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पाणी रे काचे-पाके सूं करी छोरे री पैचाण

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक डोकरे आप रे धरा जा रहï्यो हो। रास्ते में उणनै एक छोरो मिल्यो। दोनूं सागै हो लिया। वै जिकै गांव जा रहï्या हां, वो चार कोस हो। छोरी डोकरे ने कहï्यों, बाबा, गंाव चार कोस पर है, दो कोस थे म्हनै कांधे पर चढ़ा ल्यां, दो कोस म्हैं थाने चढ़ा लेस्यूं। डोकरो कहï्यो, थू तो जवान है, म्हनै चढ़ा लेसी, पण म्है कीकरण थनै चढाऊंला, रहण दे भाया। बीच में एक जगा नाठो आयो तो डाकरो जूता आपरे हाथां में ले लिया, पण छोरो पैर्या हीं राख्या। डोकरो मन में सोची, ओ छोरो मूरख है, नया जूता पानी में गीला कर र खराब कर लिया। थोड़ी देर में दोनूं गांव पूरा ग्या। डोकरो छोरे ने इशारे सूं आपरो घर बतायो, तो छोरो एक कांकरी घर कै किवांड पर मार दियो। किवांड डोकरे री छोरी खोल्या। छोरो पाणी मांग्यो। छोरी पाणी लेयर आई तो छोरो पूछ्यो, पाणी काचो है के पाको ? छोरी भी हुशियार हीं, बोली, पाणी काचो है। डोकरो ऐ बाता सुण र हैरान होग्यो। वो छोरी ने मांयने ले जाय र कहï्यो कै छोरी मूरख है, रस्ते में इण तरहा री बातां करो। छोरी हुशियार हीं, मा बापू ने कैवण लागी, बाबा, छोरो मूरख कोनी, हुशियार है। वो आधे रस्ते थाने चढ़ावण और आधे रस्ते खुद चढ़ण री बात यूं करी हीं कै आधे रस्ते थे की बोलो, आधे रस्ते म्हैं कीं बोलू तो रस्तो आराम सूं कट जावैला। पाणी रे मांय जूता इण वास्ते नीं उतारया, क्यूंकि पाणी रे तल रे मांय कोई चीज सूं पगां में चोट लाग सके। जूता मिनख री जान सूं बता कीमती कोनी हुया करै। गांव आया पछै छोरो किवांड पर कांकरो फेंक्यो, उण टैम म्हैं न्हा रेया हीं। म्हैं फटाफट बारै निकळ कर कपड़ा पैरय और बारे आय र किवांड़ खेल दियो। घरै आतां ही छोरो पाणी लावण पर पूछये कै पाणी काचो है या पको, इण रो मतलब यो हैं कै म्हैं कुंवारी हूं या ब्याहता, म्हैं पडूतर दियो, पाणी काचो है, यानी म्हैं कुंवारी हूं। डोकरो पूरी बात समझग्यों अर छोरी सो ब्याह उण छोरे सू कर दियों। दोनूं राजी सुखी रैवण लाग गया।