राजिया रे दूहा सारु http://rajiaduha.blogspot.com क्लिक करावें रज़वाड़ी टेम री ठावकी ख्यातां रो ब्लॉग आपरै सांमै थोड़ाक टेम मा आरीयो है वाट जोवताईज रौ।

मर्यादा पुरूषोतम प्रभू श्रीरामचन्द्रजी रा दोहा :-

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

कर हेत झाली कलम ने , धरे सरसती ध्यान !!
महर कर शारद मीर ने , सदबुध दिजो शान !!१!!
गिरिजा सतन गुणेश को , मनसूं लेऊं मनाय !!
कारज पुरण किजीयो , ऊमासुत झट्ट आय !!२!!
सब देवन की शरण में , म्हें अब नमावूं माथ !!
गुण रामरा गावस्यूं , सबेही रहीजो साथ !!३!!
मनउजळ दशरथ महपति , रघुकुळ अनमी रूप !!
परम न्याय नीति प्रिय , भलपण वंकोज भूप !!४!!
राजा रे त्रय रांणीयां , कौशल्या प्रथम कहाय !!
केकई सुमित्रा कांमणी , भूपत रे मन भाय !!५!!
जनम धरेया जद जगत में , लायक च्यारूं लाल !!
मन हरखावे मेदनी , त्रंबागळ वाजेया ताल !!६!!
गीत राग शुभ गावणो , अवध घणो उछरंग !!
वाजा छत्रीसे वाजिया , सुर ताल लय संग !!७!!
दशरथ रा दरबार में , गावे ज गायक गीत !!
दान मान सब देवणो , राज तणी आ रीत !!८!!
तिण पळ विप्र तेड़ावियो , दन चढते घटी दोय !!
पांचे ही अंग पंचांग रा , जोशी विध कर जोय !!९!!
जोशी पोथी जोवतां , हरख वधे मन हेत !!
दशरथ छोळ दरियाव ज्यूं , दान प्रगळो देत !!१०!!
मीठा मीर डभाल