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गीत जांगडॉ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh


सिध्ध कुंजिका स्तोत्र का भावानुवाद।

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

सिध्ध कुंजिका स्तोत्र का भावानुवाद।
सिध्ध कुंजीका सांतरी, करण सकळ सुभ काज।
गुरु चावि गढवी तणी, मेहाई महाराज ॥265
चंडी जाप है चारणी, तारण भव जळ मां ज।
अवस नाम आनंदघन, मेहाई महाराज ॥266
कवच अरगला कीलकां, रो सब है मा राज।
रिधू राज राजेसुरी, मेहाई महाराज ॥267
सुकत ध्यान अर न्यास सब, अरचन वंदन आ ज।
सरस नाम सुखरुप है, मेहाई महाराज ॥268

कथन नाम किनीयाण रो, फळै पाठ दुरगा ज।
जपौ निरंतर जोगणी, मेहाई महाराज ॥269
मारण वश अर मोहनं, सबरा सच्चा राज।
डणंकंती डाढाळ है, मेहाई महाराज ॥270
थंभण उच्चाटन थुं ही, रहस सकळ रिधू राज।
किनीयाणी करुणाकरा, मेहाई महाराज ॥ 271
नमो नमो रुद्रांणी ने, मधु मारण थुं मां ज।
अभयंकर अखिलेशरी, मेहाई महाराज ॥272

खळ कैटभ खप्पर भखा, मारण मां महिखा ज।
आई आनंदा उमा , मेहाई महाराज ॥273
 हणणी शुंभ निशुंभ खळ, जागत जोगण मां ज।
महादेवी महाकालिका, मेहाई महाराज ॥274
ऐं ह्रीं क्लीं  मंत्रात्मिका,अवनि पालिका आ ज।
काम रुपिणी कामदा, मेहाई महाराज ॥275
बीज रुप बीजांकुरी ,नमन नमन माता ज।
सृजन पाळ संहारिणी, मेहाई महाराज ॥276
चामुंड घाती चंड री, यें कारी वरदा ज।
अभय  प्रदा विच्चै उमा , मेहाई महाराज ॥277
मंत्र रुपिणी मावडी, जंत्र रुप पण मां ज।
तंत्र रुप तुं त्रंबका, मेहाई महाराज ॥278
धां धीं धूं तुं धूरजटी, शगति रुप शिवाज।
धरा ध्रुजाणं धा वडी, मेहाई महाराज ॥279
वां वीं वूं वागीशरी, विण वादनी वा ज।
कविता री कमनीयता, मेहाई महाराज ॥280
क्रां क्रीं क्रूं तुं काळका, शवारुढ शिवा ज।
अवर न अब उचर सकूं, मेहाई महाराज ॥281
 शां शीं शूं शुभ कारिणी, सारा सारे काज।
चारण री चिंता मणि, मेहाई महाराज ॥282
 हुं हुं हुं हुंकारिणी, तुं ही है त्रिपूराज।
जं जं जं जंभ नादिनी, मेहाई महाराज ॥283
भ्रां भ्रीं भ्रूं  तुं भद्रका,भैरवी आप भवा ज।
भव भय भंजणि भगवती, मेहाई महाराज ॥284
अं थुं अंबा रुप है, कं रुपां करूणा ज।
चं टं है थुं चंडिका, मेहाई महाराज ॥285
तं रुपा तुं तंत्र है, पं परिपूरण मां ज।
यं रुपा यशदायिनी, मेहाई महाराज ॥286
शं रुपा मां शाम्भवी, विं सुं दस विधा ज।
दुं रुपा दूरगा सदा, मेहाई महाराज ॥287
 ऐं ऐश्वर्य अपावणी,वीं वरदाई मां ज।
हं रुपा हंस वाहिणी, मेहाई महाराज ॥288
क्षं रुपा खय कारणी, धीजाग्रणी वड धा ज।
तोड तोड मन तिमिर हर, मेहाई महाराज ॥289
सरळ ह्दय री स्वामिनी,  गरळ रुप खळ गाज।
मन रा कलिमल मेटणी, मेहाई महाराज ॥290
 मन रा सब शंशय मिटै, दिल जगमग दिवलाज।
अंतस आलोकित ईहग, मेहाई महाराज ॥291


पां पीं पूं थुं पार्वती, पियूष वरषिणी मां ज।
अवल नाम आनंदघन, मेहाई महाराज ॥292
खां खीं खूं थुं खेचरी, रहो अगोचर राज।
काज भगत करता रहो, मेहाई महाराज ॥293
सां सीं सूं सिध सतसती, रटत नाम रिधू राज।
मंत्र सिद्ध म्हारा हुवै, मेहाई महाराज ॥294
टूमण कामण टोटका, मंत्र तंत्र सब मां ज।
वड थड म्हारै विसहथ, मेहाई महाराज ॥295
नमो तंत्र नारायणी, मंत्र रुप हे मां ज।
यंत्र रुप आरासुरा, मेहाई महाराज ॥296

स्वरचित
मेहाई सतसई से

आव गज़ल थुं आव अठे

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आव गज़ल थुं आव अठे🌺
छम छम करती पांव अठे।
आव गज़ल थुं आव अठे।
मन री बातां थनें सुणादूं,
नहीं कपट रा दाव अठे।
दाद ,कहकहा ,वाह वाह री,
अपणायत अणमाव अठे।
मन रा सुर थुं मांड मुळकती,
लय री झांझ बजाव अठे।
थाकी व्हैतो थुं सुस्ता लै,
बड पीपळ री छांव अठे।
जाजम जूनी महफिल माडां,
कोड करे अणमाव अठे।
लय री गहरी लहरी ठहरी
एहडा है घण गांव अठे।
रखसां थानै सिर रे माथै,
वळै पळोटूं पांव अठे।
आवै तो जाजै मत पाछी,
कर मन में ठहराव अठे।
नरपत रे मन रहै निरंतर,
मिळसी आदर भाव अठै॥

वैतालिक

आव ग़ज़ल थू आव अठे

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याद कबूतर चिट्ठिया

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सबद अमीनो साइया

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