राजिया रे दूहा सारु http://rajiaduha.blogspot.com क्लिक करावें रज़वाड़ी टेम री ठावकी ख्यातां रो ब्लॉग आपरै सांमै थोड़ाक टेम मा आरीयो है वाट जोवताईज रौ।

इण वास्ते रोया जवांई सां

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अैक बांणिया रो जंवाई मुकलावौ लावण सारू सासरै गियौ। सासरे में जंवाई रा लाड़-कोड़ करण सारू आगती-पागती री लुगाया कमरा रै माय बुलायौ। घणा इ गीत गाया, घणा ई लाड़-कोड़ करिया अर घाणा ई ख्याल-तमासा बताया। जंवाई रै आगती-पागती लुगायां रौ थट लगौड़ो हौ। रूपाळा जंवाई रौ रूप् निरख-निरखनै सगळी लुगायां घ्ज्ञणी ई राजी व्हीं। इता में एक छोटी-सी डावड़ी जवांई री सासू नै अेक कागद लायनै दियौ। लुगायां तौ भणियोड़ी ही नी। जंवाई सूं कांई चोज। वौ तो घर रा बेटा ज्यूं हैं। आ सोच ने सांसू जर्वाइ नै बांचण सारू कागद पकड़ाय दियौ। जंवाई कागद खोलनै आपरै साम्हीं करियौ। थोड़ी ई टेम रै पछै जंवाई रा दोनूं हाथ थर-थर धूजण लागा। अर ठळाक-ठळाक उणरी आंख्या सूं आंसू बैवण लागा। धूजता हाथौ सूं कागज नीचै पर्डग्यौ। रोवण रै समचै जंवाई रौ मूूंड़ो अेकदम काळै-मिट पडग्यौ। जंवाई रौ औ ढालौ देख्यौ तो लुगाया रा तौ धै छिलग्या। वै जाण्यौ के कोई भूड़ा समचार आया हैं। जंवाई नै रावतां देखनै सबसूं पैली उणरी सास रोवण लागी। पछै आगती-पागती री लुगाइयां। सारा घर में हाय-त्राय मचगी। बिना मरणा री खबर रै जंवाई रौवता थेड़ा ई। आज रै सुभं दिन कैड़ी अमंगल सुणावणी आई। जोग री बात। घर में रावणौ सुण्यौ तै तुरत आड़ौस-पाड़ौस री लुगाया ई रोवती-रोवती सेठां रै घरे आई। अचांणचक आ कांई अजोगती बात व्हीं ? कुण चलियौ ? किणी री साज-मांद तौ सुणई ई नीं हीं। घरवाळी लुगायां जवाब दियौ-कंवरसा नै रोवता देख्या तौ म्हां ई रोवण लागी। म्हांने ई ठाह कोनी के कुण चलियौ अर कुण नीं चलियौ। घरवाला डरता-धूजता आया अर पूछ्यौ-कांई बात व्ही ? आंे रोवणौ-रिंकणौ क्यूं मांड़िया ? की म्हानै ई ठाह पड़ेे। सैठाणी रोवतो-रोवतो कहयौं कंवरसा रा हाथ मंे कागद हैंख् उणनै बांच्यां आपनै सगळी बात ठाह पड़ जावैला। जल्दी बांचै। कंवरसा तौ दुख रा मार्या की बोल ई नीं सकै। संचांणी जंवाई तो अधमरियों सौ व्हैगा। तद सेठ लड़खड़ावती वांणी में पूछ्यौ-कंवरसा कांई बात व्हीं ? आप कागद बांचनै राया क्यूं ? तद जंवाई अटकतौ-अटकतौ कैवण लागौ-म्हैं कागद बांचनै नीं रौयौ। कागद बांचणी आवतौ तौ म्हैं रोवर्ता ई नीं। पढ़ण रा दिनों में म्हैं तबड़का देवतौ रोवतौ फिरयोंै, जिण सूं म्हनै आज रोवणौ पड़ियो। अणभणियां रां जीवण बिचै तौ मरणौ आछौ। जंवाई री बात सुणनै लुगायां खिल-खिल हंसण लागी।


पिंजारै री चतराई

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक गांव में एक पिंजारौ रैवतो हो। एकर उणरी लुगाई उणसूं कह्यों कै आज - काळ अठै कोई काम धंधों नीं हैं, इण सारू सहर जावौ अर कमावौ। पिंजारौ आपरी धुनकी अर दूजौ सामान लेयर सहर री कानी निकळियोै। चालता-चालता वौ जंगल मांय पूगिग्यों, वठै उणनै एक सैर आवतौ दिखियौ। पिंजारौ ने दैखिओ अर सैर पिनारै नै। दोंनां एक दूजै सूं डर गिया।पिंजारै कंधै माथै धुनकी देख सेर सौचियौ कै मोटो सिकारी आयौ हैं, लूंठा अस्त्रर-सस्त्रर लायौ हैं। म्हैं तो आज तक अेड़ा अस्त्रर नीं देखिया, ओ तो म्हारी जान लेने हीं चुप व्हैला। पिजांरे री जान निकलरीहीं। इतरा में वठै एक गीदड़ आयो। वो दोनो री मनोदसा समझगियों। वो सेर रै कनै पूंगौ अर कहयौ मामा, आज यूं किकर पूंछ दबायनै खड़ा हौ ? सेर पूरी बात बताय दी। गीदड़ तो चालाक हो हीं, वो कह्यों, मानों नीं मानो आ मिनख हैं तो न्यारौ, पण म्हैं इणसूं थ्हारौ जीवण बचा सकू। पण म्हारी एक बात माननी पड़ैला, म्हनै जंगल मय घूमण फिरण री छूट देन पड़ेला। सैर तो ड़रियोड़ो वो हाथां हाथ बात मान ली। पछै गीदड़ पिंजारै रै पास पूगा। पिंजारौ आपरा हाल बताया। गीदड़ सेर सूं जीवन बचावण रौ आस्वासन दियो, पण सागै कहयौ कै म्हारीं सरत माननी पड़ैला। जद सेर अठा सूं जावैला जणै म्हैं थ्हारा सरीर पर जठै चाहूं ला, वठै दों बटका भर लूं ला। पिंजारौ सोचियों जान जावण सूं बढ़िया कै गीदड़ दरी बात मान लूं। ज्यूं ही पिंजारौ हां भरियौ, गीदड़ सेर कानी इशारौ करियौ तो वो वठा सू भाग गियौ। अबै गीदड़ पिंजारै नै पूरौ देखियौ। उणरै कठी मांस नीं दिखयौ छाती माथै मांस उभरियोड़ौ उनणै दिख गयौ। गीदड़ पिंजारे सू कह्यों, म्हैं थ्हारीं छाती माथै दो बटका भरूंला। सेर सूं डरियौड़ै पिंजारौ आपरौ कुरतोै उपरै उठायौ जणै दीखी। वो पिंजारै सूं माजरौ पूछिया ? उणरै भेजा मांय एक युक्ति आई, वौ कह्यों इणरै मायंे एक कुतौ घुसगियौ है, थ्हनै देख अर भौक रियौं है, मै किणी तरै इणै बारै आवणसूं रोकियों हूं, पिंजरै री बात सुणता हीं गीदड़ रा हौस उड़ गिया, वौ पूंछ ददबार वठा सू भाग गियौ। अबै पिंजारै री जान में जान आई, अर वो झट झट सहर पूग गयौ।


सपना री बातां गम गी आंख्या खुलतां

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक मिनख रात रा सपना देख्यौ के उणरै कनै एक गाडोलिया लुहार आयो अर उण रै नारकिया रो मौल पूछ्यों। वो मिनख गोडोलिया लुहार नै कह्यों, थूं ईं मोल कर। गाडोलिया लुहार मिनख नै कह्यों, थारी चीज हैं तो इण रौ मोल थूं ही बता। घणी झोड़ रै पछै मिनख नारकिया रा तीन-बीसी रिपिया मांगिया। पण गाडोलियों लुहार उणरा पचास रिपिया धामिया। मिनख कह्यों, म्हैं तीन-बीसी सूं अेक कौडी ई कम नीं लूवं। गाडोलिया लुहार कह्यों, म्हैं पचास रिपिया सूं अेक छदाम बती नीं देंवू। थारी मरजी है तो बोल। निरी ताळ झिकाळ व्ळैती रैयी। सेवट गाडोलिया लुहार आपरी नौळी सूं पचपन रिपिया कळदार गिणिया अर नारकिया री राहड़ी में हाथ घालियौ। पण मिनख पचपन रिपियां सूं राजी नीं व्हियों। वो गाडोलिया लुहार रौ हाथ झटकतौ थकौ बोल्यौ, बाब री सोगन, जे तीन बीसी सूं राती छदाम ई कम लूेवूं तौ। दोनां री झड़पा-झड़प् में मिनख री नंीद खुलगी। वो परेशान व्हेग्यो। अरे ओ म्हैं कांई कर्यो। नींद खुलतां ई पैली बाम उणरा मन में आई के मुरख पणै में पचपन रिपिया गमा दिया। अबारा पचपन रिपिया आ जावता तो जोरदार काम व्है जावतो। वौ सौच्यौ कै, पचपन रिपिया इण नारकिये रा कांई बुरा हैं। वो झट पाछी आंख्यां मींची अर, हाथ धकै करतौ बौल्यौ-ला पचास ई दै। उण नै कीं कोनीदिख्यौ, वौ गैला व्हैग्यौ; आंख्याा मीचियोड़ों हीं हथाळी मेंरिपियां रौ परसन नीं व्हियौं तौ वो थोड़ो हाथ आगै बधायनै कह्यौ, नाराज क्यूं व्है रिया हो, रामा धरमी री बात, लाओं अबै चालीस ई दे दो, काम चला लेवूंला। पण चाळीस भी कठै पडया हा। वौ सूतो-सूतो, जोस सूं आख्या मींचनै आगै सिरकतो कह्यों, अबै सौदो तूट व्है है, ला तीस ई दै, अइ ओ नारकियों हाथ मैं पकड़। पण उठै कोई हाथ कोनी दिख्यो। वो फेर उतावळोै पड़ने बौल्यो, ला बीस रिपिया हीं दे दे, अरे, दस ई दे दे। चाल, अंत बात करां, लां पांच ईदै। मिनख जाणियौं पांवू रौ तौ रिपियों ई वतौ। सेवट आंख्यां मींच्योड़ौ ई मांचा सू उभौ व्हियौ अर आप रो पूरौ हाथ धकै करनै कह्यों, अबै नटियौ तौ थन्ने रामसापीर री सौगण हैं। ला अेक रूपियौं कोई कोनी हो, सपना री बातांग, गम गी आंख्या खुलता...। तठै तो पचपन रिपिया मिल रह्या हैं और अबै एक रिपिया कोनी मिल्यौ।


गादेल रौ परताप

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

जांबूवाला बैरा माथै पनड़री री खांडिंद-खंडिंद रौ ठेको, घड़लिया रौ खळकतौ पांणी, बांकली में रळकतो, नाळौ, होड़ा देवतौ ढलकतौ धारौ, पीयोड़ा क्यारां सूं आवता ठाड़ा लैरका अर आंबली माथै बैठी कायलां रा मीठा टकूड़ा। इण थाट बिचाळै गादेल माथै बैठौ सागड़ी मौज सू रागां करै तौ इण मेंकिणरौ दोस। गादेल माथै बैठो सागड़ीह मीठी अर तीखी राग मेंतैजौ गावतौं के उणरी धरवाळी भातौ लयनै आई। आपरा धणी नै इण गत मौज में गीत गावतां देख्यों तौ उणनै रीस आई। उणरौ माजनौ पाड़ती वा कह्यौ-हे ओ, थानै थोड़ी-घणी लाज को आवै नी ? थारां सुसरौजी नै चलियां पूरौ पखवाड़ौ ई नीं बीत्यौं अब थें ढोली री बळाई रांगां करौ ? गनौ हौ तौ म्हारै हौ, थांनै वांरौ कांई सोच? सागड़ी लतेड़ सुणनै लचकांणौ तौअवस पड़ग्यौं पण वौ जाणतौ के आ गादेल री ठौड़ इज अैड़ी हैं, इण माथै बैठैला जिणनै तो गावणौ ई पड़ैला। गादेल सूं उतरनै बौल्यौ, म्हैं रोटी खांवू जितै थूऔ डोरी उतार देै। रोटी खायनै घड़ी आधघड़ी मोर पाधरा करणी चावूं। बैठा-बैठा री कड़िया कुळण लागी। सागड़ी रोटी खावण नै बैठो अर उणरी घरवाली गादेल माथै बैठी बळद खड़ण ढूकी। बळद सात-आठेक भळाका लाया जितै तौ वा मूंडौ साजयोड़ी बोली-बोली बैठी रीवी। पछै हौळे-हौळे होठां रै मांय गुणमुण-गुणमुण करण लागी। सागड़ी ई लखग्यौं के आ गादेल तौ आपरौ परताप दरसायां रैसी। चळू करनै वौ कह्यौ-धमैक आड़ौ व्है जावूं, थू वैरो खड़ती रेजै। आंबली री जाड़ीह छीयां में वौ माथै खेसळों तांणनै सूयग्यौ। वौ सूवण रौ फगत मिस बणायौ हौ। उणरां कांन तौ घरवाळी री राग सुणण में लाग्योड़ा हा। थोडी ताभ् पछै, ई गादेल माथै बैठी उणरी घरवाळी तै मीठी अर तीखी ढाळ खेसला रै मांय उणरा धणी सूं सबूरी राखणी दौरी व्हैगी तौ वौ झट ऊभौ होसनै कह्यों - लिछमी,थनैरांगा करता सरमा को बावै नीं ? म्हारै तो ससुरोै व्हैतौ हों, पण थारौ तो बापहौ। थनै तौ थोड़ी - जांणतौ हौ के बाप मरौ, भलांई मां मरौ इण गादैल माथे जकौ बैठसी उणनै तौ गांणऔं सूझैला इज। अबै थनै कीं सोजी बंधी ? उणरी घरवाळी लचकांणी पड़नै माथै नीचै कर लियौ। कांई पडूत्तर देवती।


हिन्दी री हैवाई छोडो, भासा मायड़ बोलो रै।

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

हिन्दी री हैवाई छोडो, भासा मायड़ बोलो रै।
परभासा रै भूतां नै दूधै रौ तेज दिखाद्यो रै।
भासा मायड़ बोलो रै, राजस्थानी बोलो रै।

छाछ लेवण नैं आई आ तो घर री धिराणी बणगी रै।
रोटी-रूजगार खोस्या इण तो दफ्तर्यां में छागी रै।
भासा मायड़ बोलो रै, राजस्थानी बोलो रै।

साठ बरसां सूं छाती पर मूंग दळ रैयी
संस्क्रति रौ करियो कबाड़ो रै।
इण रौ बाळण बाळौ रै, इण रै लांपौ लगाद्यो रै।
भासा मायड़ बोलो रै, राजस्थानी बोलो रै।

पांच परदेसां रै पांण आ तो रास्ट्रभासा बणगी रै।
जबरी पोल मचाई इण तो समझ नाथी रौ बाड़ो रै।
फरजी डिगर्यां ले-ले आया धाड़वीं, नौकर्यां कब्जाई रै।
इण रौ नखरो भांगौ रै, राजस्थानी बोलो रै, भासा मायड़ बोलो रै।

जद बाईस भासावां संविधान सीकारी, रास्ट्रभासा कुणसी रै ?
राजस्थानी री बळी लेय'र आ तो हुयगी राती-माती रै।
इण नैं थोड़ी छांगो रै, इण री कड़तू तोड़ो रै, राजस्थानी बोलो रै।

जागो ! छात्र-छत्रपती, खोल उणींदी आंखड़ल्यां।
देद्यो नाहर सी दकाळ रै, धरती धूतै,
आभौ गरजै, धूजै भारत री सरकार रै।
छांटा-छिड़कां सूं नीं बूझैला आ मान्यता री आग रै।
छात्र-छत्रपती जागो रै, भासा मायड़ बोलो रै।

एकलड़ी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

तू ही म्हारो काळजो, तू ही म्हारो जीव।

घड़ी पलक नहिं आवड़ै, तुझ बिन म्हारा पीव!
जब से तुम परदेस गए, गया हमारा चैन।
'कनबतिया' कब मन भरे, तरसण लागे नैन।।
चैटिंग-चैटिंग तुम करो, वैटिंग-वैटिंग हम्म।
चौका-चूल्हा-रार में, गई उमरिया गम्म।।
सुणो सयाणा सायबा, आ'गी करवा चौथ।
एकलड़ी रै डील नै, खा'गी करवा चौथ।।
दीवाळी सूकी गई, गया हमारा नूर।
रोशन किसका घर हुआ, दिया हमारा दूर।।
दिप-दिप कर दीवो चस्यो, चस्यो न म्हारो मन्न।
पिव म्हारो परदेस बस्यो, रस्यो न म्हारो तन्न।।
रामरमी नै मिल रया, बांथम-बांथां लोग।
थारा-म्हारा साजनां, कद होसी संजोग।।
म्हैं तो काठी धापगी, मार-मार मिसकाल।
चुप्पी कीकर धारली, सासूजी रा लाल!
जैपरियै में जा बस्यो, म्हारो प्यारो नाथ।
सोखी कोनी काटणी, सीयाळै री रात।।
म्हारो प्यारो सायबो, कोमळ-कूंपळ-फूल।
एकलड़ी रै डील में, घणी गडोवै सूळ।।
दिन तो दुख में गूजरै, आथण घणो ऊचाट।
एकलड़ी रै डील नै, खावण लागै खाट।।
पैली चिपटै गाल पर, पछै कुचरणी कान।
माछरियो मनभावणो, म्हारो राखै मान।।
माछर रै इण मान नैं, मानूं कीकर मान।
एकलड़ी रै कान में, तानां री है तान।।
थप-थप मांडूं आंगळी, थेपड़ियां में थाप।
तन में तेजी काम री, मन में थारी छाप।।
आज उमंग में आंगणो, नाचै नौ-नौ ताळ।
प्रीतम आयो पावणो, सुख बरसैलो साळ।।
---सत्यनारायण सोनी कानांबाती : 09602412124 Posted By AAPNI BHASHA - AAPNI BAAT to AAPNI BHASHA-AAPNI BAAT at 10/20/2009 12:39:00 AM

ठाकर रौ आसण

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

रावळा कोट में लांठौड़ी चौकी ऊपर मकरांणा रा फूटरा गलीचा री बिछायत करियोड़ी ही। चौकी माथै पाखती एक चौधरी बैठो हो। ठाकरसा बिना बात ई राम जाणै क्यूं राजी हां ? वै मूंछ्यां माथै हाथ फ ैरता चौधरी नै मिसखरी रा भाव सूं पूछ्यौ-हे रे चौधरी, म्हेैं मोरसाण माथै बैठ्यों तौ थूं नीचै चौकी माथै बैठग्यो, पण जे म्हेै चौकी माथे बैठूं तो थूं कठे बैठेला ? चौधरीं हाथ जोड़ता कह्यौ-हुकुम, रावलै चौकी माथै बिराजौ तो म्हैं नीचै धूड़ रै आंगणै बैठ जावूंला। म्हनै तो आप सूं नीचै बैठणौ हीं ज पड़ैला। ठाकरसा फेर आगै कैवण लागा-है रे चौधरीं, थू नीचै बैठण री बात करी तौ पछै म्हनै इणरों सावल म्यांनो दै, जे म्हैं नीचे धूड़ आंगणै बैठूं तौ थूं कठै बैठेैला ? चौधरीं कहï्यौ रावले रोज आंगणै गिराजी। आंगणै बैठण रा करम तौ म्हांरा इज हैं। आपरै तौ लारला भौ री करणी चोखी करियोड़ी है, इण सूं आपरै हेटै तो सदा आसण ई रैवैला। ठाकरसा कहï्यौ-नीं नीं बावळा कदै ई अैड़ौ मौकौ बण जावै। थूं अबै गुचळकिया मत खा। म्हनैं सुभट बता के म्हैं जमीं माथैं बैठूं तो थूं कठै बैठैला ? चौधरीं मुभ्कतौ बोल्यो-हुकुम, जे रावळै जमीं माथै बिराजौ तो म्हैं थोड़ौ खाड़ो खेदनै नीचे बैठ जावूंला। ठाकरसा भळै पूछ़्यौ-चौधरी जे म्हैं खाड़ा में बैठू तौ थूं कठै बैठैला ? चौधरीं सोच में पडग्यौ। थोड़ी ताळ विचारनै पडूंतर दियौ-जै म्हैं उण ऊंड़ोड़ा खाड़ा में बैठग्यों तौ थूं कठै बैठैला ? चौधरी बौल्यौ-म्हैं भळै पांचके हाथ ऊंडौ धैड़ खादनै नीचे बैठ जावूंला ? रावलौ तो सदा ऊंचा ई बिराजौला? पण ठाकरसा नै फेर ई धीरज नीं व्हियों। बौल्या-हां रे चौधरीं, जै म्हैं ऊंडोड़ा धैउ़ में बैठग्यो तौ थूं पछै कांई करैला ? चौधरीं इण दपूचा आगै कायो व्हैग्या। उणनै जूंंझल छूटी। बैड़ाई सूं जवाब दियौ-म्हैं तो घड़ी-घड़ी आज इज कैवूं के रावलै ऊचां ई बिराज्या रैवो, पण आपरी मरजी ऊंडोड़ा धैड़ में बैठण री हैं, तो खुसी सूं उठै बिराजौ। म्हैं धूड़ न्हाकियां पूठैं लांठी सिलाड़ी सिरकाय देवूंला। इण तरै चौधरीं चतराई सूं ठाकर सा ने चुप कर दिया।

वीरमदेव विड़द

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

जरणी धर जाळोर री, जीतां अरि पग जाय।
लाजै मावड़ लोरियां, कुळ काळस लग जाय॥
भारत रचियां ही भड़ां, भारत रुप कहाय।
भारत सूं के दिर डरां, रहणी भारत मांय॥
प्रमलै सौरभ पौढियौ, आजादी री आंण।
जलम घूंट में जांणियौ, समर चढ़ंण चहुआंण॥
वरदायक वर वीरता, प्रथमी जस पूजाण।
सिर पडियां लड़ियौ समर, वीरमदेव चहुआंण॥
रंण बंका थैं राखियौ, मात भौम रो मांण।
अवसल वीरम आप री, पिरलै लग पहचांण॥

चार बांस चोवीस गज, अंगुळ अष्ट प्रमाण।
ईते पर सुळतान है, मत चूकैं चौहाण॥
ईहीं बाणं चौहाण, रा रावण उथप्यो।
ईहीं बाणं चौहाण, करण सिर अरजण काप्यौ॥
ईहीं बाणं चौहाण, संकर त्रिपरासुर संध्यो।
ईहीं बाणं चौहाण, भ्रमर ळछमण कर वेध्यो॥
सो बाणं आज तो कर चढयो, चंद विरद सच्चों चवें।
चौवान राण संभर धणी, मत चूकैं मोटे तवे॥
ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो गोकुळ में कानह।
ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो हथह भीम कर॥
ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो राम रावण संतावण।
ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो अहंकारी रावण॥
बरसी तीस सह आगरों, लछन बतीस संजुत तन।
ईम जपे चंद वरदाय वर, पृथ्वीराज उति हार ईन॥

पूराणो घणो स्याणो, राख ली लाज

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रो कारोबार देस-दिसावर फैलियोड़ो हो। उणरै एक बेटो हो। ठोर-ठोर उणरी गद्दिया हीं, पण उणरै स्वरगसिधारण रै पछै छोरो ठीक तरीका सूं काम नीं संभालियो। वो पुराणा लोगां नै निकाल नुवा मिनखा नै काम माथे राख दिया। इणरो असर ओ व्हियों कै काम-काज खराब व्हैवण लागो। एक दिन सेठ रै बैटा माथै दस हजार रूपिया री दरसन हुंडी आई। गल्ला में रूपिया नहीं हा, पण हुंडो सिकारनी जरूरी हीं। छोरो उदास मुंडा सू घरै गियो, उणरी मां कह्यों कै बात हैं ? वो सारी बात बतलायी तो मां कह्यो रूपया रा जुगाड़ में थोड़ो अैम लाग जावैला, तू आपरी गद्दिया माथै कागद लिख अर रूपिया भेजण वास्ते कह, पण इतरा टैम हुंडी खड़ी नीं रै सके, इण सारू जुणोड़े बूढे मुनीम नै बुलावा। बूढ़ा मुनीम रै घरे बुलावो भेजियो ग्यो। मुनीम री घणी उमर व्हैगी ही। ठंड रो मौसम हो, इण सारू बुढो मुनीम रूई अर शाला ओढणै जाड़ा रै मारै कांपतो-कांपतो सेठी री पेड़ी माथै पूगियो। उणमें काम करण री आसग नीं ही। मुनीम कह्यों आज घणी ठंड हैं, पेड़ी माथै हीं सिगड़ी मंगवाओं ? मुनीम रै सारू सिगड़ी मंगवाई गई। हुंडी लावण वालो मिनख हुंडी बूढा मुनीम रै हाथ में दी अर मुनीम कांपता हाथां सूं हुंडी पढण लागौ। मुनीम रा हाथ ठंड सू कांप रिया हा। हुंडी उणरै हाथ सू छूट सिगडी मांय पडगी। हुंडी जल-बग गी जणै मुनीम घणों दुख परगट करियो वो उणसूं कह्यो भाई । हुडी म्हारा हाथ सूं सिगड़ी माय पडऩै जलगी, अब थै उणरी पैठ मंगवा लो। पैठ आवैला जणै थाणै रूपिया मिल जावैला। हुंडी लावण वालां मिनख आ बात नीं जान सकिया कै बूढ़ौ मुनीण जाण-बूझणै हुंडी सिगड़ी मांयने डाली है। सेठ री फरम घणी मोटी हीं, मुनीम रो भारी परभाव हो। वो मिनख वठा सूं चलो गियो। उणरै जावण रै पछेै सेठ रो बैटो मुनीम रा पग पकड़ लिया अर उणणै पाछौ बड़ा मुनीम री गादी माथे बिठा दियो। थौड़ा टेैम रे पछै सैठ रो कारोबार उणी तरा सूं चालण लागौ। देस-दिसावर में सेठ रा छोरा री पैचाण व्हैगी।


पाणी रे काचे-पाके सूं करी छोरे री पैचाण

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक डोकरे आप रे धरा जा रहï्यो हो। रास्ते में उणनै एक छोरो मिल्यो। दोनूं सागै हो लिया। वै जिकै गांव जा रहï्या हां, वो चार कोस हो। छोरी डोकरे ने कहï्यों, बाबा, गंाव चार कोस पर है, दो कोस थे म्हनै कांधे पर चढ़ा ल्यां, दो कोस म्हैं थाने चढ़ा लेस्यूं। डोकरो कहï्यो, थू तो जवान है, म्हनै चढ़ा लेसी, पण म्है कीकरण थनै चढाऊंला, रहण दे भाया। बीच में एक जगा नाठो आयो तो डाकरो जूता आपरे हाथां में ले लिया, पण छोरो पैर्या हीं राख्या। डोकरो मन में सोची, ओ छोरो मूरख है, नया जूता पानी में गीला कर र खराब कर लिया। थोड़ी देर में दोनूं गांव पूरा ग्या। डोकरो छोरे ने इशारे सूं आपरो घर बतायो, तो छोरो एक कांकरी घर कै किवांड पर मार दियो। किवांड डोकरे री छोरी खोल्या। छोरो पाणी मांग्यो। छोरी पाणी लेयर आई तो छोरो पूछ्यो, पाणी काचो है के पाको ? छोरी भी हुशियार हीं, बोली, पाणी काचो है। डोकरो ऐ बाता सुण र हैरान होग्यो। वो छोरी ने मांयने ले जाय र कहï्यो कै छोरी मूरख है, रस्ते में इण तरहा री बातां करो। छोरी हुशियार हीं, मा बापू ने कैवण लागी, बाबा, छोरो मूरख कोनी, हुशियार है। वो आधे रस्ते थाने चढ़ावण और आधे रस्ते खुद चढ़ण री बात यूं करी हीं कै आधे रस्ते थे की बोलो, आधे रस्ते म्हैं कीं बोलू तो रस्तो आराम सूं कट जावैला। पाणी रे मांय जूता इण वास्ते नीं उतारया, क्यूंकि पाणी रे तल रे मांय कोई चीज सूं पगां में चोट लाग सके। जूता मिनख री जान सूं बता कीमती कोनी हुया करै। गांव आया पछै छोरो किवांड पर कांकरो फेंक्यो, उण टैम म्हैं न्हा रेया हीं। म्हैं फटाफट बारै निकळ कर कपड़ा पैरय और बारे आय र किवांड़ खेल दियो। घरै आतां ही छोरो पाणी लावण पर पूछये कै पाणी काचो है या पको, इण रो मतलब यो हैं कै म्हैं कुंवारी हूं या ब्याहता, म्हैं पडूतर दियो, पाणी काचो है, यानी म्हैं कुंवारी हूं। डोकरो पूरी बात समझग्यों अर छोरी सो ब्याह उण छोरे सू कर दियों। दोनूं राजी सुखी रैवण लाग गया।


बादशाह री यूं व्हीं पहचान

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक पठान नै घोड़ा री जोरदार पैचाण की। पण किणी कारणा सूं उणनै धंधा में घाटो व्हैगियो। उणरी मां रै कन्नै थोड़ा रिपिया बचायोड़ा हां । एक दिन पठान मां सू रिपिया लिया अर घोड़ा लेवण सारू निकलियो। घणो घूम्यो पण उणनै कोई घोड़ो रास नी आयो। फिरतो-फिरतो वो एक रात धोबी रै घरे रूकियो। रात राा उणनै लक्खी घोड़ा री टाप सुजीणी। वो प्रकास करनै देखियो तो धोबी रे गधां रै माय एक बछड़ो हो। दिनूगै वो दस रिपिया में बछड़ो धोबी सूं ले लियो। वो उणनै खिलायो पिलायो। एक बरस में वो मोटो तगड़ो व्हैगियो। वो उणनै बेचण सारू बादसाह रै कनै गियो। बादशाह रै कनै एक आलिम आयोड़ो होद्ध वो एक तीर सूं निशाने लगा मोर रो चितराम बणा दियो। बादसाह उणरै एक सेर आटा अर पइसा भर घी रोज बांध दियो। पछेै वो चितराम दिखाया तो उणरै पांच कपड़ा बणवा दिया। उणनै दुख व्यिहों कै राजा उणरो मान बिगाड़ दियो। एक दिन बादसाह री सवारी निकली पठान आपरा घोड़ा लेयर शामिल व्यिहों।् पारसी बादसाह सूं कह्यो लक्खी घोड़ा री टाप सुनाई देवे है। बादसाह उणसूं घोड़ो ढूंढ़ लावण रो कहïïयो। परखी घोउड़ो राजा रै सामी हाजिर कर दियो। बादशाह नै घोड़ा घणो पंसद आयो। पारखी नै इनाम रै रूप में एक चारपाई दिलवा दी अर पठान सूं सवा लाख रिपिया में घोड़ो खरीद लियो। एक दिन उस्ताद कहï्यों म्हैं एक हुनर जाणूं। म्हैं मिनख देख बता सकूं कै वो मां-बाप री औलाद हैं या वर्णसंकर। बादशाह कह्यों तड़के म्हारे दरबारियां री पैचाण करजे। रात रा सगला दरबारी पारखी रै घरै पूग्या अर उणनै घणा रूपिया देयर आपरी बात कैवण सारू राजी करियो। पारखी दूजै दिन दरबार में बादसाह सू कहïï्यो आप भटियारा रा बैटा हो। झूठ बोलू तो मां नै पूछ लिरावो। बादसाह उणी टैम आपरी मां सू साची बात पूछण लागौ। मां कहï्यों-बेैटा तू थारे बाप रो हीं पण सामी एक भटियारो रैवतो व्है सके उणरी छाया पडग़ी हों। वो पारखी सू राज पूछयों जणै वो कहियो कै आप जिको इनाम दियो उणसूं आ बात जाणी। बादशाह नै घणी सरम आई वो पारखी नै घणो इनाम दे विदा करियो।