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छंद त्रिभंगी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

छंद त्रिभंगी
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टाइप करवंता,नित्य नचंता,
आखर आता,छळकंता।
मनड़ौ मुस्काता,टुन टणकाता,
झन झनकाता,आ पड़ता।
मैसेज  घणेरै, तेरे   मेरे,
सांझ सवेरे,दिख जावै।
अंतस री वाणी,कुल री कांणी,
आंख्यां पांणी,झट लावै॥(१)


बैलेंस झपीड़ा,करै हबीड़ा,
बात  बतीड़ा,करवा   दे।
ओ नेट नवेलो,होय झमेलो,
झट दण हैलो,करवा  दे।
रंगां सू रंगियां,कूड़ वीडिया,
बणा सीड़िया,बपरावै।
ओ मिनखपणै नै,रीतपणै नै,
प्रीतपणै  नै, भरमावै॥(२)

- महेन्द्रसिंह सिसोदिया(छायण)