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ऐड़ी करी आजाद- कविवर श्री हणवन्तसिंग देवड़ा

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

Late Shri Hanwant Singh Deora
thikana- Raniwara Khurd
छुक हुआ दो दिल रा नित की मार फसाद।
कूट नितिज्ञ कांग्रेसियों ऐड़ी करी आजाद।।

बिलके नितकी बेटियां चौड़े लूटे सोहाग।
फट कायरां फूट रिया भारत वाला भाग।।

हिन्दुओं पर हाले हमें तुर्को री तलवार।
अजरालों जागो अबे विणती बारमवार।।

चोटी वालों सिर काटणों जांणे छोटो खेल।
भावलपुर में भाईड़ों रोकी तुर्को रेल।।

बिलखे बहनों बापड़ी नैणों सांवण भाद।
कियो आच्छोरे कायरों भारत ने आजाद।।

कायर पूतों नित ही कियो व्यथी घणो बकवाद।
अन्न अन्न करे आदमी ऐड़ा हुआ आजाद।।

हिन्दुओं रे हित रो कियो किसे दिन काम।
ईज्जत सत्ता आबरू नित ही हणे निजाम।।

चमको खाग चितौड़ री भबको जौहर ज्वाल।
लपकों अरियां उपरे उमड़ो रगतों खाल।।

अहिंसा गांधी आपरी रही मांने रूलाय।
हिमालय परा हालजों घाल कमण्डल मांय।।

पाकिस्तान लेने मिंया रयो नाहक रीज।
जिन्ना यूं मत जाणजे बलगयो हिन्दू बीज।।

साभार:- कविवर श्री हणवन्तसिंग देवड़ा पुस्तक का नाम "सिंहनाद" 
प्रकाशन:- १३.११.१९४७ आजादी के बाद हुए घटनाक्रम पर आधारित रचित सिंहनाद की पुस्तक को भारत सरकार ने प्रतिबंधित किया था। एक दुर्लभ प्रति मेरे पास सुरक्षित है। 
(संकलन- राव गुमानसिंग राणीवाड़ा-जालोर-मारवाड़)