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संत री साख री मिल गी सेठ रै छोरा छोरी ने मुगती

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक नगर में रातीराम नाम रो सेठ रैवतौ हौ। उणरै घरै छौरौ जलमियौ तौ ‘बै-माता‘ अंछर डालण सारू आई। सेठ बे-माता सू पंूछियौ आप कुण हौ। ‘बै-माता‘ कह्यौ, मै ‘बै-माता‘ हूं और थ्हारा बेटे मांय अंछर रै बारै में पूछियौं तौ ‘बै-माता‘कह्यौं थ्यारै मरण रै पछै थारौ छोरो सिकारी बनेळा, जिनावर मारनै पेट भरेला। ‘बै-माता‘ री बात सुण सेठ कह्यों म्हारै अठै तो जिनावर भी भूखा नीं सोवै, अेड़ो कदी नीं व्है। थ्हारा अंछर झूठा हैं। दूजी बार सैठ रै घर छौरी जलमी। ‘बै-माता‘ पाछी आई। सेठ पूछियों तो ‘बै-माता‘ कह्यौ, आ खोटा काम करैला। सेठ नै आ बात भी नीं जची। थोड़ा टैम पछै सेठजी सुरग सिधार गिया। उणरौ सगळौ धन खत्म व्हैगियौ। सेठ रौ छौरौ शिकारी बण गियौ। वौ जिनावर मारतौ अर आपरै पेट पाळतौ। छोरी खोटा काम में पड़गी। एकर एक संत जो, उण सेठ रा सथी हा, वे वठै आया। मिनखा सूं सेठ रौ पूछियौ तौ उणनै सगळी बात ठा पड़गी। संत वठै हीं जम ग्या। सिंझया पोर जद सेठ रौ छौरौ जंगल सूं पाछै आयौ तौ उणनै आपरी ओलखाण बताई। दूजे दिन संत भी उणरै सागै जंगल गिया। संत कह्यौ थ्हारै हाथ सूं एक जिनावर मरैला, अेड़ो थ्हारा भाग में है। इण सारू थूं छोटा मोटा जिनावर मत मार। वठै चिड़ी-कमेड़ी सूं लेयर घणा जिनावर उणरै आगै आया पण संत हर बार उणरौ हाथ पकड़ लियो। उणनै कोजी भूख लागी हीं, पण वौ मजबूर हौ। सिंझया व्हैती-व्हैती वठै एक हाथी आयौ जणै वो तीर मारियौ तौ हाथी चित व्हैगियौ। उणरा माथ्ज्ञा सूं घणा गजमुक्ता निकलिया, इणणै बैचणै सेठ रौ बेटौ पाछौ मालदार बण गियौ। अगली बार संत सेठ री छोरी रैकने पूगिया। उणनै कह्यौ, थ्हारै घरै जौ भी आवै थूं किंवाड़ मत खोलजै। वा यूं ही करियौ। पैला कम रिपिया रा देवाल आया पछै हजारों रिपिया देवण वाला आया पर वा किवाड़ नी खोलिया। बे-माता रा अंछर खोटा नीं व्है इण सारू खुद भगवान मिनख रा वेष में आया, पण वो किवाड़ नीं खोलिया। वा कह्यौ अगर थ्हैं भगवान हो तो किवाड़ बंद होवण पर भी अंदर आ सकौ। जद भगवान् मायनै आयनै उणनै दरसन दिया अर उणरी मुक्ति व्हिई।


बखत माथै सेठ अेड़ौ चलियौ दांव

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक गांव में एक सेठ पैलवान हो। गांव में कुश्ती करण आवण वाला सगळा पहलवानों नै वौ पछ़ाड़ियौ हो। पण अबै सेठ री अवस्था ढलन लागी हीं अर सागै ताकत भी कम व्हैगी हीं। उणसूं जलण वाला मिनखा मैं आ बात ठाह पड़ी तौ वै मौकौ साजण री सोची। वे दूजा गांव सूं एक पैलवान ने न्यौता दियौ। एक दिन गांव में एक नुंवौ पैलवान आयौ अर सेठ नै कुश्ती करण सारू ललकारियौ। सेठ सोचियौ आज तक री इज्जत धूड़ में पड़ जावैला। सरीर में ताकत नीं ही, वो घणी चिंता में पड़ग्यौ। इज्जत रै खातर वो उण पैलवान री चुनौती स्वीकार ली। सेठ सूं जलण वाला मिनख घणा खुश व्हिया। गांव में चरचा चालगी कै अबै सेठ क्हैं तिरी ताकत हैं, ठा पड़ जावैला। कुश्ती में जीतण वाना नै 500 रिपिया रौ इनाम मिळणौ हौ। थोड़ा दिन पछ़ै, अखाड़ा में कुश्ती रौ आयोजन व्हियौ। कुश्ती देखण पूरौ गांव जुटियौ। टैम माथै कुश्ती शुरू व्हिई। दोनां पैलवान आपस में गुथ गया। सेठ जद देखियौ कै जीतण री आशा नीं है तौ वौ दूजा पैलवान रै कानां में धीरे सूं कह्यौं, थूं जीत जावैला तौ थ्हनै पांच सौ रिपिया हीं मिलेळा, पण हार जावै तौ क्है थ्हनैं एक हजार रिपिया इनाम में दूंला। पैलवान बातां में लाग गियौ। वौ मन में सोचियौं मैं तो नौसिखियों हूं, कठी हारूला, कठी जीत जाऊंळा। क्हैं जाण बूझ नै हार भी जावूं जौ क्हनैं कई फरक पड़ै, हजार रिपिया घणा काम आवैला। यूं सोच नै वौ सेठ नै जिताय दियौ। सेठ आपरी मूंछां माथै ताव देवण लागौ तौ ईष्र्या करण वालां रा मूंडा उतर गिया। सेठ पांच सौ रिपिया लेयर आपरै घरै आयौ। थोड़ी देर पछै पैलवान सेठ रै पाग पूग ग्यौ। अर उणरी जुबान रै मुजब एक हजार रिपिया मांगिया। सेठ व्यंग्य सूं हंसण लागौ अर पैलवान सूं कह्यौ, बावला, काहौ रा रिपिया लैवणै आयौ है ? वौ तो बखल रौ दांव हौ, जो चाल गियौ। पैलवान उतरियौ मूंड़ौ लैयर घरे गियौ, वौ घणौं पछतायौ के पांच सौ रिपिया भी आपरी मूरखता में गमा दिया, सेठ री गांव में इज्जत घणी बढ़गी, लोग उणसूं जितरा ड़रता उणती ज्यादा डरण लागा।