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जगदंब मोगल जे भणी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

छंद=सारसी
ओखा धरे,नवलख फरे,गरबो धरे,मथ्थ उपरे.
नवरात रे,नवला परे,जडहड जरे,ज्योतु फरे.
आनंद रंगे,बव उमंगे,शक्त संगे,लइ घणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी.
    जगदंब मोगल जे भणी. (1)

सणगार सोळा,कयरा बोळा,पाय तोळा,शेष ना.
प्रक्रत अजोळा,वणे चोळा,बाइ तोळा,वेष ना.
बाजुयबंधा,नाग संधा,चडे कंधा,लट बणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (2)

वादळ अषाढा,थीया बाढा,बने गाढा,भेळीया.
विजडी प्रगाढा,कोर काढा,जबक जाढा,रेळीया.
नवलख जडुके तारला विजडी कडुके जो घणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (3)

लडवडे माळा,हिम पहाळा,त्रेण गाळा,कंठडे.
हुंफे हुफाळा,गळे थाळा,हिम वाळा,थे लडे.
हिम ओगडी ता जळ ढोळी,पद पखोळी गंगणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (4)

सुर चंद नयना,तपे कयना,आभ अयना,जडहडे.
दो दश मयना,नेण बयना,वक्र लयना,चडवडे.
बारेय राशी,मुख हाशी,ग्रह ग्रासी,ते तणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (5)

नवसौ नवाणा,नदी ताणा,गाय गाणा,खडखडी.
समंदर तमाणा,बिरद बाणा,बव वखाणा,फिणफडी.
डमरु डंमके,भु धंमके,गौ हंमके,रव रणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (6)

विंझणा तोळे,पवन ढोळे,वा हिलोळे,वारणा.
तुम्मरा होडे,वयडा टोळे,नाद घोळे,चारणा.
समंदर वजाडे,ढोल ढाळे,गडगड गाळे,धोरणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी. (7)

भेरव भेळो,करे केळो,वडो मेळो,जोगणी.
ब्रह्मांड बेळो,मथ्थे तेळो,निर्मळ नेळो,जो गणी.
सारसी छंदे,विज वंदे,जयो अंबे,तुं धणी.
धजबंध जे धिंगोधणी,जगदंब मोगल जे भणी.
       जगदंब मोगल जे भणी. (8)

- चारण कवि विजयभा हरदासभा बाटी
ध्रांगध्रां

आल्हा एकादसी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

मगरा धौरा भाखरा,घलिया घण घमसांण।
साखी कोट'र कांगरा,नमै आज अणजांण॥१॥
सुरसती सदा सरसती,हाकड़ौ कैवे हाल।
माडधरा आ मुलकती,अंतस रेत उलाल॥२॥
वीरा राखी वीरता,सूरा राखी शांण।
संतां राखी सांच री,जस जौगे जैसाण॥३॥
कुल री राखण कीरती,मही रौ राखण मांण।
आलै जंज उजालियौ,भाटी कुल रौ भांण।४॥
पौड़ भून्गरे पटकता,गूंज्यौ गढ़ गौहराण।
पीर मौडिये पाड़िया,पिरथी घणा पठाण॥५॥
छत्र धारियौ सूरमा,अनमी राखण आंण।
भली'ज राखी भांणसी,ईशाल धर एहनाण॥६॥
छत्रालै छत्र धारियौ,जबर जुन्झियौ जंग।
धर ईशाली धधकती,रंग आल्हसी रंग॥७॥
हिरदै नैण समाविया,धड़ बिच करतै दौड़।
आलोजी जंग जुन्झियौ,हरावली कर हौड़ ॥८॥
मालदे मन मोदियौ,जंज  दिखाई      जंग ।
तूटो सर धड़ जुन्झियौ,रंग आलहसी रंग॥९॥
साको कियौ सुहावणौ,जंज जुन्झकर जंग।
भाटी कुल रै  भांण  नै,दीनौ  रावल रंग ॥१०॥
कविवर 'मेन्दर' किरती,जस  गावै     जजमान ।
जुन्झिया सर बिण जगत में,रंगीलै रजथान ॥११॥

  - महेन्द्रसिह   सिसोदिया(छायण)

आल्हा एकादसी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

मगरा धौरा भाखरा,घलिया घण घमसांण।
साखी कोट'र कांगरा,नमै आज अणजांण॥१॥
सुरसती सदा सरसती,हाकड़ौ कैवे हाल।
माडधरा आ मुलकती,अंतस रेत उलाल॥२॥
वीरा राखी वीरता,सूरा राखी शांण।
संतां राखी सांच री,जस जौगे जैसाण॥३॥
कुल री राखण कीरती,मही रौ राखण मांण।
आलै जंज उजालियौ,भाटी कुल रौ भांण।४॥
पौड़ भून्गरे पटकता,गूंज्यौ गढ़ गौहराण।
पीर मौडिये पाड़िया,पिरथी घणा पठाण॥५॥
छत्र धारियौ सूरमा,अनमी राखण आंण।
भली'ज राखी भांणसी,ईशाल धर एहनाण॥६॥
छत्रालै छत्र धारियौ,जबर जुन्झियौ जंग।
धर ईशाली धधकती,रंग आल्हसी रंग॥७॥
हिरदै नैण समाविया,धड़ बिच करतै दौड़।
आलोजी जंग जुन्झियौ,हरावली कर हौड़ ॥८॥
मालदे मन मोदियौ,जंज  दिखाई      जंग ।
तूटो सर धड़ जुन्झियौ,रंग आलहसी रंग॥९॥
साको कियौ सुहावणौ,जंज जुन्झकर जंग।
भाटी कुल रै  भांण  नै,दीनौ  रावल रंग ॥१०॥
कविवर 'मेन्दर' किरती,जस  गावै     जजमान ।
जुन्झिया सर बिण जगत में,रंगीलै रजथान ॥११॥

  - महेन्द्रसिह   सिसोदिया(छायण)

आल्हा एकादसी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

मगरा धौरा भाखरा,घलिया घण घमसांण।
साखी कोट'र कांगरा,नमै आज अणजांण॥१॥
सुरसती सदा सरसती,हाकड़ौ कैवे हाल।
माडधरा आ मुलकती,अंतस रेत उलाल॥२॥
वीरा राखी वीरता,सूरा राखी शांण।
संतां राखी सांच री,जस जौगे जैसाण॥३॥
कुल री राखण कीरती,मही रौ राखण मांण।
आलै जंज उजालियौ,भाटी कुल रौ भांण।४॥
पौड़ भून्गरे पटकता,गूंज्यौ गढ़ गौहराण।
पीर मौडिये पाड़िया,पिरथी घणा पठाण॥५॥
छत्र धारियौ सूरमा,अनमी राखण आंण।
भली'ज राखी भांणसी,ईशाल धर एहनाण॥६॥
छत्रालै छत्र धारियौ,जबर जुन्झियौ जंग।
धर ईशाली धधकती,रंग आल्हसी रंग॥७॥
हिरदै नैण समाविया,धड़ बिच करतै दौड़।
आलोजी जंग जुन्झियौ,हरावली कर हौड़ ॥८॥
मालदे मन मोदियौ,जंज  दिखाई      जंग ।
तूटो सर धड़ जुन्झियौ,रंग आलहसी रंग॥९॥
साको कियौ सुहावणौ,जंज जुन्झकर जंग।
भाटी कुल रै  भांण  नै,दीनौ  रावल रंग ॥१०॥
कविवर 'मेन्दर' किरती,जस  गावै     जजमान ।
जुन्झिया सर बिण जगत में,रंगीलै रजथान ॥११॥

  - महेन्द्रसिह   सिसोदिया(छायण)