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जवार री ठौड बत्तीसी गिटाय दूंला

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक मिनख जवार री खेती वाई। सौळै आनां जमानौ तूठौ। वैंत-वैंत लांबां सिट्टा बधिया। कोड़ा रे उनमांन पाक्योड़ा दांणा चिमकण लागा। खेत रै च्यारूं खुणै अक सरीखी झोला खावती जवार रौ थट लागौड़ौ हौ। जांणै बादळां सूं पांणी रै बदळक्जवारबरसी व्है। असवाडै़-पसवाडै रा पाखती गांवां में काळ रौ पगफे रौ व्हियोड़ौ हौ, इण सूं चैधरीआठ पौर खेती री रूखाली करतौ। गोफण रा सटीड़ा पाड़तौ, चैफैरचैकसी राखतौ हौ, पण तौ ई एक दिहाड़ै, ढळती रात उणनै उंघ आयगी। चवदस री चांदणी रौ निरमळ उजास सिट्टा रै पालणै झूलतौं हौ। ठाड़ी सुवावती हवा रा लैरका सूं चैधरीं उंघ मंे गरक व्हैगी। इण बिचाळै च्यार लाठी पोटां बांधली। पाटां बांधनै वै उखणण वाळा हा के चैधरी झिझकनै जाग्यौ। भच बैठौ व्हियौ। अेक हाथ में गोफण अर अेक हाथ में गैडी लैयनै वौ चोरां रै आड़ौ उभग्यौ। साम्हीं च्यार माट्यार काटी उभा हा अर वौ साव अकैली हौ। अेकणी सागै च्यारां सूं भिड़िया तौ बात परवार जावैला। आ बता विचार नै मिनख एक अेक सूं पडपण री जुगत विचारी। हंसतौ थकौं चोरां नै केवण लागौ, खेत में उभा धांन री चोरी, चोरी नीं गिणीजै। मिनख देख्यौं कें च्यार चोर उणरीबातां सुणनै धीजग्या है। पछै वौ बात रौ रूख बदळियौ। बोल्यौ पण छानै चोरी री गळाई पोटां भरण रौ थंे आछौ कांम नीं करियो। म्है आ बात जांणणी चावूं के थें सगळा सिरदार कि जातिया हौ ? वौ कह्यौ थुड़ियौ हो कांई ? पछै चोरी कांई हिसाब सू करी ? चाल म्हारी मां कनां सूं थनै आळबौ दिरावस्यूं। पछै वौ वां तीनूं जणा नै कह्यौ-मां री दवायती लेयनै आप अठा सूं पधारज्यौं। आपनै हाथ जोड़नै म्हारी इती ई वीणती हैं। बाकी तीनूं जणआ जांणियौं म्हांरी तौ खेरियत हैं। मिनख झिलतौ व्है तौ झिलण दौ। खेत रौ धणी उणरौ बाहूड़ौ पकड़नै पाखती ई आपरी ढांणी में लेग्यौ। खेजड़ी रै काठौ बांधनै जरू कर दियौ। मिनख नै काबू करियां पछै चैधरी उठै पाछौ आयौ। हौळै सीक नेठाव सूं कैवण लागौ के म्हारी मां कह्यौ, म्हारा धणी है, वै चावै तौ सगळौ खेत भेळा सकै अर औ साहूकार कर्द ईबिखां मंे म्हानैं खटकै नीं। यूं तीजी खेजड़ी रै बांधनै काबू करियौ। पछै फुरती सूं हाथ में अेक दूजी लांठी गेड़ी लेयनै आयौ। सेवट चैधरी पछै वानै खोलिया। अबै कदै ई, खेत साम्हीं मूंडौ करियौ तौ जवार री ठौड़ बत्तीसी गिटाय दूंला।