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बे माता रा अछर झूठा नीं होवै

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ एक मातामा री घणी सेवा करी। सेवा करता करता घणा दिन व्हैगिया। एक दिन मातमा को सेठ रै हाथ में रेखावां दिखी जो मातमा नै बड़ौ पिछतावौ व्हियौं कै सेठ म्हारी इतरी दिन सेवा करी पण म्हैं इण नै कुछ नीं दे सकियौ। दो दिन बाद ही इण री उमर पूरी व्है जावैला। सेठ पूछ्यौं तो मातमा ने आपरै पछतावै रौ कारण बता दियो। सेठ घणी चिंता करी पण उण नै भी मातमा रै माथै भरौसौ हौ। मातमा सेठ नै सागै लेयर ब्रहमाजी रै कनै गिया। ब्रहमाजी मातमा रौ घणौ आदर सत्कार कर्यौ, पण सेठ री उमर बढावण री बात टाल गिया। जद दोंनू विष्णुं जी कनै पूगा। विष्णु जी रै उठै मातमा रौ घणौं आदर सत्कार व्हियौ, पण उमरा बढ़ावण री बात टाल गिया। व्है कह्यौं, महादेवजी चावै तौ सेठ री उमर बढ़ा सके, म्है तौ इण री उमर नीं बढ़ा सकू। पछै वै महादेवजी रै कनै केलास परवत माथै पूंगा। वठै माता पारवतांजी शिवजी री पूजा कर रैयी ही। महादेवजी तपस्यां में लागोड़ा हा। मातमा आया तो उण रौ घणों सतकार करियौ। आवण रौ कारण पूछियौं। मातमा पूरी बात बतलाई तो महादेवजी भी लारै हट ग्या। महादेवजी कह्यौं, उमर रा अछर बेमाता डालै हैं, इण सारू वे ही इणमें हेर-फेर कर सकें। दूजौ कोई की नीं कर सकैं। अब वै बेमाता कनै रवाना व्हिया। बेमाता एक भाखर माथै रेवजी ही। भाखर में घुसण सारू एक छोटा खाड़ा सू व्हैणै गुजरणौ पड़तौ हौ। मातमा तो खाड़ा सूं व्है नै भाखर में चला गिया, पण सेठ रै माथै एक मोटो भाटौ पड़ियौं, अर उणरी उणी टैम मौत व्हैगी। जिण टैम मातमा बैमाता कनै पूगा। बेमाता जोर जोर सूं रो रैयी ही, पण उण नै देखतां ही हसण लागी। मातमा इणरौ कारण पूछियौं, बेमाता कह्यौं, इण सेइ रे माथै म्हैं लिख्या हैं कै ओ सेठ एक मातमा रै सागै अठै आवैला जद भाखर रौ भाटा गिरण सूं इणरी मौत व्हैला। पछै म्हैं सोच्या ओ कीकर व्हैला, इण वास्तै म्हैं रो रैयी हीं, आज म्हारा अछर झूठा व्है जावैला, क्योंकि अेड़ा बानक बणना घणा दौरा हैं। भला आतमा अेक मिनख नै लेयर अठै किकर आवैला, पण अब आप अठै आय गिया हौ तो सेठ री मौत व्है ग्यी। म्हारा अछर साचा व्हिया, इण सारू म्हैं हंस री हूं। बेमाता रौ जवाब सुण मातमा चैकिंया। दो दिन की अवधि पूरी व्है गी ही। सेठ री मौत व्है चुकी ही।


सौतेली मां बुरो करण चाली, पण भलौ व्हैग्यौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

ऐक राजा रो सोलह साल रौ कुंआरौ छौरो मर गियौ। पंडत राज सूं कह्यौं कंवर सा‘ब ने यूं नीं जलावनो चाहिजै। उणरौ ब्याव व्ळैणौ चाहिजै। पैला ऐकआक री लकड़ी रै सागै ब्याव व्है जावै। पछै आक री लकड़ी रूपी बीनणी रै सागै राजकुमार रौ शव जलावणौ चाहिजै। राजा कह्यौं, ऐड़ी बात हैं तो म्हैं आक री लकड़ी रै सागै क्यूं, सागेली छोरी रै सागै ब्याव करवा दूं ला। राजा ढिंढोरौ पिटव दियौ कै जो सुरग सिधारियौड़ा राजकुमार नै सागै आपरी छोरी रो ब्याव करेला, उणनै एक लाख रिपिया राज कोष सूं दिया जावैला। एक बिरामण रा दूजौ ब्याव व्हियौ हौ। उणरै पैली लुगाई रै छोरी ही। बिरामण दिसावर गियोड़ौ हौ। बिरामाी सोचियौ इणछोरी रौ ब्याव मरियोड़ा राजकुमार रै सागै करवाय दूं जौ एक लाख रिपिया मिल जावैला। बिरामण पूछैला तौ कै दूंला कि बीमारी सूं मरगी। आ बात सोच वो आपरी छोरी रौ ब्याव राजकुमार रै सागै करवा दियौ अर एक लाख रिपिया ले लिया। राजा मरियोड़ा राजकुमार रै सागै छोरी नै चिता माथै चढावण लागा तौ वा राजा सूं कह्यौ म्हारी सौतेली मां लाख रिपिया री आपरी करजदार व्हैगी। आप म्हारौ ब्याव कर दियौ, अब औ राजकुमार म्हारौ व्हैहगयौ। अबै आप लोग अठां सूं जाऔ, म्हैं आपरी मरजी सूं इणरौ दाह करम करूंला। राजा बीनणी री बात मान ली अर वठां सूं वहिर व्हैगिया। छोरी राजकुमार री मरियोड़ी देह नै गोद में लेयर चिता रै माथै बैठ गी। आधी रात रा माहदेवजी अर पारवतांजी निकलिया। पारवतांजी माहदवेजी सूं पूछियौ, आ कई बात। आ यूं किकर बैठी ? शिवजी सगळी बात बताई तो पारवतांजी कह्यौ इणरी मां म्हारज्ञै वरत करती ही, इण सारू राजकुमार नै जीवन देवौ। शिवजी पैलां तौ मना कर दियौ, पण हठ रे आगै उणनै पारवतांजी री बात माननी पड़ी। सुबै-सुबै धण्ी-लुगाई नहावण सारू गिया। राज रा मिनख उणनै देखिया तौ वै भागिया-भागिया राजा रै पास पूगा अर बतायौ कै राजकुमार तो जीवित व्हैगिया। राजा नै विसवान नीं व्हियौ पण मिनखा रै घणौ विसवास दिलावण रै पछै राजा गंगा रै तट माथै गिया। लोग कह्यौं तो वा बात साची निकली। राज दोनां नै सागै ले पधारिया। इण भांत एक कानी तो राजा नै आपरौ छोरौ पाछौ मिलग्या, अर बिरामण री बिना मां री छोरी नै राज मिलग्यो। कैया करै कै कोई कित्तो ही बुरो करण री क्यूं नी सोच ले, ऊपर लौ जिके रो जहड़ो भाग लिखे।


जिण री जैहड़ी अकल, उण नै मिळ्या करे वैहड़ा ही दाम

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

ऐक सेठ रै कन्ने एक नौकर रह्या करतौ। वो राजीना एक ही बात सोच्या करतों, म्है तड़के उठ जाऊं, इत्तो-इत्तों काम करूं, देर रात तक जाय र, बिस्तर नसीब व्हिया करै। इण काम रा म्हनै दस रिपिया माहवार मिळै। सेठजी रो मुनीम खाली चार घंटा आवै, गादी माथै मंसद रै सहारै बैठ जावै। कीं करतो कोनी दिखै, पण सेठ इण नै तीन सौ रिपिया माहवार मिळै है। एक दिन नौकर आप रै मन री बात सेठ ने कैय ही दी। सेठ नौकर री बात सुण र, म नही मन खूब हस्यो। पछै उण नै कह्यौ, थनै थ्हारी बात रौ जवाब काळै देवूंला। दूजै दिन सेठ दिनूंगै ही नौकर से कह्यौ, दरिया माथै जाय र देख नै आ, आज कांई आयौ हैं ? नौकर दौड़ नै गयौ और पाछौ आय नै बतायौ आज एक जहाज आयौ है। सेठ उण नै पाछौ भेज्यौं, जा देख नै आज, जहाज रै माय कांई आयौ हैं ? नौकर फेरूं भाग्यो-भाग्यों दरिया माथै गयो अर जहाज वाळा नै पूछ पाछ नै खबर लायो कै जहाज रै मांय चावल भरियोड़ा है। सेठ नौकर ने पूछ्यौं, चावल किण किसम रा हैं, किण भाव रा हैं ? नौकर इण बात री तपास करण पाछौ दरिया माथै जावण वाळो ही कै इतरे में मुनीमजी आय गिया। सेठ ने मुनीमजी ने कह्यौं, मुनीमजी थोड़ो दरिया माथै कांई आयौ हैं ? मुनीमजी दरिया माथै गिया अर, चावल री सगळी बोरिया खरीद लीवी। बाजार थोड़ौ परवान माथै हौं, मुनीमजी जी वे चावला बोरियां आठ आनै रै मुनाफै मंे हाथौ हाथ बेच दीवी अर मुनाफे रा पंाच हजार रिपिया लाय र सेठजी रै आगे धर दिया। वह नौकर सगळौ नजारौ देख्यो, मुनीम री कला देख र नौकर हक्को बक्कों रेय ग्यौ। सेठ उण नै केवण लाग्यौ, बावळा, थूं एक काम ने चार चक्कर रै मांय भी पूरो कोनी कर्यौं, अर मुनीमजी एक सवाल रो जवाब इण तरै दियो कै सुबह दरिया माथै गिया अर दौपारा तक पाछै आय नै रिपिया पांच हजार गादी माथै रख दिया। अब बता, थनै दस रिपिया और मुनीमजी ने तीन सौ रिपिया ठिक ही देवूं या नीं ? नौकर बिचारौ समझ ग्यौ, कै बैठण रा नीं, मुनीमजी नै अकल रा तीन सौ रिपिया माहवर मिल्या करै। सेठ रौ सीख देवण रो तरीकों भी उण नै समझ में आय ग्यौ। वो जाण ग्यांे, आप-आप री अकल रा ही दाम मिल्या करै।