता रौ जवाब सुण मातमा चैकिंया। दो दिन की अवधि पूरी व्है गी ही। सेठ री मौत व्है चुकी ही।


सौतेली मां बुरो करण चाली, पण भलौ व्हैग्यौ

Rao GumanSingh Guman singh

ऐक राजा रो सोलह साल रौ कुंआरौ छौरो मर गियौ। पंडत राज सूं कह्यौं कंवर सा‘ब ने यूं नीं जलावनो चाहिजै। उणरौ ब्याव व्ळैणौ चाहिजै। पैला ऐकआक री लकड़ी रै सागै ब्याव व्है जावै। पछै आक री लकड़ी रूपी बीनणी रै सागै राजकुमार रौ शव जलावणौ चाहिजै। राजा कह्यौं, ऐड़ी बात हैं तो म्हैं आक री लकड़ी रै सागै क्यूं, सागेली छोरी रै सागै ब्याव करवा दूं ला। राजा ढिंढोरौ पिटव दियौ कै जो सुरग सिधारियौड़ा राजकुमार नै सागै आपरी छोरी रो ब्याव करेला, उणनै एक लाख रिपिया राज कोष सूं दिया जावैला। एक बिरामण रा दूजौ ब्याव व्हियौ हौ। उणरै पैली लुगाई रै छोरी ही। बिरामण दिसावर गियोड़ौ हौ। बिरामाी सोचियौ इणछोरी रौ ब्याव मरियोड़ा राजकुमार रै सागै करवाय दूं जौ एक लाख रिपिया मिल जावैला। बिरामण पूछैला तौ कै दूंला कि बीमारी सूं मरगी। आ बात सोच वो आपरी छोरी रौ ब्याव राजकुमार रै सागै करवा दियौ अर एक लाख रिपिया ले लिया। राजा मरियोड़ा राजकुमार रै सागै छोरी नै चिता माथै चढावण लागा तौ वा राजा सूं कह्यौ म्हारी सौतेली मां लाख रिपिया री आपरी करजदार व्हैगी। आप म्हारौ ब्याव कर दियौ, अब औ राजकुमार म्हारौ व्हैहगयौ। अबै आप लोग अठां सूं जाऔ, म्हैं आपरी मरजी सूं इणरौ दाह करम करूंला। राजा बीनणी री बात मान ली अर वठां सूं वहिर व्हैगिया। छोरी राजकुमार री मरियोड़ी देह नै गोद में लेयर चिता रै माथै बैठ गी। आधी रात रा माहदेवजी अर पारवतांजी निकलिया। पारवतांजी माहदवेजी सूं पूछियौ, आ कई बात। आ यूं किकर बैठी ? शिवजी सगळी बात बताई तो पारवतांजी कह्यौ इणरी मां म्हारज्ञै वरत करती ही, इण सारू राजकुमार नै जीवन देवौ। शिवजी पैलां तौ मना कर दियौ, पण हठ रे आगै उणनै पारवतांजी री बात माननी पड़ी। सुबै-सुबै धण्ी-लुगाई नहावण सारू गिया। राज रा मिनख उणनै देखिया तौ वै भागिया-भागिया राजा रै पास पूगा अर बतायौ कै राजकुमार तो जीवित व्हैगिया। राजा नै विसवान नीं व्हियौ पण मिनखा रै घणौ विसवास दिलावण रै पछै राजा गंगा रै तट माथै गिया। लोग कह्यौं तो वा बात साची निकली। राज दोनां नै सागै ले पधारिया। इण भांत एक कानी तो राजा नै आपरौ छोरौ पाछौ मिलग्या, अर बिरामण री बिना मां री छोरी नै राज मिलग्यो। कैया करै कै कोई कित्तो ही बुरो करण री क्यूं नी सोच ले, ऊपर लौ जिके रो जहड़ो भाग लिखे।


जिण री जैहड़ी अकल, उण नै मिळ्या करे वैहड़ा ही दाम

Rao GumanSingh Guman singh

ऐक सेठ रै कन्ने एक नौकर रह्या करतौ। वो राजीना एक ही बात सोच्या करतों, म्है तड़के उठ जाऊं, इत्तो-इत्तों काम करूं, देर रात तक जाय र, बिस्तर नसीब व्हिया करै। इण काम रा म्हनै दस रिपिया माहवार मिळै। सेठजी रो मुनीम खाली चार घंटा आवै, गादी माथै मंसद रै सहारै बैठ जावै। कीं करतो कोनी दिखै, पण सेठ इण नै तीन सौ रिपिया माहवार मिळै है। एक दिन नौकर आप रै मन री बात सेठ ने कैय ही दी। सेठ नौकर री बात सुण र, म नही मन खूब हस्यो। पछै उण नै कह्यौ, थनै थ्हारी बात रौ जवाब काळै देवूंला। दूजै दिन सेठ दिनूंगै ही नौकर से कह्यौ, दरिया माथै जाय र देख नै आ, आज कांई आयौ हैं ? नौकर दौड़ नै गयौ और पाछौ आय नै बतायौ आज एक जहाज आयौ है। सेठ उण नै पाछौ भेज्यौं, जा देख नै आज, जहाज रै माय कांई आयौ हैं ? नौकर फेरूं भाग्यो-भाग्यों दरिया माथै गयो अर जहाज वाळा नै पूछ पाछ नै खबर लायो कै जहाज रै मांय चावल भरियोड़ा है। सेठ नौकर ने पूछ्यौं, चावल किण किसम रा हैं, किण भाव रा हैं ? नौकर इण बात री तपास करण पाछौ दरिया माथै जावण वाळो ही कै इतरे में मुनीमजी आय गिया। सेठ ने मुनीमजी ने कह्यौं, मुनीमजी थोड़ो दरिया माथै कांई आयौ हैं ? मुनीमजी दरिया माथै गिया अर, चावल री सगळी बोरिया खरीद लीवी। बाजार थोड़ौ परवान माथै हौं, मुनीमजी जी वे चावला बोरियां आठ आनै रै मुनाफै मंे हाथौ हाथ बेच दीवी अर मुनाफे रा पंाच हजार रिपिया लाय र सेठजी रै आगे धर दिया। वह नौकर सगळौ नजारौ देख्यो, मुनीम री कला देख र नौकर हक्को बक्कों रेय ग्यौ। सेठ उण नै केवण लाग्यौ, बावळा, थूं एक काम ने चार चक्कर रै मांय भी पूरो कोनी कर्यौं, अर मुनीमजी एक सवाल रो जवाब इण तरै दियो कै सुबह दरिया माथै गिया अर दौपारा तक पाछै आय नै रिपिया पांच हजार गादी माथै रख दिया। अब बता, थनै दस रिपिया और मुनीमजी ने तीन सौ रिपिया ठिक ही देवूं या नीं ? नौकर बिचारौ समझ ग्यौ, कै बैठण रा नीं, मुनीमजी नै अकल रा तीन सौ रिपिया माहवर मिल्या करै। सेठ रौ सीख देवण रो तरीकों भी उण नै समझ में आय ग्यौ। वो जाण ग्यांे, आप-आप री अकल रा ही दाम मिल्या करै।


माखण री जगा रूई देखणै निकलगियौ मिनकी रौ जीव

Rao GumanSingh Guman singh

घणी पूरानी बात हैं। रामदीन नाम रो बिरामण हौ। वौ चंदर नाम रा गांव मैं रेवतौ हौ। एकर उण गांव में आंधी-तूफान आयौ। तूफान इतरौ भंयकर हो कै घरां री छतां उड़गी। थेड़ी देर पछै बरसात शुरू व्हिई। घर गिरण रा ड़र में एक मिनख आपरा टाबरां नै लेयर दूजी जगा निकल गियौ, ताकि आफत सूं उणरौ कई नीं बिगड़े। उणरै घर में एक मिनकी हीं, उतावल में वो उणनै खोलणौ भूल गियौं। आंधी-तूफान में वौ हक्को-बक्को वठा सूं निकलगियौं। इण हड़बड़ाहट में मिनकी वठेही बांधियोड़ी ही रेहगी। ज्यू-ज्यूं तूफान आयो वा घणा पग पटकिया, पण मिनकी नीं खुली। जठै मिनकी बांधियोड़ी ही, उणती थोड़ी अलगी दूर हवा सूं उड़नै रूई रौ टुकड़ौं आयनै गिर गियौ, अठै पाणी रा टपां पड़ण सूं वौ वठै ही आयनै रूक गियौ। बिल्ली रो ध्यान वठै गियौ तौ वौ सोचियौं कै औ माखन रौ टुकड़ौ हैं। वा माखन पावण सारू घणी उछल कूद मचाई, पण सगळी बेकार गी। घणी मेहनत रा पछै भी माखण उणरी पहुंच सू बारै ही रियौ। वा भूख रै मारै कूदती गी, वा बंधन सूं मुक्त होवण सारू रास्ता खोजण लागी पण उणनै कोई रास्तौं नीं सूझियौं। लारै जातौ वा थक हार गी। पांच सात दिन पछै जद आंधी तूफान रौ जोर कम पड़ियौ। जणै घर रा सगळा मिनख घरै आया। उणनै घणों अफसोस व्हियौ कै वौ उतावल में मिनकी खोलणौं भूल गियौ। उणणै आपरै करमा माथै घणौ दुख व्हियौ। खैर जौ व्हैगी सो व्हैगियौ। वौ लारली बात बिसार नै उणी टैम मिनकी नै खौली अर उणनै घणौ लाड़ करियौ। घणी चीजां खावण सारू रखी। लाड़ करतौ वौ उणनै गौद में भी उठा ली, पण मिनकी रौ जीव तौ माखन में बसियोड़ौ हौ। इण सारू वा उतावली व्हैनै माखन रै पास पूगी, वा सौचियौ आत सात दिनां रै पछै उणरी मन री इच्छा पूरी व्है जावैला। जद उणनै साची बात ठाह पड़ी तौ वा घणी दुखी व्हिई। रूई तौ टुकड़ौ पायनै उणरै मन में निराशा घर कर गई, यूं करता उणरौ जीवण उड़ गियौ। मालिक नै जद इण बात रौ ठाह पड़ियौ जणै वौ घणों दुखी व्हियौ। मिनकी सात दिनां तक माखन रा लौभ में जीवती रैहगी, पण रूई देखणै उण्रौ जीवण थौड़ा टैम में हीं निकल गियौ।


बात बात में ठाकरां आपरौ नूर गमायौ

Rao GumanSingh Guman singh

ऐक ठाकर साब रै कनै घणा रिपिया व्हैगिया तो उणनै घमंड आय गियौं। वै दिन रात रिपिया रै घमंड में रैवता। ऐक दिन री बात हैं। वे रावला सूं आपरा घोड़ा माथै सवार होय नै गांव में घूमण नै निकळिया। ऐक सेठ री दुकान रै आगै पूग्या तौ सेठ आपरी मूंछौ माथै ताव दियौ। ठाकर नै लागौ कि औ सेठ म्हारौ अपमान कर रियौ हैं। ठाकर सेठ सूं कह्यौं-थ्ज्ञू म्हनै देखनै मूंछौ माथै ताव दे रियौ हैं, आ बात ठीक नीं हैं। सेठ कह्यौ-मूछां म्हारी हैं, म्हैं ऐक नीं दस बार ताव दूं, म्हारी मरजी, आपणै इणसूं कई फरक पडैं। म्ॅहारी मूंछा म्हैं घणौं तेल पाय नै मोटी करी हूं, इण सारू ऐक नीं दस बार ताव लगांऊ, म्हारी मरजी। ठाकर सा नै इण बात सूं खासी रीस आय गी। वे सेठ नै घणी खरी-खोटी सुनाई। सेठ सूं कह्यौं, आज सूं आपरै म्हारै बीच वैर व्हिगयौ। अबै देख लेवांला सेठ भी ठाकर साब री ललकार माथै कह्यौं, ठीक हैं, बैर हैं तौ बैर हीं सही। मैदान खुलों हैं, टैमआवैला जद म्है भी देख लेवूंलां। ठाकर नै आ बात अघणी अखरी। वै लड़ाई री तैयारी करण लागा। आगती-पागती सूं तीर, तलवार अर बंदूका मगवाई। सगळा सगां संबंधिया नै अेक साथै बुलाया अर तनख्वाह देवण वाला सैनिक भैळा करिया। ठाकर उणनै घणौ खिलावतौ, पिलावतौ सगळा री सुख सुविधा रौ ध्यान राखतौ। लारै जातौ लड़ाई रौ दिन तय व्हियौ। ठाकर आपरा सगळा मिनखा रै सागै हथियारां सूं लैस व्हैणै सेठ री दुकान रै आगै पूग्या। सेठ उण टैम आपरा काम में लागौड़ा हा। वौ लड़ाई सारू तैयारी नीं करी ही। ठाकर सेठ ने ललकारतौं कह्यौं, आ जाऔ मैदान मंे। सेठ उठकर ठाकर नै मुजरौ करियौ कह्यौं, आप सूं म्हारी कैड़ी लड़ाई। आप म्हारा राजा अर म्है थ्हारी प्रजा। आ तो सेठ हाळीं मूछ हैं, यों नी सही तो यो सहीं। अेड़ो कह सेठ आपरी मूंछा रा बळ खोल दिया। ठाकर घणौं पछतायौं कै सेठ सूं यूं ही राड़ पाल ली अर इण राड़ में अपरौ सगळौ धन पाणी म्है डाल दियौ।


गिनायतां नै यूं सिखायौ सबक

Rao GumanSingh Guman singh

ऐक सेठ री छोरी रौ ब्याव हौ। बारात आई तो छोरी वाला धूमधाम सूं सत्कार करियौ। छोरा वाला मालदार हा, पण बींदणी सारू गैहणौ-गांठौं नीं लाया हा। गैहणा रै ठौर रोकड़ रिपिया भरण नै दौ थाल में धर दिया। छोरी रा बाप नै जद इण बात री जानकारी व्हिई तौ बैटी वौ आपरा गिनायत कनै पूगौं अर पूछियौं कई बात हैं ? आप तौ रीत जितरा गैहणा नीं लाया ? छोरा रा बात कह्यौं बाजार सूं सोनो लावतौ तौ सुनार कमावतौ अर उणमें मिलवाट रौ ही डर रैवतौं। पछै सुनार तौ सुनार हैं उणमूं भी थौड़ौ घणौं राख लैवतौं। इणरै पछै भीगैहणा बनावट सारू मजूरी देनी पड़ती जकौ न्यारी। बींदणी जद गैहणा पहनैला तौ वै घिसला भी। इण सारू गैहणा नीं लायनै रोकड़ रिपिया लाया हूं, ताकि किणी तरै रौ खतरौ नीं। गिनायत री आ बात सुणनै छोरी रौ बाप चुप व्हैगियौ। पण जद सजनगोठ-बड़ी ज्योनार रौ समै व्हियौ अर बारात जीमण सारू आई तौ बेटी रौ बात सगळा री पतलां माथै मिठाइंया री ठौर चार-चार रिपिया धर दिया। अबै तमाशा करियौ ? म्हारी तौ नाक कटवा दीं, पत्तला माथै रिपिया क्यूं धरिया हौ। छोरी रौ बाप घणा लाड सूं कह्यौं, म्है इण सारू पतलां माथै रिपिया धरिया क्यूंकि पैला बाजार सूं घी, शक्कर, दाल आदि लावणी पड़ती, अगर यूं करतौ तौ पंसारी नै फायदौ व्हैतौ। पछै हलवाई कनां सूं मिठाईंया बणावतौ जणै उनरी मजूरी दैवणी पड़ती, इणमें भी मीठौं कम ज्यादा री चिंता। बात अठै हीं खत्म नीं व्हैती आपनै भी उणनै खावण सारू मेहनत करनी पड़ती। इणमें घणी मिठाीई खराब व्है जावती, इण सारू म्है पतलां म्हैं मिठाई री ठौर रिपिया धर दिया। इणमें किणी तरै रै नुकसान री संभावना नीं हैं । आ बात सुणता हीं बैटा रै बाप री बोलती बंद व्हैगी, वौ घणौ पिछतायौ। हाथौ-हाथ गांव रा बाजार में गियौ अर आपरी बींदणी रै सर सूं लेयर पग तक रा गैहणा गड़ायनै लेयर आयौ जण छौरी रौ बात जो आपरै गिनायन नै सबक सिखावण री ठाणी हैं उणनै चान दिनां तक राजी खुसी पांच पकवान जिमाया।


जवार री ठौड बत्तीसी गिटाय दूंला

Rao GumanSingh Guman singh

एक मिनख जवार री खेती वाई। सौळै आनां जमानौ तूठौ। वैंत-वैंत लांबां सिट्टा बधिया। कोड़ा रे उनमांन पाक्योड़ा दांणा चिमकण लागा। खेत रै च्यारूं खुणै अक सरीखी झोला खावती जवार रौ थट लागौड़ौ हौ। जांणै बादळां सूं पांणी रै बदळक्जवारबरसी व्है। असवाडै़-पसवाडै रा पाखती गांवां में काळ रौ पगफे रौ व्हियोड़ौ हौ, इण सूं चैधरीआठ पौर खेती री रूखाली करतौ। गोफण रा सटीड़ा पाड़तौ, चैफैरचैकसी राखतौ हौ, पण तौ ई एक दिहाड़ै, ढळती रात उणनै उंघ आयगी। चवदस री चांदणी रौ निरमळ उजास सिट्टा रै पालणै झूलतौं हौ। ठाड़ी सुवावती हवा रा लैरका सूं चैधरीं उंघ मंे गरक व्हैगी। इण बिचाळै च्यार लाठी पोटां बांधली। पाटां बांधनै वै उखणण वाळा हा के चैधरी झिझकनै जाग्यौ। भच बैठौ व्हियौ। अेक हाथ में गोफण अर अेक हाथ में गैडी लैयनै वौ चोरां रै आड़ौ उभग्यौ। साम्हीं च्यार माट्यार काटी उभा हा अर वौ साव अकैली हौ। अेकणी सागै च्यारां सूं भिड़िया तौ बात परवार जावैला। आ बता विचार नै मिनख एक अेक सूं पडपण री जुगत विचारी। हंसतौ थकौं चोरां नै केवण लागौ, खेत में उभा धांन री चोरी, चोरी नीं गिणीजै। मिनख देख्यौं कें च्यार चोर उणरीबातां सुणनै धीजग्या है। पछै वौ बात रौ रूख बदळियौ। बोल्यौ पण छानै चोरी री गळाई पोटां भरण रौ थंे आछौ कांम नीं करियो। म्है आ बात जांणणी चावूं के थें सगळा सिरदार कि जातिया हौ ? वौ कह्यौ थुड़ियौ हो कांई ? पछै चोरी कांई हिसाब सू करी ? चाल म्हारी मां कनां सूं थनै आळबौ दिरावस्यूं। पछै वौ वां तीनूं जणा नै कह्यौ-मां री दवायती लेयनै आप अठा सूं पधारज्यौं। आपनै हाथ जोड़नै म्हारी इती ई वीणती हैं। बाकी तीनूं जणआ जांणियौं म्हांरी तौ खेरियत हैं। मिनख झिलतौ व्है तौ झिलण दौ। खेत रौ धणी उणरौ बाहूड़ौ पकड़नै पाखती ई आपरी ढांणी में लेग्यौ। खेजड़ी रै काठौ बांधनै जरू कर दियौ। मिनख नै काबू करियां पछै चैधरी उठै पाछौ आयौ। हौळै सीक नेठाव सूं कैवण लागौ के म्हारी मां कह्यौ, म्हारा धणी है, वै चावै तौ सगळौ खेत भेळा सकै अर औ साहूकार कर्द ईबिखां मंे म्हानैं खटकै नीं। यूं तीजी खेजड़ी रै बांधनै काबू करियौ। पछै फुरती सूं हाथ में अेक दूजी लांठी गेड़ी लेयनै आयौ। सेवट चैधरी पछै वानै खोलिया। अबै कदै ई, खेत साम्हीं मूंडौ करियौ तौ जवार री ठौड़ बत्तीसी गिटाय दूंला।


माथा री ठोर पगां में बांध देवता साफौ

Rao GumanSingh Guman singh

नसा रा आंणंद नै बिना नसा वाळौ कांई जाणै। घर वाळा सगळा ई फोड़ा भुगतै पण नसा बाज तौ हमेसां ई मौज करै। नसा में ईं सबसूं सिरै नसौ अमल रौ। राजा नसौ, इण नसां आबै तकलीफ री ठाह पड़ै नीं, पीड री ठाह पड़ै नीं। अर दुख दरद री ठाह पडै नीं। ऊगण री ठाह पड़ै नीं। उणरी भूख कदै ई मिटै नीं अर वौ धापै कदै ई नीं। अघोरी अर अमलदार अेक सरीखा व्है। अैड़ा अेक अमलदार राजा री बात गुणौ। बैटी जांणनै वै आपरी रानी रै माथै कई वळा हाथ फेर देवता। नखां री ठौड केई बार मूछ्या कतर लेवता। माथा री ठौड पगां माथै साफौ बांधौ लेवताअर माथा माथै पगरखियां धर लेवता। आंख्या रो ठोड़ दांतां में सुरमा डाल लेवता। वै अमलदार ठाकर अैड़ा परमहंस हां, तौ ई वै आप सूं वतौ सावचेत इण दुनिया में किणी नै नीं गिणता। उण सूं गौरौ जिण नै पीळियौ। अेकर वै पूरौ अमल जमायनै बैठा हा। बैठा-बैठा ईं जची के दिल्ली फतै करणी। बस, जचता, ईं वै तौ दिल्ली फतै करण सारू उभ व्हिया। नाळ सूं दौ अेक पगोतिया नीचे उतरिया के डील आपा में नीं रह्यौ। डावै कांनी डिगिया अर धड़ांम नीचै। दिल्ली तौ हांकरता फतै व्हैगी। पण ठाकर धड़ाम री आवाज सुणी तौ जार सूं हेलौ मारियौं, हाजरीया, कोई टाबर हेटै पड़ग्यौ, जल्दी उठावौ। म्हैं पड़णा रौ धमीड़ौ सुण लियौ, पण थारै कानां तौ जांणै डूंजा घाल्योड़ा है। म्हैं सावचेती नीं राखूं तौ सगभटाबर पड़ पड़नै मर जावै। दौड़ौ दौड़ौ, देखे उणरै लागी तौ नीं ? राजा रौ हाकौ सुणनै हाजरियां दौड़ता आया। देख्यौ ठाकर खुद हीं तौ जमीं माथै गुड़ियोड़ा मौज करै। हाजरियां टांगा टौळी, कर राजा ने उठायौ तौ वै कह्यौं-हौळै-हौळै, टाबर नै साव हौले उठाज्यौं। आ तौ म्हैं सावचेती राखी। म्हैं अेकलौ जीव कठी कठी ध्यांन राखूं। म्हैं तौ अबै दिल्ली फतै करण सारू जांवू, थें टाबर रौ पूरौं जाब्तौ राखजौ। म्हनै बतावों तौ खरी दुस्टियां के कुण हेटै पड़ियौ। छोटकियां राजकुमार तौ कठै ई नीं पड़ग्यौ ? हाजरियौं कह्यौं-हुकुम, अै तौ आप ई हेटै पड़िया। राजा झिझकनै पूछ्यौ-कांई कह्यौं, म्हैं खुद हेटै पड़ग्यौं। पछै वे जोर सूं अरड़ाटौ मैलियौ-तद तो म्हैं, मरग्यौ, रै मरग्यौं रै। अबै म्है दिल्ली री कीकर फतै करूंला।


अब बता सेठाणी मगज किण रौ फिरियोड़ो हो

Rao GumanSingh Guman singh

एक सेठ रै दोय घड़ी रात थकां उठ जाय करतो। निवरत व्हिया पछै पूजा पाठ करातौ। सिरावण करने अंधारै-अंधारै दुकान खोल देवतो। अेकर तड्के उठ्या अर दांतण - करता नै साम्ही बोरियां रै कनै अेक चोर लुक्योड़ो दिख्यौ। सेठ सोच्यौ, हाको करियां तौ काम बिगड़ै। सेठाणी दांतण वास्तै तंबाखू रौ गुल लाई। सेठांणी रै पाखती आजतां ई वै बाल्टी रा पांणी सूं कुरळौ भरनै सेठाणी माथे थूक दियौ। सेठाणी बोली - दीखे कोनी कांई ? गाभा सूगला कर दिया। लो हथाळी मांडौ म्है कपड़ा बदळनै आवूं। पण सेठ नीं तो जवाब दियौ अर नीं गुल लेवण सारू हथाळी ई मांड़ी। पछै दूजों कुरळौ वै चोर माथै थुक्यौ। सेठाणी नै हाल चोर री ठाह नीं पड़ी ही सेठ तीजो कुरळौ सेठाणी माथै थूक दियौ। सेठाणी फैर कह्यौं, म्हारों साज-सरीखों बैस आलौ कर दियौ। पण सेठ तौ कीं सुणी हीं होनी। मूंडौ नीचै करियां बारी-बारी सूं अेक कूरळौ सेठाणी माथै थूकता गिया। सेठाणी नै अणहूंती रीस आई। सेठां नै झिड़कती बोली-राम मार्या, थांनै आज आ कांई ऊंधी सूझी। बावळा तौ नीं व्हैगा। सेठ तो अेक कुरळौ चोर माथै अर अेक सेठाणी साम्हीं मूंडौ करनै थूकता ई गिया। चोर रासगळा गाभा भीगग्या तौ ई वौ आपरी ठौड़ सूं हिल्यौ कोनी। वौ जाणियौ सेठां रौ मगज फिरग्यौ है। सेठाणी थांभा रै ओलै ऊभनै बोली - गीगला रा बाबूजी, आज थानै औ कांई हिडकियौं सूझयौ। पण सेठ तौ कीं सुणी होनी। कुरळा थूकता रह्या। सेठाणी सेवट घर सूं बारै निकळी। आडौसियां-पाडौसियां नै भेळा करिया। चार पां जणा दौड़नै आया। सेठ बगना व्हियौड़ा बोरियां रै पाखती कुरळा थूकै हा। सेठ तौ किणी रै ई साम्हीं नीं देखियौ। बाल्टी सूं धोबा भर-भरनै पांणी मूंड़ा में लेवै अर साम्हीं कुरळा थूके। सेठाणी रोवण ढूकी। लोग पूछ हीं लियो, भला आदमी बात व्हैजकी बतावौं तौ खरी। सेठ-बोल्या, म्हैं तो सेठाणी रौ गाढ देखणौ चावतौ। वारै खातर म्है रात-दिन कळपूं अर वै म्हारा कुरळा ई झेल नीं सकिया। ओ चोर ई बापड़ौ चोखों, जकौ बोलों-बालों म्हारां कुरळा झेले। सियाळा री रात में भीजग्यौं तौ ई मूंड़ा सूं सिसकारी कांई करले। आ कैयनै वै थोड़ा मुळकिया अर बोरियां रै पसवाड़े लुक्योड़ा चोर साम्हीं हाथ रौ इसारौ करियौ। सगळा पाड़ौसी ढूका जको मार-मारनै उणरौ फूस काढ न्हाकियौ। पछै सेठ सेठाणीं रै साम्हीं देखने कह्यौं - अबै बोलौ, मगज म्हारौ फिरियौ के थारै फिरियौ।


बगसीस में मिनख नै दी अेड़़ी घोड़ी

Rao GumanSingh Guman singh

एक जमींदार रे घरै छौरो व्हियौ। वै घणा राजी व्हिया। अेक मिनख जमींदार रै दौळौं व्हैगियौ। कह्यों-अंदाता, अबकै तौ मोटी बगसीसी लेयनै जावूंला। जमींदार ई लारौ छुड़ावण सारू रीस में अेक अलांम घोड़ी बगसीस में दे दी। मिनख आपरै घरै गियौ। घोड़ी तौ अणहूंती अलाम ही ही। मारग में मिनख नै माथै ई नीं बैठण दियौ। लगांम झेलियां मिनख पाळौ-पाळौ आपरै घरे पूगौ। घोड़ी रोजीना रा दोय सेर दांणौ खाव जाती, पण असवारी वास्तै अड़ण ई नीं देवै। अेक खराब लत घोड़ी में फेर। कनौती भेळी, करनै फटाक लात मार देवे। बारी-बारी सूंमिनख रै सगळा घरवालां नै वा परसाद चखाय दियौ। पछै घरवाळां नै ई ठाह पड़गी। जद घोड़ी कनोती भेळी करण लागै तद वै आग ई रेवै, नेड़ा नी जावै। गांवतरै मांगणी करणनै जावै तद घोड़ी माथै चढ़या फिर तौ मिनख तौ लाख कमाया। पण वा तौ पूठा माथै ई हाथ नीं धरण दै। कदै ई ठोड़-कुठौड़ ठरकाय दी तौ जीव सवाय में जावैला। मिनख रा पड़ौस में अेक कुबदी मिनख रैवतौ हौ। मिनख नै ई कुमत सूझी जकौ उण सूं सला विचारी। कह्यो-भाया, घोड़ी असवारी नं करण दै जकौ तौ भरपाई पण लातां मार-मारनै सैंग घरवाळां रा हाड़का खोळा कर दिया। घोड़ी री इण लात मारण री लत रौ तौ कीं उपाव बता। कुबदी-लात मारती वगत घोड़ी कांई करतब करै-पूछ हिलावती व्हैला के खारी निजर सूं जोवती व्हैला। म्हनै घोड़ी रौ रंग-ढंग तौ बता। तद मिनख कह्यौ-लात मारती वगत वा कन्नौती भेळी करै अर कनौतौ भेळी, व्हैतां ई वा लात फटकार देवै। कुबदी कह्यौ-तौ इण में इत्ती सोचै जितरी कांई बात, घोड़ी री सगळी खोडत्र तौ उणरी कनौती में है। जे थूं उणरी कनौती बोच न्हाकै तौ फेर की टंटौ नी। कनौती बोचियां पछै वा नीं तौ कनौती भेळी करैला अर नीं लात मारेला। मिनख कद घोड़िया धारी ही। कुबदी रै कैतां ई ईं उणरै पूरी जचगी। घरे आतां ई वौ किणी नै पूछ्यौं नीं कोई ताछ्यौ। कतरणी सूं कुचदेणई घोड़ी रा कांन बोच लिया। घोड़ी घणा ईतडफडाटा करिया, पण वौ तौ उणनै सफा बूची करा दी। कांन बोचणा मिनख रै हाथ हा पण लातां मारणी तौ घोड़ी री मरजी माथै हीं। पैला कनौती भेळी करतां पांण जाच पड़ जावती के घोड़ी लात मारैला। पण अबै वा ई ठाह नीं पड़ै। भरोस ासूं पाखती जावै अर लप लात दै। अबै तौ लात खायां ई लात रौ पत्तौ पड़ै।


सगळां ननै पांती परवाणै अेड़ो धन दियौ सेठजी

Rao GumanSingh Guman singh

एक सेठ रा घर में चार चोर घुस गिया। हजारूं रिपिया अर माया वारै हाथे लागी। चोर बारला कमरा में बैठने पांती करण ढूका हा के संठा री नींद खुलगी। कोरी नींद खुलिया सूं ई कांई व्ळै। बोले जौ मरे ? अकल सूं उपाव निकालियौ। सेठ हौळे-हौळे चालता खुद बैठक रा कमरा में जाय पूग्या। चोर हळफळिया होयनै माल-मता संवटण ढूका जितै वै कह्यौं-थारै फायदा वास्तै आयौ हूं। म्हारा बेटा नाजोगा है। सगळी उमर दिन-रात कमाई करी, उणरौ बुढ़ापा में फळ ओ मिळियोै के वे नाजोगा व्हैगिया। म्हैं चांवू उणनै ठाह पड़े कै कमाई करणी तिकी दोरी है। थें आज म्हारै खास मनजांणी बात करी। कपूंता रा अेडा ई लखण हैं। आ माया थारे सुक्यारथ कांम लागै तौ म्हैं घणों राजी। म्हैं म्हारा हाथां सू पाती करनै थाने निवेडदूं, नीतर थें माहौमाड झगड़ो-टंटौ करोला। चोर सेठां री बात सुणनै पूरा धीजग्या। कह्यौं म्हांनै सावळ सलटाय दौ। थारां उमर भर गुण गंावाला। सेठ आ कैयने पांती करण सारू बेठा। ताकड़ी रा दोनूं चेळां में पैला सोना-गैणों भरणै वे जोर सूं बोल्या। धड़ी लगाय दूं तेजा हो। सोजतियां, सिरदारा हो। सेठा रोजसेरसूं बोलणौ सुणनै चोर डरिया। कहयौं आप थोड़ा हौळै बोळौ। कोई जाग जावैला। तठ सेठ बोल्या-अबै म्हारै बैठा थे क्यूं डरो। कमाई म्हारी करयोड़ी है, किणी रै बाप री कोनी। थे किणी बात री चिंता मत करो। यूं समझायनै सेठ तो फेर बोल्या। सेठां रे तीन बेटा हा। अेक रौ नांव तेजौ, अेक रो सोजतियौं अर अेक रौ सिरदारौं हौ। वे पाखती रा नोहरा में सता हा। सेठा वारै नांव सू हैलो मारने-मारनै जगावण चावता हा। चार पांच वळा हैलौ मारियों तों तीमूं जणा जाग्या। वै सीधा उणी कमरा रै बारै आया। आड़ौ बजायौ। चोर डर ने पूछयोै-कुण है ? सेठ कह्यौं-म्हारा छोरा है, पण थेजावौ म्हैं माल लुकायनै पछै थारै हवाल कर देवूंला। अबै फुरती करो। चारू जणा भंवरा मांय वलग्या। उणरै माय वलता ई सेठ कूंटौ जड़नै अंकोड़ियौं पजाय दियौ। पछे बैठक रौ आड़ौ खोलियौ। कह्यौं, हेला मार मारनै कायौ व्हैगौ। काळीधार डूब जाता। चोर घर में घूस गिया। अटकळ सूं वानै भंवरा में घाल दिया हूं। पड़ौसयौं ने जगयानै लावौ। बेटां रै हाकौ करतां ई सगळा पाड़ौसी भेळा व्हैगा। भंवरौ खोलनै सागैड़ा जंतारवण ढूका तद सेठ कह्यौ-भाईड़ा, सगळां नै पांती परवाणै।


इण तरै बैमाता रा लेख व्हिया साचा

Rao GumanSingh Guman singh

एक राजा रै कोई टाबर नीं हौ। एक दिन वौ सैर माथै निकलियौ तो उणनै रास्ता में ‘बेमाता‘ मिळी। राजा रै पूछण पर बेमाता कह्यौं जिण मिनख रै करम में जो लिख दूं, वैड़ौ हीं व्है। राजा नै उण माथै विसवास नीं व्हियौ। वौ मजाक करतौ पूछियौ के बता त्हारा भाग में कई है ? बेमाता कह्यौं थ्हारी बेठी रै सागै त्याव करता टैम थ्हारी मौत व्हैला। राजा उणरी बात सुण हंसण लागौ अर कह्यौं त्हारै तो कोई टाबर नीं है, त्या किण सूं करूंला। जेगा री बात, थोड़ा दिनां पछै रानी गरभवती व्हिई। राजा रै मन में शक पैदा व्हियौ। राजा रैमन में शक पैछा व्हियौ। वौ सोचियौ औ छोरौ व्हैला तौ राख लूं लां, अर छोरी व्हिई तो मरवा दूं ला। विधि रा लेख सूं रानी रै छोरी व्हिई। राजा नै दासी सूं कह्यौं, बाई को मुकलादेओ (मार डालो)। राजा छोरी नै खाड़े में डलवा दी। थोड़ी टैम पछै वठै एक कुत्हार और कुत्हारी आया। उणरै टाबर नी हा। कुत्हारी छोरी नै उठाय ली अर घरै ले आई। टैम रे सागै छोरी मोटी व्हिई। एक दिन राजा रा दो घोड़ा अस्तबल सूं छूट नगर में गिया परा। वे उण कुत्हार रै घर में घुस गिया। कुत्हार छोरी सूं कह्यौ, बेटी इन घोड़ा ने बारै निकाल दे। छोरी दोनूं घोड़ा री पीठ माथै थपकी लगाई अर अणनै घर सूं बारै निकाल दिया। छोरी रै हाथ री थपकी लगाती हीं घोड़ा री पीठ माथै सोना रा पंजां उभर गिया। दूजी पीठ माथे चांदी रा पंजा। घोड़ा पाछा गिया। राजा घोड़ौ री पीठ माथै सोना-चांदी रौ पंजो उभरियौ देखियौ तो उणनै घणौ अचत्भौ व्हियौ। पंजा देख वो अणुमान लगायौ कै अे किणी किशोरी हाथ है। वौ मन में ठान लियौ के इण छोरी सूं त्याव करूंला। दूजै दिन वो खेाज शुरू कर दी।गांव में जीमण रौ आयोजन करियौ उणमें जद वा छोरी घोड़ो री पीठ पर थपकी लगाई तौ सुनहला अर रूपहला पंजा उभर आया। राज उणनै राक ली। कुत्हार सूं कह्यौं आपरी लड़की रौ त्याव त्हासूं कर दौ। कुत्हार घणौ ना कह्यौं पण राजहठ रै सामीं एक नीं चाली। लड़की नै जद आ बात ठा पड़ी कै त्याव रचावण वालौ उणरौ बाप हैं तौ वा कह्यौंः- जल्दी पढ़ रे बामणा, बेगों पढ़ रै बामणा, फेरा लेसी बाप और बेटी। वा दो तीन बार आ बात किदी। राजा नै जब पूरी बात ठा पड़ी तौ पश्चाताप में उणरी मौत व्हैगी।


राजा रा बिल्ली ने यूं भुलायों दूध पीवणौ

Rao GumanSingh Guman singh

एक राजा नै बिल्लिया पालणै रो घणे चाव हो,। अेक दिन राजा आप रै खास दरबारियौं नै बुलाय र सगळा ने अेक अेक बिल्ली दीवी अर कह्यौ, इण बिल्लियां नै आप रै घरै ले जावो अर इण रो पालन करौ। जिको भी खरचो लागौ, राज रै खजानै सूं ले य लो। छै म्हीना पछै जिका री बिल्ली सबसूं मोटी ताजी व्हैला, उण नै ईनाम दियौ जावैला। सगळा दरबारी आप आप रै घरे बिल्लियां लेय नै गिया परा। हर काईआप री बिल्ली नै घणो लाड़कोड़ सूं दूध पिला-लिपा र पालण लागा। हरेक दरबारी रै मन रै मांय एक हीं बात हीं कै उण री बिल्ली सबसू मौटी व्हैला, इण वास्ते ईनाम उण ने हीं मिलेळा। पण अेक दरबारी ऐहड़ो भी हो, जिको मन रै मांय सोच्यो कै दूध बिल्ली नै क्यूं पिलाऊं, वो राजा रै खरचे सूं दूध आप रै पेटमें पूगावण लाग्यो। बिल्ली नै पीवण नै कीं कोनी मिल्यो तो वा सूख नै कांटा व्हैगी। छै म्हिना पूरा होवण रे माय दस दिन बचिया तो वो दरबारी उबलते दूध रौ प्याला भरयोअरबिल्ली की गरदन पकड़र उबलते दूध रे मांय उण रो मुड़ो घाल दियो। बिल्ली रो मुड़े बळ ग्यौ। वो दस दिनां तक यूं हीं करतो रह्यो। अब बिल्ली दूध रै नाम सूं हीं डरण लाग ग्यी। छह म्हीना पूरा व्हिया तो सगळा दरबारी आप आप री बिल्ली लेय र दरबार में पूग्या। सगळी बिल्लियां खूब मोटी-ताजी हीं, पण अेक बिल्ली आज मरै, कालै मरै जेहड़ी होय री हीं। बिल्ली री ऐहड़ी सूरत देख राजा लाल पीळो व्हैग्यौ। वै पूछ्यौ, थूं इण बिल्ली ने एहड़ो मुरदार कीकण बणा दिया, राज सूं खरचों कोनी मिल्यो कां ? दरबारी बोल्यों, अनदाता इण मैं म्हारौ कोई अपराध कोनी। आप रा मंत्री म्हनै ऐहड़ी बिल्ली दीवी जिकी दूध पीवे हीं कोनी। राजा अचरज में भरग्यों, पूछ्यों, बिल्ली दूध नीं पीवै, आ बात हो ही नीं सकै। दरबारी कह्यौं, हाथ कंगन नै आरसी कांई अर पछठै लिखै ने फारसी कांई, उणी टैम बिल्ली रे आगे गरम दूध रो प्यालो मंगवाय र राखीज्यो, बिल्ली दूध ने देखता हीं उछल नै दूर जाय नै बैठ ग्यी। राजा ने भरोसो व्हैग्यो, वो सोची कै इण दरबारी रै सागै अन्याव व्हियौ है, इण वास्ते ईनाम इण नै ही दियो जावे। इण री बिल्ली दूध पीवती तो आ सबसूं मोटी व्हैती।


समझी रै वीरा समझी

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अेक बिणियांणी नै गुदळक पड़ता हाजत व्ही तौ वा थोड़ी सूं पाछी वळती वगत अेक चोर उणरै आड़ी फिरियौ। बिणियांणी गैणा-गाठा संू पीळी-जरद व्हियोड़ी ही। चोररै तौ जांणै अणचींती माया हाथै लागी। लुगारी अबळा जात हैं, जोर सूं धाकल करतां ईं सगळौ गपी लपौलप उतारनै देय देवैला। चोर ई धाकलता ईं बिणियांणी मुळकती थकी बोली-बावळा, थोड़ौ हौळै बोल। म्हनै डरावण री जरूरत कोनीं। इता गैणा सूं ईं राजी मत व्है। थारी हीमत व्है तौ म्हनै ई साथै लै चाल। घर मंे दोय ओडी गैणौं फेर पड़ियौ है। म्हनै वौ ई जुगती सूं लावण दै। अपा दोनां रै आखी ऊमर खायां ईं नीं खूटै। म्हारा भाग रौ आज थूं नांमी मिळियौ। हाक मत कर, सेठनजी नै खुड़कौ व्हैगौ तौ पछै रांझौ पड़ जावैला। घर रै मांय सगळी पूंजा लेयनै आय जावूंला। बोल, थारी, कांई मंसा है ? थूं कैवै तो है ज्यूं ई चालूं परी अर थू कै तौ सगळौ माल उचकायनै चालां। चोर जांणियौ के आज तौ सांप्रत लिछमी तूठी। उणनै तौ अेड़ौ मौकौ ऊमर में हाथ नीं आवैला। हौळौ सूं सुरपुर करतौ बोल्यौ-म्हैं तो थूं कैवै ज्यूंक रण नै त्यार हूं। इणी बाड़ा मंे बैठौ उड़ीकू। कैड़ीक हुंस्यारीं सूं सगळौ कांम करै। बिणियांणी बौली-म्हैं इक्कीस आनां तौ मतै ई आई रैवूंला। पण कदास अैड़ौ ई धांदौ पड़ जावै तौ थूं सांम्हला झिरोखा हेटै ऊभनै म्हनै हौळौ-हौलै हेलौ पाड़ लीजै। म्हारौ नांव समझाी है। म्हैं झिरोखा री बाती सूं पोटळी थरकाय देवूंला। माल-मत्ता थनै सूपियां पछै म्हैं कोई मिस बणायनै बाड़ा मेंआय जावूंला। कैडीक सावचेती राखै। बाड़ा में सावळ चापळियोड़ी रैजै, कोई देख नीं लेवै। म्हारौ नांव समझी हैं, याद राखजौ। बिणियांणी तौ आ कैयनै निरांत सूं आपरी हवेली में गी परी अर चोर बाड़ा में चापळनै बैठग्यौ। आज उणरा मन में खुसी रौ पार नीं हौ। वौ बैठौ-बैठौ मन में मंसूबा बाधण लागौ कै धरै जावतां ई अेक पक्की हवेली चुणावूंला। उणरी सीख रै मुजब वौ तीन घड़ी पूठै झिरोखा हेटै उभनै हौळै-हौळै हेलौ मारण लागौ - समझी, अे समझी। इत्ता में झरोखा री बारी खुली। समझी बारै मूंडौ काढ़नै बोली-समझी रे वीरा समझी। नीं तो घाणा खांवा अ नीं कुबैला बारै जावं। अबै थां में समझ व्है तौ बोलौ-बोलौ बाड़ा सूं बारै जातौ रैजै नींतर घणौ पिछतावैला। चो रै मंसूबा री सगळी हवेली घुड़गी। वौ फीटौ पड़ै उठा सू सीकड़ मनाई, जांणै हवेली उणरै माथै पडै़।

अेड़ी करी बांणिया रै घरे चैरी

Rao GumanSingh Guman singh

अेक चोर बाणिया रै घरै रूई री चोरी करण नै गियौ। चारे नै इण बात रौ सुराग हौ के भखारीं में रूई पड़ी है। वौ जांणियौ के रूई री अेक मोटी गांठ बांध लूं तौजळम सुधर जावैला। सियाळा रा दि हा। वौ हौळे-हौळे हालतौ भखरी रै कने पूरा ग्यौ। भखारी रै अेक बाजू भैंस ऊभी हीं। वौ भैंस रै पाखती ई रूई बांधण सारू आपरौ खेसलौ बिछायौ। पण बिछावता ई खेसला नै तौ कोई उठा सूं खांच लियौ। चोर जांणियौ भैंस खायगी। कीं बात नीं। खेसला नै चिगळैला जित्तै पोतियौं बिछायनै उण में रूई बांधलूं। वौ दोवडौ-तेवड़ौ करनै आपरौ पोतियौं पाछौ उणी ठौड़ बिछायौ। रूई री बाथ भरी जित्तैं तौ फेर कोई उणरो पोतियों खांच लियौ। जांणियौं के फेर भैंस खायगी। अबै कांई उपाव करै। बिछावण सारू ठौड़ आ इज हीं। रूई रा लोभ में, खेसलौं अर पोतियौं गमायौ। अंारी कसर तौ काढ़णी हीं। रात री वगत, कुण दैखेै। वो आपरी धोती खोलनै बिछाय दी। काठी बाथ भरनै वौ धौती माथै रूई धरण लागौ के जित्तैं फेर धोती कुण ई खांचली। साव नागौ-तडं़ग उठै ई ऊभौ रह्यौं। रूई रा लोभ में सगला गाभा ई गमाय दिया। आ भैंस हैं के डाकण। गाभौ तौ देख्यौड़ौं छोड़े नीं। वौ सोच करतौ चितबंगियौं सौ ऊभौं हौ के उणनै अेक टाबर री बोली सुणीजी-दादोजी, म्हनै बेक नवी बात सुणावौ। भंवरिया, थनै तौ बातां आगै रात रा सूवता नै झक पड़ै नीं, दिन रा जागता नै झक पड़ै नीं। अै कोई बाता हैं ? म्हनै घड़ी आधा घड़ी ई सावळ सूवण दै कोंनी। दादोजी तौ चोर रै आवतां ई जागग्या हा। वै आपरै हाथां ई उणरा सगळा गाभा खींच्या हा। रूई री नीगैदास्ती वै भखारीं में ई सूवता हा। अर बांता सुणन सारू भंवरियौं वारै पाखती सूवतौ हौं। वै कह्यौं फगत अेक बात सुणावूंला। भंवरियौ मान गियौ। दादोजी चोर रै सागै बीती बात सुणाई। कह्यौ-रूई लेवण सारू खेसलो, पौतियौं धोती बिछाई तौ वा डाकण म्हारा सगळा गाभा खायगी। भंवरियौ पूछ्यौं - सगला गाभा उतारियां पछै थे कैड़ा दीखता हा। दादोजी दीयौ झूपायनैं उण चोर साम्हीं इंसारौ करनै कह्यौं बैटा, म्हैं साव इण जैड़ो दीखतौ हौं। चोर तौ फीटौ पड़ने नागौ ई उठा सू भाग गियौ।


मारिया पछै नीं छोडिया रूपिया

Rao GumanSingh Guman singh

अेक महंत अेक बांणिया सूं ठागौ करने दस हजार रिपिया झाड़ लिया। बाणियौ घणी ई हाथा-जोड़ी करौ पण महंत तौ पाछी अेक लाल-छद्ाम ई उणनै नीं बताई। बाणिये कह्यौ, मरियां पछै ई अै रिपिया नीं छोडूंला आ जांणज्यौं। उण दिन सूं ईं वौ बांणियौं तौ गिणनै गांठ बांध लीवी। पण कदै ई वौ मूंडै दरसाई कोंनी। रोज रामदुंवारै जावतौ। महंतजी री अणहूंती हाजरी साजतौ। महंतजी लारली सगळी बातां बिसारने गांणिया सूं घणा ई राजी व्हैगा। बांणियौ तौ मन में बात दबायोड़ी राखी, पण महंतजी सांचाणी ई उण दिन वाळी बात आई गई करग्या। बांणियौं खासो बूढ़ों हौ। घणकरौ मांदौ ई रैवतौ। पण वौ रांमदुवारा री हाजरी बजावतौ। अेक दिन बांणिया नै कुजरबौ ताव चढ़ियौ, पण वणै रामदुंवारै गयौ। आवणै उणरै सारै हौ पण पाछौ जावणौ सारै नीं रह्यौ। उणनै आछी तरै जाच पड़गी के आ आखरी घड़ी है। महंतजी ई लखग्या। कह्यौ, भाया, अबै रामजी रौ नांव लै, वौ ई साथै चालैला। बाणियौं कह्यौ- महंतजी मरणौ तो हैं, म्हैं मरण रौ सौच नीं करू। पण म्हनै रात सपनौ आयौ के म्हारौ आधौ सांस कुपाळी में अटक्यौं रैवैला अर आधौं कागलियां में। इण सूं म्हारी मुगती नीं व्हैला। आप मेहरबानी करनै अेक चन्नण री लांठी फाड़ी म्हारी कुपाळी अर अेक तीखी फाड़ी म्हारा कागलिया में ठौक दौ। आखरी वगत म्हनै आपरै हाथा सूं उबारलौ। महंतजी ई जांणियौं जै इणरी मुगती व्है तो चन्नण री दोय फाड़िया ठोरण में म्हनै कांइ जोर आवै। वै चंन्नण रा दोय तीखा फाड़ा उड़नै उणरै मरिया पछै अेक कुपाळी अर अेक कागलिया में ठोक दिया। बांणिया रै दैव लोक होवण री बात सुणी तौ उणरा घरवाळा रांमदुवारै आया। तीन मोट्यार बेटा हा। सेठां री हालत देखी तो वांनै रीस आई। महंत नै पूछयौं तौ वै खुद आपरै मुंडा सूं मंजूर करयौ के सेठा रै कैवणा रै मुजब ई मुगती रौ उपाव करियौ। बेटा कह्यौ - मुगती रो औ उपाव तौ म्हैं आज थारैं मूंडै ई सुणियौ। थें म्हारै भाईजी री हित्या करी हो। म्हैं तो राजाजी नै फरियाद कराला। महंतजी घणी ई हाथा-जोड़ी करी, पण सेठ रा बेटा नीं मांनिया। सेवट लोग बीच में पड़िया अर चाळीस हजार रिपिया में राजीपौ करियौ। उण दिन रा बौल वानै याद आया के मरियां पछै ई रिपियां नीं छोडूंला।


अेडा दिया ब्याज माथै रिपिया

Rao GumanSingh Guman singh

अेक बिणयांणी ही। उणरै आगै-लारै कोई नीं हौ। लुगाई री जात हीं, दूजौ वौपार सज नीं आवै, इण खातर वा ब्याज रौ ई धंधौ करणै सावळ समझियौ। लोगां रै जरूरत व्हैती तौ वे बिणियांणी रै घरै आयनै रिपिया लै जावता। पण रिपिया पाछा देवती वगत वै उणनै अवस फोड़ा घालता। कीकर करनै बिणयांणी निसेवार आपरौ खरचो-खातौ काढ़ लेवती। अेकर अेक मिनख उण बिणियांणी कना सूं रिपिया मांगण नै आयौ। हाथ जोड़ने बौल्यौ-सेठांणीजी, म्हारी लाज अबै थारै हाथ हैं। बेटी ने सीख देवणी हैं। सौ रिपियां रौ जाणै जितौं अड़ाव हैं। कातीरा लाटां में दूध सूं खोळनै आपरा रिपिया भरै पालूंला। वौ खंजिया मांय सूं रिपिया काढ़नै बौल्यौ-औ अेक महीना रौ ब्याज आगू लौ अर म्हनै सौ रिपिया साझौ। म्हैं जांणूला के थें म्हनैं नवौ जलम दियौ। सेठांणी नै नवा जलम री बात इती समझ में नीं आई जित्ती पांच रिपिया देखने आई। महीना रौ पांच रिपिया ब्याज अर वौ ई आगूंच। वा तौ तुरंत उण जाट नै सौ रिपिया नगद गिण दिया। जाट घणा-घणा गुण गावतौं उठा सूं वहींर व्हियौं। दूजैं दिन घड़ी दिन चढ़िया वौ जाट सेठांणी कनै फेर आयौ। अेक धौळी-धक्क नवी पावली उणरै साम्हीं करनै कह्यौं आपरा सौ रिपियां सूं सगळै काम सार लियौ। फगत पांच रिपिया ई भेळा देवूंला। आ लौ ब्याज री आगुंच पावली अर म्हनैं सटकै पांच रिपिया देवौ। जान तौ वहींर व्हियोड़ी बारणै ऊभी हैं। पावली रौ ब्याज सुणनै बिणियांणी तौ झट लोभ में आयगी। मन में राजी व्ही औ आसांमी तौ नांमी थपियौ। बापड़ौं आगूंज ब्याज झिलावैं। वा तौ उणनैं कैतां पांण पांच रिपिया दे दिया। जाट तौ रिपिया लियां पछै बिणियांणी रै घर साम्हीं पाछौ मूंड़ौ ई नीं करियौ। सेठाणी उणनै रिपियां री भुळावण देवण सारू गी, पण जाट तौ मौळौ-मौळौ जवाब दियौ। गोता खाय-खायनै सेठांणी रै पगां पांणी पड़ग्यौ। अेक दिन सेठांणी काठी काई होयनै चिड़ती थकी बोली-थनै थोड़ी घणी ईलाज को आवै नीं। जाट बोल्यौ - सेठांणीजी, उण दिन वै रिपिया थें म्हनैं अर म्हारीं गरज सारू को दिया हा नीं, थे रिपिया दिया हा आगूंच ब्याज। अबै कांन खोलनै साफ सुणलौ। सौ ने लेग्यौं पंजौ, अर पंजा नै लैग्यौ पाव। अब के हैं बिणियांणी, थू आव भलाई जाव।


नींबू रै आसरे पूग ग्यौ रावळा मंे कुबदी

Rao GumanSingh Guman singh

अेक धरमसाळा में अेक मिनख रैवतौ हौ। वो आपरा खूजियां में हरदम नींबू राखतौ। आवतौ जकौ मारगू उठै रोटी खावतौ तौ वौ उणरै पाखती बैठनै बातां करणी सरू कर देवतौ। आगला नै राजी करण सारू वौ उणरै मनभावती बातां करणी सरू कर देवतौ। आगला नै राजी करण सारू वौ उणरै मनभावती बातां करतौ, पण हरेक रै साम्हीं नींबू रा बखांण तौ करतौ ई। दुनिया में अमरफळ हैतौ ओ नींबू। नींबू खाया कोई मांदगी नैड़ी आवै नीं। पैळा री कोई मांदगी व्है तौ नींबू खाया तुरंतमिट जावै। धरमसाळा में कोई पीळिया रौ रोगी आवतौ तौ वौ कैवतौ के पीलिया तौ हांकरतां नींबूं सूं मिटै। रातिंदा वाळा नै, निकाळा वाळा नै, आधा-सीसी रौ माथौ दूखण वाळा नै, मस्स री तक लीफ वाळा नै अर सरणा चालती व्है जका नै इत्याद मांदगिया सारू वौ नींबू रै रस री दवाई बतावलौ। धौला बाळां वाळा नै कैवतौ नींबू सं पाछा काळा बाळ आय जावै। नींबू खाया ऊमर बधै। यू वौ नाई नींबू रा बखांण करतौ करतौ चक्कू सूं नींबू बंधार लेवतौ अर मौकौ देखनै बातां बातां में मुसाफिर री साग-सब्जी में नींबू निचोय देवतौ। नींबू निचोयां पछै कैवतौ-सवाद है जकौ तौ इण नींबू में इज है। नींबू सूं साग की रौ-कीं बण जावै। आफ तूमार तौ जोवौ। लियाज रै मारिया मुसाफिर उणनै साग घाल देवता। रोट्या खंवाड़ देवता। फगत नींबू रै आसरै वौ मजा में आपरौ गुजारौ कर लेवतौ। होळै-होळै लोगां नै उणरी चालाकी री ठाह पड़गी गी। प्एा रोटी रै सारू कुणं माजनौ पाड़ै। मिनख रा नींबू भरै पड़ता ई गिया। मिनख अेक ठाकर सूं दो-तीन वळा रोटियां खायली। चैथी बार वौ ई ठाकर धरमसाळा में फेर आयौ। अबकै उणरै साथै छोटकियौं कंवर ई हौ। कंवर री आंख मंे केई बरसां सूं फूलौं पड़ियौड़ो हो। मिनख तौ आपरी आदत मुजब आंख में फूलौ देखनै कह्यौ, ई नींबू रा रस सूं तौ आंख रौ औ फूलौ हाकरतां मिट जावै। आ बात कैयनै वौ तुरंत नींबू बधारनै सागरी धेकची मंे रस निचोय दियौ। ठाकर रौटी खावण् रौ मतौ करियौ ई हौ। पण मिनख री बात अजोगती सुणनै वांनै रीस आयगी। जंतराय दिया। पण मिनख रीस करी नी। साम्हीं हंसतौ हंसतौ कैवण लागौ ठाकरसा, के तौ म्हारीं मां मार-मारनै रोटी जीमावती ही के आज आप मार-मारनै रोटी खवाड़ौ हौ। मिनख री बात सुणनै ठाकरसा नै ई हंसी आयगी। कह्यौ-इण कुबदी में तौ घाटौ नीं है। वै उणनै मनवार रै सागै ठिकांणा में लेयग्या।


लालच मैं गंवासरे मूल संख पायो ढपोर संख

Rao GumanSingh Guman singh

एक बामण पक्कों भगत हों। वो भगवान री टैमो टेम पूजा करतो। एक दिन भागवान इण माथे तूठ गिया। वे बामण ने एक छोटे सो संख दियो, अर कह्यौं कै अण संख री पूजा कर नै जिकी चीज मांगेला, थने मिल जाया करेला। बामण संख पा र निहार व्है ग्यौ। वो आपरी जरूरत री चीजां एक एक कर उण संख सू मांग ली। रेवण वास्ते चोखें सो घर बणवा लियो, खावण पीवण और पैहर-ओढण री चीजां संख सूं ले ली। बामण में आयो ओ बदलाव देख र पाड़ोसी से डाह होयगी। वो आपनी घरवाली ने उण बामण से घरै इण रो पतो लगावण सारू भेज्यौ। लुगाई बामण री बीनणी सूं मीठी-मीठी बातां कर र भेद रो पतो लगा लियौ। पाड़ोसी अंचभे में पड़ ग्यौ। वो लुगाई ने कह्यो, थूं मौको देख र वो संख पार कर नै लय ने आजा। लुगाई आपरै धणी री बात मान ली अर एक दिन मौकै देख र संख उड़ा लिया। संख गायब होवता ही बामण बावळौ होय ग्यौ। कोई और उपाय कोनी दिख्यो पो पाछौ भगवान री शरण में गियौ। बौल्यौ, परभु, गरीब बामण में आ कांई जोखी करी। भगवान तो दया रा सागर है, वे पजीज ग्या। भगवान उण नै पाछा दर्शन दिया समझायौ, बावळा ऐड़ी कीमिया चीज यूं हीं रख दी, पण इण बार म्है थने एक बड़ो संख देऊ, इण नै संभाल नै राख जै। ओ संख थनैकी कोनी देवेला, पण थारो पैलकों संख पाछौ आ जावेला। बामण वो संख ले ने बैठ्यौ अर बोल्यो, सो रिपिया देओ, संख जोर सूं बोल्यौ, सो ले, दौ सौ ले, हजार ले, दस हजार ले। पण दिया एक भी रिपियौं कोनी। इण तरा बामण जिकी भी चीज मांगतौ, संख खाली बातां करतो, देवतो कीं कोनी। पोड़ोसी ऐड़ी बातां सुण सुण नै आखतौ व्हैग्यौ, वो देख्यौ कै ओ संख तौ जोर रो है, सौ मांग तो हजार देवे। वो मौको देख र, मोटोड़ो संख पार कर लिया अर उण री जगां पुराणौं संख रख दियौ। घरे आय र वो संख सूं एक घोड़ी मांगी तो संख कह्यौ, एक घोड़ी ले, दो घोड़ी ले, दस घोड़ी ले, ऊंट ले, हाथी ले। पण उठै देवण नै तो राम रो नाम हो। अबै वौ पछतावण लाग्यो, तो संख बौल्यौं वा हीं संखी सोहणी, म्है संख ढपोल। लेण देण ने कीं कोनी, हामल भरू किरोड़।