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जवार री ठौड बत्तीसी गिटाय दूंला

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक मिनख जवार री खेती वाई। सौळै आनां जमानौ तूठौ। वैंत-वैंत लांबां सिट्टा बधिया। कोड़ा रे उनमांन पाक्योड़ा दांणा चिमकण लागा। खेत रै च्यारूं खुणै अक सरीखी झोला खावती जवार रौ थट लागौड़ौ हौ। जांणै बादळां सूं पांणी रै बदळक्जवारबरसी व्है। असवाडै़-पसवाडै रा पाखती गांवां में काळ रौ पगफे रौ व्हियोड़ौ हौ, इण सूं चैधरीआठ पौर खेती री रूखाली करतौ। गोफण रा सटीड़ा पाड़तौ, चैफैरचैकसी राखतौ हौ, पण तौ ई एक दिहाड़ै, ढळती रात उणनै उंघ आयगी। चवदस री चांदणी रौ निरमळ उजास सिट्टा रै पालणै झूलतौं हौ। ठाड़ी सुवावती हवा रा लैरका सूं चैधरीं उंघ मंे गरक व्हैगी। इण बिचाळै च्यार लाठी पोटां बांधली। पाटां बांधनै वै उखणण वाळा हा के चैधरी झिझकनै जाग्यौ। भच बैठौ व्हियौ। अेक हाथ में गोफण अर अेक हाथ में गैडी लैयनै वौ चोरां रै आड़ौ उभग्यौ। साम्हीं च्यार माट्यार काटी उभा हा अर वौ साव अकैली हौ। अेकणी सागै च्यारां सूं भिड़िया तौ बात परवार जावैला। आ बता विचार नै मिनख एक अेक सूं पडपण री जुगत विचारी। हंसतौ थकौं चोरां नै केवण लागौ, खेत में उभा धांन री चोरी, चोरी नीं गिणीजै। मिनख देख्यौं कें च्यार चोर उणरीबातां सुणनै धीजग्या है। पछै वौ बात रौ रूख बदळियौ। बोल्यौ पण छानै चोरी री गळाई पोटां भरण रौ थंे आछौ कांम नीं करियो। म्है आ बात जांणणी चावूं के थें सगळा सिरदार कि जातिया हौ ? वौ कह्यौ थुड़ियौ हो कांई ? पछै चोरी कांई हिसाब सू करी ? चाल म्हारी मां कनां सूं थनै आळबौ दिरावस्यूं। पछै वौ वां तीनूं जणा नै कह्यौ-मां री दवायती लेयनै आप अठा सूं पधारज्यौं। आपनै हाथ जोड़नै म्हारी इती ई वीणती हैं। बाकी तीनूं जणआ जांणियौं म्हांरी तौ खेरियत हैं। मिनख झिलतौ व्है तौ झिलण दौ। खेत रौ धणी उणरौ बाहूड़ौ पकड़नै पाखती ई आपरी ढांणी में लेग्यौ। खेजड़ी रै काठौ बांधनै जरू कर दियौ। मिनख नै काबू करियां पछै चैधरी उठै पाछौ आयौ। हौळै सीक नेठाव सूं कैवण लागौ के म्हारी मां कह्यौ, म्हारा धणी है, वै चावै तौ सगळौ खेत भेळा सकै अर औ साहूकार कर्द ईबिखां मंे म्हानैं खटकै नीं। यूं तीजी खेजड़ी रै बांधनै काबू करियौ। पछै फुरती सूं हाथ में अेक दूजी लांठी गेड़ी लेयनै आयौ। सेवट चैधरी पछै वानै खोलिया। अबै कदै ई, खेत साम्हीं मूंडौ करियौ तौ जवार री ठौड़ बत्तीसी गिटाय दूंला।


माथा री ठोर पगां में बांध देवता साफौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

नसा रा आंणंद नै बिना नसा वाळौ कांई जाणै। घर वाळा सगळा ई फोड़ा भुगतै पण नसा बाज तौ हमेसां ई मौज करै। नसा में ईं सबसूं सिरै नसौ अमल रौ। राजा नसौ, इण नसां आबै तकलीफ री ठाह पड़ै नीं, पीड री ठाह पड़ै नीं। अर दुख दरद री ठाह पडै नीं। ऊगण री ठाह पड़ै नीं। उणरी भूख कदै ई मिटै नीं अर वौ धापै कदै ई नीं। अघोरी अर अमलदार अेक सरीखा व्है। अैड़ा अेक अमलदार राजा री बात गुणौ। बैटी जांणनै वै आपरी रानी रै माथै कई वळा हाथ फेर देवता। नखां री ठौड केई बार मूछ्या कतर लेवता। माथा री ठौड पगां माथै साफौ बांधौ लेवताअर माथा माथै पगरखियां धर लेवता। आंख्या रो ठोड़ दांतां में सुरमा डाल लेवता। वै अमलदार ठाकर अैड़ा परमहंस हां, तौ ई वै आप सूं वतौ सावचेत इण दुनिया में किणी नै नीं गिणता। उण सूं गौरौ जिण नै पीळियौ। अेकर वै पूरौ अमल जमायनै बैठा हा। बैठा-बैठा ईं जची के दिल्ली फतै करणी। बस, जचता, ईं वै तौ दिल्ली फतै करण सारू उभ व्हिया। नाळ सूं दौ अेक पगोतिया नीचे उतरिया के डील आपा में नीं रह्यौ। डावै कांनी डिगिया अर धड़ांम नीचै। दिल्ली तौ हांकरता फतै व्हैगी। पण ठाकर धड़ाम री आवाज सुणी तौ जार सूं हेलौ मारियौं, हाजरीया, कोई टाबर हेटै पड़ग्यौ, जल्दी उठावौ। म्हैं पड़णा रौ धमीड़ौ सुण लियौ, पण थारै कानां तौ जांणै डूंजा घाल्योड़ा है। म्हैं सावचेती नीं राखूं तौ सगभटाबर पड़ पड़नै मर जावै। दौड़ौ दौड़ौ, देखे उणरै लागी तौ नीं ? राजा रौ हाकौ सुणनै हाजरियां दौड़ता आया। देख्यौ ठाकर खुद हीं तौ जमीं माथै गुड़ियोड़ा मौज करै। हाजरियां टांगा टौळी, कर राजा ने उठायौ तौ वै कह्यौं-हौळै-हौळै, टाबर नै साव हौले उठाज्यौं। आ तौ म्हैं सावचेती राखी। म्हैं अेकलौ जीव कठी कठी ध्यांन राखूं। म्हैं तौ अबै दिल्ली फतै करण सारू जांवू, थें टाबर रौ पूरौं जाब्तौ राखजौ। म्हनै बतावों तौ खरी दुस्टियां के कुण हेटै पड़ियौ। छोटकियां राजकुमार तौ कठै ई नीं पड़ग्यौ ? हाजरियौं कह्यौं-हुकुम, अै तौ आप ई हेटै पड़िया। राजा झिझकनै पूछ्यौ-कांई कह्यौं, म्हैं खुद हेटै पड़ग्यौं। पछै वे जोर सूं अरड़ाटौ मैलियौ-तद तो म्हैं, मरग्यौ, रै मरग्यौं रै। अबै म्है दिल्ली री कीकर फतै करूंला।


अब बता सेठाणी मगज किण रौ फिरियोड़ो हो

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रै दोय घड़ी रात थकां उठ जाय करतो। निवरत व्हिया पछै पूजा पाठ करातौ। सिरावण करने अंधारै-अंधारै दुकान खोल देवतो। अेकर तड्के उठ्या अर दांतण - करता नै साम्ही बोरियां रै कनै अेक चोर लुक्योड़ो दिख्यौ। सेठ सोच्यौ, हाको करियां तौ काम बिगड़ै। सेठाणी दांतण वास्तै तंबाखू रौ गुल लाई। सेठांणी रै पाखती आजतां ई वै बाल्टी रा पांणी सूं कुरळौ भरनै सेठाणी माथे थूक दियौ। सेठाणी बोली - दीखे कोनी कांई ? गाभा सूगला कर दिया। लो हथाळी मांडौ म्है कपड़ा बदळनै आवूं। पण सेठ नीं तो जवाब दियौ अर नीं गुल लेवण सारू हथाळी ई मांड़ी। पछै दूजों कुरळौ वै चोर माथै थुक्यौ। सेठाणी नै हाल चोर री ठाह नीं पड़ी ही सेठ तीजो कुरळौ सेठाणी माथै थूक दियौ। सेठाणी फैर कह्यौं, म्हारों साज-सरीखों बैस आलौ कर दियौ। पण सेठ तौ कीं सुणी हीं होनी। मूंडौ नीचै करियां बारी-बारी सूं अेक कूरळौ सेठाणी माथै थूकता गिया। सेठाणी नै अणहूंती रीस आई। सेठां नै झिड़कती बोली-राम मार्या, थांनै आज आ कांई ऊंधी सूझी। बावळा तौ नीं व्हैगा। सेठ तो अेक कुरळौ चोर माथै अर अेक सेठाणी साम्हीं मूंडौ करनै थूकता ई गिया। चोर रासगळा गाभा भीगग्या तौ ई वौ आपरी ठौड़ सूं हिल्यौ कोनी। वौ जाणियौ सेठां रौ मगज फिरग्यौ है। सेठाणी थांभा रै ओलै ऊभनै बोली - गीगला रा बाबूजी, आज थानै औ कांई हिडकियौं सूझयौ। पण सेठ तौ कीं सुणी होनी। कुरळा थूकता रह्या। सेठाणी सेवट घर सूं बारै निकळी। आडौसियां-पाडौसियां नै भेळा करिया। चार पां जणा दौड़नै आया। सेठ बगना व्हियौड़ा बोरियां रै पाखती कुरळा थूकै हा। सेठ तौ किणी रै ई साम्हीं नीं देखियौ। बाल्टी सूं धोबा भर-भरनै पांणी मूंड़ा में लेवै अर साम्हीं कुरळा थूके। सेठाणी रोवण ढूकी। लोग पूछ हीं लियो, भला आदमी बात व्हैजकी बतावौं तौ खरी। सेठ-बोल्या, म्हैं तो सेठाणी रौ गाढ देखणौ चावतौ। वारै खातर म्है रात-दिन कळपूं अर वै म्हारा कुरळा ई झेल नीं सकिया। ओ चोर ई बापड़ौ चोखों, जकौ बोलों-बालों म्हारां कुरळा झेले। सियाळा री रात में भीजग्यौं तौ ई मूंड़ा सूं सिसकारी कांई करले। आ कैयनै वै थोड़ा मुळकिया अर बोरियां रै पसवाड़े लुक्योड़ा चोर साम्हीं हाथ रौ इसारौ करियौ। सगळा पाड़ौसी ढूका जको मार-मारनै उणरौ फूस काढ न्हाकियौ। पछै सेठ सेठाणीं रै साम्हीं देखने कह्यौं - अबै बोलौ, मगज म्हारौ फिरियौ के थारै फिरियौ।


बगसीस में मिनख नै दी अेड़़ी घोड़ी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक जमींदार रे घरै छौरो व्हियौ। वै घणा राजी व्हिया। अेक मिनख जमींदार रै दौळौं व्हैगियौ। कह्यों-अंदाता, अबकै तौ मोटी बगसीसी लेयनै जावूंला। जमींदार ई लारौ छुड़ावण सारू रीस में अेक अलांम घोड़ी बगसीस में दे दी। मिनख आपरै घरै गियौ। घोड़ी तौ अणहूंती अलाम ही ही। मारग में मिनख नै माथै ई नीं बैठण दियौ। लगांम झेलियां मिनख पाळौ-पाळौ आपरै घरे पूगौ। घोड़ी रोजीना रा दोय सेर दांणौ खाव जाती, पण असवारी वास्तै अड़ण ई नीं देवै। अेक खराब लत घोड़ी में फेर। कनौती भेळी, करनै फटाक लात मार देवे। बारी-बारी सूंमिनख रै सगळा घरवालां नै वा परसाद चखाय दियौ। पछै घरवाळां नै ई ठाह पड़गी। जद घोड़ी कनोती भेळी करण लागै तद वै आग ई रेवै, नेड़ा नी जावै। गांवतरै मांगणी करणनै जावै तद घोड़ी माथै चढ़या फिर तौ मिनख तौ लाख कमाया। पण वा तौ पूठा माथै ई हाथ नीं धरण दै। कदै ई ठोड़-कुठौड़ ठरकाय दी तौ जीव सवाय में जावैला। मिनख रा पड़ौस में अेक कुबदी मिनख रैवतौ हौ। मिनख नै ई कुमत सूझी जकौ उण सूं सला विचारी। कह्यो-भाया, घोड़ी असवारी नं करण दै जकौ तौ भरपाई पण लातां मार-मारनै सैंग घरवाळां रा हाड़का खोळा कर दिया। घोड़ी री इण लात मारण री लत रौ तौ कीं उपाव बता। कुबदी-लात मारती वगत घोड़ी कांई करतब करै-पूछ हिलावती व्हैला के खारी निजर सूं जोवती व्हैला। म्हनै घोड़ी रौ रंग-ढंग तौ बता। तद मिनख कह्यौ-लात मारती वगत वा कन्नौती भेळी करै अर कनौतौ भेळी, व्हैतां ई वा लात फटकार देवै। कुबदी कह्यौ-तौ इण में इत्ती सोचै जितरी कांई बात, घोड़ी री सगळी खोडत्र तौ उणरी कनौती में है। जे थूं उणरी कनौती बोच न्हाकै तौ फेर की टंटौ नी। कनौती बोचियां पछै वा नीं तौ कनौती भेळी करैला अर नीं लात मारेला। मिनख कद घोड़िया धारी ही। कुबदी रै कैतां ई ईं उणरै पूरी जचगी। घरे आतां ई वौ किणी नै पूछ्यौं नीं कोई ताछ्यौ। कतरणी सूं कुचदेणई घोड़ी रा कांन बोच लिया। घोड़ी घणा ईतडफडाटा करिया, पण वौ तौ उणनै सफा बूची करा दी। कांन बोचणा मिनख रै हाथ हा पण लातां मारणी तौ घोड़ी री मरजी माथै हीं। पैला कनौती भेळी करतां पांण जाच पड़ जावती के घोड़ी लात मारैला। पण अबै वा ई ठाह नीं पड़ै। भरोस ासूं पाखती जावै अर लप लात दै। अबै तौ लात खायां ई लात रौ पत्तौ पड़ै।


सगळां ननै पांती परवाणै अेड़ो धन दियौ सेठजी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रा घर में चार चोर घुस गिया। हजारूं रिपिया अर माया वारै हाथे लागी। चोर बारला कमरा में बैठने पांती करण ढूका हा के संठा री नींद खुलगी। कोरी नींद खुलिया सूं ई कांई व्ळै। बोले जौ मरे ? अकल सूं उपाव निकालियौ। सेठ हौळे-हौळे चालता खुद बैठक रा कमरा में जाय पूग्या। चोर हळफळिया होयनै माल-मता संवटण ढूका जितै वै कह्यौं-थारै फायदा वास्तै आयौ हूं। म्हारा बेटा नाजोगा है। सगळी उमर दिन-रात कमाई करी, उणरौ बुढ़ापा में फळ ओ मिळियोै के वे नाजोगा व्हैगिया। म्हैं चांवू उणनै ठाह पड़े कै कमाई करणी तिकी दोरी है। थें आज म्हारै खास मनजांणी बात करी। कपूंता रा अेडा ई लखण हैं। आ माया थारे सुक्यारथ कांम लागै तौ म्हैं घणों राजी। म्हैं म्हारा हाथां सू पाती करनै थाने निवेडदूं, नीतर थें माहौमाड झगड़ो-टंटौ करोला। चोर सेठां री बात सुणनै पूरा धीजग्या। कह्यौं म्हांनै सावळ सलटाय दौ। थारां उमर भर गुण गंावाला। सेठ आ कैयने पांती करण सारू बेठा। ताकड़ी रा दोनूं चेळां में पैला सोना-गैणों भरणै वे जोर सूं बोल्या। धड़ी लगाय दूं तेजा हो। सोजतियां, सिरदारा हो। सेठा रोजसेरसूं बोलणौ सुणनै चोर डरिया। कहयौं आप थोड़ा हौळै बोळौ। कोई जाग जावैला। तठ सेठ बोल्या-अबै म्हारै बैठा थे क्यूं डरो। कमाई म्हारी करयोड़ी है, किणी रै बाप री कोनी। थे किणी बात री चिंता मत करो। यूं समझायनै सेठ तो फेर बोल्या। सेठां रे तीन बेटा हा। अेक रौ नांव तेजौ, अेक रो सोजतियौं अर अेक रौ सिरदारौं हौ। वे पाखती रा नोहरा में सता हा। सेठा वारै नांव सू हैलो मारने-मारनै जगावण चावता हा। चार पांच वळा हैलौ मारियों तों तीमूं जणा जाग्या। वै सीधा उणी कमरा रै बारै आया। आड़ौ बजायौ। चोर डर ने पूछयोै-कुण है ? सेठ कह्यौं-म्हारा छोरा है, पण थेजावौ म्हैं माल लुकायनै पछै थारै हवाल कर देवूंला। अबै फुरती करो। चारू जणा भंवरा मांय वलग्या। उणरै माय वलता ई सेठ कूंटौ जड़नै अंकोड़ियौं पजाय दियौ। पछे बैठक रौ आड़ौ खोलियौ। कह्यौं, हेला मार मारनै कायौ व्हैगौ। काळीधार डूब जाता। चोर घर में घूस गिया। अटकळ सूं वानै भंवरा में घाल दिया हूं। पड़ौसयौं ने जगयानै लावौ। बेटां रै हाकौ करतां ई सगळा पाड़ौसी भेळा व्हैगा। भंवरौ खोलनै सागैड़ा जंतारवण ढूका तद सेठ कह्यौ-भाईड़ा, सगळां नै पांती परवाणै।


इण तरै बैमाता रा लेख व्हिया साचा

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक राजा रै कोई टाबर नीं हौ। एक दिन वौ सैर माथै निकलियौ तो उणनै रास्ता में ‘बेमाता‘ मिळी। राजा रै पूछण पर बेमाता कह्यौं जिण मिनख रै करम में जो लिख दूं, वैड़ौ हीं व्है। राजा नै उण माथै विसवास नीं व्हियौ। वौ मजाक करतौ पूछियौ के बता त्हारा भाग में कई है ? बेमाता कह्यौं थ्हारी बेठी रै सागै त्याव करता टैम थ्हारी मौत व्हैला। राजा उणरी बात सुण हंसण लागौ अर कह्यौं त्हारै तो कोई टाबर नीं है, त्या किण सूं करूंला। जेगा री बात, थोड़ा दिनां पछै रानी गरभवती व्हिई। राजा रै मन में शक पैदा व्हियौ। राजा रैमन में शक पैछा व्हियौ। वौ सोचियौ औ छोरौ व्हैला तौ राख लूं लां, अर छोरी व्हिई तो मरवा दूं ला। विधि रा लेख सूं रानी रै छोरी व्हिई। राजा नै दासी सूं कह्यौं, बाई को मुकलादेओ (मार डालो)। राजा छोरी नै खाड़े में डलवा दी। थोड़ी टैम पछै वठै एक कुत्हार और कुत्हारी आया। उणरै टाबर नी हा। कुत्हारी छोरी नै उठाय ली अर घरै ले आई। टैम रे सागै छोरी मोटी व्हिई। एक दिन राजा रा दो घोड़ा अस्तबल सूं छूट नगर में गिया परा। वे उण कुत्हार रै घर में घुस गिया। कुत्हार छोरी सूं कह्यौ, बेटी इन घोड़ा ने बारै निकाल दे। छोरी दोनूं घोड़ा री पीठ माथै थपकी लगाई अर अणनै घर सूं बारै निकाल दिया। छोरी रै हाथ री थपकी लगाती हीं घोड़ा री पीठ माथै सोना रा पंजां उभर गिया। दूजी पीठ माथे चांदी रा पंजा। घोड़ा पाछा गिया। राजा घोड़ौ री पीठ माथै सोना-चांदी रौ पंजो उभरियौ देखियौ तो उणनै घणौ अचत्भौ व्हियौ। पंजा देख वो अणुमान लगायौ कै अे किणी किशोरी हाथ है। वौ मन में ठान लियौ के इण छोरी सूं त्याव करूंला। दूजै दिन वो खेाज शुरू कर दी।गांव में जीमण रौ आयोजन करियौ उणमें जद वा छोरी घोड़ो री पीठ पर थपकी लगाई तौ सुनहला अर रूपहला पंजा उभर आया। राज उणनै राक ली। कुत्हार सूं कह्यौं आपरी लड़की रौ त्याव त्हासूं कर दौ। कुत्हार घणौ ना कह्यौं पण राजहठ रै सामीं एक नीं चाली। लड़की नै जद आ बात ठा पड़ी कै त्याव रचावण वालौ उणरौ बाप हैं तौ वा कह्यौंः- जल्दी पढ़ रे बामणा, बेगों पढ़ रै बामणा, फेरा लेसी बाप और बेटी। वा दो तीन बार आ बात किदी। राजा नै जब पूरी बात ठा पड़ी तौ पश्चाताप में उणरी मौत व्हैगी।


राजा रा बिल्ली ने यूं भुलायों दूध पीवणौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक राजा नै बिल्लिया पालणै रो घणे चाव हो,। अेक दिन राजा आप रै खास दरबारियौं नै बुलाय र सगळा ने अेक अेक बिल्ली दीवी अर कह्यौ, इण बिल्लियां नै आप रै घरै ले जावो अर इण रो पालन करौ। जिको भी खरचो लागौ, राज रै खजानै सूं ले य लो। छै म्हीना पछै जिका री बिल्ली सबसूं मोटी ताजी व्हैला, उण नै ईनाम दियौ जावैला। सगळा दरबारी आप आप रै घरे बिल्लियां लेय नै गिया परा। हर काईआप री बिल्ली नै घणो लाड़कोड़ सूं दूध पिला-लिपा र पालण लागा। हरेक दरबारी रै मन रै मांय एक हीं बात हीं कै उण री बिल्ली सबसू मौटी व्हैला, इण वास्ते ईनाम उण ने हीं मिलेळा। पण अेक दरबारी ऐहड़ो भी हो, जिको मन रै मांय सोच्यो कै दूध बिल्ली नै क्यूं पिलाऊं, वो राजा रै खरचे सूं दूध आप रै पेटमें पूगावण लाग्यो। बिल्ली नै पीवण नै कीं कोनी मिल्यो तो वा सूख नै कांटा व्हैगी। छै म्हिना पूरा होवण रे माय दस दिन बचिया तो वो दरबारी उबलते दूध रौ प्याला भरयोअरबिल्ली की गरदन पकड़र उबलते दूध रे मांय उण रो मुड़ो घाल दियो। बिल्ली रो मुड़े बळ ग्यौ। वो दस दिनां तक यूं हीं करतो रह्यो। अब बिल्ली दूध रै नाम सूं हीं डरण लाग ग्यी। छह म्हीना पूरा व्हिया तो सगळा दरबारी आप आप री बिल्ली लेय र दरबार में पूग्या। सगळी बिल्लियां खूब मोटी-ताजी हीं, पण अेक बिल्ली आज मरै, कालै मरै जेहड़ी होय री हीं। बिल्ली री ऐहड़ी सूरत देख राजा लाल पीळो व्हैग्यौ। वै पूछ्यौ, थूं इण बिल्ली ने एहड़ो मुरदार कीकण बणा दिया, राज सूं खरचों कोनी मिल्यो कां ? दरबारी बोल्यों, अनदाता इण मैं म्हारौ कोई अपराध कोनी। आप रा मंत्री म्हनै ऐहड़ी बिल्ली दीवी जिकी दूध पीवे हीं कोनी। राजा अचरज में भरग्यों, पूछ्यों, बिल्ली दूध नीं पीवै, आ बात हो ही नीं सकै। दरबारी कह्यौं, हाथ कंगन नै आरसी कांई अर पछठै लिखै ने फारसी कांई, उणी टैम बिल्ली रे आगे गरम दूध रो प्यालो मंगवाय र राखीज्यो, बिल्ली दूध ने देखता हीं उछल नै दूर जाय नै बैठ ग्यी। राजा ने भरोसो व्हैग्यो, वो सोची कै इण दरबारी रै सागै अन्याव व्हियौ है, इण वास्ते ईनाम इण नै ही दियो जावे। इण री बिल्ली दूध पीवती तो आ सबसूं मोटी व्हैती।


समझी रै वीरा समझी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक बिणियांणी नै गुदळक पड़ता हाजत व्ही तौ वा थोड़ी सूं पाछी वळती वगत अेक चोर उणरै आड़ी फिरियौ। बिणियांणी गैणा-गाठा संू पीळी-जरद व्हियोड़ी ही। चोररै तौ जांणै अणचींती माया हाथै लागी। लुगारी अबळा जात हैं, जोर सूं धाकल करतां ईं सगळौ गपी लपौलप उतारनै देय देवैला। चोर ई धाकलता ईं बिणियांणी मुळकती थकी बोली-बावळा, थोड़ौ हौळै बोल। म्हनै डरावण री जरूरत कोनीं। इता गैणा सूं ईं राजी मत व्है। थारी हीमत व्है तौ म्हनै ई साथै लै चाल। घर मंे दोय ओडी गैणौं फेर पड़ियौ है। म्हनै वौ ई जुगती सूं लावण दै। अपा दोनां रै आखी ऊमर खायां ईं नीं खूटै। म्हारा भाग रौ आज थूं नांमी मिळियौ। हाक मत कर, सेठनजी नै खुड़कौ व्हैगौ तौ पछै रांझौ पड़ जावैला। घर रै मांय सगळी पूंजा लेयनै आय जावूंला। बोल, थारी, कांई मंसा है ? थूं कैवै तो है ज्यूं ई चालूं परी अर थू कै तौ सगळौ माल उचकायनै चालां। चोर जांणियौ के आज तौ सांप्रत लिछमी तूठी। उणनै तौ अेड़ौ मौकौ ऊमर में हाथ नीं आवैला। हौळौ सूं सुरपुर करतौ बोल्यौ-म्हैं तो थूं कैवै ज्यूंक रण नै त्यार हूं। इणी बाड़ा मंे बैठौ उड़ीकू। कैड़ीक हुंस्यारीं सूं सगळौ कांम करै। बिणियांणी बौली-म्हैं इक्कीस आनां तौ मतै ई आई रैवूंला। पण कदास अैड़ौ ई धांदौ पड़ जावै तौ थूं सांम्हला झिरोखा हेटै ऊभनै म्हनै हौळौ-हौलै हेलौ पाड़ लीजै। म्हारौ नांव समझाी है। म्हैं झिरोखा री बाती सूं पोटळी थरकाय देवूंला। माल-मत्ता थनै सूपियां पछै म्हैं कोई मिस बणायनै बाड़ा मेंआय जावूंला। कैडीक सावचेती राखै। बाड़ा में सावळ चापळियोड़ी रैजै, कोई देख नीं लेवै। म्हारौ नांव समझी हैं, याद राखजौ। बिणियांणी तौ आ कैयनै निरांत सूं आपरी हवेली में गी परी अर चोर बाड़ा में चापळनै बैठग्यौ। आज उणरा मन में खुसी रौ पार नीं हौ। वौ बैठौ-बैठौ मन में मंसूबा बाधण लागौ कै धरै जावतां ई अेक पक्की हवेली चुणावूंला। उणरी सीख रै मुजब वौ तीन घड़ी पूठै झिरोखा हेटै उभनै हौळै-हौळै हेलौ मारण लागौ - समझी, अे समझी। इत्ता में झरोखा री बारी खुली। समझी बारै मूंडौ काढ़नै बोली-समझी रे वीरा समझी। नीं तो घाणा खांवा अ नीं कुबैला बारै जावं। अबै थां में समझ व्है तौ बोलौ-बोलौ बाड़ा सूं बारै जातौ रैजै नींतर घणौ पिछतावैला। चो रै मंसूबा री सगळी हवेली घुड़गी। वौ फीटौ पड़ै उठा सू सीकड़ मनाई, जांणै हवेली उणरै माथै पडै़।

अेड़ी करी बांणिया रै घरे चैरी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक चोर बाणिया रै घरै रूई री चोरी करण नै गियौ। चारे नै इण बात रौ सुराग हौ के भखारीं में रूई पड़ी है। वौ जांणियौ के रूई री अेक मोटी गांठ बांध लूं तौजळम सुधर जावैला। सियाळा रा दि हा। वौ हौळे-हौळे हालतौ भखरी रै कने पूरा ग्यौ। भखारी रै अेक बाजू भैंस ऊभी हीं। वौ भैंस रै पाखती ई रूई बांधण सारू आपरौ खेसलौ बिछायौ। पण बिछावता ई खेसला नै तौ कोई उठा सूं खांच लियौ। चोर जांणियौ भैंस खायगी। कीं बात नीं। खेसला नै चिगळैला जित्तै पोतियौं बिछायनै उण में रूई बांधलूं। वौ दोवडौ-तेवड़ौ करनै आपरौ पोतियौं पाछौ उणी ठौड़ बिछायौ। रूई री बाथ भरी जित्तैं तौ फेर कोई उणरो पोतियों खांच लियौ। जांणियौं के फेर भैंस खायगी। अबै कांई उपाव करै। बिछावण सारू ठौड़ आ इज हीं। रूई रा लोभ में, खेसलौं अर पोतियौं गमायौ। अंारी कसर तौ काढ़णी हीं। रात री वगत, कुण दैखेै। वो आपरी धोती खोलनै बिछाय दी। काठी बाथ भरनै वौ धौती माथै रूई धरण लागौ के जित्तैं फेर धोती कुण ई खांचली। साव नागौ-तडं़ग उठै ई ऊभौ रह्यौं। रूई रा लोभ में सगला गाभा ई गमाय दिया। आ भैंस हैं के डाकण। गाभौ तौ देख्यौड़ौं छोड़े नीं। वौ सोच करतौ चितबंगियौं सौ ऊभौं हौ के उणनै अेक टाबर री बोली सुणीजी-दादोजी, म्हनै बेक नवी बात सुणावौ। भंवरिया, थनै तौ बातां आगै रात रा सूवता नै झक पड़ै नीं, दिन रा जागता नै झक पड़ै नीं। अै कोई बाता हैं ? म्हनै घड़ी आधा घड़ी ई सावळ सूवण दै कोंनी। दादोजी तौ चोर रै आवतां ई जागग्या हा। वै आपरै हाथां ई उणरा सगळा गाभा खींच्या हा। रूई री नीगैदास्ती वै भखारीं में ई सूवता हा। अर बांता सुणन सारू भंवरियौं वारै पाखती सूवतौ हौं। वै कह्यौं फगत अेक बात सुणावूंला। भंवरियौ मान गियौ। दादोजी चोर रै सागै बीती बात सुणाई। कह्यौ-रूई लेवण सारू खेसलो, पौतियौं धोती बिछाई तौ वा डाकण म्हारा सगळा गाभा खायगी। भंवरियौ पूछ्यौं - सगला गाभा उतारियां पछै थे कैड़ा दीखता हा। दादोजी दीयौ झूपायनैं उण चोर साम्हीं इंसारौ करनै कह्यौं बैटा, म्हैं साव इण जैड़ो दीखतौ हौं। चोर तौ फीटौ पड़ने नागौ ई उठा सू भाग गियौ।


मारिया पछै नीं छोडिया रूपिया

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक महंत अेक बांणिया सूं ठागौ करने दस हजार रिपिया झाड़ लिया। बाणियौ घणी ई हाथा-जोड़ी करौ पण महंत तौ पाछी अेक लाल-छद्ाम ई उणनै नीं बताई। बाणिये कह्यौ, मरियां पछै ई अै रिपिया नीं छोडूंला आ जांणज्यौं। उण दिन सूं ईं वौ बांणियौं तौ गिणनै गांठ बांध लीवी। पण कदै ई वौ मूंडै दरसाई कोंनी। रोज रामदुंवारै जावतौ। महंतजी री अणहूंती हाजरी साजतौ। महंतजी लारली सगळी बातां बिसारने गांणिया सूं घणा ई राजी व्हैगा। बांणियौ तौ मन में बात दबायोड़ी राखी, पण महंतजी सांचाणी ई उण दिन वाळी बात आई गई करग्या। बांणियौं खासो बूढ़ों हौ। घणकरौ मांदौ ई रैवतौ। पण वौ रांमदुवारा री हाजरी बजावतौ। अेक दिन बांणिया नै कुजरबौ ताव चढ़ियौ, पण वणै रामदुंवारै गयौ। आवणै उणरै सारै हौ पण पाछौ जावणौ सारै नीं रह्यौ। उणनै आछी तरै जाच पड़गी के आ आखरी घड़ी है। महंतजी ई लखग्या। कह्यौ, भाया, अबै रामजी रौ नांव लै, वौ ई साथै चालैला। बाणियौं कह्यौ- महंतजी मरणौ तो हैं, म्हैं मरण रौ सौच नीं करू। पण म्हनै रात सपनौ आयौ के म्हारौ आधौ सांस कुपाळी में अटक्यौं रैवैला अर आधौं कागलियां में। इण सूं म्हारी मुगती नीं व्हैला। आप मेहरबानी करनै अेक चन्नण री लांठी फाड़ी म्हारी कुपाळी अर अेक तीखी फाड़ी म्हारा कागलिया में ठौक दौ। आखरी वगत म्हनै आपरै हाथा सूं उबारलौ। महंतजी ई जांणियौं जै इणरी मुगती व्है तो चन्नण री दोय फाड़िया ठोरण में म्हनै कांइ जोर आवै। वै चंन्नण रा दोय तीखा फाड़ा उड़नै उणरै मरिया पछै अेक कुपाळी अर अेक कागलिया में ठोक दिया। बांणिया रै दैव लोक होवण री बात सुणी तौ उणरा घरवाळा रांमदुवारै आया। तीन मोट्यार बेटा हा। सेठां री हालत देखी तो वांनै रीस आई। महंत नै पूछयौं तौ वै खुद आपरै मुंडा सूं मंजूर करयौ के सेठा रै कैवणा रै मुजब ई मुगती रौ उपाव करियौ। बेटा कह्यौ - मुगती रो औ उपाव तौ म्हैं आज थारैं मूंडै ई सुणियौ। थें म्हारै भाईजी री हित्या करी हो। म्हैं तो राजाजी नै फरियाद कराला। महंतजी घणी ई हाथा-जोड़ी करी, पण सेठ रा बेटा नीं मांनिया। सेवट लोग बीच में पड़िया अर चाळीस हजार रिपिया में राजीपौ करियौ। उण दिन रा बौल वानै याद आया के मरियां पछै ई रिपियां नीं छोडूंला।


अेडा दिया ब्याज माथै रिपिया

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक बिणयांणी ही। उणरै आगै-लारै कोई नीं हौ। लुगाई री जात हीं, दूजौ वौपार सज नीं आवै, इण खातर वा ब्याज रौ ई धंधौ करणै सावळ समझियौ। लोगां रै जरूरत व्हैती तौ वे बिणियांणी रै घरै आयनै रिपिया लै जावता। पण रिपिया पाछा देवती वगत वै उणनै अवस फोड़ा घालता। कीकर करनै बिणयांणी निसेवार आपरौ खरचो-खातौ काढ़ लेवती। अेकर अेक मिनख उण बिणियांणी कना सूं रिपिया मांगण नै आयौ। हाथ जोड़ने बौल्यौ-सेठांणीजी, म्हारी लाज अबै थारै हाथ हैं। बेटी ने सीख देवणी हैं। सौ रिपियां रौ जाणै जितौं अड़ाव हैं। कातीरा लाटां में दूध सूं खोळनै आपरा रिपिया भरै पालूंला। वौ खंजिया मांय सूं रिपिया काढ़नै बौल्यौ-औ अेक महीना रौ ब्याज आगू लौ अर म्हनै सौ रिपिया साझौ। म्हैं जांणूला के थें म्हनैं नवौ जलम दियौ। सेठांणी नै नवा जलम री बात इती समझ में नीं आई जित्ती पांच रिपिया देखने आई। महीना रौ पांच रिपिया ब्याज अर वौ ई आगूंच। वा तौ तुरंत उण जाट नै सौ रिपिया नगद गिण दिया। जाट घणा-घणा गुण गावतौं उठा सूं वहींर व्हियौं। दूजैं दिन घड़ी दिन चढ़िया वौ जाट सेठांणी कनै फेर आयौ। अेक धौळी-धक्क नवी पावली उणरै साम्हीं करनै कह्यौं आपरा सौ रिपियां सूं सगळै काम सार लियौ। फगत पांच रिपिया ई भेळा देवूंला। आ लौ ब्याज री आगुंच पावली अर म्हनैं सटकै पांच रिपिया देवौ। जान तौ वहींर व्हियोड़ी बारणै ऊभी हैं। पावली रौ ब्याज सुणनै बिणियांणी तौ झट लोभ में आयगी। मन में राजी व्ही औ आसांमी तौ नांमी थपियौ। बापड़ौं आगूंज ब्याज झिलावैं। वा तौ उणनैं कैतां पांण पांच रिपिया दे दिया। जाट तौ रिपिया लियां पछै बिणियांणी रै घर साम्हीं पाछौ मूंड़ौ ई नीं करियौ। सेठाणी उणनै रिपियां री भुळावण देवण सारू गी, पण जाट तौ मौळौ-मौळौ जवाब दियौ। गोता खाय-खायनै सेठांणी रै पगां पांणी पड़ग्यौ। अेक दिन सेठांणी काठी काई होयनै चिड़ती थकी बोली-थनै थोड़ी घणी ईलाज को आवै नीं। जाट बोल्यौ - सेठांणीजी, उण दिन वै रिपिया थें म्हनैं अर म्हारीं गरज सारू को दिया हा नीं, थे रिपिया दिया हा आगूंच ब्याज। अबै कांन खोलनै साफ सुणलौ। सौ ने लेग्यौं पंजौ, अर पंजा नै लैग्यौ पाव। अब के हैं बिणियांणी, थू आव भलाई जाव।


नींबू रै आसरे पूग ग्यौ रावळा मंे कुबदी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक धरमसाळा में अेक मिनख रैवतौ हौ। वो आपरा खूजियां में हरदम नींबू राखतौ। आवतौ जकौ मारगू उठै रोटी खावतौ तौ वौ उणरै पाखती बैठनै बातां करणी सरू कर देवतौ। आगला नै राजी करण सारू वौ उणरै मनभावती बातां करणी सरू कर देवतौ। आगला नै राजी करण सारू वौ उणरै मनभावती बातां करतौ, पण हरेक रै साम्हीं नींबू रा बखांण तौ करतौ ई। दुनिया में अमरफळ हैतौ ओ नींबू। नींबू खाया कोई मांदगी नैड़ी आवै नीं। पैळा री कोई मांदगी व्है तौ नींबू खाया तुरंतमिट जावै। धरमसाळा में कोई पीळिया रौ रोगी आवतौ तौ वौ कैवतौ के पीलिया तौ हांकरतां नींबूं सूं मिटै। रातिंदा वाळा नै, निकाळा वाळा नै, आधा-सीसी रौ माथौ दूखण वाळा नै, मस्स री तक लीफ वाळा नै अर सरणा चालती व्है जका नै इत्याद मांदगिया सारू वौ नींबू रै रस री दवाई बतावलौ। धौला बाळां वाळा नै कैवतौ नींबू सं पाछा काळा बाळ आय जावै। नींबू खाया ऊमर बधै। यू वौ नाई नींबू रा बखांण करतौ करतौ चक्कू सूं नींबू बंधार लेवतौ अर मौकौ देखनै बातां बातां में मुसाफिर री साग-सब्जी में नींबू निचोय देवतौ। नींबू निचोयां पछै कैवतौ-सवाद है जकौ तौ इण नींबू में इज है। नींबू सूं साग की रौ-कीं बण जावै। आफ तूमार तौ जोवौ। लियाज रै मारिया मुसाफिर उणनै साग घाल देवता। रोट्या खंवाड़ देवता। फगत नींबू रै आसरै वौ मजा में आपरौ गुजारौ कर लेवतौ। होळै-होळै लोगां नै उणरी चालाकी री ठाह पड़गी गी। प्एा रोटी रै सारू कुणं माजनौ पाड़ै। मिनख रा नींबू भरै पड़ता ई गिया। मिनख अेक ठाकर सूं दो-तीन वळा रोटियां खायली। चैथी बार वौ ई ठाकर धरमसाळा में फेर आयौ। अबकै उणरै साथै छोटकियौं कंवर ई हौ। कंवर री आंख मंे केई बरसां सूं फूलौं पड़ियौड़ो हो। मिनख तौ आपरी आदत मुजब आंख में फूलौ देखनै कह्यौ, ई नींबू रा रस सूं तौ आंख रौ औ फूलौ हाकरतां मिट जावै। आ बात कैयनै वौ तुरंत नींबू बधारनै सागरी धेकची मंे रस निचोय दियौ। ठाकर रौटी खावण् रौ मतौ करियौ ई हौ। पण मिनख री बात अजोगती सुणनै वांनै रीस आयगी। जंतराय दिया। पण मिनख रीस करी नी। साम्हीं हंसतौ हंसतौ कैवण लागौ ठाकरसा, के तौ म्हारीं मां मार-मारनै रोटी जीमावती ही के आज आप मार-मारनै रोटी खवाड़ौ हौ। मिनख री बात सुणनै ठाकरसा नै ई हंसी आयगी। कह्यौ-इण कुबदी में तौ घाटौ नीं है। वै उणनै मनवार रै सागै ठिकांणा में लेयग्या।


लालच मैं गंवासरे मूल संख पायो ढपोर संख

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक बामण पक्कों भगत हों। वो भगवान री टैमो टेम पूजा करतो। एक दिन भागवान इण माथे तूठ गिया। वे बामण ने एक छोटे सो संख दियो, अर कह्यौं कै अण संख री पूजा कर नै जिकी चीज मांगेला, थने मिल जाया करेला। बामण संख पा र निहार व्है ग्यौ। वो आपरी जरूरत री चीजां एक एक कर उण संख सू मांग ली। रेवण वास्ते चोखें सो घर बणवा लियो, खावण पीवण और पैहर-ओढण री चीजां संख सूं ले ली। बामण में आयो ओ बदलाव देख र पाड़ोसी से डाह होयगी। वो आपनी घरवाली ने उण बामण से घरै इण रो पतो लगावण सारू भेज्यौ। लुगाई बामण री बीनणी सूं मीठी-मीठी बातां कर र भेद रो पतो लगा लियौ। पाड़ोसी अंचभे में पड़ ग्यौ। वो लुगाई ने कह्यो, थूं मौको देख र वो संख पार कर नै लय ने आजा। लुगाई आपरै धणी री बात मान ली अर एक दिन मौकै देख र संख उड़ा लिया। संख गायब होवता ही बामण बावळौ होय ग्यौ। कोई और उपाय कोनी दिख्यो पो पाछौ भगवान री शरण में गियौ। बौल्यौ, परभु, गरीब बामण में आ कांई जोखी करी। भगवान तो दया रा सागर है, वे पजीज ग्या। भगवान उण नै पाछा दर्शन दिया समझायौ, बावळा ऐड़ी कीमिया चीज यूं हीं रख दी, पण इण बार म्है थने एक बड़ो संख देऊ, इण नै संभाल नै राख जै। ओ संख थनैकी कोनी देवेला, पण थारो पैलकों संख पाछौ आ जावेला। बामण वो संख ले ने बैठ्यौ अर बोल्यो, सो रिपिया देओ, संख जोर सूं बोल्यौ, सो ले, दौ सौ ले, हजार ले, दस हजार ले। पण दिया एक भी रिपियौं कोनी। इण तरा बामण जिकी भी चीज मांगतौ, संख खाली बातां करतो, देवतो कीं कोनी। पोड़ोसी ऐड़ी बातां सुण सुण नै आखतौ व्हैग्यौ, वो देख्यौ कै ओ संख तौ जोर रो है, सौ मांग तो हजार देवे। वो मौको देख र, मोटोड़ो संख पार कर लिया अर उण री जगां पुराणौं संख रख दियौ। घरे आय र वो संख सूं एक घोड़ी मांगी तो संख कह्यौ, एक घोड़ी ले, दो घोड़ी ले, दस घोड़ी ले, ऊंट ले, हाथी ले। पण उठै देवण नै तो राम रो नाम हो। अबै वौ पछतावण लाग्यो, तो संख बौल्यौं वा हीं संखी सोहणी, म्है संख ढपोल। लेण देण ने कीं कोनी, हामल भरू किरोड़।


राया रा भाव रातै ही गया

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रै घरै रात रै चोर घुस ग्यौ। सेठ-सेठाणी, सूता हां, पण चोर री खड़खड़ाहट सूं आंख खुलगी। चोर नै आयं देख, सेठ सौच्यौ, चोर रै कनै हथियार व्हियो तो मार नाखेला। सेठ डरपोक जरूर हो, पण बाणिया बुद्धि तो विरासत में ही मिल्या करै, सो वो आप री लुगाई सूं बातां लाग ग्यौ। केवण लाग्यों, नींद नी आ रेयी है, थनै म्हारै मन री बात केवूं, अबकै साल आपां रामसापीर रै धोक देवण पाळा जावांला। सेठाणी हुंकारौ भरियौ। उबासी खायनै वा पळकां उघाड़ी तौ उण नै चोर दिया ग्यो। जे हाकौ करै तो पाड़ोसियां सूं पैला चोर सुणै। पाड़ौसी आवै जद तक तौ चार मार जावै। दोनां रै टूंपौ दै दियौ तौ। सेठाणी समझ गी कै सेठ जी नै भी ठाह पड़ ग्यी है। वा भी बातां मंे लाग गी। घर री बातां चाल पड़ी। चोर सोच्यौ, सेठ-सेठाणी री बातां रै मांय जरूर काम री पत लागेला। वौ एक खंभे से लारै छिप नै बाता सुनण लाग्यौ। सेठजी कह्यौं, अरे भागवान, वै राया री दोनूं बोरिया आढ़ोड़ी साळ में सावळ राख्योड़ी तो है नी ? सेठाणी पड़ूतर दियो, म्हारै तौ सावचैते ई उतरग्यौ। ध्यान ई नीं रह्यौ, वै बोरियां तो बारलै चैक में हीं राख्योड़ी पड़ी है। सेठजी कह्यौं-थूं बावळी है, थने ठाह कोनी रायां रौ भाव चांदी सूं ईं ऊॅंचा चढ़ग्या है। दस रिपिया मण हो ग्या है। सेठाणी कह्यौं-थै नाराज क्यूं व्है रिया हौ, अबार आड़ोड़ी साळ में रखवा दूं ? सेठ थोड़ो ढीलो पड़यो, बोल्यो, अबै रात रा रैवण दे, दिनूगे देखालां। चोर बातां सुणी तौ घणौ राजी व्हिया। मन में सोच्यौ-अबै तौ रायां बजार में हीं मिलैला, यू सोच चोर रायां री दोनूं बोरिया उठायने ले ग्यौ। चोर उठां सी पार व्हिया तो सेठ अर सेठाणी री आंख्या लागी। दूजै दिन चोर रायां ले यर बजार में फिरियौं पण उण नेै दस रिपिया मण में रायां रा लैवाल कोनी मिल्या। चोर जांणियौ के बांणिया म्हनै लूटणी चावै। वो राया दूजी बोरियां में घाल र उण से ठ री दूकान पूग ग्यौ, जठै सूं चोरी करी ही। सेठ री दूकान चढ़ता हीं, सेठ चोर ने पेचाण लियौ। सेठ कह्यौं-बजार में आज राया रा भाव एक रिपियें मण रा है। चोर कह्यौ, काल तो लोग बाग रात नै रायां रा भाव चांदी जैड़ा बतावै हा। सेठ कह्यौ, अरे बावळा, राया भाव रातै वाळा तो रातै ही गया, अब दिन उग ग्यौ.......।


भाग लिख्या ही अेहड़ा, ऊपर वाळो भी कांई करतो

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक करसी हो। लगो-लग दो तीन बरसां सू काळ रे चालतां खेती में कीं आवक नहीं हो रेयी ही। घर रो चूलों चलावणों दौरौ हौग्यो हो। वौ उनाळू साख सारू चैथा वांटा में एक जमीनदार सूं बात करी अर, उण रो बेरौ बंटाई रे हिसाब सूं तै कर लियौ। वे बेरौ सितर हाथ ऊंडौ झेलवौ बेरौ हो। चार जोड़िया बिना वो ताबै आवणौ ही दोरो हौ। इण खातर करसो अेक सेठ कनै गयौ अर उणसूं सूद माथै करजो लियौ। उण रै मन में ही कै चैखी साख होवता हीं माथै सगळी फारगती कर दूं ला। पैले फटकारै ई पूरौ खातौ वाळण सारू करसौ सगळा जाव में वो मिरचा बोय दी। कैणा में तौ जमींदार रौ बांटौ चैथौ हो, पण वो बैजा तंग करण लागग्यौ। रोजीना री मांगा-तांगी में के आज फलांणजी रै मिरचा भेजणी, आज ढींकड़जी रै अर आज पूछडंजी रै, यूं कर नै सगळौ बांटौ आधा सूं ईं करणौ पड़ियौ। दूबळा नै सौ दोखा व्ळिया करै। जोग री बात, पछै मिरचा में रोग व्हैगौ, की दावा री झपट लागगी, कीं ठाकर री गिरै अर कीं भाव धापनै मोळौ रेगौ। करसौ तौ लेणा में साव कळग्यौ। भूंडै ढाळै पड़ग्यौ। कमायो कीं नीं, सूद ऊपर सूं। रिपिया में जोखौ राखणियौ, अैड़ौ भोळौ सेठ ई कोनीं हौ। करसा री च्यारूं जोड़िया, थोड़ौ घणौं गैणौ गांठौ, वित-मवेसी, कपड़ा-लत्ता, बरतन-बासण सूंकाम नीं सरियौ तौ सेठ करसा रै डील रा गाभा ई उतार दिया। पौतियौं अंगरखी अर पगरखियां धुराधुर खुलायली। फगत गोड़ा सूं अेक वेंत ऊंची फोटोड़ी झीर-झीर व्हियोड़ी धोती राखी। पण लैणौं नीं उतरियौ ? करसौ घणौ ई रोयौ, कळपियौ पण सेठजी अेक लाल-छदांम छोड़ण नै ई त्यार नीं हा। करसो घणी बेईज्जती अर कूटण रा डर सूं रात रा आप रो झंूपौं छौड़नै छानै छिपतौं मंदिर में जाय नै छिपग्यौ। जांणियौ झांझरकै पौर रात थकां उठा सूं ठेको देय ने निकळ जावूंला। जीव रौ उकारळियौड़ी वौ पारसनाथ जी री पूतळी रै लारै लुकग्यौ। अंधारा में पूतळी साव नागी-तड़ंग। पूतळी रा माथा माथै हाथ फेरनै वो होळै सूं ड़रतै ड़रतै कह्यौं, भाया, थूं दो बेरा करिया दीसै। म्हारै अेक फोटोड़ी धोतड़ी तौ है, थारै तो वा ई कोनी। भगवान भी मन रे मांय हंस नै रेय ग्या, करता भी काई, करसे रा भाग चितरगुप्त भी ऐड़ा हीं लिख्या हा।


अकल सू बणा लियो भाई

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रौ बेटौ ब्याव करनै सासरा सू पाछौ आवतौ हौ। बेटा रा सारा वाळा घणौ दायाजौ दियौ। बारात गाजां-बाजां रै सागै उठा सूं वहीर व्ही। अेक धाड़ैती उण बारात नै लूटण रौ मतौ करियौ। वौ छौटा-मोटी लूट करतौ हौ। वौ सौ मिनखा रौ जत्थौ बणायौ। मौका री घाटी देखनै वठै आपरौ मोरचै लगायौ। सेठ रै कानां में ईं इण बात री भणक पड़गी। बारात पांच सो मिनखा री ही। गांव जावण रौ मारग ई अेक इज हौ। बाराज दूजा मारग सूं नीं जा सके। जै धाड़ैती मारेचां लियां बैठा है तौ वे अक भी जणा नै जीवतौ नीं छोड़ैला। वै मन में सोच लियौ के औ ब्याव घणौं मूघौ पड़ैला। खून-खराबै सूं सुगन बिगड़ैला। बींदणी रै कीं व्हैगौ तौ मूंड़ौ दिखावण जोग ई नीं रैवैला। इण वगत अकल हीं काम आवैला। सेठजी विचार करण लागा। थौड़ी देर पछै बोझ उतरग्यौ। सगळा जांनिया नै विस्वास दियौ के डरण री जरूरत नीं है। सेठा री अकल माथै सगळां नै ई भरोसौ हौ। सैठ बींदणी अर बंदी रै साथै सबसू आगै वाळा रथ में बैठ्या। बारात घाटै पूगी। सेठ तौ पूरौ जाब्तौ करियों बैठा हा। घाटा रै बीच में धाड़ैत आड़ा फिरिया। सेठ तौ निरभै बींदणी नै लेयनै रथ सूं हैटै उतरिया। वांरा दोनूं हाथां में दोय थाळ हां, अेक में मैवो-मिस्ठान, मिसरी अर पतासा भरियोड़ा हां। दूजा थाळ में इक्कीस मोहरां पळकती हीं। सेठ कह्यौ-म्हारीं आ बींदणी आपरै खोळै है। अर म्हारी तरफ सूं आपनै औ मामूली निजराणौ हैं। कबूल करौ। सेठ री बात सुणतां ई ठाकर तलवार अळगी फंेक ली। कह्यौ-म्हारी लाड़ल बेटी, दूधां न्हावौ अर पूतां फळौ। सेठां सांम्हीं देखनै केवण लागा-सेठां, आ बींदणी म्हारै खोळै है, पण बेटी रै दायजा री कीं चीज म्हैं निजरांणा में कबूल नीं करूंला। इणरौ घर रौ पांणी पीवणौ ई म्हारै वास्ते निखेद हैं। पछै ठाकर सेठां रा मोर थापलनै कह्यौ-सेठां, थें अेक बोल र्में इं म्हनै फंसा दियौ। पण, कोई बात नीं, बणी सो भाग री। अबै थै म्हारी तरफ सूं बेटी रै सारू अेक सौ अेक रिपिया कबूल करौ। पछै आपरो जत्थौ लेयनै बारात रै सागै व्हिर व्हिया। घरै पूगियां पछै सेठ ठाकरां नै पाठा नीं जावण दिया। आपरै साथै ई धंधा में भेळा राख दिया। दोनूं भाई व्ळै ज्यूं ऊमर भर भेळा रह्या।


सेठ यूं निभाई सोगन

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ नै कांदा घाणा भावता हां। वो तीसूं तारीख कांदां रौ सांग खावता। घर वाला पैला तौ काया व्हिया, पर हौळे-हाळे हेवा व्हैगिया। टेकर उण गांव में संत पधारिया। आगती-पागती सूं लोग उणरा परवचन सुणण सारू आया। केई दिनां तकयूं हीं चालतौ रियौ। संत अेक-अेक साहूकार नै खावण-पीवण री सोगन-सपथां दिराई। जोग री बात के उण कांदा वाला सेठ नै संत कांदा खावण री सोगन दिराई। सेठ कह्यौ-महाराज, आप फरमावों तौ धांन छोड दूं पण म्हारा सूं कांदा मरियां ईं नी छूटे। संत कह्यौ-मरियां पछै तौ सगळी चीजां अठै ई छूट जावैला। जीवतां छोड़णी आपरै हाथै हैं। संत ई हठी अणहूंता हा। कह्यौ छोड़णौ व्है तो कांदा छोड, नीतर थारौ मन व्है ज्यूं कर। संठ नै सेवट कांदां छोडण सारू मनवायनै ईं मान्या। सोगन लियां पंछै सेठ घरै आयौ। सेठाणी सू पूछयौ-आज साग कांई करियौ ? सेठाणी बोली-इण में पूछण री कांई बात। साग तौ कांदा रौ ई बणायौ है। सेठ कह्यौं- आज तौ म्हनैं संत कांदां नीं खावण री सोगन दिरायदी। सेठाणी कह््यौ-संत किया देखण नै आवै। अपारै सोगन ई खाय खेवणी अर कांदां ई खाय लेवणा। पण सेठ कह्यौ-आ बात तौ मन मांनै कोनी। सोगन खाई जकौ तौ अबै पालणी ई पड़सी। थें दूजौ साग बणा दियौ। सेठाणी कांम करण में माठी ही। कह्यौ-अबै कुण चूल्हौ चेतावै। आज-आज जो जिमलै, नीतर मन में रैय जावेला। तौ ई सेठ रौ मन नीं मानियौ। भूख अणहूंती लागोड़ी है। दोय पापड़ छमक दियौ। सेठाणी फेर ओजौ ताकियौ। बोली-पापड़ा रो सागकरूंला, जितरै आपरी भूख मर जावैला। सौगण खावणी तौ साचा मन सूं खावणी। मन में आवणौ ता आधौ खावणौं है। कांदां रा नांव सूं तौ थारै लाळा पड़ै। म्हारौ कैणौं मानौ आज आज तौ खायलौ। सेठ रै मन में तौ खावण री ही इज। सेठाणी रै इता कैवणा सूं वौ कह्यौ-थ्हारी मरजी व्है तौ औ साग लै आवौ। पण अेक उपाय कर, धेकची रै ढकणौ काठौ लगायणै कौरौ झोळ-झौळ आवण दौ। कांदां मत आवण दीजौ। सेठाणी कह्यौ-हां, आ गळी तौ थें नांकी काढी। झोळ में तौ मुसाला, पांणी अर बघार घी रौ है। माराजा आंरी तौ थ्ज्ञानै सोगन दिराई कोनी। म्हैं अैड़ी सुथराई सूं झोल घालूला कै तासळी में कांदां रौ फुतरकौ ई नीं आवण दूं। झौळ रै सागै कांदां ई पड़ता गिया। इण तरै वौ आपरी सोगन निभाई।


संत री साख री मिल गी सेठ रै छोरा छोरी ने मुगती

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक नगर में रातीराम नाम रो सेठ रैवतौ हौ। उणरै घरै छौरौ जलमियौ तौ ‘बै-माता‘ अंछर डालण सारू आई। सेठ बे-माता सू पंूछियौ आप कुण हौ। ‘बै-माता‘ कह्यौ, मै ‘बै-माता‘ हूं और थ्हारा बेटे मांय अंछर रै बारै में पूछियौं तौ ‘बै-माता‘कह्यौं थ्यारै मरण रै पछै थारौ छोरो सिकारी बनेळा, जिनावर मारनै पेट भरेला। ‘बै-माता‘ री बात सुण सेठ कह्यों म्हारै अठै तो जिनावर भी भूखा नीं सोवै, अेड़ो कदी नीं व्है। थ्हारा अंछर झूठा हैं। दूजी बार सैठ रै घर छौरी जलमी। ‘बै-माता‘ पाछी आई। सेठ पूछियों तो ‘बै-माता‘ कह्यौ, आ खोटा काम करैला। सेठ नै आ बात भी नीं जची। थोड़ा टैम पछै सेठजी सुरग सिधार गिया। उणरौ सगळौ धन खत्म व्हैगियौ। सेठ रौ छौरौ शिकारी बण गियौ। वौ जिनावर मारतौ अर आपरै पेट पाळतौ। छोरी खोटा काम में पड़गी। एकर एक संत जो, उण सेठ रा सथी हा, वे वठै आया। मिनखा सूं सेठ रौ पूछियौ तौ उणनै सगळी बात ठा पड़गी। संत वठै हीं जम ग्या। सिंझया पोर जद सेठ रौ छौरौ जंगल सूं पाछै आयौ तौ उणनै आपरी ओलखाण बताई। दूजे दिन संत भी उणरै सागै जंगल गिया। संत कह्यौ थ्हारै हाथ सूं एक जिनावर मरैला, अेड़ो थ्हारा भाग में है। इण सारू थूं छोटा मोटा जिनावर मत मार। वठै चिड़ी-कमेड़ी सूं लेयर घणा जिनावर उणरै आगै आया पण संत हर बार उणरौ हाथ पकड़ लियो। उणनै कोजी भूख लागी हीं, पण वौ मजबूर हौ। सिंझया व्हैती-व्हैती वठै एक हाथी आयौ जणै वो तीर मारियौ तौ हाथी चित व्हैगियौ। उणरा माथ्ज्ञा सूं घणा गजमुक्ता निकलिया, इणणै बैचणै सेठ रौ बेटौ पाछौ मालदार बण गियौ। अगली बार संत सेठ री छोरी रैकने पूगिया। उणनै कह्यौ, थ्हारै घरै जौ भी आवै थूं किंवाड़ मत खोलजै। वा यूं ही करियौ। पैला कम रिपिया रा देवाल आया पछै हजारों रिपिया देवण वाला आया पर वा किवाड़ नी खोलिया। बे-माता रा अंछर खोटा नीं व्है इण सारू खुद भगवान मिनख रा वेष में आया, पण वो किवाड़ नीं खोलिया। वा कह्यौ अगर थ्हैं भगवान हो तो किवाड़ बंद होवण पर भी अंदर आ सकौ। जद भगवान् मायनै आयनै उणनै दरसन दिया अर उणरी मुक्ति व्हिई।


बखत माथै सेठ अेड़ौ चलियौ दांव

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक गांव में एक सेठ पैलवान हो। गांव में कुश्ती करण आवण वाला सगळा पहलवानों नै वौ पछ़ाड़ियौ हो। पण अबै सेठ री अवस्था ढलन लागी हीं अर सागै ताकत भी कम व्हैगी हीं। उणसूं जलण वाला मिनखा मैं आ बात ठाह पड़ी तौ वै मौकौ साजण री सोची। वे दूजा गांव सूं एक पैलवान ने न्यौता दियौ। एक दिन गांव में एक नुंवौ पैलवान आयौ अर सेठ नै कुश्ती करण सारू ललकारियौ। सेठ सोचियौ आज तक री इज्जत धूड़ में पड़ जावैला। सरीर में ताकत नीं ही, वो घणी चिंता में पड़ग्यौ। इज्जत रै खातर वो उण पैलवान री चुनौती स्वीकार ली। सेठ सूं जलण वाला मिनख घणा खुश व्हिया। गांव में चरचा चालगी कै अबै सेठ क्हैं तिरी ताकत हैं, ठा पड़ जावैला। कुश्ती में जीतण वाना नै 500 रिपिया रौ इनाम मिळणौ हौ। थोड़ा दिन पछ़ै, अखाड़ा में कुश्ती रौ आयोजन व्हियौ। कुश्ती देखण पूरौ गांव जुटियौ। टैम माथै कुश्ती शुरू व्हिई। दोनां पैलवान आपस में गुथ गया। सेठ जद देखियौ कै जीतण री आशा नीं है तौ वौ दूजा पैलवान रै कानां में धीरे सूं कह्यौं, थूं जीत जावैला तौ थ्हनै पांच सौ रिपिया हीं मिलेळा, पण हार जावै तौ क्है थ्हनैं एक हजार रिपिया इनाम में दूंला। पैलवान बातां में लाग गियौ। वौ मन में सोचियौं मैं तो नौसिखियों हूं, कठी हारूला, कठी जीत जाऊंळा। क्हैं जाण बूझ नै हार भी जावूं जौ क्हनैं कई फरक पड़ै, हजार रिपिया घणा काम आवैला। यूं सोच नै वौ सेठ नै जिताय दियौ। सेठ आपरी मूंछां माथै ताव देवण लागौ तौ ईष्र्या करण वालां रा मूंडा उतर गिया। सेठ पांच सौ रिपिया लेयर आपरै घरै आयौ। थोड़ी देर पछै पैलवान सेठ रै पाग पूग ग्यौ। अर उणरी जुबान रै मुजब एक हजार रिपिया मांगिया। सेठ व्यंग्य सूं हंसण लागौ अर पैलवान सूं कह्यौ, बावला, काहौ रा रिपिया लैवणै आयौ है ? वौ तो बखल रौ दांव हौ, जो चाल गियौ। पैलवान उतरियौ मूंड़ौ लैयर घरे गियौ, वौ घणौं पछतायौ के पांच सौ रिपिया भी आपरी मूरखता में गमा दिया, सेठ री गांव में इज्जत घणी बढ़गी, लोग उणसूं जितरा ड़रता उणती ज्यादा डरण लागा।


दिल्ली रा ठग अर मिनख

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक मिनख गंगाजी गियौ। पूरी तैयारी रै सागै। हरद्वार सूं पाछौ वहीर व्हियौ तौ उणरै जची के दिन दिल्ली निजरां सूं देखलूं तो कैड़ौक व्है। अबै तौ म्हारा ई फुल गंगाजी में आवैला। खुद रै आवण रौ तौ मौको पाछौ नीं बणैला। राजी-राजी वौ हरद्वार सूं आवण रै वगत दिल्ली उतरग्यौ। दिल्ली देखणै वौ घणौ राजी व्हियौ। ऊंचा मैला, पक्की सड़कां अर सुरंगा बाग-बगीचा। जमना रै काठै बसियोड़ी। आ नगरी तौ सुरगापुरी नै ई मात करै। मिनख नगरी देखण में मस्त हौ के तीन च्यार लफंगा उणरै लारै पड़ग्या। वौ ग्वार व्है ज्यूं दिखतौ हौ। पैली वळा दिल्ली आयौ हौ। वौ तौ आपरै मन परवांण धौळी-धौळी सै दूध जांणतौ। मिनख जात रौ पतियारौ करतौ। पण लफंगा तौ अैड़ा भोळा मिनखा री इज टौय में रैवे। वै उणरै लारै-लारै अटकळ विचारता, निरी दूर लारौ करता रह्या। मिनख अेकांत ठौड़ देखनै बैठग्यौ। उगां नै औ ई मिस लाधौ। तुरंत उणनै पजावण री विचारली। मिनख ऊभौं व्हियौ तौ वै उणरै दौळा व्हैगा। कह्यौ-थू पवितर आतमा रौ अपमान व्हियौ। थारी मौत तौ नीं आई। कोतवाळ कनै चाल। दस साल जेळ में पंड़ियौ सिडै़ला। बूढ़ो है, पण इतौं ई होस नीं। मिनख कह्यौ-म्हैं गांव रौ अबूझ हूं, म्हनै ठाह कोनीं। भूल संू गलती व्हैगी, हाथ जोड़नै माफी चावूं। कीं डंड भरणौ व्है तौ पावली-आठ आंनी अठै ई लै लिरावौ। म्हनै कोतवाळ करै मत घसीटौ। कीकर ई पिंड छूटै जकी बात करौ। थांनै आसीस देवूंला। ठग कह्यौ-बदमास, थूं पवितर आतमा री कीमत चार आनां ईक रै। आ तौ फैल जुलम री बात हैं। थनै कोतवाळी में लै जांवणी ई पड़सी। थूं जांण करनै आ पाप करियौ। मिनख हाथ जोड़तो बौल्यौ-म्हनै इण में कांई हाथ आवै ! आप हुकम दिरावै तौ आ सगळी ठौड़ म्हारै हाथां सफ कर दूं। पण ठग किणरां मानै। सगळा दोळा व्हिया जकौ रोवता-ई उणरौ सैंग माल मतौ खोस लियौ। फगत पैरण नै धोतड़ी लारै छोड़ी। मिनख जांणियौ के इता में ईं पिंड छूटौ। दस बरस री जेळ तौ भुगतणी नीं पड़ै। पण उणरा मन में पूरौ बैठग्यौ। कठैई फेर गलती व्हैगी तो अबकै लारौ नीं छूटैला। इण विचार सूं पूछयो-अबै तौ म्हनै सावळ रिह्यौ।


ए तो कंवळै टिरियोड़ौ ई खोटा

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ तिमंजली हवेली बणाई। घणा कोड़ सू हवेली रौ पूजन करायौ। गांव रा जमींदार नै खास तौर सूं निवतिया। उणनै राजी करण सारू हवेली रा सिरै मोड़ माथै वारै पिताजी रौ चितराम लगायौ। चितराम नै बतावती वगत सेठ कह्यो-छोटे मूंडै मोटी बात तो नीं करू पण तौ ई म्हनै कैणौ पड़ेला के मायतां रा चितराम सूं हवेली री छिब सुधरग्यी। जमींदार कह्यौ-क्यूं सेठा, साची कैजो बापजी री करड़ी निजर रौ तौ जीवता सिंघ बिचै ई घणौं वतौ डर नीं लागे ? सेठ जवाब दियौ-इण में कांई कूड़ी बात। आज दिन ताई वारी धाक सूं मोटा चोर अर धाड़ायती रा थर-थर कांपे ! जमींदार मूछंया माथै हाथ फेरनै घांटी हिलायनै बोल्या-हां, इण में कांई मीन मेख। उण दि री बात पछै तीन चार बरस बीतग्या। अेक दिन जमींदार मतै चलायनै सेठां री हवेली पधारिया। सेठ घणा ई राजी व्हिया। बोल्या-की हुकम व्है फरमाऔ। जमींदार कह्यौ-यूं ईं मन में जचगी, सेठा सूं मिळण री। की हिसाब किताब ई करणौ हैं। सेठ अचरज सूं पूछ्यौ-हुकम, किसौ हिसाब किताब, म्हनै कीं जाच कोनीं। जमींदार बात बदळनै कह्यौ-अैड़ी कीं खास बात कोनीं। घर री बात हैं। बोले सेठां, रह्या तौ राजी खुसी ? कींडर भै तौ कोनी। सेठ कह्यौ-अै बातां आप सूं काई छांनी ? आणंद रा थाट हैं। नरमाई सू पाछौ कह्यौ-म्हारा कैणा परताप ! परताप तौ पुराणा जमींदारा रा हैं। पछै सेठां नै बात समझाई-इण हवेली री प्रतिस्ठा नै आज चैथौ बरस लागण आयौ। उण दिन आप खुद ई फरमायौ के जे आपरै सिरै म्हारै बापजी रौ चितराम नीं व्हैतो तौ आपरी लाखूं रिपिया री माया पार व्है जाती। आठ पौर बतीस घड़ी वे हवेली री रूखाळी करता। उण रूखाळी पेटै तीन बरसां रा बीस हजार रिपिया कीं वती बात कोनीं। घणा बरसा रौ हिसाब भेळो व्हियां आपरै माथै घणौ भार पड़तौ। सगळी बात सुणतां ई सेठा रा तौ हौसला ई गुम व्हैगा। पण जोर ई कांई करै ! माडांणी मुळकण री कोसिस करी। कह्यौ-म्है तो बापजी रौ मान राखण सारू चितराम लगायौ हौ, आप औ बोझौ दे दियौ। जमींदार रिसां बळनै कह्यौ-सेठां, औ तौ थारौ धापनै नुगरापणौ है। सेठ बापड़ो कांई करतौ ! जांणग्यौ जमींदार रिपिया तौ किणी भाव छोड़ै नीं। पछै हील हुज्जत करणी फालतू हैं। हवेली में जायनै बीस हजार रिपिया लायौ। चितराम रै माथै धरनै जमींदार रै निजर कर दिया। मन में घणौं ई पिछतावौ करियौ के जमींदार तो कंवळै टिरियोड़ी ई खोटौ।


आपरी घरवाली नै पिछाणौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

आजकल घणकरा घरां में लुगाया रो राज है अ‘र लुगायां रौ ईज बोलबालो हैं। मूछाला मरद बापड़ा घर में भड़ती बगत मूछा नीची कर‘र ड्योढ़ी में बढ़े। म्हारा ई कई मींत मिळै तो आपरी घर गाथ सुणावे। उणमें कीं बातां सुख री व्है तो केई दुख री भी व्हैं। मलै मिनळ आळा लोग अर मींत आपरौ जिकौ तजुरबो मनै सुणावै, उणरे मुजब वांरी घरवाली या जोड़ायत भांत-भांत रा सुभाव अ‘र आदतां रै कारण न्यारी ओळखाण राखे नै आपरै घरधणी नै उणी ढंग सू परोटे। मोटै तौर सूं बै इण मुजब देखण में आवै। केई भायलां री घरवालीं पतिदेव सूं बेसी वांरी जेब सू हेत राखे अ‘र तनखा लावतां ईपूरी तनखा आपरे कबजे कर ले अ‘र घरधणी बिचारौ गुटका-बीड़ी सारू ई पईसा ने तरसै। वांरी लुगायां नित नवा कपड़ा पेहरै अ‘र वै भाई लोग वार-तिवांर नै ई नवा कपड़ा सारू उडीकता रेय ज्यावै। पति परमेसर रै हाथ में पईसा देखतां ई ए लुगायां पतंग री डोर ज्यूं खेच‘र पईसा आपरे हवाले करले। केई देविया तो दोयां च्यारां छानै-ओले पति री जेबां टटोळती रेवै अ‘र चोरियौड़े धन सूं बजार में चाट-पकौड़ी खावै। कदेई-कदास गुटका सुपारी रो ई भाग लगावै। ऐड़ी लुगायां कसाई री श्रेणी में गिणीजै। दूजै कांनी केईघर लिछमी ऐड़ी भी व्है, जिकी आपरे पतिदेव नै खोळे रै टाबर ज्यूं राो अ‘र उणरै खाणै-पीणै सूं लेय‘र कपड़ा-लतां तांई पूरौ ध्यान राखै। घरधणी रे दियोडे़ माल-असबाब सूं लेयर उणरै कागद-पानां तांई सगळी चीजां संभाल र राखै, उणरी आतमा ने कदैई कष्ट नीं पोंचावै अ‘र सदा खुश राखण रौ जतन करै। ऐड़ी लुगायां मां रूपी पत्नी कहीजै। पण केई घरवालियां ऐड़ी भी हुवै, जका काम-काज सूं तो किनारौ राखैं पण खावण-खंड़ी घणी व्है। इयां लिछमीयां री खुराक तो अणूती व्है, पण काम रै नावां माथै फळी ई नीं फोडे। रोट तोड़णा अ‘र नींद काढणी इयां रे खास सुभाव में गिणीजै। काम पड्यां घरधणी नै गाल काढ़णै सूं लेय‘र इज्जत उतारण तांई कोई औसर नीं चूकै। आपरे पति नै रमतियो समझण आली ए लुगायां कर्कसा लुगायां कहीजै। इणरै टाळ केई लुगाया पतिदेव रै हुकम बिना पावंड़ो ई नीं भरै, अ‘र पति री इंदा मुजब घर चलावै अ‘र पति ने प्रिय भोजन रो भोग लगावै, मान-मनवार सागै जिमावै, पछै खुद खावै, वा पत्नी आग्याकारी घर लिछमी कहीजै। ऐड़ी लुगायां पति रै एक इशारै माथै दोड़ती निजर आवै। केई लुगायां इसी ई व्है, जिकी आपरे पति नै देखतां पाण हरख करै, हंसी-ठिठोळी करै अ‘र जे घणै अरसे सूं पतिदेव परदेसां सू पधार्या व्है तो उणरौ कोड़ करै, उच्छब करै अ‘र आरती उतारै। भांत-भांत रा जीमण जिमावै नै खुद ई उणरै सागै भोजन करै, वा घरवाली मित्र पत्नी कैवावै। केईक लुगायां ऐड़ी भी व्है, जिकी पति रै रीस कर्या सूं रीसां नीं बळै, नीं पाछौ तूटतौ जबाब देवै। सदैव मन में घरधणी रो ड़र खटकतौ रेवै, अ‘र भूले-भटके पतिदेव हाथ उठायदै तो ई चुप-चाप सहन करलै, पण मन में पति रै वास्तै कदेई दुरभावना नीं राखै, ऐड़ी लुगाया दास पत्नियां कहीजै। इण भांती लुगाया रे सुभाव रै ढ़ालै वांरी विगत अठै दीवी है। आपई आप रै मन में तौल‘र निरणै करो कै आपरी घरवाली उपर लिख्यौड़ी लिछमियां री कुणसी केटेगरी मंे आवै अ‘र आप किता पाणी में हौ। पति देवां रा कांई-कांई रूप व्है अ‘र कांई कुलक्खण पाळै, इण विगत रै सागै फेर कदेई हाजर होवूंला।


पंड़तजी यूं गंगाजी घाल नै आया जाट री मां ने

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक जाट री मां मरी तौ वौ गांव रा पंडतजी नै गंगाजी वहीर करिया। हरद्वारा सूं तीसेक मील पैलां पड़तजी रौ सासरौ हो। तीच-च्यार बरसां सूं सासरै जावण रौ काम नीं पड़ियौ। अर कांम पड़तौ तौ ई इत्ती अळगी पड़ियौ भांय जावण सारू खरचो माथै पड़तौ। चैधरण रा फूल गंगाजी घालण रौ औ टांणौ देखियौ तौ वै केतां पांण मांनग्या। पण पंडत रा मन में कुटळाई आई। जाट सूं हरद्वार रौ पूरौ भाड़ौ लयनै वै आपरै सासरै ई मौज करणी चावता। फूलां नै सासरा री नाड़ी में छाने सूं पटक देवूंला। किणई नै कांई ठाह पड़ै। पंडतजी तौ सोची जकी ई करी। जाट सूं ठेठ हरद्वारा रौ आवण-जावण रौ खरचै लेयनै वै तो सीधा आपरै सासरे गिया। उठे आठ-दस दिनां तक आराम सूं रहयौ। खरचा मांय सूं खासा भला दांम बचाय लिया। दिनां री गिणती करनै वै पाछा हिसाब सूं गांव पूराग्रूा। जाट आपरी मां रै लारै घणौ ई खरचै खातौ करियौ। गंगाजळी वरतायनै सगळी न्यात निंवती। नांमी मौसर करियौ। केई दिन बीत्यां पछै जाट नै खबर पड़ी के पंड़तजी तौ ठागौ करग्या। ठेक हरद्वार गिया ई कोनीं। सासरा सू ई पांछा वळग्या। उठा री नाड़ी में फूल पटकनै झूठ ई गंगाजी रौ नांव ले लियौ। आ बात जाट नै अणहूंती खारी लागी। पंडतजी नै औळवौ देवतां कहयौ- पंडतजी, म्हैं आपनै म्हारा खास घरू जांण नै मां रा फूल सूंप्या। पण म्हनै रात रा सपनौ आयौ। सपा में मां आयनै म्हने कहयौ - पंडतजी आपरै सासरै ई म्हारा फूल पटक दिया। गंगाजी में घालिया बिना म्हारी गति नीं व्हैं। अबै कीकर ई करनै म्हनै गंगाजी पूगती कर। गंगाजी पुगायां बिना थारौ सगळौ खरचै-खातौ अकारथ जावैला। जाट री बात सुणनै पंडतजी कह्यौ - चैधरीं, म्हनैं तौ थारी मां, लखंणा बायरी ई दीसी। म्हारा सासरा सूं इतौं गौतौं खायनै पाछी अठै गांव कांई खावण नै आई। उठीनै ई सीधी गंगाजी पूग जावती तौ उणनै कुण बरजतौं हौ। थारौ खरचो-खातोै ई सुक्यारथ लाग जावतौ अर उणरी ई गति व्हैं जाती। पण लखणांबायरी लुगायां रौ कोई कांई करै। तबड़का मारती अठीनै नी आयनै उठीनै ई बळ जावती तौ कांई जोर आवतौ। गंगाजी तौ उठा सूं साम्ही नैड़ा हा। पंडत रौ पडूंतर सुणनै जाट घणों सरमीझियौं।

मातृभाषा अर विदेसी भाषा रै उळझाड़ मांय

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

आपणै ग्रंथा मांय बच्चिया रौ लालन-पालण अर ताड़ण पर जोर हैं। अठै गौर तलब है क आज बच्चा रौ लालन-पालण रो तो पतौं ई गायब हो गयै क्यूंकि मों अर बच्चा रै बीचै अंग्रेजी पालणां आं ग्या। मां रे पलंग पर बच्चियां नै जगै नीं मिल सकै। पैला कनै सूती मां अर बच्चियों बिचे बेक घड़कणां री भाषा हुती। लौरी साथै थापी री भाषा रो अेक रंग हुतो। दादा-दादी, मां-बाप, बुआ-मासी, ताऊ जी कई रिस्ता हुता। अंग्रेजीयत अर अेकळ परिवार में अबै कीं नी। ताड़ना रौ जिम्मो लियौ है कान्वेंट स्कूल। इंग्लिष मिड़ियम रा स्कूल। जका बरसाती कुकुरमता जैड़ी फसला ज्यूं कस्बा, गांवां तक उग ग्या है। मैनरस रै नांव सूं पीर रैया हैै बच्चा...पण संस्कृति ? कांई पैला स्कूंला मांय सस्कार नीं दिया जवता। इण स्कूंला माय साइंस तौ पढ़ाई जावै पण आपणौं मारल हर तरै सूं डाउन राख्यौ जावै। स्ककूलां मायं मातृभाषा बोलण पर जुर्मानों हुवै है। गंवार अर सभ्य भाषा रो भाव उभर रैयौ हैं। गंवार भाषा गिणीजै क्यूं ? क्यूं नीं हुवै म्हां अंग्रेजी ने माथेै जौ चढ़ाय दी है। इण भाषा रै कारण बच्चा आपरै घरां अर रिस्तेदार बिचै अजनबी बण र रैय जावै। सुबै चिड़ियाघर में टाबरियां ने लेयर गई। म्हैं अेक बच्चा ने बांदरा कनै देखर पूछियौ ‘बेटा आपणी भाषा में मंकी अर डंकी ने कांई कैवे ? बो आपरी मां रौ मुंड़ो जोवण लागौ। मासी आपने कांई पतो म्हारा टाबरिया अंग्रेजी स्कूल में पढ़े है। इणां वासते तौ हिंदी रौ काळौ आखर भैंस बरोबर है‘ बा घणी गूमेज सूं बोली ‘म्हारा बच्चिया तौ अंग्रेजी में ई खाईंग, अंग्रेजी में ई पढ़िंग अर अंग्रेजी मांय ई रैविंग।‘ सुणर मांय रै मांय हंसी रोकती म्है कैयौ, थारा टाबर थनै अंग्रेजी खूब सिखाई है। जिंदगी री पैली पाठषाला तो घर हुवै अर मां पैली गुरू। यो कथन आज पलटी खा ग्यौ। मां-बाप‘ बर ‘मम्मी-डेडी‘ कांई दो भाषावां रा दो सबद संबोधन मात्र है ? कांई किणीं भी देस री भाषा ने आपणी भाष ने छोड़र ई अपणाणौं ई आपणी संस्कृति रैयगी है। म्हंै तो कैवूं क कोई भी संस्कृति आपरी भाषा रो अलग अस्तित्व राख सकै। मजै री बात है, अबै ओ हाल है क किण ने ई गुस्सौ आवै तो बो ई अंग्रेजी में बोलण ढूकेै, अंग्रेजी में गाळिया काढे भलई मतलब जाणै चाहे नीं जाणै। बाजार में अेड़ा भी कई निजर आवै है जकी अंग्रेजी में बोले, भलई उण रो अरथ बदळ ावै। अंट-संट बोलर लोंगां री हंसी रो कारण बण जावै। और तौ और बहुराष्ट्रीय कंपनीया अर पूंजीवाद रो विरोध करणीयां पाणी पी-पीयर हाका करणवाला, स्वदेसी रा नारा लगावण वाला, हिंदी ने ओढण-बिछावण वाला, हिंदी रो पक्ष लेवण वाला लोग भी अंग्रेजीयत री मानसिकता सूं ग्रस्त है। म्हां अग्रंेजी भासा रो विरोध नी करां। म्हां जाण हां कै अंग्रेजी में साइंस रो ज्ञान रो विस्तृत रूप में मिले हैं। इण वास्तै विद्यार्थिओंने अंगेजी सूं घणौ फायदो मिलो। अंग्रेजी में विज्ञान पढ़नो जरूरी है। पण आपरी संस्कृति नै कायम राखणौ ई जरूरी है। साक्षरता अर सांस्कृतिक विरासत ने विद्यार्थिओं तक पहुंचाण सू पूर्व उणांने उणां री मातृभाषा देनी होसी। राष्ट्रीय भावना सूं ओतप्रोत कीं लोग, उच्चाधिकारीं अर केंद्रिय शासन कानी सूं कई क्षेत्रां में हिंदी भासा रो प्रयोग लागू कारण हिंदी भाषा अंग्रेजी ने अंगेठौ बतावती प्रगति रै पथ माथै बढ़ रैयी है।


आगोतर नीं बिगड़ै अण

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक चोर रा सगला घरवाळा मर खूटग्या तौ उणनै वैराग ऊठग्यों। वौ एक साधू-मातरा रै पगां पड़ने कहयौ-संता, म्हारौ औ जलम तौ बिगड़ियौ जकौ बिगड़ियौ ई, अबै आगौतर नीं बिगड़ेै, इण खातर आपरै सरणै आयौ हूं। सारी ऊमर, चोरियां में काढ़ी, अबै ढळती उमर रांम रौ नांव लेवण चावूं। पण बिन गुरू बिना वौ ई लिरीजै कठै। म्हारा जैड़ा पापी माथै दया बिचारौ अर म्हनै तारौ। साधू मातमा उणनै चेलौ बन लियौ। मातमा रौ अड़खंजौ लाठौ हौ। रामुदंवार में कोई संन्यासी रैवता हा। घणी ई वित-मवेसी अर घणौ ई घीणौ-धापौ हो। रांमदुवार में केई चारियां, लोटा गिलास, कूंडा, केइ राच-पीच, केई ठांव-ठीकरा अर केई बरतन-बासणा हां। रामजी री किरपा सूं गिरस्ती रा सगळा थाट इण रामदुंवारा में हा। चोर रै तौ मोज बणी पण बणी। सैकडूं चोरिया करनै ई वौ इतौ आराम नीं पायौ। पछै चोरी करण में कांई सार, पण तौ ई रांमदुवारा में अठी-उठी हेर-फेर करियां बिना उणनै नेहचै नीं व्हैतौ। केई बरसा रीं जूंनी लत ही। सारै-सास छूटै तो कीकर छूटै। वो आपरीं पुरांणी आदत पोखण सारू रांमदुवारा रा सगळा बरतन-बासणां री अठी-उठी हेरा-फेरी करतौ रेवणो। दूजा चेला ठोड़ री ठोड़ सगळी चीजां सावळ सुथराई सूं जमायनै धरता अर वौ जमायोड़ी चीजां ने अठी-उठी कर दैवतौ। सगळा चेला उणरी हेरा-फेरी सूं काठा काया व्हैगा। वै महंतजी नै चुगली करी तौ महंतजी उणनै बुलायनै समझायो-भाया, सगळी मूरतियां थारी घणी सिकायतां करै। थूं बिना कांम कारग चालतौ ई वांरी जमायोड़ी चीजा नै ठोड़ क्यूं छुड़ावै। रामदुवारा री सगळी मूरतियां थारी इण हेरा-फेरी सूं नाराज हैं। चोर महंतजी रै पगां हाथ लगायनै कहयौ-बाबजी, आप ई न्याव करौ के चोर, चोरी सूं गियौ जको तौ ठीक, पण हेरा-फेरी सूं ई गियौ। पुरांणी लत हैं, चोरी तौ छूटगी पण हेरा-फेरी नीं छूटै। मातमा उणनै समझायौ तो एकर मान गियौ। थोड़ा टैम वो हेरा-फेरी नीं करी। पण वो आपरी आदत नीं छोड़ सकियौ, रांमुदवारा रा मिनख मातमा नै घणी सिकायत करता पण मातमा मातमा उणनै बुलायनै समझावाता ही रैता। तामता जाणियौ के इणरी चैरी करण री आदत तो रांमदुवारा में रैहणै छूटी। लारै जाता वै हेरा-फेरी री लत आगोतर माथे छूट गी।

घोडियां रै इता लांबा-लांबा सींगड़ा हा

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ छकड़ौ जोतनै आपरै सासरै जावतौ हौ। साथै सेठाणी अर उणरौ बैटौ भी हौ। बैटा री उमर सतरा-अठारा बरस हीं। सूरज मथारै आयौड़ौ हौ अर वै हौळौ-हौळै बळदां नै खड़ता हा। मारग में एक जाड़ी घेर-घुमेर बोरड़ी रै टेटे वे छकड़ौ ढाबियौ। सेठाणी कहयौ-धमैक बिसाई खायनै दौफरी करलां। बोरड़ी री छींया नांमी है। वौ कटोरदांन खालनै रोटिया खावण ढूंका के वांनै दोय घोड़िया सरणाट साम्हीं आवती दीसी। धोड़िया रा असवार ई बोरड़ी हैटे छकड़ौ देख्यौ तौ लगांम खांची। सेठां ने कहयो-कोई म्हारीं पूछै तौ बताजौ मती। जै बताय दियौ तौ थें थारी जाणौ। आ कैयनै वै दोनूं चोर भरणाटै डावै पसवाड़े उजड़ टळग्या। थोड़ी ताळ पछे जीम-जूठने सेठ पाछो छकड़ौ। जोतियौ। दूजा दौय असवार वळै आवता दीखिया। ै कदास घोड़िया रा धणी हा। चोरां नें पकड़गण सारू वारै लारै वार चढ़या हा। घोड़िया रै खोजा-खोजां वै उणी मारग लारै उड़ता आया हा। पण तौ ई खासी छेती रैगीं। सिरदार छकड़ा रै पाखती आयनै घोड़िया ढाबा। आखता पड़नै पूछियौ-सेठां, अठीकर दोय घोड़िया जाती देखी कांई। सेठ रै जवाब दैवे उण सूं पैला उणरौ बीच में बौल्यौ-हां देखी। सिरदार वळै पूछयौं-उणरौ रंग कैड़ौ हौ ?वो दीखण में कैड़ी हीं ? चोरां रौ तौ ना दियौड़ौ हौ इण उपरांत सेठ सौच्यौ के घोड़िया हाथ आया पछै गवाईयां में फिरणौ पड़ैला। कुण मारग चालता घांदा में पड़ै। वै बैठा नै इसारौ करियौ तौ ई वौ समझियौं कोनीं। कोड़यौ होयनै साची बात कैवण लागौ-रांत रंग री फूठरी घोड़िया हीं। तद सेठ बळदा री रासां तणकार नै कह्यौ-चेत, चेत। अबे जावतौ वौ सांनी में समझग्यौ। भोळौ गणनै हाथ उंचै करियौ। खुंणी रे आंगळियां लगायनै कहयौ-फैर घोड़िया रै इता लांबा-लाबंबा सींगड़ाहा। सिरदार नै ई उणरी बात सुणनै हंसी छूटगी। कह्यौ-बावळा, घोड़िया रै ई कदै ई सींगडा हंसता थका कहयौ-बांणिया रा बैटा, घोड़िया मंे काई समझै। औ तो टाबर है। आपनै यू झूठ ई बताय दियौ। म्हां तौ घोड़िया देखी नीं कोई घोड़ा देखिया। आ कैयनै सेठ ई आपरै मारग बळ खड़िया अर सिरदार ई आपरी घोड़िया चोरां रै लारै बगडाई।

मूंछ रौ फगत एक बाळ घणों

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक मिनख रै तोटौ आयग्यौ। परभात रौ आथण अर आथण रौ परभात पकड़णौ दौरौ व्हैगा। आपरी ऊपर में वौ चिलम ई मांगनै नीं पीवी तौ किणी सूं रिपिया कीक मांगै। पण दिन धकावणा मुळगा ई दूभर व्हैगा तौ काठौ कायो हायनै वो एक बांणिया री पेढ़ी चढ़यौ। बांणियौ उणनै ओळखतौ हौ। आव-आदर रै सागै बतळायौ-आवौ सिरदारा, आज अठीनै कीकरण किरपा करी ? मिनख सूं नीं तौबोलीजियौ अर नीं उण सूं बांणिया रै साम्हीं ई भाळीजियौ। वौ तौ नीची धूण करनै बौलो-बौली पैढ़ी माथै बैठग्यौ। सेठ मा‘ टौ बड़ौ समझणौ हौ। तुरण उणरै मन री बात लखग्यौ बौल्यौ-अर पौ आपरै घर री पेढी है। म्हारां सूं आप संकोच राखौ, बड़ी अचंभा री बात है। मिनख सूं ई कांम पड़िया करै। फरमावौ किता रिपिया री जरूरत है ? मिनख गळगळा कंठ सू जवाब दियौ, सेठां, रिपिया तौ म्हारे हजार चाहीजै। पण करो चाहीजण सूं ई कांइ व्है, म्हारै कनै गैणौ-गांठौ की कोनी। अर जीम म्है मारियं इ किणी रै नांव नी मंडावू। बांणियो बीच में बौल्यौ-कुण बुरीगार आप सूं गैणौ-गांठौ मांगियो। आपरी मूंछ रौ फगत एक बाळ म्हनै तौड़नै दे दिरावौ, मिनख आपरा धूजता हाथ सूं मूंछ रौ एक बाळ पकड़ियौ। तणकरौ देयनै तो बाळ तौ तोड लियौ पण बांणिया नै बाळ झिलावतां उणरी आंख्या जळजळी रहेगी। मिनख रै पाखती ई एक राईको बैठौ हो। वौ ई सेठा कनैरिपिया लेवण सारू आयो हौ। मूंछया रा बाळ साटै रिपिया मिळला देख्या तौ वौ तुरंत आपरी मूंछ रा लट्टी बांणिया साम्हीं करनै कहयौ-लौ सेठां, अंक री ठौड़ औ पचास बाळ। म्हनै ई आरै साटै पांच सौ रिपिया दे दौ। बाणियौ खिखरा करतौ बोल्यौ-बावळा, एड़ी जट तौ टकै घड़ी बिके। औ तौ मूंछ-मूंछ रौ फरक है। अळगी बारै फंेक, क्यूं हाट में फूस बिखरे। इणरी मंूछ रौ एक बाल हीं म्हारै करजा चुकावण सारू घणै हो, ओ उतरी रात सावैला नीं जठा तक वौ पेढ़ी माथै सूं बाल नीं लै जावै। राईका नै सगली बात समझ आयगी, वौ बोलो-बौलो आपरौ कंदौरो काढ़ने पांच सौ रिपिया लिया। मिनख नै मूंछ रे एक बाल रे सागै हजार रूपिया मिलगिया।


इण वास्ते रोया जवांई सां

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अैक बांणिया रो जंवाई मुकलावौ लावण सारू सासरै गियौ। सासरे में जंवाई रा लाड़-कोड़ करण सारू आगती-पागती री लुगाया कमरा रै माय बुलायौ। घणा इ गीत गाया, घणा ई लाड़-कोड़ करिया अर घाणा ई ख्याल-तमासा बताया। जंवाई रै आगती-पागती लुगायां रौ थट लगौड़ो हौ। रूपाळा जंवाई रौ रूप् निरख-निरखनै सगळी लुगायां घ्ज्ञणी ई राजी व्हीं। इता में एक छोटी-सी डावड़ी जवांई री सासू नै अेक कागद लायनै दियौ। लुगायां तौ भणियोड़ी ही नी। जंवाई सूं कांई चोज। वौ तो घर रा बेटा ज्यूं हैं। आ सोच ने सांसू जर्वाइ नै बांचण सारू कागद पकड़ाय दियौ। जंवाई कागद खोलनै आपरै साम्हीं करियौ। थोड़ी ई टेम रै पछै जंवाई रा दोनूं हाथ थर-थर धूजण लागा। अर ठळाक-ठळाक उणरी आंख्या सूं आंसू बैवण लागा। धूजता हाथौ सूं कागज नीचै पर्डग्यौ। रोवण रै समचै जंवाई रौ मूूंड़ो अेकदम काळै-मिट पडग्यौ। जंवाई रौ औ ढालौ देख्यौ तो लुगाया रा तौ धै छिलग्या। वै जाण्यौ के कोई भूड़ा समचार आया हैं। जंवाई नै रावतां देखनै सबसूं पैली उणरी सास रोवण लागी। पछै आगती-पागती री लुगाइयां। सारा घर में हाय-त्राय मचगी। बिना मरणा री खबर रै जंवाई रौवता थेड़ा ई। आज रै सुभं दिन कैड़ी अमंगल सुणावणी आई। जोग री बात। घर में रावणौ सुण्यौ तै तुरत आड़ौस-पाड़ौस री लुगाया ई रोवती-रोवती सेठां रै घरे आई। अचांणचक आ कांई अजोगती बात व्हीं ? कुण चलियौ ? किणी री साज-मांद तौ सुणई ई नीं हीं। घरवाळी लुगायां जवाब दियौ-कंवरसा नै रोवता देख्या तौ म्हां ई रोवण लागी। म्हांने ई ठाह कोनी के कुण चलियौ अर कुण नीं चलियौ। घरवाला डरता-धूजता आया अर पूछ्यौ-कांई बात व्ही ? आंे रोवणौ-रिंकणौ क्यूं मांड़िया ? की म्हानै ई ठाह पड़ेे। सैठाणी रोवतो-रोवतो कहयौं कंवरसा रा हाथ मंे कागद हैंख् उणनै बांच्यां आपनै सगळी बात ठाह पड़ जावैला। जल्दी बांचै। कंवरसा तौ दुख रा मार्या की बोल ई नीं सकै। संचांणी जंवाई तो अधमरियों सौ व्हैगा। तद सेठ लड़खड़ावती वांणी में पूछ्यौ-कंवरसा कांई बात व्हीं ? आप कागद बांचनै राया क्यूं ? तद जंवाई अटकतौ-अटकतौ कैवण लागौ-म्हैं कागद बांचनै नीं रौयौ। कागद बांचणी आवतौ तौ म्हैं रोवर्ता ई नीं। पढ़ण रा दिनों में म्हैं तबड़का देवतौ रोवतौ फिरयोंै, जिण सूं म्हनै आज रोवणौ पड़ियो। अणभणियां रां जीवण बिचै तौ मरणौ आछौ। जंवाई री बात सुणनै लुगायां खिल-खिल हंसण लागी।


पिंजारै री चतराई

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक गांव में एक पिंजारौ रैवतो हो। एकर उणरी लुगाई उणसूं कह्यों कै आज - काळ अठै कोई काम धंधों नीं हैं, इण सारू सहर जावौ अर कमावौ। पिंजारौ आपरी धुनकी अर दूजौ सामान लेयर सहर री कानी निकळियोै। चालता-चालता वौ जंगल मांय पूगिग्यों, वठै उणनै एक सैर आवतौ दिखियौ। पिंजारौ ने दैखिओ अर सैर पिनारै नै। दोंनां एक दूजै सूं डर गिया।पिंजारै कंधै माथै धुनकी देख सेर सौचियौ कै मोटो सिकारी आयौ हैं, लूंठा अस्त्रर-सस्त्रर लायौ हैं। म्हैं तो आज तक अेड़ा अस्त्रर नीं देखिया, ओ तो म्हारी जान लेने हीं चुप व्हैला। पिजांरे री जान निकलरीहीं। इतरा में वठै एक गीदड़ आयो। वो दोनो री मनोदसा समझगियों। वो सेर रै कनै पूंगौ अर कहयौ मामा, आज यूं किकर पूंछ दबायनै खड़ा हौ ? सेर पूरी बात बताय दी। गीदड़ तो चालाक हो हीं, वो कह्यों, मानों नीं मानो आ मिनख हैं तो न्यारौ, पण म्हैं इणसूं थ्हारौ जीवण बचा सकू। पण म्हारी एक बात माननी पड़ैला, म्हनै जंगल मय घूमण फिरण री छूट देन पड़ेला। सैर तो ड़रियोड़ो वो हाथां हाथ बात मान ली। पछै गीदड़ पिंजारै रै पास पूगा। पिंजारौ आपरा हाल बताया। गीदड़ सेर सूं जीवन बचावण रौ आस्वासन दियो, पण सागै कहयौ कै म्हारीं सरत माननी पड़ैला। जद सेर अठा सूं जावैला जणै म्हैं थ्हारा सरीर पर जठै चाहूं ला, वठै दों बटका भर लूं ला। पिंजारौ सोचियों जान जावण सूं बढ़िया कै गीदड़ दरी बात मान लूं। ज्यूं ही पिंजारौ हां भरियौ, गीदड़ सेर कानी इशारौ करियौ तो वो वठा सू भाग गियौ। अबै गीदड़ पिंजारै नै पूरौ देखियौ। उणरै कठी मांस नीं दिखयौ छाती माथै मांस उभरियोड़ौ उनणै दिख गयौ। गीदड़ पिंजारे सू कह्यों, म्हैं थ्हारीं छाती माथै दो बटका भरूंला। सेर सूं डरियौड़ै पिंजारौ आपरौ कुरतोै उपरै उठायौ जणै दीखी। वो पिंजारै सूं माजरौ पूछिया ? उणरै भेजा मांय एक युक्ति आई, वौ कह्यों इणरै मायंे एक कुतौ घुसगियौ है, थ्हनै देख अर भौक रियौं है, मै किणी तरै इणै बारै आवणसूं रोकियों हूं, पिंजरै री बात सुणता हीं गीदड़ रा हौस उड़ गिया, वौ पूंछ ददबार वठा सू भाग गियौ। अबै पिंजारै री जान में जान आई, अर वो झट झट सहर पूग गयौ।


सपना री बातां गम गी आंख्या खुलतां

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक मिनख रात रा सपना देख्यौ के उणरै कनै एक गाडोलिया लुहार आयो अर उण रै नारकिया रो मौल पूछ्यों। वो मिनख गोडोलिया लुहार नै कह्यों, थूं ईं मोल कर। गाडोलिया लुहार मिनख नै कह्यों, थारी चीज हैं तो इण रौ मोल थूं ही बता। घणी झोड़ रै पछै मिनख नारकिया रा तीन-बीसी रिपिया मांगिया। पण गाडोलियों लुहार उणरा पचास रिपिया धामिया। मिनख कह्यों, म्हैं तीन-बीसी सूं अेक कौडी ई कम नीं लूवं। गाडोलिया लुहार कह्यों, म्हैं पचास रिपिया सूं अेक छदाम बती नीं देंवू। थारी मरजी है तो बोल। निरी ताळ झिकाळ व्ळैती रैयी। सेवट गाडोलिया लुहार आपरी नौळी सूं पचपन रिपिया कळदार गिणिया अर नारकिया री राहड़ी में हाथ घालियौ। पण मिनख पचपन रिपियां सूं राजी नीं व्हियों। वो गाडोलिया लुहार रौ हाथ झटकतौ थकौ बोल्यौ, बाब री सोगन, जे तीन बीसी सूं राती छदाम ई कम लूेवूं तौ। दोनां री झड़पा-झड़प् में मिनख री नंीद खुलगी। वो परेशान व्हेग्यो। अरे ओ म्हैं कांई कर्यो। नींद खुलतां ई पैली बाम उणरा मन में आई के मुरख पणै में पचपन रिपिया गमा दिया। अबारा पचपन रिपिया आ जावता तो जोरदार काम व्है जावतो। वौ सौच्यौ कै, पचपन रिपिया इण नारकिये रा कांई बुरा हैं। वो झट पाछी आंख्यां मींची अर, हाथ धकै करतौ बौल्यौ-ला पचास ई दै। उण नै कीं कोनीदिख्यौ, वौ गैला व्हैग्यौ; आंख्याा मीचियोड़ों हीं हथाळी मेंरिपियां रौ परसन नीं व्हियौं तौ वो थोड़ो हाथ आगै बधायनै कह्यौ, नाराज क्यूं व्है रिया हो, रामा धरमी री बात, लाओं अबै चालीस ई दे दो, काम चला लेवूंला। पण चाळीस भी कठै पडया हा। वौ सूतो-सूतो, जोस सूं आख्या मींचनै आगै सिरकतो कह्यों, अबै सौदो तूट व्है है, ला तीस ई दै, अइ ओ नारकियों हाथ मैं पकड़। पण उठै कोई हाथ कोनी दिख्यो। वो फेर उतावळोै पड़ने बौल्यो, ला बीस रिपिया हीं दे दे, अरे, दस ई दे दे। चाल, अंत बात करां, लां पांच ईदै। मिनख जाणियौं पांवू रौ तौ रिपियों ई वतौ। सेवट आंख्यां मींच्योड़ौ ई मांचा सू उभौ व्हियौ अर आप रो पूरौ हाथ धकै करनै कह्यों, अबै नटियौ तौ थन्ने रामसापीर री सौगण हैं। ला अेक रूपियौं कोई कोनी हो, सपना री बातांग, गम गी आंख्या खुलता...। तठै तो पचपन रिपिया मिल रह्या हैं और अबै एक रिपिया कोनी मिल्यौ।


गादेल रौ परताप

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

जांबूवाला बैरा माथै पनड़री री खांडिंद-खंडिंद रौ ठेको, घड़लिया रौ खळकतौ पांणी, बांकली में रळकतो, नाळौ, होड़ा देवतौ ढलकतौ धारौ, पीयोड़ा क्यारां सूं आवता ठाड़ा लैरका अर आंबली माथै बैठी कायलां रा मीठा टकूड़ा। इण थाट बिचाळै गादेल माथै बैठौ सागड़ी मौज सू रागां करै तौ इण मेंकिणरौ दोस। गादेल माथै बैठो सागड़ीह मीठी अर तीखी राग मेंतैजौ गावतौं के उणरी धरवाळी भातौ लयनै आई। आपरा धणी नै इण गत मौज में गीत गावतां देख्यों तौ उणनै रीस आई। उणरौ माजनौ पाड़ती वा कह्यौ-हे ओ, थानै थोड़ी-घणी लाज को आवै नी ? थारां सुसरौजी नै चलियां पूरौ पखवाड़ौ ई नीं बीत्यौं अब थें ढोली री बळाई रांगां करौ ? गनौ हौ तौ म्हारै हौ, थांनै वांरौ कांई सोच? सागड़ी लतेड़ सुणनै लचकांणौ तौअवस पड़ग्यौं पण वौ जाणतौ के आ गादेल री ठौड़ इज अैड़ी हैं, इण माथै बैठैला जिणनै तो गावणौ ई पड़ैला। गादेल सूं उतरनै बौल्यौ, म्हैं रोटी खांवू जितै थूऔ डोरी उतार देै। रोटी खायनै घड़ी आधघड़ी मोर पाधरा करणी चावूं। बैठा-बैठा री कड़िया कुळण लागी। सागड़ी रोटी खावण नै बैठो अर उणरी घरवाली गादेल माथै बैठी बळद खड़ण ढूकी। बळद सात-आठेक भळाका लाया जितै तौ वा मूंडौ साजयोड़ी बोली-बोली बैठी रीवी। पछै हौळे-हौळे होठां रै मांय गुणमुण-गुणमुण करण लागी। सागड़ी ई लखग्यौं के आ गादेल तौ आपरौ परताप दरसायां रैसी। चळू करनै वौ कह्यौ-धमैक आड़ौ व्है जावूं, थू वैरो खड़ती रेजै। आंबली री जाड़ीह छीयां में वौ माथै खेसळों तांणनै सूयग्यौ। वौ सूवण रौ फगत मिस बणायौ हौ। उणरां कांन तौ घरवाळी री राग सुणण में लाग्योड़ा हा। थोडी ताभ् पछै, ई गादेल माथै बैठी उणरी घरवाळी तै मीठी अर तीखी ढाळ खेसला रै मांय उणरा धणी सूं सबूरी राखणी दौरी व्हैगी तौ वौ झट ऊभौ होसनै कह्यों - लिछमी,थनैरांगा करता सरमा को बावै नीं ? म्हारै तो ससुरोै व्हैतौ हों, पण थारौ तो बापहौ। थनै तौ थोड़ी - जांणतौ हौ के बाप मरौ, भलांई मां मरौ इण गादैल माथे जकौ बैठसी उणनै तौ गांणऔं सूझैला इज। अबै थनै कीं सोजी बंधी ? उणरी घरवाळी लचकांणी पड़नै माथै नीचै कर लियौ। कांई पडूत्तर देवती।


हिन्दी री हैवाई छोडो, भासा मायड़ बोलो रै।

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

हिन्दी री हैवाई छोडो, भासा मायड़ बोलो रै।
परभासा रै भूतां नै दूधै रौ तेज दिखाद्यो रै।
भासा मायड़ बोलो रै, राजस्थानी बोलो रै।

छाछ लेवण नैं आई आ तो घर री धिराणी बणगी रै।
रोटी-रूजगार खोस्या इण तो दफ्तर्यां में छागी रै।
भासा मायड़ बोलो रै, राजस्थानी बोलो रै।

साठ बरसां सूं छाती पर मूंग दळ रैयी
संस्क्रति रौ करियो कबाड़ो रै।
इण रौ बाळण बाळौ रै, इण रै लांपौ लगाद्यो रै।
भासा मायड़ बोलो रै, राजस्थानी बोलो रै।

पांच परदेसां रै पांण आ तो रास्ट्रभासा बणगी रै।
जबरी पोल मचाई इण तो समझ नाथी रौ बाड़ो रै।
फरजी डिगर्यां ले-ले आया धाड़वीं, नौकर्यां कब्जाई रै।
इण रौ नखरो भांगौ रै, राजस्थानी बोलो रै, भासा मायड़ बोलो रै।

जद बाईस भासावां संविधान सीकारी, रास्ट्रभासा कुणसी रै ?
राजस्थानी री बळी लेय'र आ तो हुयगी राती-माती रै।
इण नैं थोड़ी छांगो रै, इण री कड़तू तोड़ो रै, राजस्थानी बोलो रै।

जागो ! छात्र-छत्रपती, खोल उणींदी आंखड़ल्यां।
देद्यो नाहर सी दकाळ रै, धरती धूतै,
आभौ गरजै, धूजै भारत री सरकार रै।
छांटा-छिड़कां सूं नीं बूझैला आ मान्यता री आग रै।
छात्र-छत्रपती जागो रै, भासा मायड़ बोलो रै।

एकलड़ी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

तू ही म्हारो काळजो, तू ही म्हारो जीव।

घड़ी पलक नहिं आवड़ै, तुझ बिन म्हारा पीव!
जब से तुम परदेस गए, गया हमारा चैन।
'कनबतिया' कब मन भरे, तरसण लागे नैन।।
चैटिंग-चैटिंग तुम करो, वैटिंग-वैटिंग हम्म।
चौका-चूल्हा-रार में, गई उमरिया गम्म।।
सुणो सयाणा सायबा, आ'गी करवा चौथ।
एकलड़ी रै डील नै, खा'गी करवा चौथ।।
दीवाळी सूकी गई, गया हमारा नूर।
रोशन किसका घर हुआ, दिया हमारा दूर।।
दिप-दिप कर दीवो चस्यो, चस्यो न म्हारो मन्न।
पिव म्हारो परदेस बस्यो, रस्यो न म्हारो तन्न।।
रामरमी नै मिल रया, बांथम-बांथां लोग।
थारा-म्हारा साजनां, कद होसी संजोग।।
म्हैं तो काठी धापगी, मार-मार मिसकाल।
चुप्पी कीकर धारली, सासूजी रा लाल!
जैपरियै में जा बस्यो, म्हारो प्यारो नाथ।
सोखी कोनी काटणी, सीयाळै री रात।।
म्हारो प्यारो सायबो, कोमळ-कूंपळ-फूल।
एकलड़ी रै डील में, घणी गडोवै सूळ।।
दिन तो दुख में गूजरै, आथण घणो ऊचाट।
एकलड़ी रै डील नै, खावण लागै खाट।।
पैली चिपटै गाल पर, पछै कुचरणी कान।
माछरियो मनभावणो, म्हारो राखै मान।।
माछर रै इण मान नैं, मानूं कीकर मान।
एकलड़ी रै कान में, तानां री है तान।।
थप-थप मांडूं आंगळी, थेपड़ियां में थाप।
तन में तेजी काम री, मन में थारी छाप।।
आज उमंग में आंगणो, नाचै नौ-नौ ताळ।
प्रीतम आयो पावणो, सुख बरसैलो साळ।।
---सत्यनारायण सोनी कानांबाती : 09602412124 Posted By AAPNI BHASHA - AAPNI BAAT to AAPNI BHASHA-AAPNI BAAT at 10/20/2009 12:39:00 AM

ठाकर रौ आसण

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

रावळा कोट में लांठौड़ी चौकी ऊपर मकरांणा रा फूटरा गलीचा री बिछायत करियोड़ी ही। चौकी माथै पाखती एक चौधरी बैठो हो। ठाकरसा बिना बात ई राम जाणै क्यूं राजी हां ? वै मूंछ्यां माथै हाथ फ ैरता चौधरी नै मिसखरी रा भाव सूं पूछ्यौ-हे रे चौधरी, म्हेैं मोरसाण माथै बैठ्यों तौ थूं नीचै चौकी माथै बैठग्यो, पण जे म्हेै चौकी माथे बैठूं तो थूं कठे बैठेला ? चौधरीं हाथ जोड़ता कह्यौ-हुकुम, रावलै चौकी माथै बिराजौ तो म्हैं नीचै धूड़ रै आंगणै बैठ जावूंला। म्हनै तो आप सूं नीचै बैठणौ हीं ज पड़ैला। ठाकरसा फेर आगै कैवण लागा-है रे चौधरीं, थू नीचै बैठण री बात करी तौ पछै म्हनै इणरों सावल म्यांनो दै, जे म्हैं नीचे धूड़ आंगणै बैठूं तौ थूं कठै बैठेैला ? चौधरीं कहï्यौ रावले रोज आंगणै गिराजी। आंगणै बैठण रा करम तौ म्हांरा इज हैं। आपरै तौ लारला भौ री करणी चोखी करियोड़ी है, इण सूं आपरै हेटै तो सदा आसण ई रैवैला। ठाकरसा कहï्यौ-नीं नीं बावळा कदै ई अैड़ौ मौकौ बण जावै। थूं अबै गुचळकिया मत खा। म्हनैं सुभट बता के म्हैं जमीं माथैं बैठूं तो थूं कठै बैठैला ? चौधरीं मुभ्कतौ बोल्यो-हुकुम, जे रावळै जमीं माथै बिराजौ तो म्हैं थोड़ौ खाड़ो खेदनै नीचे बैठ जावूंला। ठाकरसा भळै पूछ़्यौ-चौधरी जे म्हैं खाड़ा में बैठू तौ थूं कठै बैठैला ? चौधरीं सोच में पडग्यौ। थोड़ी ताळ विचारनै पडूंतर दियौ-जै म्हैं उण ऊंड़ोड़ा खाड़ा में बैठग्यों तौ थूं कठै बैठैला ? चौधरी बौल्यौ-म्हैं भळै पांचके हाथ ऊंडौ धैड़ खादनै नीचे बैठ जावूंला ? रावलौ तो सदा ऊंचा ई बिराजौला? पण ठाकरसा नै फेर ई धीरज नीं व्हियों। बौल्या-हां रे चौधरीं, जै म्हैं ऊंडोड़ा धैउ़ में बैठग्यो तौ थूं पछै कांई करैला ? चौधरीं इण दपूचा आगै कायो व्हैग्या। उणनै जूंंझल छूटी। बैड़ाई सूं जवाब दियौ-म्हैं तो घड़ी-घड़ी आज इज कैवूं के रावलै ऊचां ई बिराज्या रैवो, पण आपरी मरजी ऊंडोड़ा धैड़ में बैठण री हैं, तो खुसी सूं उठै बिराजौ। म्हैं धूड़ न्हाकियां पूठैं लांठी सिलाड़ी सिरकाय देवूंला। इण तरै चौधरीं चतराई सूं ठाकर सा ने चुप कर दिया।

वीरमदेव विड़द

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

जरणी धर जाळोर री, जीतां अरि पग जाय।
लाजै मावड़ लोरियां, कुळ काळस लग जाय॥
भारत रचियां ही भड़ां, भारत रुप कहाय।
भारत सूं के दिर डरां, रहणी भारत मांय॥
प्रमलै सौरभ पौढियौ, आजादी री आंण।
जलम घूंट में जांणियौ, समर चढ़ंण चहुआंण॥
वरदायक वर वीरता, प्रथमी जस पूजाण।
सिर पडियां लड़ियौ समर, वीरमदेव चहुआंण॥
रंण बंका थैं राखियौ, मात भौम रो मांण।
अवसल वीरम आप री, पिरलै लग पहचांण॥

चार बांस चोवीस गज, अंगुळ अष्ट प्रमाण।
ईते पर सुळतान है, मत चूकैं चौहाण॥
ईहीं बाणं चौहाण, रा रावण उथप्यो।
ईहीं बाणं चौहाण, करण सिर अरजण काप्यौ॥
ईहीं बाणं चौहाण, संकर त्रिपरासुर संध्यो।
ईहीं बाणं चौहाण, भ्रमर ळछमण कर वेध्यो॥
सो बाणं आज तो कर चढयो, चंद विरद सच्चों चवें।
चौवान राण संभर धणी, मत चूकैं मोटे तवे॥
ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो गोकुळ में कानह।
ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो हथह भीम कर॥
ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो राम रावण संतावण।
ईसो राज पृथ्वीराज, जिसो अहंकारी रावण॥
बरसी तीस सह आगरों, लछन बतीस संजुत तन।
ईम जपे चंद वरदाय वर, पृथ्वीराज उति हार ईन॥

पूराणो घणो स्याणो, राख ली लाज

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रो कारोबार देस-दिसावर फैलियोड़ो हो। उणरै एक बेटो हो। ठोर-ठोर उणरी गद्दिया हीं, पण उणरै स्वरगसिधारण रै पछै छोरो ठीक तरीका सूं काम नीं संभालियो। वो पुराणा लोगां नै निकाल नुवा मिनखा नै काम माथे राख दिया। इणरो असर ओ व्हियों कै काम-काज खराब व्हैवण लागो। एक दिन सेठ रै बैटा माथै दस हजार रूपिया री दरसन हुंडी आई। गल्ला में रूपिया नहीं हा, पण हुंडो सिकारनी जरूरी हीं। छोरो उदास मुंडा सू घरै गियो, उणरी मां कह्यों कै बात हैं ? वो सारी बात बतलायी तो मां कह्यो रूपया रा जुगाड़ में थोड़ो अैम लाग जावैला, तू आपरी गद्दिया माथै कागद लिख अर रूपिया भेजण वास्ते कह, पण इतरा टैम हुंडी खड़ी नीं रै सके, इण सारू जुणोड़े बूढे मुनीम नै बुलावा। बूढ़ा मुनीम रै घरे बुलावो भेजियो ग्यो। मुनीम री घणी उमर व्हैगी ही। ठंड रो मौसम हो, इण सारू बुढो मुनीम रूई अर शाला ओढणै जाड़ा रै मारै कांपतो-कांपतो सेठी री पेड़ी माथै पूगियो। उणमें काम करण री आसग नीं ही। मुनीम कह्यों आज घणी ठंड हैं, पेड़ी माथै हीं सिगड़ी मंगवाओं ? मुनीम रै सारू सिगड़ी मंगवाई गई। हुंडी लावण वालो मिनख हुंडी बूढा मुनीम रै हाथ में दी अर मुनीम कांपता हाथां सूं हुंडी पढण लागौ। मुनीम रा हाथ ठंड सू कांप रिया हा। हुंडी उणरै हाथ सू छूट सिगडी मांय पडगी। हुंडी जल-बग गी जणै मुनीम घणों दुख परगट करियो वो उणसूं कह्यो भाई । हुडी म्हारा हाथ सूं सिगड़ी माय पडऩै जलगी, अब थै उणरी पैठ मंगवा लो। पैठ आवैला जणै थाणै रूपिया मिल जावैला। हुंडी लावण वालां मिनख आ बात नीं जान सकिया कै बूढ़ौ मुनीण जाण-बूझणै हुंडी सिगड़ी मांयने डाली है। सेठ री फरम घणी मोटी हीं, मुनीम रो भारी परभाव हो। वो मिनख वठा सूं चलो गियो। उणरै जावण रै पछेै सेठ रो बैटो मुनीम रा पग पकड़ लिया अर उणणै पाछौ बड़ा मुनीम री गादी माथे बिठा दियो। थौड़ा टेैम रे पछै सैठ रो कारोबार उणी तरा सूं चालण लागौ। देस-दिसावर में सेठ रा छोरा री पैचाण व्हैगी।


पाणी रे काचे-पाके सूं करी छोरे री पैचाण

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक डोकरे आप रे धरा जा रहï्यो हो। रास्ते में उणनै एक छोरो मिल्यो। दोनूं सागै हो लिया। वै जिकै गांव जा रहï्या हां, वो चार कोस हो। छोरी डोकरे ने कहï्यों, बाबा, गंाव चार कोस पर है, दो कोस थे म्हनै कांधे पर चढ़ा ल्यां, दो कोस म्हैं थाने चढ़ा लेस्यूं। डोकरो कहï्यो, थू तो जवान है, म्हनै चढ़ा लेसी, पण म्है कीकरण थनै चढाऊंला, रहण दे भाया। बीच में एक जगा नाठो आयो तो डाकरो जूता आपरे हाथां में ले लिया, पण छोरो पैर्या हीं राख्या। डोकरो मन में सोची, ओ छोरो मूरख है, नया जूता पानी में गीला कर र खराब कर लिया। थोड़ी देर में दोनूं गांव पूरा ग्या। डोकरो छोरे ने इशारे सूं आपरो घर बतायो, तो छोरो एक कांकरी घर कै किवांड पर मार दियो। किवांड डोकरे री छोरी खोल्या। छोरो पाणी मांग्यो। छोरी पाणी लेयर आई तो छोरो पूछ्यो, पाणी काचो है के पाको ? छोरी भी हुशियार हीं, बोली, पाणी काचो है। डोकरो ऐ बाता सुण र हैरान होग्यो। वो छोरी ने मांयने ले जाय र कहï्यो कै छोरी मूरख है, रस्ते में इण तरहा री बातां करो। छोरी हुशियार हीं, मा बापू ने कैवण लागी, बाबा, छोरो मूरख कोनी, हुशियार है। वो आधे रस्ते थाने चढ़ावण और आधे रस्ते खुद चढ़ण री बात यूं करी हीं कै आधे रस्ते थे की बोलो, आधे रस्ते म्हैं कीं बोलू तो रस्तो आराम सूं कट जावैला। पाणी रे मांय जूता इण वास्ते नीं उतारया, क्यूंकि पाणी रे तल रे मांय कोई चीज सूं पगां में चोट लाग सके। जूता मिनख री जान सूं बता कीमती कोनी हुया करै। गांव आया पछै छोरो किवांड पर कांकरो फेंक्यो, उण टैम म्हैं न्हा रेया हीं। म्हैं फटाफट बारै निकळ कर कपड़ा पैरय और बारे आय र किवांड़ खेल दियो। घरै आतां ही छोरो पाणी लावण पर पूछये कै पाणी काचो है या पको, इण रो मतलब यो हैं कै म्हैं कुंवारी हूं या ब्याहता, म्हैं पडूतर दियो, पाणी काचो है, यानी म्हैं कुंवारी हूं। डोकरो पूरी बात समझग्यों अर छोरी सो ब्याह उण छोरे सू कर दियों। दोनूं राजी सुखी रैवण लाग गया।


बादशाह री यूं व्हीं पहचान

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक पठान नै घोड़ा री जोरदार पैचाण की। पण किणी कारणा सूं उणनै धंधा में घाटो व्हैगियो। उणरी मां रै कन्नै थोड़ा रिपिया बचायोड़ा हां । एक दिन पठान मां सू रिपिया लिया अर घोड़ा लेवण सारू निकलियो। घणो घूम्यो पण उणनै कोई घोड़ो रास नी आयो। फिरतो-फिरतो वो एक रात धोबी रै घरे रूकियो। रात राा उणनै लक्खी घोड़ा री टाप सुजीणी। वो प्रकास करनै देखियो तो धोबी रे गधां रै माय एक बछड़ो हो। दिनूगै वो दस रिपिया में बछड़ो धोबी सूं ले लियो। वो उणनै खिलायो पिलायो। एक बरस में वो मोटो तगड़ो व्हैगियो। वो उणनै बेचण सारू बादसाह रै कनै गियो। बादशाह रै कनै एक आलिम आयोड़ो होद्ध वो एक तीर सूं निशाने लगा मोर रो चितराम बणा दियो। बादसाह उणरै एक सेर आटा अर पइसा भर घी रोज बांध दियो। पछेै वो चितराम दिखाया तो उणरै पांच कपड़ा बणवा दिया। उणनै दुख व्यिहों कै राजा उणरो मान बिगाड़ दियो। एक दिन बादसाह री सवारी निकली पठान आपरा घोड़ा लेयर शामिल व्यिहों।् पारसी बादसाह सूं कह्यो लक्खी घोड़ा री टाप सुनाई देवे है। बादसाह उणसूं घोड़ो ढूंढ़ लावण रो कहïïयो। परखी घोउड़ो राजा रै सामी हाजिर कर दियो। बादशाह नै घोड़ा घणो पंसद आयो। पारखी नै इनाम रै रूप में एक चारपाई दिलवा दी अर पठान सूं सवा लाख रिपिया में घोड़ो खरीद लियो। एक दिन उस्ताद कहï्यों म्हैं एक हुनर जाणूं। म्हैं मिनख देख बता सकूं कै वो मां-बाप री औलाद हैं या वर्णसंकर। बादशाह कह्यों तड़के म्हारे दरबारियां री पैचाण करजे। रात रा सगला दरबारी पारखी रै घरै पूग्या अर उणनै घणा रूपिया देयर आपरी बात कैवण सारू राजी करियो। पारखी दूजै दिन दरबार में बादसाह सू कहïï्यो आप भटियारा रा बैटा हो। झूठ बोलू तो मां नै पूछ लिरावो। बादसाह उणी टैम आपरी मां सू साची बात पूछण लागौ। मां कहï्यों-बेैटा तू थारे बाप रो हीं पण सामी एक भटियारो रैवतो व्है सके उणरी छाया पडग़ी हों। वो पारखी सू राज पूछयों जणै वो कहियो कै आप जिको इनाम दियो उणसूं आ बात जाणी। बादशाह नै घणी सरम आई वो पारखी नै घणो इनाम दे विदा करियो।