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सौतेली मां बुरो करण चाली, पण भलौ व्हैग्यौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

ऐक राजा रो सोलह साल रौ कुंआरौ छौरो मर गियौ। पंडत राज सूं कह्यौं कंवर सा‘ब ने यूं नीं जलावनो चाहिजै। उणरौ ब्याव व्ळैणौ चाहिजै। पैला ऐकआक री लकड़ी रै सागै ब्याव व्है जावै। पछै आक री लकड़ी रूपी बीनणी रै सागै राजकुमार रौ शव जलावणौ चाहिजै। राजा कह्यौं, ऐड़ी बात हैं तो म्हैं आक री लकड़ी रै सागै क्यूं, सागेली छोरी रै सागै ब्याव करवा दूं ला। राजा ढिंढोरौ पिटव दियौ कै जो सुरग सिधारियौड़ा राजकुमार नै सागै आपरी छोरी रो ब्याव करेला, उणनै एक लाख रिपिया राज कोष सूं दिया जावैला। एक बिरामण रा दूजौ ब्याव व्हियौ हौ। उणरै पैली लुगाई रै छोरी ही। बिरामण दिसावर गियोड़ौ हौ। बिरामाी सोचियौ इणछोरी रौ ब्याव मरियोड़ा राजकुमार रै सागै करवाय दूं जौ एक लाख रिपिया मिल जावैला। बिरामण पूछैला तौ कै दूंला कि बीमारी सूं मरगी। आ बात सोच वो आपरी छोरी रौ ब्याव राजकुमार रै सागै करवा दियौ अर एक लाख रिपिया ले लिया। राजा मरियोड़ा राजकुमार रै सागै छोरी नै चिता माथै चढावण लागा तौ वा राजा सूं कह्यौ म्हारी सौतेली मां लाख रिपिया री आपरी करजदार व्हैगी। आप म्हारौ ब्याव कर दियौ, अब औ राजकुमार म्हारौ व्हैहगयौ। अबै आप लोग अठां सूं जाऔ, म्हैं आपरी मरजी सूं इणरौ दाह करम करूंला। राजा बीनणी री बात मान ली अर वठां सूं वहिर व्हैगिया। छोरी राजकुमार री मरियोड़ी देह नै गोद में लेयर चिता रै माथै बैठ गी। आधी रात रा माहदेवजी अर पारवतांजी निकलिया। पारवतांजी माहदवेजी सूं पूछियौ, आ कई बात। आ यूं किकर बैठी ? शिवजी सगळी बात बताई तो पारवतांजी कह्यौ इणरी मां म्हारज्ञै वरत करती ही, इण सारू राजकुमार नै जीवन देवौ। शिवजी पैलां तौ मना कर दियौ, पण हठ रे आगै उणनै पारवतांजी री बात माननी पड़ी। सुबै-सुबै धण्ी-लुगाई नहावण सारू गिया। राज रा मिनख उणनै देखिया तौ वै भागिया-भागिया राजा रै पास पूगा अर बतायौ कै राजकुमार तो जीवित व्हैगिया। राजा नै विसवान नीं व्हियौ पण मिनखा रै घणौ विसवास दिलावण रै पछै राजा गंगा रै तट माथै गिया। लोग कह्यौं तो वा बात साची निकली। राज दोनां नै सागै ले पधारिया। इण भांत एक कानी तो राजा नै आपरौ छोरौ पाछौ मिलग्या, अर बिरामण री बिना मां री छोरी नै राज मिलग्यो। कैया करै कै कोई कित्तो ही बुरो करण री क्यूं नी सोच ले, ऊपर लौ जिके रो जहड़ो भाग लिखे।