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समझ्यौं भोळौ, पण निकल्यौं गजब रौ गौळौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

थळी रौ अेक वासी अेकर नेड़ा रा गांव में आयौ। उठै रौ थाट देखनै वौ तौ हाक्यौ-बाक्यौं व्हैगौ। वौ अेक बेरा माथै आयौ तौ उणरी अकल ई कह्यौं को करियौं नीं। थळियौं चकन-बकन व्हियौ। वै बेरा रा सागड़ी कनै आयौ। वो सागड़ी ने इचरज सूं पूछ्यौ-आ घड़लिया रौ तौ सेड़ौ ई कोंनी। कितीक लाबीं हैं ? सागड़ी कोतकियौ हौ। थळिया री बात सुणनै वौ जोर सूं हंसियौ। कह्यौं-थनै ईती ई ठाह कोनी ? घड़लिया री आ माळ तौ सात पंयाळ उंडी हैं, पछै किकर सेड़ौ आवै। बात सुणनै थळिया रौ तौ माथै ई चकरीजगौ। बेरा माथै उणीगंाव रा च्यार पांच मिनख बैठा हा। थळियां री भौळप माथै वै ई हंसिया। फरे पूछ्यौ-पण आं घड़लिया बौल्यौ-घड़लिया भरे थारौ बाप। थारा बाप नै घड़लिया भरण सारू राख्या हूं। थळियौं कह्यौं-म्हारो बाप मांय बैठौ सीयां नी मरतौ व्हैला ? सागड़ी कह्यो-थनै बाप माथै दया आवती व्है तौ थ्हारी कांगल दे दै। थळियौं लप उतारनै सागड़ी नै आपरी कांबल झिलाय दीवी। मिनख हंसिया तौ कह्यौ-बाप सूं बती कांबल थोड़ी ई हैं। थळियौं कांबळ गमायनै राजी-खुसी व्हीर व्हैगौ। सागड़ी कह्यौ-थळिया कितरा नाढ़ व्हैं। फागण उतरतां वौ थळियौं पाछौ उण बेरा माथै आयौ। सगळा लोग बेरा माथै पूगा। थलियौं कह्यौ-म्हारा बाप घड़लिया नीं भरतौ तौ गवूं रौ अेक दांणौ ई नीं व्हैतौ। इण सारू साख री आधी पांती रौ हकदार म्हैं हूं। थळियां रीबात सुणतां पांण सागड़ी रौ मूंड़ौ थाप खायग्यौं। म्हारौ बात कित्तौ दौरौ दिनां तक घड़लिया भरी, अबै औ पांती देवतौ दौरौ क्यंू व्है ? बेरा रो धणी छान सूं काबळ लायनै थळिया रै साम्ही करतौ बौल्यौ-आ लै थारी कांबली, म्हैं तौ कोगत करी ही। थळिये कह्यौ-अबै मानूं जैड़ौ म्हैं ई कोंनी। म्हैं तौ माथौ बाढ़िया ई म्हारी पाती नी छौड़ूं। इण गांव में मिनख बसता व्हैला तौ म्हारा न्याव करैला, नीतर म्है खुद निवेड़ लेस्यू। मरणौ तेवड़नै ई अठै आयौ हूं। लोग कह्यौ-बात तौ न्याव री कैवै हैं। पैला ठागौ करियौं जकौ अबै भुगतै। तेवड़ी कांबळ लेवती वगत उणनै आ बात सोच लेवणी हीं। बस्ती रा सगळा मिनख थळिया रै विळू रहया। सागड़ी घणौ ई रौयौ-रीक्यौं के म्हारी धूड़ खांणी व्हैगी, माफी चांवू। पण थळियौं तौ अेक ई सुणी नीं। झख मारनै आपरै हाथ छुरी-छैक आधौ आध पांती करनै थळियां सूं नीठ आपरौ लारौ छुड़ायौ।


थारै बस री बात कोनी तो म्हारै भी कोनी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठाणी बेरा माथै पांणी सींचण गई। वा डोली उरायनै उंची खांचै तौ डोली खाली-री-खाली। डोली भरीजी कोनी। वा लुळ नै मांय झांक्यौं तौ उणनै किणी मिनख रौ झबकौ पड़ियौ। बोली-ओ मांय कुण बैठौ मायं कुण बैठौ म्हारी डोलिया खाली करे ? रसोई रौ अबैठौ व्है। वौ भूत हौ। कह्यौ, म्हैं भूत हूं। बेरा रौ भंवणिया चरराटा घणा करै। म्हनै इणरी चूं-चूं सूं नींद नीं आवै। म्है म्हारै हाथां इणनै गावा घी रौ वांगण देवूंला। थूं म्हनैं अेक कटोरौ भरने घी लायदै। सेठाणी कह्यौ - घी तो तौ कटौरौ भरनै घी लायदै। सेठाणी कह्यौ-घी तो कटौरा री ठौड़ कूड़ियौं भरने लाय दूं। पण पछै ई थूं डोलियां खाली करे तौ। म्हनै बचन दे, के आज पछै म्हारी डोलियां खाली नीं करैला, अर म्हारौं कीं बिगाड़ नीं करैला। भूत कह्यौ - थूं म्हनै कचोळा री ठौड़ कूड़ियौं धांमियौं, इण सूं म्हैं राजी हूं। थूं घी नीं लावै तौ ई थारज्ञै कीं बिगाड़ नीं करूलां। पक्कों बचन दूं हूं। थूं म्हनै चैथै-पांचवै वांगण सारू गावा घी रौ कटौरौ डोली रै मांय धरनै पुगाय दिया कर। सेठाणी जांणियौं के अबै तौ औ वाचा में बंधग्यौं। घी नीं लावूं तौ ई म्हारी बिगाड़ नीं करै। पछै फालतू आ वांगण री लाग क्यूं भरू। वां कह्यौ, घी तौ म्हारै घणौं ई है। पण लावण सारू म्हारै कनै बासण कोंनी। थूं म्हनैं हीरा मौत्या रौ अेक कचोळौ लाय दै तौ म्हंै रोजीना थारै वांगण पुगावती रैवूंला। भूत उणरै हीरा मौत्या रौ अेक अमोलक कचोलौं सूंच दियौ। सेठाणी कचोळौ घरे लायनै जाब्ता सूं धर दियौ। पण घी लावणौं तो अगळौं वा तौ पाछी उणरी बातई नीं करी। भूत रोज वांगण सारूघी मांगतौ पण सेठांणी पिछतावौं करनै कैवती-पांतर गी। घी-घी घोखूं तौ ई मौका भूल जावूं। कालै जरूर लावूंला। भूत नै गावा घी री भावड ़अणहूंती ही। वौ राजीना सेठाणी नै पूरी-पूरी भुळावण दैवतौ। पण सैठाणी तौ टाळमटोळ करती रेई। सेवट अेक दिन वो काठौ आंती आयनै बौल्यौ-सेठाणी, धायौ थारा वांगण सूं, म्हनैं म्हारौ कचैळी तौ पाछौ दे। सेठाणी हसती थकी जबाब दियौ - आज नीं कालै जरूर लावूंला। भूत कह्यौ - थारै इण कालै रौ तौ अंत ई कोनीं। सेठांणी बोली था में अेड़ी करामंत व्है तौ थूं काळै पछै इण आज नै पाछौ मत आवण दै। जिण दिन थूं औ कांम कर दियौ तौ म्हैं उणी दिन थनै ढुळढुळतौं कचैळौं गावा घी सू भरनै लाय देवूंला। भूत कह्यौ, आ तौ म्हारा बस री कोंनीं। सेठाणी कह्यौ-जद थारै बस री बाता कोनीं तौ पछै जावणौ म्हारै बस री ई बात कोनीं।


घूटियों भर नै बचाय लिया राज

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक नटणी आपरै झीणा करतबां सू सगळा मुलक में चावीही। एकर उदैपुर में उण री रांमत मंडी। राणौजी नटणी ने कह्यौं-एड़ी रांमत बता जिकी ली कोंई नीं देखी व्हैं। नटणी कह्यौं-बड़ौं काम, म्हैं तौ करतब जाणूं, पण देखण वाळा री ई सरधा चाहीजे। आप देखी चावौं तौ म्हैं भरत माथै पीछोला पार कर जावूं। रांणौजी नै विसवार नीं व्हियौ। अंचभा सूं पाछै खरायौ, कंाई पीछोला ? नटणी कह्यो-हां, पीछौला। आपनै दीखै आ पीछौला।अेकर छोड, भरत माथै चार वळा फिर जावूं। रांणौजी जांणियौ के आ बात ई कोई व्हैणी हैं ! वै कह्यौं - थे, थूं पीछौला भरत माथै अेक वळा ई पार कर जावै तौ मैवाड़ रौ आधौ राज थारै नांव कर दूं। जे पार नीं व्हीं तौ म्हारौ राज छौड़नै किणी दूजा रजवाड़ा में थू रांमत नीं मांड़ सकेला। पीछोला री इण तीर सू उण तीर भरत बांधीजी। नटणी रांतम करण सारू भरत माथै चढी। अलेखूं निजरां नटणी रै पगां साम्हीं पड़ी। ओ कंाई! व तौ जमीं माथै चालै ज्यूं भरत माथै चालण ढूकी।देखण वाळां रा सांस ऊंचा चढग्या। रांणौजी रौ काळजौ उंचै चढग्यौं। ठाकर ठेठर कह्यो-हजारूं माथा दियां जकां नै ई मेवाड़ री पांती नीं मिळी अर आप इण नटणी री रांमत माथै आधौ राज देवणौ कबूल कर लियौ, अंदाता जुलम हैं। रांणौजी देखियौ के नटणी तो आधेटै पूगण वाळी हैं। नटणी तौ पीछोला पार जावैला। पार करियां आधौ राज देवणौ पड़ैला। नटे ई कीकर! मेवाड़ री आंन माथै पांणी फिर जावैला। जबांन में बंधग्यौ। पाखती ई अेक जाट उभौ हौ। कह्यौं-अनदांता कोप नीं करै तौ म्है उपाव कर दूं। जाट कह्यौ-जे इण सूं बांजी अर आंन रैवती व्हैला तौ म्है राख देवूंला। वौ तीर रै पाखती ई नटिया रै डैरै पूंगौ। नटणी आधेटा सूं सली पार व्हेगी। उणरै हांचळा में फेर पांनौ आवण ढूकौ हौ। वा आपरा बेटा रौ ध्यांन करियौ। वा फेर खाथी सिरकण ढूकी। पांणी रै हिबोळां रै टाळ कोई आवाज नीं ही। जांणै आवाज खुद सूं चिराळी सुणीजी। चिराळी नटणी रै कानां पूगी। वा तुरंत आपरै बैटठा री चिराळी ओळख लीवी। रांमत करती मां रौ ध्यान चूकौ। नटणी तौ भरत माथा सूं पीछौला री लैरां मंे पडग्यी। चैधरी रै पाखती आतां ई ठाकर ठेठर कह्यौ-तरवारां सूं राज नीं बचै जकौ औ जाट बाळक रै चूंटिया भरनै बचाय लिया।


मिनख रौ बोदौ जीव, इण तरै व्हियौ इलाज

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

बात घणी पुराणी है। उण समै दवाखाना नीं खुलिया हा। लोग इलाज करण सारू हकीमा अर झाड़-फंूक करण वाळा रै अटै ही जावता हा। अेकर अेक मिनख नै कांळिंदर सरप डसग्यौ। झाड़ौ दिरावण सारू वौ झाड़ागर रै पाखती गियौ। झाड़ागर गोरियावर रैझाड़ा रौ अेक रिपियौ अर कांळिंदर रै झाड़ा रा पांच रिपिया लेवतौ हौ। मिनख रो जीव रौ बोदौ घणौं हो। मन में सोच्यौं झाड़ा-झाड़ा तो सगळा अेक सरीख व्है। दुनिया ने ठागौ बतावण सारू अै झाड़ागर ढपला करै। अै तौ फगत रिपिया कमावण री अटकंळा है। वो उणी समे अेक अटकल विचारी की इणनै गोरियावर कै दूं तो भी म्हारौ तौ इलाज व्है जावै ला। वो झाडा़गर ने कळदार अेक रिपियौ पकड़ायनै कह्यौ-गोरियावर सरप डसग्यौ, नांमी झाडौ दे दै। झाड़ागर पैचाण भी पूछी तौ वौ गोरियावर ही बताई। झाड़ागर झाड़ौ देवण लागौ। झाड़ौ देवतां थोडी ई ताळ व्हींके मिनख रा मन में डर वापरियौ-जे कदास न्यारा-न्यारा झाड़ा व्हैता व्है तौ। घर में साची बात तौ आ हैं कि खायौ तो कंळिंदर, गोरियावर रौ नांव तौ कूड़ौ लियौ। झाड़ौ गुण करियौ तौ हकनाक मारियौ जावैला। उणरै मन मं डर अणहूंतौ घर करगियौ। पण झाड़ागर नै आ बात कैवै तौ चार रिपिया ओर देवणा पड़ैला। उणरै मळीच जीव सूं वत्ता चार रिपिया देवणी नीं आवै। वौ यूं ई उपरवाड़ी कांम सारणी चावतौ हौ। वौ पाछी अटकल विचारी झाड़ागर ने कह्यौं-भाईड़ा, म्है निजरा तौ गोरियावार देख्यौ, पण मिनखा देह है, भूल व्है सकै। थने कांई खरच लागै, भेळमभेळ अंकाध नांव काळियौं रा ई परा लेई। झाड़ागर भी अणहूंतौं हौ, वौ मिनख रै मन री बात जाण ली। वौ कह्यौ-गोरियावर अर काळिंया रा नांव लूं, पण मिनख देह है, एकाध आध नांव उपर नीचे व्हियौ तौ कैंनीं सकूं। यूं करा जीव री बात हैं, म्हैं पैला गोरियावर रौ पछै काळियां रौ झाड़ौ दे दूं, ताकि किणी बात री चिंता नी व्हैं। अबै तौ मिनख री हालत फेर बिगड़ गी, वौ सौचियौ अटकळ में एक रिपियौ बिगड़ियौं अर जान जावै जकौ नैरी। उणरै सागै उारी लुगाई आई ही। वा कह्यौ-झाड़ागरजी, थ्हैं मानळौ इणनै गोरियावर अर काळियौं दोनूं साप डस लिया अे लोग पांच रिपिया फरे थ्हैं दोनूं झाड़ा लगाय लियौ। इण तरै मिनख नै लालच में एक रिपियौं गमावनौं पड़ियौै।


म्हारा बकरा नै ई औ बोबाड़ियौ रोग लागौ हौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक गांव में अेक गवैयौ रैवतौं हौ। अेक दिन गांव में रात रा गीत-संगीता रो नूंठौ आयोजन व्हियौ। वो पक्की राग में गांणौ गावतौ हौ। रांगा रा मोटा-मोटा जांणकार सुणणिया उणरै, औळू-दोळू बैठा हां। भीड़ देखने अेक मिनख ई उठै जमग्यौ। वौ देखियौ गवैयौ घंाटी हिलाय-हिलाय अर बाकौ फाड़-फाड़नै उंचा सुर में गावती हौ। सुणण वाळा सगळा ई मस्त व्हैगा। घणा दिनां बाद इण तरै रौ आयोजन व्हियौ हौ। सगळा लोग मस्त हा। वै गवैया री तारीख कर रिया हा। पण इण सब में एक मिनख वां सगळा सूं उंचै रह्यौ। वौ गवैया रौ असंली जांणकर हौ, जेड़ौ दूजा आज तांई मिळियौ। वौ गांणौ सुणतौ-सुणतौ जोर-जोर सू रोवण लागौ। गवैयौ मिनख रो घणौ-घणौ औसांण जतावतां कह्यौ-म्हनै आज अणहूंती खुसी है के म्हारी राग आपरे माथै इतौ असर करियौ कै आपरी आंख्या में आसुवां री झड़ी मचगी। इण दुनिया में हाल पक्की रांगा आप जैड़ा असली जांणकर बैठा तौ है, आ बात जाणनै म्हनैं घणौं मोद व्है। घणी खुसी व्हिई की आप जेड़ा राग रा जानकार इण आयोजन में पधारिया। सब एक दूजा कानी देखण लागा। इता में मिनख रोवतौ-रौवतौ ई कह्यौं-अबै मोद गुमेज री बातां छोड़ौ अरले सकौ तो आखरी वगत रांतजी रो नांव लेलौ। मोद-फोद तौ सगळौ लारै धरियां रैय जावैला, फगत रांमजी रौ नांव साथै चालैला। अबै आपरौ घड़ी-पलकां रौ सांस हैं। म्हारा बकरा नै ई औ बोबाड़िया रौग लागो हौ। बापड़ौ बोबाड़ा करती-करती उणी सांयत प्रांण छोड़ दिया। आपनै ई बकरा वालौ सागै रोग लागौ हैं। अबै धन्तर वेद ई आपनै बचा नीं सके। परारा री साल म्हारौ बकरौ भूंडै ढाळै दौरौ घणौ मरियौ हौ। आपनै उणी भांत बोबाड़ा करतां देख म्हनै बकरा री याद आयगी। इण सूं म्हनै रोज आयग्यौ। म्हारौ कैणौ मानौं, ले सकौ तौ दोय-च्यार राम रा नांव लेलौ। अबारूं आपनै मरणौ पड़ेला। मिनख री बात सुणनै सगळां नै ई हंसी छूटगी। तद मिनख आंख्या पूछतौ फैर कह्यौ-अबारूं हंसौ भला ई, सेवट रोवणौ पड़ैला। मरिया पछै थानै म्हारी बात रौ साच आवैला। म्हारौ बकरौ भी इण तरै घणौ दुखी हो। सगळा उणनै राग रौ मतलब समझायौं पण उणनै तो इतरौ हीं समझ मं आयौ के गवैया नै नै ई औ बोबाड़िया रोग लागौ हौ।


बापू---कन्हैयालाल सेठिया

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

महात्मा गांधी रै सुरगवास माथै देस री कांई दसा व्ही। सगळै जीव जगत माथै उण महान आत्मा रै गमन रौ कांई असर व्हीयो, उणरौ वर्णन कवि सेठिया री रचना मे घणौ मर्मस्पर्शी शब्दां में मिळै। जात-पांत रा भेद नै मेटण वाळौ, मिनख मातर रौ सांचो मींत, महात्मा गांधी जैड़ा अवतारी इण धरती माथै आया न कोई आवै। एक गांधी रै मिटण सूं सगळा री आँख्यां में आँसू है। मरतो-मरतो ई गांधी एकता रौ पाठ पढ़ाय ग्यौ।



आभै में उड़ता खग थमग्या
गेलै में बैंता पग थमग्या
हाको सो फूट्यो धरती पर
बै कुण गमग्या, बै कुण गमग्या?

ओ मिनख मरयो'क मरयो पाखी?
सै साथै नाड़ कियां नाखी?
बा सिर कूटै है हिंदुआणी
बा झुर झुर रोवै तुरकाणी।

इसड़ो कुण सजन सनेही हो
सगळां रा हिवड़ा डगमगग्या।
बै कुण गमग्या, बै कुण गमग्या?

मिनखां रो रुळग्यो मिनखपणो
देवां री मिटगी संकळाई,
बापूजी सुरग सिधार गया
हूणी रै आडी के आई?

जीऊंला सौ'र पचीस बरस
बिसवास दिरा'र किंया ठगग्या?
गिगनार पडै़ लो अब नीचै
सतवादी वचनां स्यूं डिगग्या
बै कुण गमग्या, बै कुण गमग्या?

बापू सा मिनखां देही में
धरती पर मिनख नहीं आया,
आगै री पीढ्यां पूछै ली-
के इस्या नखतरी जुग जाया?

ई एक जोत रै पळकै स्यूं
इतिहास सदा नै जगमगग्या
ईं एक मौत रै मोकै पर
सगळां रा आंसू रळ मिलग्या,
बै कुण गमग्या, बै कुण गमग्या?

सेठ सेठाणी रा पाछा फेरा रे फेर में आयौ चोर

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक चोर एक सेठां रै घरै घुसियौ पण, सेठ पांणी पीवण नै जागया सो उण री निजर चोर माथै पड़गी। सेठ मांचा माथै बैठग्या। चोर थांभा रै लारै उभौं रह्यौ। सेठ दो-तीन हेला पाड़नै सेठांणी नै जगाई। कह्यौं-ब्याव नै बीसेेक बरस व्हैगा। आज कांई जची के फेरा पाछा नवा करलां। सेठाणी सानी में समझगी, तौ ई वा अण जांण बणनै कह्यौं-माथा में धोळा आया हैं अर हाल टाबरपणा री बातां करौ। फेरा खावण री मन में आवै तौ अेकला खायलौ। सेठ बोल्या,-थे रांजी व्हौ भंलाई बैराजी। म्है तौ पांतरग्यौं के फेरा कीकर खाया हा। सेठांणी बोली-थारां आगै म्हारीं जोर नीं चाले। पण पाड़ौसियां रै साम्हीं अैड़ी बातां मत करज्यौ। लो, नवा फेरा खावणा व्है तौ अबै झट खायलौ। चोर सेठ सेठाणी री बातां सुणनै मन में जांणियौ के अेड़ौ भौळौ सेठ तौ मुलकां में ई नीं लाधै। परिंड़ा माथै सींचणियौ पड़ियौ हौ। सेठ डोली खोलनै सींचणियौ पड़ियौ हौ। सेठ डोली खोलनै सींचणियौ लाया। अेक मूंड़ौ सेठाणी ने झिलयानै कह्यौ-म्हनै साचैला फेरा तो खावण नी है। पाछा याद करणाहै जकौं इणसींचणिया सूं याद व्है जावैला। लौ, थैं इणरौ मूंड़ौ झेलौ। आ कैयनै सेठ उणी थांभा सू चिपियोड़ौ ऊभग्यौ। दोनूं धणी लुगाई थांभा रै चारूकांनी फेरा खावण लागा। चोर रै साम्हीं तौ वै भळियौ ई कोनीं। तीन फेरां रै पछै सेठाणी कह्यौ-लो, अबै म्हनै लारै आवण दौ। सेठ हौळै-हौळै चालता ई रह्या। चोर नै गिरियां सूं लेयनै ठेठ गळा तंाई आटां में पळेट लियौ। सेठ, सेठांणी नै थांभा रै पाखती बैठांणनै खुद डागळै चढ्या। जोर सूं हेलौ मारियौ-पाडिसियां, सावळ कांन देयनै सुण लीजौ, म्हैं चोरी करण सारू आवूं हूं। जाब्तौं करणौं व्है जकों कर लीजों। तीन चार बार वौ औ ई हेलौ मारियौ। चैथी वळा उणरौ हेलौ सुणनै अेक लड़कीलौ आदमी कह्यौ-सेठां, चोरी करोला तो माथा में अणगिणती रा जूत पड़ैला। सेठ पड़ूतर दियौ-चैरियां करण सूं जूत पड़ता व्है तो आवौ, चोर म्हारै घरै बंधियोड़ौ त्यार है। सगळा आड़ौसी पाड़ौसी जूता अब गेड़िया लेयनै दौड़ता आया। सेठ चोर नै बताया कह्यो-चोरां रै जूत पड़ता व्है तौ औ कोरौ क्यूं जावै ? अबै चूकजौ मती। पाड़ौसी लिगतरां सूं मार मारनै उणरौ पोखाळौ कर दियौ। वौ तौ सेठां रै नवा फेरा खावण रौ खिलकौं आखी ऊमर नीं पातरैला।


सेठा-सेठानी करिया, चोरां सूं दो-दो हाथ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

सीयाळा रा दिन हा। सेठ-सेठांणी सूता हा। आधी रात रा सेठांणी नै तिरस लागी। सेठांणी आड़ौ खोलनै थळी रै बारै पग धरियौ तौ साम्हीं डागळा सूं दो चोर उतरता दिख्या। वा तौ डरी, पर झट पाछौ आड़ौ देयनै आगळ जड़ दी। सेठा रा कांन में डरती-डरती हौळै सूं बोळी, गींगला रा भायजी, घर में चोर घुसग्या है। सेठ कह्यौ, डरण री जरूरत कोनी। सेठांणी पाछी सूय तौ गी पण डर नीं मिट्यौ। काळजौ धक-धक करण लागौ। सेठ सेठांणी रौ पुणचै दबायनै केवण लागा, सेठांणीजी, सुणौ कोंनीं, काई। बताळयनै कायौ व्हैगौ पण थांरी तौ आंख ई नीं उघड़े। सेठांणी बोली क्यूं, जीव खावौ। थे तोै रैय-रैयनै चमकौ। दूजा नै ई सावळ नीं सूवण दौ। हाका मत करौ। साळ रौ तौ आड़ौ दियड़ौ हौ। मांय सेठ-सेठांणी नै बातां करता सुणिया तौ चोर आड़ा रै पाखती कांन लगायनै उभग्या। जांणियौ के धन री की सोय लागैला। सेठ कह्यौं, आज थानै नांणौ लायनै दियौ जकौ सावळ जाब्ता सूं धर दियौ कांई ? सेठांणी चिड़ती बोली, थांने तो दिन रात धन हीं दिखे। सावळ आंख में कस ई नीं लेवण दौ। सेठ कह्यौं, अेकर पूछणा में थाने इती रीस क्यूं आवै ? धन कमावणौ दोरौ घणौ है। हजार-हजार रा नग जड़ियोड़ी बींटियां अर सौ मोहरां थारा हाथ में झिलाई। सेठांणी कह्यौ-म्हनै किसौ धन खारौ लागै। अैड़ौ जाब्ता सूं धरियौ हूं के चोर रा बाप रै ई हाथ नीं आवे। चोर काठा कांन अड़ायनै ध्यानं सूं बात सुणाण लागा। सेठांणी कह्यौ-बीटियां तौ बेक कुलड़ी में घालने सावळ माथै ढकणी देयनै चैक रा उखल माथै धरी हूं अर मोहरां सगळी अेक काळी चूंदड़ी में पळैटनै बाड़ां रै नींबड़ा रा डाळा में टेर दी हूं। बतावौ, थे अेड़ी जुगत कर सकता। चोर मन में कह्यौं के अबै घणा दिन रोवौला के कोई चोर मिळिया तौ हा। बेक तुरत मोहरां लावण सारू गियौ। वठै सांचांणी ई कुलड़ी पड़ी हीं। लप ढकणी उघाड़ी अर हाथ घालियौ। हाथ मांय घालतां ई जोर सूं हाकौ करियों-अरै, खायग्यौ रै। चोर रा सगळा डील में लाय-लाय फूटगी ही। बिच्छुवां रा ओळबां चढ़िया पण चढिया। सेठांणी नै सिंझया रा ऊखळ कनै दौ बिच्छु लाध्या हा। वा वांनै कुलड़ी में घाल दिया। उठीनै दूजौड़ौ चोर चूंदड़ी में बंधियोड़ी मोहरा लेवण सारू नींबड़ा माथै चढ़ियौ। डाळां माथै टिरती चूंदड़ी दिखी। देखतां ई वौ जोर सूं हचीड़ दियौ। हचीड़ देवतां ई अलेखूं मधु मखिया ठोड-ठोड डस न्हाकियौ। हैटै पड़ग्यौ। चोरां री गत देख सेठ सेठांणी हंसण लागा।


बे माता रा अछर झूठा नीं होवै

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ एक मातामा री घणी सेवा करी। सेवा करता करता घणा दिन व्हैगिया। एक दिन मातमा को सेठ रै हाथ में रेखावां दिखी जो मातमा नै बड़ौ पिछतावौ व्हियौं कै सेठ म्हारी इतरी दिन सेवा करी पण म्हैं इण नै कुछ नीं दे सकियौ। दो दिन बाद ही इण री उमर पूरी व्है जावैला। सेठ पूछ्यौं तो मातमा ने आपरै पछतावै रौ कारण बता दियो। सेठ घणी चिंता करी पण उण नै भी मातमा रै माथै भरौसौ हौ। मातमा सेठ नै सागै लेयर ब्रहमाजी रै कनै गिया। ब्रहमाजी मातमा रौ घणौ आदर सत्कार कर्यौ, पण सेठ री उमर बढावण री बात टाल गिया। जद दोंनू विष्णुं जी कनै पूगा। विष्णु जी रै उठै मातमा रौ घणौं आदर सत्कार व्हियौ, पण उमरा बढ़ावण री बात टाल गिया। व्है कह्यौं, महादेवजी चावै तौ सेठ री उमर बढ़ा सके, म्है तौ इण री उमर नीं बढ़ा सकू। पछै वै महादेवजी रै कनै केलास परवत माथै पूंगा। वठै माता पारवतांजी शिवजी री पूजा कर रैयी ही। महादेवजी तपस्यां में लागोड़ा हा। मातमा आया तो उण रौ घणों सतकार करियौ। आवण रौ कारण पूछियौं। मातमा पूरी बात बतलाई तो महादेवजी भी लारै हट ग्या। महादेवजी कह्यौं, उमर रा अछर बेमाता डालै हैं, इण सारू वे ही इणमें हेर-फेर कर सकें। दूजौ कोई की नीं कर सकैं। अब वै बेमाता कनै रवाना व्हिया। बेमाता एक भाखर माथै रेवजी ही। भाखर में घुसण सारू एक छोटा खाड़ा सू व्हैणै गुजरणौ पड़तौ हौ। मातमा तो खाड़ा सूं व्है नै भाखर में चला गिया, पण सेठ रै माथै एक मोटो भाटौ पड़ियौं, अर उणरी उणी टैम मौत व्हैगी। जिण टैम मातमा बैमाता कनै पूगा। बेमाता जोर जोर सूं रो रैयी ही, पण उण नै देखतां ही हसण लागी। मातमा इणरौ कारण पूछियौं, बेमाता कह्यौं, इण सेइ रे माथै म्हैं लिख्या हैं कै ओ सेठ एक मातमा रै सागै अठै आवैला जद भाखर रौ भाटा गिरण सूं इणरी मौत व्हैला। पछै म्हैं सोच्या ओ कीकर व्हैला, इण वास्तै म्हैं रो रैयी हीं, आज म्हारा अछर झूठा व्है जावैला, क्योंकि अेड़ा बानक बणना घणा दौरा हैं। भला आतमा अेक मिनख नै लेयर अठै किकर आवैला, पण अब आप अठै आय गिया हौ तो सेठ री मौत व्है ग्यी। म्हारा अछर साचा व्हिया, इण सारू म्हैं हंस री हूं। बेमाता रौ जवाब सुण मातमा चैकिंया। दो दिन की अवधि पूरी व्है गी ही। सेठ री मौत व्है चुकी ही।


सौतेली मां बुरो करण चाली, पण भलौ व्हैग्यौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

ऐक राजा रो सोलह साल रौ कुंआरौ छौरो मर गियौ। पंडत राज सूं कह्यौं कंवर सा‘ब ने यूं नीं जलावनो चाहिजै। उणरौ ब्याव व्ळैणौ चाहिजै। पैला ऐकआक री लकड़ी रै सागै ब्याव व्है जावै। पछै आक री लकड़ी रूपी बीनणी रै सागै राजकुमार रौ शव जलावणौ चाहिजै। राजा कह्यौं, ऐड़ी बात हैं तो म्हैं आक री लकड़ी रै सागै क्यूं, सागेली छोरी रै सागै ब्याव करवा दूं ला। राजा ढिंढोरौ पिटव दियौ कै जो सुरग सिधारियौड़ा राजकुमार नै सागै आपरी छोरी रो ब्याव करेला, उणनै एक लाख रिपिया राज कोष सूं दिया जावैला। एक बिरामण रा दूजौ ब्याव व्हियौ हौ। उणरै पैली लुगाई रै छोरी ही। बिरामण दिसावर गियोड़ौ हौ। बिरामाी सोचियौ इणछोरी रौ ब्याव मरियोड़ा राजकुमार रै सागै करवाय दूं जौ एक लाख रिपिया मिल जावैला। बिरामण पूछैला तौ कै दूंला कि बीमारी सूं मरगी। आ बात सोच वो आपरी छोरी रौ ब्याव राजकुमार रै सागै करवा दियौ अर एक लाख रिपिया ले लिया। राजा मरियोड़ा राजकुमार रै सागै छोरी नै चिता माथै चढावण लागा तौ वा राजा सूं कह्यौ म्हारी सौतेली मां लाख रिपिया री आपरी करजदार व्हैगी। आप म्हारौ ब्याव कर दियौ, अब औ राजकुमार म्हारौ व्हैहगयौ। अबै आप लोग अठां सूं जाऔ, म्हैं आपरी मरजी सूं इणरौ दाह करम करूंला। राजा बीनणी री बात मान ली अर वठां सूं वहिर व्हैगिया। छोरी राजकुमार री मरियोड़ी देह नै गोद में लेयर चिता रै माथै बैठ गी। आधी रात रा माहदेवजी अर पारवतांजी निकलिया। पारवतांजी माहदवेजी सूं पूछियौ, आ कई बात। आ यूं किकर बैठी ? शिवजी सगळी बात बताई तो पारवतांजी कह्यौ इणरी मां म्हारज्ञै वरत करती ही, इण सारू राजकुमार नै जीवन देवौ। शिवजी पैलां तौ मना कर दियौ, पण हठ रे आगै उणनै पारवतांजी री बात माननी पड़ी। सुबै-सुबै धण्ी-लुगाई नहावण सारू गिया। राज रा मिनख उणनै देखिया तौ वै भागिया-भागिया राजा रै पास पूगा अर बतायौ कै राजकुमार तो जीवित व्हैगिया। राजा नै विसवान नीं व्हियौ पण मिनखा रै घणौ विसवास दिलावण रै पछै राजा गंगा रै तट माथै गिया। लोग कह्यौं तो वा बात साची निकली। राज दोनां नै सागै ले पधारिया। इण भांत एक कानी तो राजा नै आपरौ छोरौ पाछौ मिलग्या, अर बिरामण री बिना मां री छोरी नै राज मिलग्यो। कैया करै कै कोई कित्तो ही बुरो करण री क्यूं नी सोच ले, ऊपर लौ जिके रो जहड़ो भाग लिखे।


जिण री जैहड़ी अकल, उण नै मिळ्या करे वैहड़ा ही दाम

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

ऐक सेठ रै कन्ने एक नौकर रह्या करतौ। वो राजीना एक ही बात सोच्या करतों, म्है तड़के उठ जाऊं, इत्तो-इत्तों काम करूं, देर रात तक जाय र, बिस्तर नसीब व्हिया करै। इण काम रा म्हनै दस रिपिया माहवार मिळै। सेठजी रो मुनीम खाली चार घंटा आवै, गादी माथै मंसद रै सहारै बैठ जावै। कीं करतो कोनी दिखै, पण सेठ इण नै तीन सौ रिपिया माहवार मिळै है। एक दिन नौकर आप रै मन री बात सेठ ने कैय ही दी। सेठ नौकर री बात सुण र, म नही मन खूब हस्यो। पछै उण नै कह्यौ, थनै थ्हारी बात रौ जवाब काळै देवूंला। दूजै दिन सेठ दिनूंगै ही नौकर से कह्यौ, दरिया माथै जाय र देख नै आ, आज कांई आयौ हैं ? नौकर दौड़ नै गयौ और पाछौ आय नै बतायौ आज एक जहाज आयौ है। सेठ उण नै पाछौ भेज्यौं, जा देख नै आज, जहाज रै माय कांई आयौ हैं ? नौकर फेरूं भाग्यो-भाग्यों दरिया माथै गयो अर जहाज वाळा नै पूछ पाछ नै खबर लायो कै जहाज रै मांय चावल भरियोड़ा है। सेठ नौकर ने पूछ्यौं, चावल किण किसम रा हैं, किण भाव रा हैं ? नौकर इण बात री तपास करण पाछौ दरिया माथै जावण वाळो ही कै इतरे में मुनीमजी आय गिया। सेठ ने मुनीमजी ने कह्यौं, मुनीमजी थोड़ो दरिया माथै कांई आयौ हैं ? मुनीमजी दरिया माथै गिया अर, चावल री सगळी बोरिया खरीद लीवी। बाजार थोड़ौ परवान माथै हौं, मुनीमजी जी वे चावला बोरियां आठ आनै रै मुनाफै मंे हाथौ हाथ बेच दीवी अर मुनाफे रा पंाच हजार रिपिया लाय र सेठजी रै आगे धर दिया। वह नौकर सगळौ नजारौ देख्यो, मुनीम री कला देख र नौकर हक्को बक्कों रेय ग्यौ। सेठ उण नै केवण लाग्यौ, बावळा, थूं एक काम ने चार चक्कर रै मांय भी पूरो कोनी कर्यौं, अर मुनीमजी एक सवाल रो जवाब इण तरै दियो कै सुबह दरिया माथै गिया अर दौपारा तक पाछै आय नै रिपिया पांच हजार गादी माथै रख दिया। अब बता, थनै दस रिपिया और मुनीमजी ने तीन सौ रिपिया ठिक ही देवूं या नीं ? नौकर बिचारौ समझ ग्यौ, कै बैठण रा नीं, मुनीमजी नै अकल रा तीन सौ रिपिया माहवर मिल्या करै। सेठ रौ सीख देवण रो तरीकों भी उण नै समझ में आय ग्यौ। वो जाण ग्यांे, आप-आप री अकल रा ही दाम मिल्या करै।


माखण री जगा रूई देखणै निकलगियौ मिनकी रौ जीव

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

घणी पूरानी बात हैं। रामदीन नाम रो बिरामण हौ। वौ चंदर नाम रा गांव मैं रेवतौ हौ। एकर उण गांव में आंधी-तूफान आयौ। तूफान इतरौ भंयकर हो कै घरां री छतां उड़गी। थेड़ी देर पछै बरसात शुरू व्हिई। घर गिरण रा ड़र में एक मिनख आपरा टाबरां नै लेयर दूजी जगा निकल गियौ, ताकि आफत सूं उणरौ कई नीं बिगड़े। उणरै घर में एक मिनकी हीं, उतावल में वो उणनै खोलणौ भूल गियौं। आंधी-तूफान में वौ हक्को-बक्को वठा सूं निकलगियौं। इण हड़बड़ाहट में मिनकी वठेही बांधियोड़ी ही रेहगी। ज्यू-ज्यूं तूफान आयो वा घणा पग पटकिया, पण मिनकी नीं खुली। जठै मिनकी बांधियोड़ी ही, उणती थोड़ी अलगी दूर हवा सूं उड़नै रूई रौ टुकड़ौं आयनै गिर गियौ, अठै पाणी रा टपां पड़ण सूं वौ वठै ही आयनै रूक गियौ। बिल्ली रो ध्यान वठै गियौ तौ वौ सोचियौं कै औ माखन रौ टुकड़ौ हैं। वा माखन पावण सारू घणी उछल कूद मचाई, पण सगळी बेकार गी। घणी मेहनत रा पछै भी माखण उणरी पहुंच सू बारै ही रियौ। वा भूख रै मारै कूदती गी, वा बंधन सूं मुक्त होवण सारू रास्ता खोजण लागी पण उणनै कोई रास्तौं नीं सूझियौं। लारै जातौ वा थक हार गी। पांच सात दिन पछै जद आंधी तूफान रौ जोर कम पड़ियौ। जणै घर रा सगळा मिनख घरै आया। उणनै घणों अफसोस व्हियौ कै वौ उतावल में मिनकी खोलणौं भूल गियौ। उणणै आपरै करमा माथै घणौ दुख व्हियौ। खैर जौ व्हैगी सो व्हैगियौ। वौ लारली बात बिसार नै उणी टैम मिनकी नै खौली अर उणनै घणौ लाड़ करियौ। घणी चीजां खावण सारू रखी। लाड़ करतौ वौ उणनै गौद में भी उठा ली, पण मिनकी रौ जीव तौ माखन में बसियोड़ौ हौ। इण सारू वा उतावली व्हैनै माखन रै पास पूगी, वा सौचियौ आत सात दिनां रै पछै उणरी मन री इच्छा पूरी व्है जावैला। जद उणनै साची बात ठाह पड़ी तौ वा घणी दुखी व्हिई। रूई तौ टुकड़ौ पायनै उणरै मन में निराशा घर कर गई, यूं करता उणरौ जीवण उड़ गियौ। मालिक नै जद इण बात रौ ठाह पड़ियौ जणै वौ घणों दुखी व्हियौ। मिनकी सात दिनां तक माखन रा लौभ में जीवती रैहगी, पण रूई देखणै उण्रौ जीवण थौड़ा टैम में हीं निकल गियौ।


बात बात में ठाकरां आपरौ नूर गमायौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

ऐक ठाकर साब रै कनै घणा रिपिया व्हैगिया तो उणनै घमंड आय गियौं। वै दिन रात रिपिया रै घमंड में रैवता। ऐक दिन री बात हैं। वे रावला सूं आपरा घोड़ा माथै सवार होय नै गांव में घूमण नै निकळिया। ऐक सेठ री दुकान रै आगै पूग्या तौ सेठ आपरी मूंछौ माथै ताव दियौ। ठाकर नै लागौ कि औ सेठ म्हारौ अपमान कर रियौ हैं। ठाकर सेठ सूं कह्यौं-थ्ज्ञू म्हनै देखनै मूंछौ माथै ताव दे रियौ हैं, आ बात ठीक नीं हैं। सेठ कह्यौ-मूछां म्हारी हैं, म्हैं ऐक नीं दस बार ताव दूं, म्हारी मरजी, आपणै इणसूं कई फरक पडैं। म्ॅहारी मूंछा म्हैं घणौं तेल पाय नै मोटी करी हूं, इण सारू ऐक नीं दस बार ताव लगांऊ, म्हारी मरजी। ठाकर सा नै इण बात सूं खासी रीस आय गी। वे सेठ नै घणी खरी-खोटी सुनाई। सेठ सूं कह्यौं, आज सूं आपरै म्हारै बीच वैर व्हिगयौ। अबै देख लेवांला सेठ भी ठाकर साब री ललकार माथै कह्यौं, ठीक हैं, बैर हैं तौ बैर हीं सही। मैदान खुलों हैं, टैमआवैला जद म्है भी देख लेवूंलां। ठाकर नै आ बात अघणी अखरी। वै लड़ाई री तैयारी करण लागा। आगती-पागती सूं तीर, तलवार अर बंदूका मगवाई। सगळा सगां संबंधिया नै अेक साथै बुलाया अर तनख्वाह देवण वाला सैनिक भैळा करिया। ठाकर उणनै घणौ खिलावतौ, पिलावतौ सगळा री सुख सुविधा रौ ध्यान राखतौ। लारै जातौ लड़ाई रौ दिन तय व्हियौ। ठाकर आपरा सगळा मिनखा रै सागै हथियारां सूं लैस व्हैणै सेठ री दुकान रै आगै पूग्या। सेठ उण टैम आपरा काम में लागौड़ा हा। वौ लड़ाई सारू तैयारी नीं करी ही। ठाकर सेठ ने ललकारतौं कह्यौं, आ जाऔ मैदान मंे। सेठ उठकर ठाकर नै मुजरौ करियौ कह्यौं, आप सूं म्हारी कैड़ी लड़ाई। आप म्हारा राजा अर म्है थ्हारी प्रजा। आ तो सेठ हाळीं मूछ हैं, यों नी सही तो यो सहीं। अेड़ो कह सेठ आपरी मूंछा रा बळ खोल दिया। ठाकर घणौं पछतायौं कै सेठ सूं यूं ही राड़ पाल ली अर इण राड़ में अपरौ सगळौ धन पाणी म्है डाल दियौ।


गिनायतां नै यूं सिखायौ सबक

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

ऐक सेठ री छोरी रौ ब्याव हौ। बारात आई तो छोरी वाला धूमधाम सूं सत्कार करियौ। छोरा वाला मालदार हा, पण बींदणी सारू गैहणौ-गांठौं नीं लाया हा। गैहणा रै ठौर रोकड़ रिपिया भरण नै दौ थाल में धर दिया। छोरी रा बाप नै जद इण बात री जानकारी व्हिई तौ बैटी वौ आपरा गिनायत कनै पूगौं अर पूछियौं कई बात हैं ? आप तौ रीत जितरा गैहणा नीं लाया ? छोरा रा बात कह्यौं बाजार सूं सोनो लावतौ तौ सुनार कमावतौ अर उणमें मिलवाट रौ ही डर रैवतौं। पछै सुनार तौ सुनार हैं उणमूं भी थौड़ौ घणौं राख लैवतौं। इणरै पछै भीगैहणा बनावट सारू मजूरी देनी पड़ती जकौ न्यारी। बींदणी जद गैहणा पहनैला तौ वै घिसला भी। इण सारू गैहणा नीं लायनै रोकड़ रिपिया लाया हूं, ताकि किणी तरै रौ खतरौ नीं। गिनायत री आ बात सुणनै छोरी रौ बाप चुप व्हैगियौ। पण जद सजनगोठ-बड़ी ज्योनार रौ समै व्हियौ अर बारात जीमण सारू आई तौ बेटी रौ बात सगळा री पतलां माथै मिठाइंया री ठौर चार-चार रिपिया धर दिया। अबै तमाशा करियौ ? म्हारी तौ नाक कटवा दीं, पत्तला माथै रिपिया क्यूं धरिया हौ। छोरी रौ बाप घणा लाड सूं कह्यौं, म्है इण सारू पतलां माथै रिपिया धरिया क्यूंकि पैला बाजार सूं घी, शक्कर, दाल आदि लावणी पड़ती, अगर यूं करतौ तौ पंसारी नै फायदौ व्हैतौ। पछै हलवाई कनां सूं मिठाईंया बणावतौ जणै उनरी मजूरी दैवणी पड़ती, इणमें भी मीठौं कम ज्यादा री चिंता। बात अठै हीं खत्म नीं व्हैती आपनै भी उणनै खावण सारू मेहनत करनी पड़ती। इणमें घणी मिठाीई खराब व्है जावती, इण सारू म्है पतलां म्हैं मिठाई री ठौर रिपिया धर दिया। इणमें किणी तरै रै नुकसान री संभावना नीं हैं । आ बात सुणता हीं बैटा रै बाप री बोलती बंद व्हैगी, वौ घणौ पिछतायौ। हाथौ-हाथ गांव रा बाजार में गियौ अर आपरी बींदणी रै सर सूं लेयर पग तक रा गैहणा गड़ायनै लेयर आयौ जण छौरी रौ बात जो आपरै गिनायन नै सबक सिखावण री ठाणी हैं उणनै चान दिनां तक राजी खुसी पांच पकवान जिमाया।