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छंद त्रिभंगी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

छंद त्रिभंगी
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टाइप करवंता,नित्य नचंता,
आखर आता,छळकंता।
मनड़ौ मुस्काता,टुन टणकाता,
झन झनकाता,आ पड़ता।
मैसेज  घणेरै, तेरे   मेरे,
सांझ सवेरे,दिख जावै।
अंतस री वाणी,कुल री कांणी,
आंख्यां पांणी,झट लावै॥(१)


बैलेंस झपीड़ा,करै हबीड़ा,
बात  बतीड़ा,करवा   दे।
ओ नेट नवेलो,होय झमेलो,
झट दण हैलो,करवा  दे।
रंगां सू रंगियां,कूड़ वीडिया,
बणा सीड़िया,बपरावै।
ओ मिनखपणै नै,रीतपणै नै,
प्रीतपणै  नै, भरमावै॥(२)

- महेन्द्रसिंह सिसोदिया(छायण)

ङुगरीयो रलियावणो

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

भाकरीयो मन भावणो ,जठे आवङ माँ रो थान रे |
जठे आई माँ रो धाम रे, ङुगरीयो रलियावणो ||

ऊँचे ङुगर ओर लो ज्यारी धजा उङे असमान रे |
जोत जगामग जगमगे माँ रा नामी धूरत निशान रे ||1||
ङुगरियो रलियावणो...........

पग धरिया इण पैङिया म्हारा दुखङा हुयग्या दूर रे|
दरस कर्यो जगदम्ब रो म्हारे सुख रो उग्यो सूर रे||2||
ङुगरियो रलियावणो...........

इण ङूगर पर आय कर कोई धरे रे भगत जन ध्यान रे |
आणंद उर मे ऊपजे बाने आतम होवे ओलखान रे ||3||
ङुगरियो रलियावणो.........

हल तो सिन्धु हाकङो ज्यारो पानी बिन परवाण |
आवङ सोख्यो एकलां जे रो नीर न बचीओ निवाण रे ||4||
ङुगरियो रलियावणो.........

भुजंग ङस्यो निज भ्रात ने अम्बा लोवङ रोक्यो भाण रे |
अमरापुर सूं आवङा माँ इमरत    दीनो आण रे ||5||
ङुगरियो रलियावणो.......

मारयो राकस तेमङो  माँ इण ङूगर पर आय रे |
ऊंङो दर में दाटियो माँ अधर शिला अटकाय रे ||6||
ङुगरियो रलियावणो..........

दीज्यो थारे दास ने अम्बा भगती रो वरदान रे |
सोहन  चरणां शरण मे म्हारो मात राखिजे मान रे ||7||
ङुगरियो रलियावणो......

        भूलचूक -क्षमाप्रार्थी

👏👏टाईप -   प्रेम चारण भाखराणी👏👏