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रेत रौ घर दे भलांई छाज दे - --- नवल जोशी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

रेत रौ घर दे भलांई छाज दे
नाज़ दे मिनखापणौ दे लाज दे

छापरौ फाटै भली कर छौ फटै
मारुवां नै मेह दे घण गाज दे

कैद में पंछी हुयौ अधगावळौ
दे सकै तो आभ दे परवाज़ दे

भोग भोग्या ई सरै नरदेह रा
तूं तँदूरै तांण दे सुर साज दे

मुलक री सगळी जबानां जाम क्यूं
गूंगलां नै शब्द दे आवाज दे

जूण किम जमगी हिमाळै बर्फ ज्यूं
अंतसां में ओज अगनी दाझ दे

राज में मिनखापणौ लवलेस नीं
दे कदै तो मिनख नै ई राज दे

आँगळी रौ अेक टपकारौ दियौ
औरुं भुगत्या, साँडियां नै ताज दे

आपणी जूणी अटाळै सारखी
धार बँगला थूं म्हनै गैराज दे

बेङियां बेजा जङी रे साँवरा
देय झटकौ साँतरौ पण आज दे
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 --- नवल जोशी

* भ्रष्टाचार रा कुंडलिया * -

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

घोटाळा धोखाधङी,रिश्वत भ्रष्टाचार ।
भली चुणी रे भायलां,लोकतंत्र सरकार ॥
लोकतंत्र सरकार , देश नै दी बरबादी ।
म्हैनतकश नै मार,चोरटां नै आजादी ॥
मजा करै मरदूद,करणिया धंधा काळा ।
खुलतां ई दब जाय,फाइलां में घोटाळा ॥१॥

भ्रष्टाचारी म्हैकमा,भ्रष्टाचारी राज ।
भ्रष्टाचारण रै बिना,सरै न कोई काज ॥
सरै न कोई काज,नौकरी लगै न सोरी ।
नोट टेकियां टाळ,बदळियां व्हैणी दोरी ॥
क्रोङौं खर्च चुणाव लङै जिथ सत्ताधारी ।
डूबै मुलक भलाय,न धापै भ्रष्टाचारी ॥२॥

राजा अफसर माफिया,भूमि हङपणहार ।
तस्करिया आतंकिया,चौङा फिरै बजार ॥
चौङा फिरै बजार,संत भोपा बटमारा ।
नोटां री थपकार सुणै ,नाचै दरबारा ॥
बिकै मीडिया न्यूज,बजाय र थोथा बाजा ।
मूंडै मांग्या दाम लेय,बिकजावै राजा ॥३॥

सिंघ विसा राजा कठै,रजवट रापटरोळ ।
पद पाय र पसरै पदा, ठाला गाडर टोळ ॥
ठाला गाडर टोळ,साख चट जाय समूळी ।
मिनखां नै गिट जाय,समझ कर गाजर मूळी ॥
कोयक जे कानून रुखाळा मिळै कदीसा ।
अेकाधौ पज जाय,जियां पजिया सिंघवी सा ॥४॥
               
               --- नवल जोशी

गणेश स्तुति- नवल जी जोशी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐ - ॐगणपतयै नमः *ॐ

गणेश स्तुति (छन्द त्रिभंगी में)
          (नवल जोशी कृत )
        ॐॐॐॐॐॐॐ

जय हे गणनायक सिद्धिप्रदायक
सब सुखदायक  वरदायक ।
भक्तन प्रतिपालकविघ्नविदारक
सकल सुधारक फलदायक ॥

लम्बोदर देवा सिमरथ सेवा
जगत कुटेवा हर लेवा ।
भव संकट तारण पाप विदारण
पत रखवाळण सुर देवा ॥

हे रिधसिध दाता प्रकट विधाता
जगविख्याता शुभ दाता ।
प्रथमः आराध्यं जीवन साध्यं
विकट विबाध्यं हर त्राता ॥

हे गवरीनंदन नमो निरंजन
भव भय भंजन सूंडाळा ।
मूषक असवारी जय असुरारी
गजतनधारी विरदाळा ॥

मोदक तव अर्पण भाव समर्पण
सिरधा सिमरण आप ग्रहो ।
अंतस उजियाळा कर सूंडाळा
मम ह्रिदयाळा आन रहो ॥

          --- नवल जोशी

बाबा थारै बेरणै

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

मन ऊजळ ऊजळ वरण,शरण ऊजळी सेव ।
अरण रुणीचौ ऊजळौ,(जिथ)तपै त्रिलोकी देव ॥
हर भजतां हर राखतां,हर पाळै हर कोय ।
हुकम टाळ हलणौ कियां,रामदेवरै होय ॥
जोत जागरित जोयलो,अमर आस्था ईश ।
दूहा रामापीर रा ,जबर रच्या जगदीश ॥
हर कोई हेलौ करै ,(तो) हाजर हाथोहाथ ।
आय र मेटै आपदा,राम रुणीचा नाथ ॥
जणौ जणौ जग जातरू,परतख पार न पाय ।
रामदेव राखै जिनैं,रुणीचै रम जाय ॥
तेवङियां तकदीर रा,तट ताळा खुल जाय ।
रामदेव राजी हुयां,जग जाळा कट जाय ॥
पिंड पीङा परतख मिटै,प्रगट कटै पम्पाळ ।
रजी रुणीचै राज री,भाल लगाय र भाळ ॥
सुख सांयत सरसै सकल,खुलै करम री रेख ।
राम रुणीचै राज रौ,ध्यान लगाय र देख ॥
कुण ऊँचौ नीचौ कुणी,कुण गोतर कुण न्यात ।
रामदेव रा जातरू,रामदेव री जात ॥
जगधारा जित जाय कर,हरधारा रळ जाय ।
घन्न धणी रै देवरै,जमधारा थम जाय ॥
धर्म अधर्मी लोगङा,राज रंक दरवेश ।
हाथ जोङ हाजर हुवै,देव धणी रै देश ॥
मन हंसा मोती चुगै,ईश करै असनान ।
रामसरोवर राम रौ,मानसरोवर मान ॥
जम रै हाथां जेवङी,काळ कळू विकराल ।
पीर पगलिया पूज नर,तिर जावै तिरकाल ॥
जूंणी जोखम जातरा,जगत जीव भरमांण ।
भजै रामसा पीर सो,नर पावै निरवांण ॥
हर गावै ध्यावै हरी,संत गिरस्थ फकीर ।
हरजस जुम्मा जागरण,रामसरोवर तीर ॥
दुख दोरप कर दूबळा,भव रा भोग भगाय ।
राम धणी रौ ध्यान धर,रामसरोवर न्हाय ॥

अंतस दीजै आस्था,उर दीजै उजळास ।
बाबा थारै बेरणै,अथ इतरी अपदास ॥
-- नवल जोशी