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मातृभाषा अर विदेसी भाषा रै उळझाड़ मांय

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

आपणै ग्रंथा मांय बच्चिया रौ लालन-पालण अर ताड़ण पर जोर हैं। अठै गौर तलब है क आज बच्चा रौ लालन-पालण रो तो पतौं ई गायब हो गयै क्यूंकि मों अर बच्चा रै बीचै अंग्रेजी पालणां आं ग्या। मां रे पलंग पर बच्चियां नै जगै नीं मिल सकै। पैला कनै सूती मां अर बच्चियों बिचे बेक घड़कणां री भाषा हुती। लौरी साथै थापी री भाषा रो अेक रंग हुतो। दादा-दादी, मां-बाप, बुआ-मासी, ताऊ जी कई रिस्ता हुता। अंग्रेजीयत अर अेकळ परिवार में अबै कीं नी। ताड़ना रौ जिम्मो लियौ है कान्वेंट स्कूल। इंग्लिष मिड़ियम रा स्कूल। जका बरसाती कुकुरमता जैड़ी फसला ज्यूं कस्बा, गांवां तक उग ग्या है। मैनरस रै नांव सूं पीर रैया हैै बच्चा...पण संस्कृति ? कांई पैला स्कूंला मांय सस्कार नीं दिया जवता। इण स्कूंला माय साइंस तौ पढ़ाई जावै पण आपणौं मारल हर तरै सूं डाउन राख्यौ जावै। स्ककूलां मायं मातृभाषा बोलण पर जुर्मानों हुवै है। गंवार अर सभ्य भाषा रो भाव उभर रैयौ हैं। गंवार भाषा गिणीजै क्यूं ? क्यूं नीं हुवै म्हां अंग्रेजी ने माथेै जौ चढ़ाय दी है। इण भाषा रै कारण बच्चा आपरै घरां अर रिस्तेदार बिचै अजनबी बण र रैय जावै। सुबै चिड़ियाघर में टाबरियां ने लेयर गई। म्हैं अेक बच्चा ने बांदरा कनै देखर पूछियौ ‘बेटा आपणी भाषा में मंकी अर डंकी ने कांई कैवे ? बो आपरी मां रौ मुंड़ो जोवण लागौ। मासी आपने कांई पतो म्हारा टाबरिया अंग्रेजी स्कूल में पढ़े है। इणां वासते तौ हिंदी रौ काळौ आखर भैंस बरोबर है‘ बा घणी गूमेज सूं बोली ‘म्हारा बच्चिया तौ अंग्रेजी में ई खाईंग, अंग्रेजी में ई पढ़िंग अर अंग्रेजी मांय ई रैविंग।‘ सुणर मांय रै मांय हंसी रोकती म्है कैयौ, थारा टाबर थनै अंग्रेजी खूब सिखाई है। जिंदगी री पैली पाठषाला तो घर हुवै अर मां पैली गुरू। यो कथन आज पलटी खा ग्यौ। मां-बाप‘ बर ‘मम्मी-डेडी‘ कांई दो भाषावां रा दो सबद संबोधन मात्र है ? कांई किणीं भी देस री भाषा ने आपणी भाष ने छोड़र ई अपणाणौं ई आपणी संस्कृति रैयगी है। म्हंै तो कैवूं क कोई भी संस्कृति आपरी भाषा रो अलग अस्तित्व राख सकै। मजै री बात है, अबै ओ हाल है क किण ने ई गुस्सौ आवै तो बो ई अंग्रेजी में बोलण ढूकेै, अंग्रेजी में गाळिया काढे भलई मतलब जाणै चाहे नीं जाणै। बाजार में अेड़ा भी कई निजर आवै है जकी अंग्रेजी में बोले, भलई उण रो अरथ बदळ ावै। अंट-संट बोलर लोंगां री हंसी रो कारण बण जावै। और तौ और बहुराष्ट्रीय कंपनीया अर पूंजीवाद रो विरोध करणीयां पाणी पी-पीयर हाका करणवाला, स्वदेसी रा नारा लगावण वाला, हिंदी ने ओढण-बिछावण वाला, हिंदी रो पक्ष लेवण वाला लोग भी अंग्रेजीयत री मानसिकता सूं ग्रस्त है। म्हां अग्रंेजी भासा रो विरोध नी करां। म्हां जाण हां कै अंग्रेजी में साइंस रो ज्ञान रो विस्तृत रूप में मिले हैं। इण वास्तै विद्यार्थिओंने अंगेजी सूं घणौ फायदो मिलो। अंग्रेजी में विज्ञान पढ़नो जरूरी है। पण आपरी संस्कृति नै कायम राखणौ ई जरूरी है। साक्षरता अर सांस्कृतिक विरासत ने विद्यार्थिओं तक पहुंचाण सू पूर्व उणांने उणां री मातृभाषा देनी होसी। राष्ट्रीय भावना सूं ओतप्रोत कीं लोग, उच्चाधिकारीं अर केंद्रिय शासन कानी सूं कई क्षेत्रां में हिंदी भासा रो प्रयोग लागू कारण हिंदी भाषा अंग्रेजी ने अंगेठौ बतावती प्रगति रै पथ माथै बढ़ रैयी है।