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आपणा इलाका :

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

आपणा इलाका : आपणा नांव-

ओम पुरोहित 'कागद'

राजस्थान जूनो प्रदेश। जूनी मानतावां। जूनो इतिहास। जूनी भाषा। जूनी परापर। परापर एड़ी कै आज तक इकलग चालै। खावणै-पीवणै, उठणै-बैठणै अनै बोवार री आपरी रीत। रीत में ठरको। ठरकै में इतिहास री ओळ। ग्यान-विग्यान अर भूगोल री ओळ। बात-बोवार अर नांव में राजस्थानी री सौरम। इण सौरम रो जग हिमायती। आजादी सूं पैली राजस्थान में घणा ठिकाणा। घणा ई राज। राजपूतां रा राज। इणी पाण राजपूताना। राजा राज करता पण धरती प्रजा री। प्रजा राखती नांव धरती रा। नांवकरण में ध्यान धरती रै गुण रो। राजवंश, फसल, माटी, पाणी, फळ, पसु-पखेरू धरती रा धणी। आं री ओळ में थरपीजता इलाकै रा नांव।बीकानेर रा संस्थापक राव बीकाजी रै नांव माथै बीकाणो। बीकाणै में बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, भटिंडा, अबोहर, सिरसा अर हिसार। राव शेखाजी रै नांव माथै शेखावाटी। शेखावाटी में चूरू, सीकर अर झुंझुणू। मारवाड़ में जोधपुर, पाली जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर। मेवाड़ में उदयपुर, चितोड़ , भीलवाड़ा अर अजमेर। बागड़ में बांसवाड़ा अर डूंगरपुर। ढूंढाड़ में जयपुर, दौसा, टोंक, कीं सवाईमाधोपुर। हाड़ौती में कोटा, बूंदी, बांरा, झालावाड़, कीं सवाईमाधोपुर। मेवात में अलवर, भरतपुर। जैसलमेर में माड़धरा, हनुमानगढ़ नै भटनेर, करोली-धोलपुर नै डांग, अलवर नै मतस्य, जयपुर नै आमेर, अजमेर नै अजयमेरू, उदयपुर नै झीलां री नगरी, जैसलमेर नै स्वर्णनगर, जोधपुर नै जोधाणो अर सूर्यनगरी, भीलवाड़ा नै भीलनगरी, बीकानेर नै जांगळ अर बागड़ भी कैईजै। राजस्थान रै हर खेतर रा न्यारा-निरवाळा नांव। कीं नांव बिणज-बोपार माथै। कीं नांव जमीन री खासियतां रै पाण। बीकाणै में भंडाण, थळी, मगरो अर नाळी जे़डा नांव सुणीजै। ऐ हाल तो बूढै-बडेरां री जुबान माथै है। बतळ में उथळीजै। पण धीरै-धीरै बिसरीज रैया है। आओ आपां जाणां आं नांवां री मैमा।
भंडाण भंडाण बीकानेर जिलै री लूणकरणसर, बीकानेर अर कीं कोलायत तहसील रै उण गांवां नै कैवै जकां रै छेकड़ में 'ऐरा' लागै। जियां- हंसेरा, धीरेरा, दुलमेरा, खींयेरा, वाडेरा।भंडाण रा मतीरा नांमी होवै। मीठा। अठै री आल जबर मीठी होवै। आल लाम्बै मतीरै नै कैवै। भंडाण री गायां-भैंस्यां, भेड-बकरयां अर ऊंट नांमी। भंडाण रो घी, मावो अर मोठ नांमी। मतीरो भंडाण रो सै सूं सिरै। अठै रै मतीरै सारू कैबा है-
खुपरी जाणै खोपरा, बीज जाणै हीरा।बीकाणा थारै देस में, बड़ी चीज मतीरा।।थळीथळी चूरू जिलै रै रतनगढ़ अर सुजानगढ़ रै खेतर नै थळी कैवै। इण खेतर रा लोग थळिया। थळी री बाजरी, मोठ, काकड़िया, मतीरा नांमी हुवै। थळी री बाजरी न्हानी अर मीठी होवै। थळी रा वासी मोटो अनाज खावै। काम में चीढा अनै जुझारू अर तगड़ा जिमारा होवै। थळी सारू कैबा है-
खाणै में दळिया, मिनखां में थळिया।
मगरोबीकानेर जिलै री कोलायत तहसील अर इणरै लागता जैसलमेर रा कीं गांवां नै मगरो कैवै। अठै री जमीन कांकरा रळी। मगर दाईं समतळ। पधर। इण कारण नांव धरीज्यो मगरो। मगरै रा ऊंट, गा-भेड अर बकरी नांमी। कोलायत धाम भी मगरै में पड़ै।
नाळीहनुमानगढ़, सूरतगढ़, पीळीबंगा, अनूपगढ़, विजयनगर अर हरियाणा रै सिरसै जिलै रै गांवां नै नाळी कैवै। अठै बगण आळी वैदिक नदी सुरसती जकी नै अजकाळै घग्घर भी कैवै। इण नदी खेतर नै नाळी कैईजै। इण इलाकै रो नांव नाळी क्यूं थरपीज्यो। इण सूं जुड़ियोड़ी एक रोचक बात है। आओ बांचां-जद घग्घर में पाणी आंवतौ। बीकानेर रा राजा नदी पूजण हनुमानगढ़ आंवता। एकर राजाजी हनुमानगढ़ आयोड़ा हा। लारै सूं एक जणौ अरदास लेय’र म्हैलां पूग्यौ। राजाजी नीं मिळ्या। पूछ्यौ तौ लोगां बतायौ, नदी पूजण गया है। बण पूछ्यो, नदी के होवै? एक कारिंदै जमीन माथै माटी में घोचै सूं लीकटी बणाई। लोटै सूं उण में पाणी घाल्यो। बतायो, नदी इयां होवै। बण कैयो, ए डोफा! आ क्यांरी नदी ? आ तो नाळी है, नाळी। बस उण दिन रै बाद इण इलाकै रो नांव नाळी पड़ग्यो। नाळी रा चावळ, कणक अर चीणा जग में नांमी। नाळी री जमीन घणी उपजाऊ होवै।
आज रौ औखांणौबूढळी रै कह्यां खीर कुण रांधै?

प्रस्तुति : सत्यनारायण सोनी अर विनोद स्वामी, परलीका, वाया-गोगामे़डी, जिलो- हनुमानगढ़ -335504कानाबाती- 09602412124
राजस्थानी रा लिखारां सूं अरज- आप ई आपरा आलेख इण स्तंभ सारू भेजो सा!

कोरियर री डाक इण ठिकाणै भेजो सा!सत्यनारायण सोनी, द्वारा- बरवाळी ज्वेलर्स, जाजू मंदिर, नोहर-335523email-
aapnibhasha@gmail.com

लालां बिचलो मोती

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

लालां बिचलो मोती, लाखीणो भरतार।

प्रो. जहूरखां मेहर
राजस्थानी लूंठी भासा। लूंठो इणरो सबदकोस। लूंठी इणरी बातां। एक-एक सबद रा पर्याय गिणो तो गिणण में नीं आवै। लाधता जावै, लाधता जावै। लारलै दिनां छैल भंवर रा नांव अर विशेषण छाप्या तो आप घणा दाय करिया। घणी सरावणा कीनी। आज कीं और भळै बांचो। ऐ नांव आपणै सारू अंवेर'र भेज्या है- जोधपुर सूं प्रो. जहूरखां मेहर।
अंतर रो फूंबो, अंतर रो छकियो, अंतरियो बनड़ो, अंधारै घर रो पांवणो, अचूकरा बोलणो, अलबेलो ओठी, अलवलियो असवार, आंखड़ल्यां रो ठार, आंख्यां रो अंजन, आंख्यां रो काजळ, आतमा रो आधार, ऊगतो भाण, ऊगतै सूरज रो तेज, ऊजळदंतो कानूड़ो। कमोदणी रो चांद, काचै किरसलियै रो रूप, कान्हकंवर-सा, काया री कोर, काळजै री कूंप, केतकी रो कंथ, केळू री कांब, केळू री पांख, केसर वरणो, केसरियो भरतार, कोटड़ियां रो रूपक, कोडीलो, खावंद। गसारी रा प्राण आधार, गाडाळ, गायड़ रो गाडो, गुडळो बादळ, गोपियां मांयलो कान्ह। घण नेहाळू, घणबिलमाऊ, घण-रीसाळू, घण-रूपाळू, घण-संकाळू, घणहंसा, घर रो आधार, घर रो धणी, घु़डलां रो असवार।
चंवरी रो रूप, चतर रो चांद, चतुर बुद्ध रो जाण, चु़डलै रो रूप। छिरजगारो, छैल-छबीलो। जग-मोवणो, जीव री जड़ी, जीव रो आसरो, जोड़ी रो भरतार, जोबन रो जोड़। टोळी मांय सूं टाळको, टोळी रो टीकायत। ढळती नथ रा मोती। तन रो ताईतियो, तारां बिचलो चांद, तुनक मिजाजी। थोड़ा बोली रो सायबो। दुख-भंजक। धण रो धणी, धरती-सो धीमो। नखराळो, नथड़ी रो मोती, नेतल रो भरतार, नैणां री जोत, नैणां रो नीर, नैणां रो वासी, नैणां रो हीर, नैनी नणद रो वीर।
परदेसियो, परदेसी सूवटियो, परभात रो रूप, पीरजादो। फूटरियो, फूल बनी रो सायबो, फूलां बिचलो गुलाब। बागां मांयलो केवड़ो, बागां मांयलो चंपलो, बागां रो छैल, बागां रो भंवरो, बागां रो सूवटो, बाड़ी रा भौंरा, बाजू़डै री लूंब, बाढाळो, बाताळु, बायां बिचलो बीजळो, बाव नोचण। भंवरियै पटां रो, भाखर जिस्या भारी, भायां रो लाडलो। मंडियोड़ो मोर, मजलस रो मांझी, मदछकियो स्याम, मनचोर, मनभरियो, मन रो तीमण, मन रो धणी, मन रो मीत, मन रो राजा, महलां मांयलो दिवलो, महलां रो मान, माथा रो मैमद, माथै रो मौड़ , मारूड़ो, मालको, मिजाजी, मिणधर, मिसरी मेवो, मिसरी रो डळो, मैमद मोरियो, मैलां रो मेवासी, मोवनगारो, मौजां रा बगसणहार।रंगीलो बादळ, रखड़ी रो उजास, रागां रो रसियो, रागां रो रीझाळू, राय, रिड़मलो, रीसाळु राज, रूप रो डळो, रेजो, रेसम, रेसम रो भारो। लळवळियो सरदार, लाखीणो भरतार, लाडो, लालां बिचलो मोती। व्हालो।संसार रो सुख, सइयां, सईजादो, बनड़ो, सगां रो सूवटियो, सजनी रो सूओ, समंदां जिस्या अथाह, सरद पून्यूं रो चांद, सांवळियो मोटियार, सवाग रो चीर, सवाग रो धणी, सातां बैनां रो बीर, सायधण रो चीर, सायरमल, सायर सोढो, सासू-जायो, सासू रो मोबी, सिर रो सेवरो, सुन्दर रो सायबो, सुखकरण, सुख रो सागर, सूरज रो साखियो, सेजां रो सुख, सेजां रो धणी, सेजां बिचलो स्याम, सेजां रो सरूप, सेजां रो सिणगार, सेजां रो सुखवासी, सेजां रो सूवटियो, सैणां रो सूवटो, सोरमियो, सोळा कळा सुजान। हथळेवै रो हाथ, हरियाळो बनड़ो, हाटां मांयलो हीर, हाथां रो खतमी, हाथां रो खामची, हिवड़ै रो चीर, हिवड़ै रो हमीर, हिवड़ै रो हार, हीयै री जोत, हीयै रो हीर, हेताळु हंसलो।
अर अबार सुणो सा, ओ दूहो-मोरां बिन डूंगर किसा, मेह बिन किसा मल्हार।तरिया बिन तीजां किसी, पिव बिना किसा सिंगार।।
आज रौ औखांणौधणी बिना गीत सूना तो सिरदार बिना फौज निकांमी
प्रस्तुति : सत्यनारायण सोनी अर विनोद स्वामी, परलीका, वाया-गोगामे़डी, जिलो- हनुमानगढ़ -335504कानाबाती- 09602412124
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