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लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो

Rao GumanSingh Guman singh


लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो

म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो

छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो

लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो

छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो

म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो


आप रे कारण म्हे तो बाग़ लगायो सा

घुमण रे मिस आजो नैना रा लोभी

हरियो रुमाल म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो

छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो


आप रे कारण म्हे तो थाळ परोस्यो सा

आप रे कारण म्हे तो भोजन परोस्यो सा

जीमण रे मिस आजो नैना रा लोभी

हरियो रुमाल म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो

लाल ननद भाई रा बीरा रे रुमाल म्हारो लेता जैजो


आप रे कारण म्हे तो होद भरायो सा

नहावण रे मिस आजो नैना रा लोभि

हरियो रुमाल म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो

छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो

लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो

छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो

म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो


लस्सी पीने के मजे Lassi Pi Ke

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Lassi Pi Ke
Originally uploaded by theurbannexus
Drinking Lassi. A tradition in Northern India - soothing and cooling against the heat of the land.

The Lassiwala store is famous in Jaipur. Lonely Planet India states that two cities in India have particularly good lassi (a yoghurt based milk drink in Northern India) - Amritsar in the Punjab, and Jaipur in Rajasthan.

This store here is one of several called "Lassiwalla" in a row - this guy is the original. You have to go early in the morning for fresh lassi, and it's served icy cold in these terracotta glasses. You smash them in the bin when you are done!

The best thing was that the lassi was 10 rupees! (less than 30 australian cents)

Snake Charmer(ette), Galtaji Temple; Jaipur

Rao GumanSingh Guman singh

I came across this lady snake charmer at the Galtaji Temple, near Jaipur. She began to take out snakes and place them around her children. She must have done this as I was backing away (fear of snakely creatures). I did feel bad for her and the guide mentioned that this was a dying art. I paid her some rupees and took a photo. I was just hoping that when her baby develops teeth, the snake takes pity on him and does not bite :{

Galtaji Temple today is largely abandoned, other than the presence of many cows roaming around the 'gardens', littered with trash. It was disheartening to see cows having to resort to actually eating the rubbish as there is little else. In addition, there are hundreds of monkeys (perhaps thousands) who can be fed (buying peanuts for them).

The site is of significance as this is where the great saint (swami) Galav is believed to have spent his life and meditated. There are many temples in the complex, including the three story temple of Balaji, and the Temple of Galtaji himself. There are large bathing tanks, where many people come to bathe on Makar Sankranti - a religious festival celebrated in mid January (mid winter).

An 18th Century Surya (sun) templ sits on the highest peak - dedicated to the Sun God, by a courtier of Sawai Jai Singh II.

Lake Pichola Hotel, Udaipur

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मेवाड़ री शानः- पिछौळा झीळ उदैपर

Daily life, Lake Pichola

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Rajasthani Reflection

मेवाड़ री शानः- पिछौळा झीळ उदैपर

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Rajasthani Reflection
Originally uploaded by theurbannexus
Rajasthani Reflection

Rang De Churiyan :: Bangles of Many Colours

Rao GumanSingh Guman singh

Rang De Churiyan: A Punjabi (Rang Ke Churiyan for the Hindi translation) sentence which paints a picture of a brightly dressed Indian lady in a Punjabi Suit ("Salwaar Kameez"), and "Dupatta" (light chiffon shawl, draped over the head or around the neck) or Sari (bright primary colours with gold trim is a popular choice) wearing "rang de churiyan" - bright bangles of many colours.

Indian women love bangles - one of many accessories that are deemed necessary for all women in the Subcontinent. Even poorer women will wear them.

They come in a multitude of varieties - gold (the traditional favourite, quite heavy and often inlaid with jewels), and multicoloured metal and glass ones.

Some caught my eye as I walked past a bazaar (a hindi word) in the Lajpat Nagar street market in Delhi's southern suburbs.

Thanks to Moni and Mona for helping me with the Indian grammar.

Once, a palace.

Rao GumanSingh Guman singh


Once, a palace.
Originally uploaded by Java Cafe
Now a "heritage hotel" in Bharatpur in the state of Rajasthan in India.

Bharatput is the home of the world famous bird sanctuary, known officially as the Keoladeo National Park, and declared a World Heritage by UNESCO. It used to be duck-hunting grounds for the Maharajas of yesteryears. It is a major wintering area for several kinds of acquatic birds from Siberia, China, Turkmenistan and Afganistan. The presence of over 360 species of birds, including the rare Siberian crane, have been recorded in the park. Bharatpur is located 50 km to the west of Agra (the home of the Taj Mahal).

म्हारो गोरबन्द नखराळो

Rao GumanSingh Guman singh


लड़ली लूमा झूमा ऐ लड़ली लूमा झुमा ऐ

ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो

ओ लड़ली लूमा झूमा ऐ लड़ली लूमा झुमा ऐ

ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो


ऐ ऐ ऐ गायाँ चरावती गोरबन्द गुंथियों

तो भेंसयाने चरावती मैं पोयो पोयो राज मैं तो पोयो पोयो राज

म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो

ओ लड़ली लूमा झूमा ऐ लड़ली लूमा झुमा ऐ

ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो


ऐ ऐ ऐ ऐ खारासमद सूं कोडा मंगाया

तो बिकाणे तो गड़ बिकाणे जाए पोया पोया राज मैं तो पोया पोया राज

म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो

ओ लड़ली लूमा झूमा ऐ लड़ली लूमा झुमा ऐ

ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो


ऐ ऐ ऐ ऐ देराणी जिठणी मिल गोरबन्द गुंथियों

तो नडदल साचा मोती पोया पोया राज मैं तो पोया पोया राज

म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो

ओ लड़ली लूमा झूमा ऐ लड़ली लूमा झुमा ऐ

ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नाखारालो


कांच री किवाडी माथे गोरबन्द टांकयो

तो देखता को हिवडो हरखे ओ राज हिवडो हरखे ओ राज

म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो

ओ लड़ली लूमा झूमा ऐ लड़ली लूमा झुमा ऐ

ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नाखारालो



ऐ ऐ ऐ ऐ डूंगर चढ़ ने गोरबन्द गायो

तो झोधाणा तो झोधाणा क केडी हैलो सांभळो जी राज हैलो सांभळो जी राज

म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नखराळो

ओ लड़ली लूमा झूमा ऐ लड़ली लूमा झुमा ऐ

ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो आलिजा म्हारो गोरबन्द नाखारालो


ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ

Rao GumanSingh Guman singh


ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ

घुमर रमवा म्हें जास्याँ

ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्याँ

ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ

घुमर रमवा म्हें जास्याँ

ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्याँ

ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ

घुमर रमवा म्हें जास्याँ .

ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्याँ .

ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ

घुमर रमवा म्हें जास्याँ

ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्याँ

ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ

घुमर रमवा म्हें जास्याँ

ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्यां

ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ

घुमर रमवा म्हें जास्याँ

ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्यां

ओ म्हारी घुमर छे नखराळी ऐ माँ

घुमर रमवा म्हें जास्याँ ...


बाजरियाँ हरियाळियाँ........

Rao GumanSingh Guman singh


जिण रुति बग पावस लियइ,धरणि न मेल्हइं पाइ।
तिण रुति साहिब वल्लहा, कोइ दिसावर जाइ॥
प्रीतम कामणगारियॉं, थळ थळ बादळियाँह।
धण बरसंतइ सूकियाँ, लू सूँ पाँगुरियाँह॥
कप्पड़, जीण, कमाण गुण भीजइ सब हथियार।
इण रूति साहिब ना चलइ, चालइ तिके गिमार॥
बाजरियाँ हरियाळियाँ, बिचि बिचि बेलाँ फूल।
जउ भरि बूठउ भाद्रवउ, मारु देस अमूल॥
धर नीली, धण पुंडरी, घरि गहगहइ गमार।
मारु देस सुहामणउ, साँवणि साँझी वार॥

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पीथल री वीरवाणी
पातळ जो पतसाह, बोलै मुख हुंतां बयण।
मिहर पछम दिसमाहं, ऊगे कासप राव उत॥
पटकूं मूंछां पाण, के पटकूं निजतन करद।
दीजे लिख दीवाण, इणदो महली बात इक॥
परताप रौ उतर
तुरक कहासी मुख पतौ, इण तन सूं इकलिंग।
ऊगे जांही उगसी, प्राची बीच पतंग॥
खुशी हूंत पीथल कमध, पटको मूंछं पाण।
पछटण है जे तौ पतौ, कलमां सिर के बाण॥

प्रताप-प्रतिग्या

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दुरजण जबलग देस में, हेम न पहरुं हाथ।
भाखर विपदा भटकणो, आंणज इकलिंग नाथ॥
बड़का जिण कारण विकट, सही विपद सन्ताप।
हडकण रजकण बिण हुवां, पण नँह तजै प्रताप॥
चेटक चढ़ आयौ चटक, मेटक अरियां माण।
जग उण दिन ही जाणियौ, भव मझ बीजो भाण॥
धारां हूंत धपाविया, अरियल दळ आराण।
पीढ्या लग लडिया पिसण, मिणधारी महराण॥
नम नम नीसरीया निलज, दूजा सह देसोत।
दिल्ली ढिग नह डिग दियो, सूरज कुल सांगोत॥
भाखर भाखर भटकियो, तजियो ध्रम नह तन्त।
महाराण मेवाड मह, भली करी भगवन्त॥
सत पर साबत साहिबौ, कर देखो सह कोय।
सीसोदा रहिया सदा, साय एकलिंग सोय॥
चेटक आहव इम भाखियो, पता तुरंग तूरंग॥

रणबंका राठौड़..............

Rao GumanSingh Guman singh

हरवळ भालां हाँकिया, पिसण फिफ्फरा फौड़।
विडद जिणारौ वरणियौ, रण बंका राठौड़ ॥
किरची किरची किरकिया, ठौड़ ठौड़ रण ठौड़।
मरुकण बण चावळ मरद, रण रचिया राठौड़ ॥
पतसाहाँ दळ पाधरा, मुरधर धर का मौड़।
फणधर जेम फुंकारिया, रण बंका राठौड़ ॥
सिर झड़ियां जुडिया समर, धूमै रण चढ़ घौड़।
जोधा कमधज जाणिया, रण बंका राठौड़ ॥
सातां पुरखाँ री सदा, ठावी रहै न ठौड़।
साहाँ रा मन संकिया, रण संकै राठौड़ ॥
हाको सुण हरखावणो, आरण आप अरौड़।
रण परवाड़ा रावळा, रण बंका राठौड़ ॥

अम्बा-अरदास

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चढ़ो म्रगप महा माया, चामुण्ड़ा चिरताळी।
मद री छांका छक कर माता, धार त्रिसूल धजाली॥
चण्ड मुण्ड भड़ राकस, चंडा, मार दिया मतवाली।
आज सैकड़ा राकसड़ा मिल, मचा रिया पैमाली॥
समंद कोट में रावण समरथ, वर पाकर मुंडमाली।
न्याय नीत नै लोप कोप कर, चाली चाल कुचाली॥
फलचर समंद फांद हिक पळ में, लंका कोट प्रजाली।
दस-कंधर रा दस कंध छाग्यां, संत साध प्रतपाली॥
जद जद हुई धरम घर हाणी, धारी खड़ग भुजाली।
रजवट वट प्रतपालक देवी, जय अम्बे जय काली॥

म्हारीं इण पोथी

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म्हारीं इण पोथी रै ऎकुकै चितराम ने मैं सावळ नेठाव सूं परखियौ है। राजस्थानी संस्कृति सूं सराबोर आ पोथी रालस्थानी काव्य री धकळी पांत री टाळकी पोथी है। मठार-मठार अर मांड़ियोडा चितराम हत्तूका सामा ऊबा, मूंडै बोलता लखावै। ऎकूकौ टाळमौ आखर आपरी ठावकी ठोड़ बीड़ीजियोड़ौ दीसै। लिखारै उण्डी-उण्ड़ी मरम री बातां रै ठेट मांय बड़ ने सावळ टंटोळ ने पछै लिखी है। राजस्थानी भासा री जाणकारी रै सागैई सूझ आळी दीठ, खरी परख, अचुकरी उपज, इतिहास री पूरी पकड़ अर राजस्थानी संस्कृति ने रुं-रु में रमायां टाळ इत्ती सांतरी पोथी लिखीजै इज कौ-यनी।
चितराम सामी है, रेखावां रां, रंगा रा चितराम नीं है। ऎ चितराम है सबदां रा। केई सबदां रा चितराम ऎड़ा हुया करै जका सबद री सींव में रिया करै, अर कीं चितराम सबद री सींव री ने तोड़ै, सबदां ने नवा अरथां सू भरै, नवा मरम दैवे।सबद खुदौखुद चितराम रा उणियारा ने उजागर करै।अर चितराम सबद री आतमा ने।

राजस्थानी भासा

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भासा राजस्थान री, रहियां राजस्थान।
राजस्थानी रै बिना, थोथो मान 'गुमान'॥
आढो दुरसौ अखौ, ठाढ़ा कवि टणकेल।
भासा बिना न पांगरै, साहित वाळी बेल॥
पीथल बीकाणै पुर्णा, जाणै सकल जिहान।
पातल नै पत्री पठा, गहर करायौ ग्यान॥
सबद बाण पीथल लगै, मन महाराणा मोद।
अकबर दल आयो अड़ण, हलदी घाट सीसोद॥
धर बांकी बांका अनड़, वांका नर अर नार।
इण धरती रा ऊपना, प्रिथमी रा सिंणगार॥
धन धरती धन ध्रंगड़ो, धन धन धणी धिणाप।
धन मारु धर धींगड़ा, जपै जगत ज्यां जाप॥
रचदे मेहंदी राचणी, नायण रण मुख नाह।
जीतां जंग बधावस्यां, ढहियां तन संग दाह॥
नरपुर लग निभवै नहीं, आज काल री प्रीत।
सुरपुर तक पाळी सखी, प्रेम तणी प्रतीत॥
मायड़ भासा मान सूं, प्रांत तणी पहिचांण।
भासा में ईज मिलैह, आण काण ऒळखांण॥
मायड़ भासा जाण बिण, गूंगो ग्यान 'गुमान'।
तीजा गवरा होळीका, हुवै प्रांत पहिचांन॥
भाइ बीज राखी बंधण, गीत भात अर बान।
बनौ विन्याक कामण्या, विण भासा न बखान॥

मणिहारी लादै मनै, मूंघो चुड़लो मोल

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सती री बाँतः-
मणिहारी लादै मनै, मूंघो चुड़लो मोल।
पति रण खेतां पौढियो, हण अरियांह हरोळ॥
पाणी सौ सौ हाथ पर सींच सींच कर सीर।
प्रीत मीत रा फूलड़ा, अरपण कीध अखीर॥
सती तणा सतरी सखी, स्रवणां हूँत सुणीह।
ज्वाला बिच तन जाळतां, दरसण करै दूणीह॥
सती समौवड़ कुण सधै, ऒपम अवर अयाणं।
बैठ विमाणां इम बळी, उमां रुप अहनांण॥
सन्देसो रथ सांड़िये, मांड़यो कागळ माय।
मिलणां बहनाँ मेलिया, साथणियां समझाय॥
फरवट आंख फरक्क, खड़ियो तायल करहलो।
उगताँ पैल अरक्क, सन्देसो जा सौंपियो॥

हाथां मे हथियारां रौ वखांण

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गणण गणण गोळां गणण, गरण गरण गरणाय।
धरर धरर धरती धमक, कमठ पीठ कड़काय॥
गजंद गुडाणी गजबणी, अरि भखणी आराण।
सैस मुखी अर खड़गखट, गूंजै धर गरणाय॥

देवी अंबा ने रुखाळी री वंदना

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चढ़ो मग्रप महामाया, चामुण्ड़ा चिरताळी।
मद री छाकां छक र माता, धार त्रिसूळ धजाळी।
चंड-मुंड, भड़ राकस चंड़ा, मार दिया मतवाळी।
आज सैकड़ां राकसड़ां मिल, मचा रिया पैमाळी।
जद-जद हुई धरम री हाणी, धारी खड़ग भुजाळी।
रजवट वट प्रतपाळक देवी, जय अंबे जय काळी॥

गणेश-वंदना

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रणथंभर गढ़ राव, उमा सुत थांनै सिंबर।
दोखी देवण दाव, साम्रथ दीजै सूंडळा॥
रिद्धि-सिद्धि वर बुद्धि वरद, ऒढ़र बगसण आथ।
सारा कारज सारणा, नमो चरण गणनाथ॥

दारु पीवो रण चढो

Rao GumanSingh Guman singh


दारु पीवो रण चढो, राता राखो नैण।
बैरी थारा जल मरे, सुख पावे ला सैण॥
सोरठ रो दोहो भळो, कपड़ो भळो सपेत।
नारी तो निवली भळी, घोड़ो भलो कुम्मेत॥
ब्रजदेशाँ चन्दन बना, मेरु पहाड़ाँ मौड़।
गरुड़ खगाँ, लंका गढाँ, राजकुलाँ राठौर॥

(संकलनः- द ग्रैट इंडियन राव)

धरती रा थांभा

Rao GumanSingh Guman singh


धरती रा थांभा कद धसकै, उल्ट्यो आभो कद आसी
माता अब तो साँझ पड़ी है, रुस्यो दिन कद उग आसी
हाथ्यां रा होदा कद टूटै, घोड़ां नै कद धमकास्यूं,
मूँछां म्हारी कद बट खावै, खांड़ां नै कद खड़कास्यूं।
सूना पड़ग्या भुज म्हारा ए, अरियां नै कद जरकासी॥
म्हारै जीतां धरती लेग्या, चाकर आज धणी बणग्या,
दोखीड़ाँ रै दुख सूं म्हारै, अन्तै में छाळा पड़ग्या।
आंसू झरती आंखड़ल्यां में, राता डोरा कद आसी॥
गाठी म्हारी जीभ सुमरतां, कान हुया बोळा थारै,
दिन पल्टयो जद मायड़ पल्टी, बेटां नै कुण बुचकारै।
माँ थारो तिरशूळ चलै कद, राकसड़ा कद अरड़ासी॥
थारै तो लाखों बेटा है, म्हारी मायड़ इक रहसी,
हूं कपूत जायो हूँ थारै, थनै कुमाता कुण कहसी।
अब तो थारी पत जावै है, बाघ चढ्यां तू कद आसी॥
रचनाकारः-तनसिंघ बाड़मेर १६ अगस्त १९५९

समर जालोर रौः-

Rao GumanSingh Guman singh


जैसल घर भटी लजै, कुळ लजै चहुंआण।
हूँ किम परणू तुरकड़ी, अळ किम उगे भांण॥
मांमो लाजे भाटियाँ, कुळ लाजे चहुंआण।
वीरम परणे तुरकड़ी, उल्टो उगे भांण॥
(रचना-शुभकरण देवल)

वियौग श्रृंगार-सपने घड़िया झूंटणा

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वियौग श्रृंगार
सपने घड़िया झूंटणा, बिखरी धण री बात।
इसड़ा ही अफसोस में, गमगी गोरण रात॥
जमवारौ पाणी हुऔ, पिघल गयौ जिंण पाथ।
राखूं किण विध रोक नै, बिन हाथां भर बाथ॥
तो ई हूं तिरसी रही, या इचरज की बात।
बरसै बारह मास ही, हिवड़ा में बरसात॥
ढळती मांझल रात में, बादळ बीज बंधेस।
काजळ फिरोजा नैंण रो, सजल हुऔ सिंभरेस॥
ढाई आखर प्रेम रा, कांई नह कह देत।
फिरोजा अगनि बळी, रह वीरम रण खेत॥
( रचना-शुभकरण देवल कूंपावास)

वीरमदेव विड़द

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जरणी धर जाळोर री, जीतां अरि पग जाय।
लाजै मावड़ लोरियां, कुळ काळस लग जाय॥
भारत रचियां ही भड़ां, भारत रुप कहाय।
भारत सूं के दिर डरां, रहणी भारत मांय॥
प्रमलै सौरभ पौढियौ, आजादी री आंण।
जलम घूंट में जांणियौ, समर चढ़ंण चहुआंण॥
वरदायक वर वीरता, प्रथमी जस पूजाण।
सिर पडियां लड़ियौ समर, वीरमदेव चहुआंण॥
रंण बंका थैं राखियौ, मात भौम रो मांण।
अवसल वीरम आप री, पिरलै लग पहचांण॥
(रचियता-हड़मतसिंघ देवड़ा रानीवाड़ा खुर्द)

हथाईबाजा ने ई सरावणा जोईजै

Rao GumanSingh Guman singh


घणी जूनी सभ्यतावां में यूनान री सभ्यता अणूतै ठसकै आळी गिणीजै। पैला रै यूनानियां री घणी सरावण जोग बात आ बताईजै कै वे भांत-भांत रै मुद्दां माथै गळियां में ऊबा बंतळ करता अर आपसरी री बैस सूं बात रै तुण्ड़ै पूग सांच काड़ लेता। आपां रै अठै रै हथाईबाजां ने तौ फुगतरै बराबर ई नी गिणां। ठैट सू ई आपां रै हथाईबाजां री पैठ कच्ची कीकर ही। मिनख इणाने हाडौ-हाडौ क्यूं करता। देसी हथाईबाज बैस करण में अर सूझ में यूनानियां सू मोळा तौ नीज हा। आठूं पोर बातां रा लावा लूटणियां ऎ डोकर उड़ता कागद बांच लेता। मिनख रौ मूण्डौ देख बात बताय देता पछै आपां इणां ने क्यूं भूण्डा कैवा। हथायां तौ आपो-आप में पूरी संस्थावां ही। सो आपां रै हथाईबाजा ने ई सरावणा जोईजै।
दिनऊगैई हथाई माथै आय धसणौ अर सिंज्या तांई सतरंज, चौपड़-पासा, चरर्-भरर् रमता थकां जरदा बीड़ी दाब र पिचरक-पिचरक करबौ करणौ, ठंडायां घोटणी, होका खुडकावणां, चिळमां रा झपेटा दैणा, अम्मळ री डोढो मनवारां अर बैई मस्करियां करणी, खोटां काढ़णी, काचड़ा करणा अर आपसरी में दांतियां करतां थूक उछालवौ करणौ। हथाई-बाजां रा ऎ रंग देख-र कोई लिखारौ इयां ने कीकर सरावतौ।
हथायां कोरी चौथड़ियां तांई बंधियोड़ी नीं ही। भांत-भांत री हथायां में अमलदारां री हथायां निरवाळीज ही। डोडी मनवारां रै सागैई राज-दरबार ठाकर-ठूंकर सूं ले-र ढोली, भांभी, सरगरै-साटियै तांई रै कामां रौ बखाण नीं व्हैतौ जठै तांई तौ अम्मळ ई को उगतौ नीं। अम्मल ऊगियां पूठै ऎ ऎड़ी-ऎड़ी भेद री बातां करता कै सुणतां कानां रा कीड़ा झड़ण लागता। अठा रौ समाज यूं तौ जात-पांत अर ऊंच- नीच रै भाव सूं किड़ियोड़ौ हो पण हथायां माथै इयां बातां नै तुस्यै बराबर ई को गिणता नीं।

दिपावळी परब रा रामा-सामा....

Rao GumanSingh Guman singh


'जैड़ी दीख वैड़ी सीख, जैड़ी खांण वैड़ी बांण
जैडौ वास वैड़ौ अभ्यास, जैड़ौ दीजै वैड़ौ लीजै
जैड़ी रात वैड़ा परभात, जैड़ी करणी वैड़ी भरणी'

राजश्री,
इण सबदों रे साथे दिपावळी परब रौ घणों-घणों रामा-सामा

आपरौ-
राव गुमानसिंघ
रानीवाड़ा(मारवाड़) भारत

चांदड़ळै री निरमळ रात

Rao GumanSingh Guman singh


चांदड़ळै री निरमळ रात
आधी रा सरवर सांचरी ऒ रांम।
रांमजी सांमी धकिया नंदजी रा लाल
म्हांनै गाय दूवाड़ौ छाळरी ऒ रांम।
रांमजी लांबी लांबी दूधड़लै री धार
म्हारी चूंदड़ होयगी चीगटी ऒ रांम।
रांमजी जायोड़ै नै बरज नै राख
म्हनै (गूजरियां) जणी जणी देवै ऒळबा।
बहू ऐ गूजरियां री जात कुजात
सांची री झूठी भेळ दै ऒ रांम।

(चक्की चळावा बां टेम रो लोकगीत)

कापड़ फटै, करज बढै......

Rao GumanSingh Guman singh

कविजन घर रहै, तीन अवगुण होय।
कापड़ फटै, करज बढै, नाम न जाणै कोई।।

भमता भळा जोगीयां, भमता भळा सुपात्र।
भमता भळा पंखीयां, जठै बैठे वठै ही गांव।।

नाम रहंदा ठाकरां, नाणां नहिं रहंत।
कीर्ती हंदा कोटड़ा, पाडयां नहिं पडंत।।

मुसलमान सुव्वर तजें, हिन्दु तजें सो गाय।
दोनुं रस्ता छोड़ के, काफर होय ते खाय।।

नीर थोड़ो नेह घणों, लग्यो परित को बाण।
तुं पी, तुं पी करतां, दोई जणें छोड्या पराण।।

कहत वखत बळवान हे, नहिं नर बळवान।
काबे अरजण लूंटियों, ऐहीं धनुस ऐहीं बांण।।

ऐहीं बांण चौहाण, राम रावण उथप्यों।
ऐहीं बांण चौहाण, करण सिर अरजण कप्यों॥

(संकलित दोहावळी)

कहावतां जातां री..

Rao GumanSingh Guman singh

अग्गम बुद्धि बांणियौ, पिच्छम बुद्धि जाट।
तुरत बुद्धि तुरकड़ो, बांमण सम्पट पाट॥

बातां रीझै बांणियौ, रागां सूं रजपूत।
बांमण रीझै ळाड़वां, बाकळ रीझै भूत॥

जंगळ जाट न छोड़िये, हाटां बिचै किराड़।
रंघड़ कदैयन छोड़िये, जद तद करै बिगाड़॥

बींद मरौ बींदणी मरौ, बांमण रै टक्कौ त्यार।
ठाकर ग्या ठग रिया, रिया मुळक रा चोर॥

बजे तळवार खटाखट...

Rao GumanSingh Guman singh


'बजे तळवार खटाखट, गिर खोपड़ियां कटाकट।

वीर निकळे बच झटपट, मरे कितने ही चटपट॥

मची लड़ाई विकट भयंकर, नदी खून की चाळी।

जोगणियां खप्पर ळे आई, नाच करे कंकाळी॥


'पड़ी नगारां ठोर मच्या दळ सोर

इकट्ठा हो र कटक पर चाळा

कर हनुमान ज्यूं हाक ळंक पर ड़ाक पड़ा छिन मांही

ज्यूं व्रज पर कर्यो चढ़ाव इन्द्र की नांई

केई ळिया खंग कुरसांण धनुष करतांण बांण फँटकारै

केई तबळ तेग त्रिसूळ वज्र के मारे

केई गुप्ती गुर्ज चळावै केई छुरी कटांरा बावै

केई ळे ळे चक्र चढ़ावै केई जादू सा आजमावै।'

चार बांस चोवीस गज..

Rao GumanSingh Guman singh


चार बांस चोवीस गज, अंगुळ अष्ट प्रमाण।

ईते पर सुळतान है, मत चूकैं चौहाण॥


ईहीं बाणं चौहाण, रा रावण उथप्यो।

ईहीं बाणं चौहाण, करण सिर अरजण काप्यौ॥

ईहीं बाणं चौहाण, संकर त्रिपरासुर संध्यो।

ईहीं बाणं चौहाण, भ्रमर ळछमण कर वेध्यो॥


सो बाणं आज तो कर चढयो, चंद विरद सच्चों चवें।

चौवान राण संभर धणी, मत चूकैं मोटे तवे॥

ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो गोकुळ में कानह।

ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो हथह भीम कर॥

ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो राम रावण संतावण।

ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो अहंकारी रावण॥


बरसी तीस सह आगरों, लछन बतीस संजुत तन।

ईम जपे चंद वरदाय वर, पृथ्वीराज उति हार ईन॥

याददासत नव कोटां री

Rao GumanSingh Guman singh


(मुंहता नैणसी री ख्यात सुंवत १६६५ सूं १७५५ तांई)
१-बाहड़मेरः- मुदै केराड़ू कहीजै छै। धरणीवाराह री बैसणौ छै। भाखर मांहै ऊंड़ी जायगा छै। देहुरा जिण समै रा छै। गांव ७०० जैड़ा ळागे।

२-आबूः- आल्ह पाल्ह पंवार रौ बैसणौ छै।असळगढ़ नांव छै। जिकौ गढ़ असळेश्वर मादेव रै नांवै छै। पंवारां नै मारनै चहुवांणां लीयौ। गांव ५४० ळागें।

३-पारकरः- हांसू पंवारां रौ बैसणौ। काछ अड़तौ, चवदै वेढ़ी कहीजै।घणी धरती ळागें छै। हमार सोढ़ा राज करै छै। राधणपुर रा हाकम नुं मिळै छै। सूराचन्द परै कोस चाळीस छै। रांणा सोढ़ा कहीजै। बरसाळी रौ देस छै।ऊनाळी ऊहीं(साधारण)।


लेख री विगत चाळु है............wait

सपना तूं सोभागियो

Rao GumanSingh Guman singh


सुपने में प्रीतम मिल्या, हूँ लागी गळ रोय।
डरपत पलक न खोळ ही, मत बिछोहो होय॥

जिण
ने सुपने देखती, प्रगट भया पिव आय।
डरती आंख न मूंदहीं, मत सुपनो हुय जाय॥

सुपना तोहि मरावसूं, हिये दिरावूं छेक।
जद सोवूं तद दो जणां, जद जागूँ तद एक॥

हूंता सखी मौ हीवडै, सायणां हंदा हत्थ।
जो सपनो सांचौ हुवै, सपनो बड़ी वसत्त॥

सुपने प्रियतम मुझ मिल्यां, हूँ ळागी गळ रोय।
डरपत पळक न खोल ही, मत सपनो हो जाय॥

सुपनो आयो फिर गयो, मैं सर भरिया रोय।
आव सुहागण नींदड़ी, वळि पिउ देखूं सोय॥

सपना तूं सो भागियो, उत्तम थारी जात।
सो कोसां साजण वसै, आण मिलावै रात॥

पड़ पड़ बूंद पळंग पै

Rao GumanSingh Guman singh


पड़ पड़ बूंद पळंग पै, कड़ कड़ बीज कड़क्क।

सायधण सेजां एकळी, धड़ धड़ हियो धड़क्क॥

आज धरां दिस ऊनम्यो, काळी धड़ सिखरांह।

वा धण देसी ऒळमा, कर कर लांबी बांह॥

नाळा नदियां सूं मिळै, नदियां सागर जाय।

विरछां सूं बेळां, मिळै, ऐसी सही न जाय॥

आज धरा दिस ऊमग्यो, मोटी छांटां मेह।

भींजी पाग पधारस्यो, जद जाणूंळी नेह॥

सावण आयो सायबा, सब बन पांगरियांह।

आव विदेसी पांवणा, ऐ दिन दूभरियांह॥

सावण आयो सायबा, मोर हुया महमंत।

इण रित पीयर मोकळै, कठण हिया रो कन्त॥

सावण आयो सायबा, बांधो पाग सुरंग।

घर बैठा राजस करो, हरिया चरै तुरंग॥

सावण आयो सायबा, गाढा मांणां रंग।

आणां घर जांणां नहीं, ठाणां बांध तुरंग॥

सजण सिकारां जावसी, नैणां मरसी रोय।

विधणा ऐसी रैण कर, भोर कदे ना होय॥

चाळ सखी उण मंदिरै, प्रियतम रहिया जैण।

कोईक मीठौ बोळड़ो, ळायो होसी तैण॥

सावण आयो सायबा

Rao GumanSingh Guman singh




सावण आयो सायबा, पगां बिळूंबी गार।तरां बिळूंबी बेळड़यां, नरा बिळूंबी नार॥
च्यारुं पासै घण घणो, बिजळ खिवै अकास।हरियाळी रित तो भळी, घर संपत पिव पास॥
ळूमां झड़ नदियां ळहर, बग पगंत भर बाथ।मोरां सोर ममोळियां, सावण ळायो साथ॥
हरणो मन हरियाळियां, उर हाळियां उमंग।तीज परब रंग त्यारियां, सावण लायो संग॥
आभ गड़ै बीजां अडै़, मौरां धरै मळार।कामण धरा धपाड़वां, आयो मैह उदार॥
मोर सिखर ऊंचा मिळै, नाचै हुआ निहाळ।पिक ठहकै झरणा पड़ै, हरियै ड़ूंगर हाळ॥
धन धोरां, जोरां घटा ळोरां बरसत ळाय।बीज न मावै वादळां, रसिया तीज रमाव॥
घर घर चंगी गोरड़ी, गावै मंगळाचार।कंथा मती चुकावज्यो, तीजां तणो तिवार॥
आज ऊवैळा उनमियो, मेड़ी ऊपर मैह।जाऊं तों भींजै कांचळीं, रैवुं तो टूटै नेह॥
भड़कत तड़कत बीजळी, धड़कत गाज।कोप करयां आवे, या कुण ऊपर आज॥
भर पावस सज्जण नहीं, उल्हरियों जसराज।जाणूं छूं ले जावसी, काढ़ कळेजो आज॥
घटा बांध बरसे जसा, छांट लगै खग भाय।इण रित साजण बाहिरा, क्यूँ कर रैण बिहाय॥
घर ळीळी गिरवर धुपै, घन मधरो घहरात।निस सारी खारी ळगै, बिन प्यारी बरसात॥
परनाळा पाणी पड़ै, भींजैं गढ़ री भींत।सूता आवै औजका, राजण आवै चींत॥
अगग्गां सगग्गां नदी बहै, नदी न ळागै नावं।हिरणी हो हेळो देवूं, आवो जी प्रीतम आव॥

राजपुताना रौ पैळड़ौ ख्यात लिखारौ- मुंहता नैणसी

Rao GumanSingh Guman singh


नैणसी री ख्यात अर विगत राजपुताना रै इतिहास री घणी चाईजती पोथियां हैं। राजस्थान साहित में ई इण दोनां पोथियां री जागा ठैट धकळी पांत में है। मुंहता नैणसी रै बडैरां मारवाड़ रै ऊंचै ऒदां माथै काम करियौ, इण सारुं आ गुवाड़ी इज मुइणोतां री गुवाड़ी बाजण लागगी। नैणसी रै बड़ैरां रौ बखांण जाळोर रै महावीर जैन मिन्दर अर नवळखा जैन मिन्दर री भींतां माथै खुदियोड़ै लेखां में करियोड़ौ है। लेखां सूं ठा पडै कै नैणसी रौ पैळड़ौ बडेरौ मोहन राठौड़ हो, जिण आपरै ढळतै बरसां में जैन धरम अंगेज लियौ, उण रै लारै उण रौ भाई सौभागसेन ई जैनी बणग्यौ।इणीज मोहन राठौड़ रौ नवमौं वंसज नैणसी रौ बाप जयमल्ल हो। मुगळ बादसाह जहांगीर जद मारवाड़ रै धणीं गजसिंघ सूं राजी हूय दएनै जाळोर इणायत कीयौ तद उणां जयमल्ल ने जाळोर री हाकमी दी। उणरी चाकरी सूं राजी व्हैय र महाराजा उणनै जौधाणै रो दीवाणं बणाय दियौ। नैणसी १६११ ईस्वी में जलम्यौ हो। मोटियार व्हैता ई उणनै मारवाड़ री फौज में ऒदौ मिलग्यौ। नैणसी सागेडौ सेना-नायक साबित हुयौ।
ठेट सूंई नैणसी इतिहास में रग्योड़ौ हो। वो जठीनै ई जावतौ उठै रा चारण-राव अर बूढै-बडैरां सूं जरुर मिळतौ, बहियां बांचतौ, बड़ैरां सूं बंतळ करतौ। उणा सागै हथाई माथै होका खुड़कावतौ, उण ठौड़ रा लेखां अर साहित सूं वाकब हूवतौ, कीं चोखी बातां हींयै उतारतौ अर कीं नीज डायरी रै पानड़ा में अटकाय लेवतौ। नैणसी राज रै ऊंचै ऒदै माथै होइज सो उणनै अठी-उठी फिर भटक अर बातां निरखण-परखण रौ मोकौ मिळियौ। घूम-फिर, जांणकारी भेळी कर उण आपरी जांणकारी रै पांण दो पोथियां लिखी-ऐक नैणसी री ख्यात अर बीजी मारवाड़ रै परगणां री विगत। महाराजा जसवंतसिंघ मुगळा री हिमायत में दिखणियां सूं जूंझतां थका नैणसी अर सुन्दरदास ने ई आप सागै बुलाय लिया। उठैई महाराजा किणी अणजाणी वजै सं रिसीजग्या अर भाई समैत नैणसी ने अपड़ कर कैद कर लियौ। जिणरी वजै कायस्थ हां, वै महाराजा नै काण भरण लागा। दोनां ने कित्ताई संताया, कूपितां करी पण तोई वै टस-सूं-मस ई को हुया नीं। इण मुजब मारवाड़ में हाळ तांई नैणसी अर सुन्दरदास बाबत कैयोड़ा ऐ दूहा-सोरठा घर-घर चावा है--लाख लखारा नीपजै, बड़ पीपळ री साख।नटियौ मूथौ नैणसी, तांबौ देण तळाक॥लेसौ पीपळ लाख, लाख लखारा लावसी।तांबौ देण तळाक, नटियौ सुन्दर नैणसी॥दोनुंई भायां माथै कानां रा कीड़ा झडै जैड़ी कुपीतां हुवण लागी जद उणां ऐड़ै जीवण सूं छुटकारौ पावण सारु आतमघात कर अर पराण तज दिया। इण मुजब मारवाड़ रै इण पैळड़ै इतिहास लिखारै री ळीळा घणी दोजखी अर दुखदायी तरै सूं खतम हुई। नैणसी री खास कारीगरी आ है कै उण आपरै बखांण ने कोरौ राजावां अर ठाकरां तांई नीं राखियौ-धोबी, चमार, सरगरा अर समाज रै ठेट नीचल्लै मिनखां ने ई को छोड़ियौ नीं। प्रसासक रै रुप में नैणसी खरौ उतरियौ। घणा नीं तोई बीस बरसां तांई उण मारवाड़ रै न्यारै-न्यारै मोटै ऒदां माथै सावळ चुतराई सूं काम करियौ।
(लेख जारी है)

पग पग भम्यां पहाड़

Rao GumanSingh Guman singh


पग पग भम्यां पहाड़, धरा छांड़ राख्यो धरम।
'महाराणा' र 'मेवाड़', हिरदै बसिया हिंद रे॥

सकळ चढावै सीस, दान धरम जिणरो दियो।
सो खिताब बगसीस, लेवण किम लळचावसी॥

दिया सत्रुवां दाह, सांचा भड़ रखिया सदा।
लाखां सीस लियाह, वाज्या धन धन सीसवद॥

उरा थरिंदां आंपणां, सीस घुणिन्दां साह।
रुप रखिन्दा राण रा, वाह गिरिन्दां वाह॥

धर बांकी दिन पाधरा, मरद न मूकै माण।
धणा नरिन्दा घेरियो, रहै गिरंदां राण॥

अकबर जासी आप, दिल्ली पासी दूसरा।
पुनरासी परताप, सुजस न जासी सूरमा॥

गिर पुर देस गमाड़, भमिया पग पग भाखरां।
मह अंजसै मेवाड़, सह अंजसै सीसोदिया॥

समंदर पूछै सफ्फरां, आज रतंबर काह।
भारत तणै उमेदसी, खाग झकोळी आह॥

राहब उटठ कमाणगर, मूंछ मरोड़ न रोय।
मरदां मरणों हक्क है, रोणो हक्क न होय॥

सत री सहनाणी चही, समर सळूंबर घीस।
चूड़ामण मेळी सिया, इण धण मेल्यो सीस॥

सीता ना रावण सको, दोप्रद कीचक देख।
अकबर काम उमीठियो, इण सींसोदण एक॥

अकबर देख अचाणचक, भई न तिल भर जीत।
नीरोजै नर नाहरी, जबर लियो जस गीत॥

दुरगो आसावत रो, नित उठ बागां जाय।
अमळ औरंग रा ऊतरे, दिल्ली धड़का खाय॥

बीज चंद सी बकड़ी, खड़ी खड़ी भ्रह खूंच।
टणकापण री तखतसी, मारै हेळा मूंह॥

उजड़ चाळे उतावळो, रोही गिण न रन्न।
जावे धरती धूंसतो, धन्न हो घोड़ा धन्न॥

(मेवाड़ री महिमा)

समर चढै़ ...

Rao GumanSingh Guman singh


समर चढै़ काठां चढै़, रहै पीव रै साथ।
एक गुणा नर सूरमा, तिगुण गुणा तमय जात॥

चन्द ऊजाळै एक पक, बीजै पख अंधिकार।
बळ दुंहु पाख उजाळिया, चन्द्रमुखी बळिहार॥

खाटी कुळ रो खोयणां, नेपै घर घर नींद।
रसा कंवारी रावतां, वीर तिको ही वींद॥

ऊंघ न आवै त्रण जणां, कामण कहीं किणांह।
उकडू थटां बहुरिणां, बैर खटक्के ज्यांह॥

एक्कर वन वसंतड़ा, एकर अंतर काय।
सिंघ कवड्डी ना लहै, गँवर लक्ख विकाय॥


संकलित काव्य

भाईयां बांधण राखड़ी

Rao GumanSingh Guman singh


देख पूनम सावणीं यूं मेघ उमड़ियां।
हाथां झाली राखँडी ज्यूं उभी धिवड़ियां॥

बहिनां जोवे बाटड़ी हियो घणो अधीर।
ज्यूं सावणीं सरित में कुचळे ऊंचौ नीर॥

तीज तिवारां है घणा सासरियां रां सैंण।
वीरां मिलण राखड़ी राह जोवे सहुं बैन॥

बहिन भाई स्नेह रो राखी तणौ तिवार।
धन विधाता सृजियों कर कर करोड़ विचार॥

आई पूनम सावणीं हियो धरे नहीं धीर।
भाईयां बांधण राखड़ी बैना आज अधीर॥

सावणं वरसण वादली कर रहीं दौड़म दौड़।
(यूं)बहिन मौळावें राखड़ी कर कर मन में कोड़॥

वरसे घटा बावली नदि अथंगा नीर।
(यूं) बहिनां बांधे राखड़ी हरख उमंगे वीर॥

चमकी भलीज सावणीं वूठों भळोज मेंह।
बहिना भळीज राखड़ी तूठों भठोज नेंह॥

छायी आकाशां बादळी, दे संदेसो गाज।
बहिनां बान्धो राखड़ी, भाईयां रक्षण काज॥

रक्षाबन्धन सूत्र में, बध्यों बली हमेश।
तिन देव चौकी भरे, ब्रह्मा विष्णुं महेस॥

सुरग पताळ मरतुळोक में, बहीना घणों अरमान।
बळराजा री राखड़ी, सहं ठौड़ यजमान॥


(संकलन:- मंछाराम परिहार)

वाह बिकांणा वाह..

Rao GumanSingh Guman singh



मोंठ बाजरी मतीरा खेलर काचर खांण।
अन्न-धन्न धीणा धोपटा वरसाळे बिकांण॥
ऊंट मिठाई अस्तरी सोना गेणो शाह।
पांच चीज पृथ्वी सिरे वाह बिकांणा वाह॥
उन्नाळै खाटु भळी सियाळे अजमेर।
नागाणौ नितको भळो सावणं बिकानेर॥
मरु रो पत माळवो नाळी बिकानेर।
कवियाँ ने काठी भळा आँधा ने अजमेर॥
जळ ऊँड़ा थळ उजळा नारि नवळे वेश।
पुरुष पट्टाधर निपजे आई मरुधर देश॥


(संकलन%-मंछाराम परिहार)

बलिदानी चित्तोड़........

Rao GumanSingh Guman singh


मांणक सूं मूंगी घणी जुडै़ न हीरां जोड़।
पन्नौं न पावै पांतने रज थारी चित्तौड़॥
आवै न सोनौं ऒळ म्हं हुवे न चांदी होड़।
रगत धाप मूंघी रही माटी गढ़ चित्तोड़॥
दान जगन तप तेज हूं बाजिया तीर्थ बहोड़।
तूं तीरथ तेगां तणौ बलिदानी चित्तोड़॥
बड़तां पाड़ळ पोळ में मम् झुकियौ माथोह।
चित्रांगद रा चित्रगढ़ नम् नम् करुं नमोह॥
जठै झड़या जयमल कला छतरी छतरां मोड़।
कमधज कट बणिया कमंध गढ थारै चित्तोड़॥
गढला भारत देस रा जुडै़ न थारी जोड़।
इक चित्तोड़ थां उपरां गढळा वारुं क्रोड़॥


संकलित काव्य

डींगल......

Rao GumanSingh Guman singh


"विश्व में तमिल को छोड़कर कोई भी ऐसी भाषा नहीं है जो डींगल के बराबर समृद्ध हो. इसमें श्रृंगार और शौर्य का अदभुत मिश्रण है." राजस्थान में शायद ही कोई ऐसा हो जिसकी प्रशस्तियों में डींगल के गीत ना हों. (कोट खिसै देवल डिगै, वृख इंधण व्हे जाय। जस रा आखर जेहिया, जातां जुगां न जाय॥).... (घायल गत घूमैह, रै भूमी मारवाड़ री। राळो रुं रुं मेह, साहित इमरत सूरमों॥)

धड़ धराति पग पागड़ै....

Rao GumanSingh Guman singh


धड़ धरती पग पागड़ै, आंतां तणो घरट्ट।
तोहि न छांडै साहिबो, मूंछां तणो मरट्ट॥
भड़ बिण माथै जीतियो, लीलो घर ल्यायोह।
सिर भूल्यो भोळो घणो, सासू रो जायोह॥
खाग खणकै सिर फटै, तिल तिल माथै सींब।
आलां घावां ऊठसी, धीमो बोल नकीब॥
कठण पयोधर लग्गतां, कसमसातो तूं कन्त।
सेल घमोड़ा किम सह्या, किम सहिया गजदन्त॥
मैं परणन्ती परखियो, मूंछां भिड़ियो मोड़।
जासी सुरग न एकलो, जासी दळ संजोड़॥
ढोल सुणंतां मंगळी, मूंछां भौंह चढंत।
चंवरी ही पहचाणियो, कंवरी मरणो कन्त॥
हथलेवै री मूठ किण, हाथ विलग्गा माय।
लाखां वातां हेकळो, चूड़ो मो न लजाय॥
करड़ा कुच नूं भाखतो पड़वा हंदी चोळ।
अब फूलां जिम आंगमै, भाळां री घमरोल॥

(संकलित काव्य)

सोरठ रंग री सावळीं

Rao GumanSingh Guman singh


सोरठ रंग री सावळीं, सुपारी रे रंग।
लूंगा जैड़ी चरपरी, उड़ उड़ लागै अंग॥
सोरठ उतरी महल सूं, झांझर रे झणकार।
धूज्या गढ़ रा कांगरा, गाजी गढ़ गिरनार॥
सोरठ साकर री डळी, मुख मेल्यां घुळ जाय।
हिवड़ै आय विलूंबतां, हेमाळो ढुळ जाय॥
ऊंचो गढ गिरनार, आबू पै छाया पड़ै।
सोरठ रो सिणगार, बादळ सूं वातां करै॥
जिण सांचै सोरठ घड़ी, घड़ियो राव खंगार।
वो सांचो तो गळ गयो, लद ही गयो लुहार॥
सुण बींझा सोरठ कहे, नेह केता मण होय।
लाग्यां रो लेखो नहीं, टूटा टांक न होय॥
सोरठ थां में गुण घणां, रतियन ऒगण होय।
गूंदगरी रा पेड़ ज्यूं, कदियन खारो होय॥
सोरठ तूं सुरनार, सिर सोने रो बेहड़ो।
पग थांभो पणिहार, बातां बूझे बींझरो॥
बींझा बीण बजाय के, गायो सोरठ राग।
झोला खावे नाग जूं, जागी सोरठ जाग॥

(संकलित काव्य)

नमिया तिलोकीनाथ...Sachi bante

Rao GumanSingh Guman singh


हित कर जोड़े हाथ,कामण सूं अनमी किसो।
नमिया तिलोकीनाथ, राधा आगळ राजिया॥
जाणै हरिया रुंखड़ा, नीरां हन्दो नेह।
सूका ठूंठ न जाणही, कीं घर बूठा मेह॥
साठी चांवल भैंस दूध, घर सिळवंती नार।
चौथी पीठ तुरंग री, सुरग निसाणी चार॥
दूरां सूं कह देत, सोभा घर संपत तणीं।
हिवड़ा हन्दो हेत, नैणां झलकै नाथिया॥
मगर मकोड़ो मूढ़ नर, तीनूं लाग मरन्त।
भंवर भुजगर सुघड़ नर, डस कर दूर रहन्त॥
पान झड़तां देख के, हंसी जो कूंपळियांह।
मो बीती तो बीतसी, धीरी बापड़ियांह॥
कोयल बोल सुहावणां, बोलै इमरत वैण।
किण कारण काळी भई, किण गुण राता नैण॥
बागां बागां हूँ फिरी, कठै न लाध्या सैण।
तड़फ तड़फ काळी भई, रोय रोय राता नैण॥
आग लगी वन खंड में, दाइया चंदण बस।
हम तो दाइया पंख बिन, तूं क्यूं दाझै हंस॥
पान मरोड़या रस पिया, बैठया एकण डाळ।
तुम जळो हम उड़ चलें, जीणों किताक काळ॥
घर मोरां, वन कुंजरां, आंबा डाळ सूवांह।
सज्जन कुवचण,जलमघर,बीसरसी मूवांह॥

उदियापुर री कामनी

Rao GumanSingh Guman singh


उदियापुर री कामनी,गोए काढे गात्र।
देव तारा मन डगे, मानवीया कुण मात्र॥

चलो व्रज नार चलो ब्रजनार
खेल देखो पनिहारन का
रुमक जुमक चाल चलें,गज छुटा फौजदारन का

तेरे ललाट पे बूंद पर्यो
जाणे हार तुटा लखचारण का
सेंथापुर के आई खड़ी
जाणे घाव लगा तलवारन का

नगर ठठा मुलताण में, ऐसीं नहिं कामनी
गले मोतनकी माल, दमंके जणे दामनी

छुटा मेली केश, अंबोडो छोड़ के
उभी सरोवर पाल, मृगली अंग मरोड़कें

कायरड़ा मंजन करै(kayar manjan kare..)

Rao GumanSingh Guman singh

जीमण पांत जठेह मिल भड़ आवे मोकळा।
तणियां खाग तठेह मांडे पैंड़ न मोतिया॥

मंजन करे सधीर मन सूरां धारां सार।
कायरड़ा मंजन करै आंसू धार मझार॥

मूंछ नाक सिर रो मुकुट ससतर साम सनाह।
साबत लायो समर सूं कै नहं लायो नाह॥

मूंछ केस खंडत नहीं नाक न खंडत कोर।
पड़ी पुळंता पाघड़ी सुकुलीणी तज सोर॥

सेहणी सब री हुँ सखी दो उर उळटी दाह।
दूध लजाणो पूत सम वळय लजाणौ दाह॥

मणिहारी जा री सखी अब न हवेली आव।
पिव मूवा घर आविया विधवा किसा बणाव॥

यो गहणो यो बेस अब कीजै धारण कन्त।
हूं जोगण किण काम री चूड़ा खरच मिटंत॥

बिन मरियां बिन जीतियां धणी आविया धाम।
पग पग चूड़ी पाछटूं जे रावत री जाम॥

कोई घोडो कोई पुरखडो

Rao GumanSingh Guman singh


उजड़ चाळे उतावळो रोही गिण न रन्न।
जावे धरती धूंसतो धन्न हो घोड़ा धन्न॥

लीला थारे पांव ने सोने की खुरताळ।
पग पूंजूं रैवंत तणां भेंटायो भरतार॥

जंग नगारां जाण रव अणि धगारां अंग।
तंग लियतां तंडियो तोनै रंग तुरंग॥

अस लीलो पिव पीथळो चंपावती ज नार।
ऐ तीनू ही एकठा सिरज्या सिरजणहार॥

कोई घोडो कोई पुरखडो कोई सतसंगी नार।
सरजण हारे सिरजिया तीनू रतन संसार॥

हळ तो धूना धोरियां पन्धज गग्धां पांव।
नरां तुरां अर वनफळां पक्कां पक्कां साव॥

जन्म अकारथ ही गयो भड़ सिर खग्ग न भग्ग।
तीखा तुरी न माणिया गोरी गळे न लग्ग॥

घर घोडो पिव अचपळो बैरी वाड़ै बास।
नितरा बाजै ढोलड़ा कद चुड़लै री आस॥

राव गुमानसिंह
रानीवाड़ा ( मारवाड़ )