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लालच मैं गंवासरे मूल संख पायो ढपोर संख

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक बामण पक्कों भगत हों। वो भगवान री टैमो टेम पूजा करतो। एक दिन भागवान इण माथे तूठ गिया। वे बामण ने एक छोटे सो संख दियो, अर कह्यौं कै अण संख री पूजा कर नै जिकी चीज मांगेला, थने मिल जाया करेला। बामण संख पा र निहार व्है ग्यौ। वो आपरी जरूरत री चीजां एक एक कर उण संख सू मांग ली। रेवण वास्ते चोखें सो घर बणवा लियो, खावण पीवण और पैहर-ओढण री चीजां संख सूं ले ली। बामण में आयो ओ बदलाव देख र पाड़ोसी से डाह होयगी। वो आपनी घरवाली ने उण बामण से घरै इण रो पतो लगावण सारू भेज्यौ। लुगाई बामण री बीनणी सूं मीठी-मीठी बातां कर र भेद रो पतो लगा लियौ। पाड़ोसी अंचभे में पड़ ग्यौ। वो लुगाई ने कह्यो, थूं मौको देख र वो संख पार कर नै लय ने आजा। लुगाई आपरै धणी री बात मान ली अर एक दिन मौकै देख र संख उड़ा लिया। संख गायब होवता ही बामण बावळौ होय ग्यौ। कोई और उपाय कोनी दिख्यो पो पाछौ भगवान री शरण में गियौ। बौल्यौ, परभु, गरीब बामण में आ कांई जोखी करी। भगवान तो दया रा सागर है, वे पजीज ग्या। भगवान उण नै पाछा दर्शन दिया समझायौ, बावळा ऐड़ी कीमिया चीज यूं हीं रख दी, पण इण बार म्है थने एक बड़ो संख देऊ, इण नै संभाल नै राख जै। ओ संख थनैकी कोनी देवेला, पण थारो पैलकों संख पाछौ आ जावेला। बामण वो संख ले ने बैठ्यौ अर बोल्यो, सो रिपिया देओ, संख जोर सूं बोल्यौ, सो ले, दौ सौ ले, हजार ले, दस हजार ले। पण दिया एक भी रिपियौं कोनी। इण तरा बामण जिकी भी चीज मांगतौ, संख खाली बातां करतो, देवतो कीं कोनी। पोड़ोसी ऐड़ी बातां सुण सुण नै आखतौ व्हैग्यौ, वो देख्यौ कै ओ संख तौ जोर रो है, सौ मांग तो हजार देवे। वो मौको देख र, मोटोड़ो संख पार कर लिया अर उण री जगां पुराणौं संख रख दियौ। घरे आय र वो संख सूं एक घोड़ी मांगी तो संख कह्यौ, एक घोड़ी ले, दो घोड़ी ले, दस घोड़ी ले, ऊंट ले, हाथी ले। पण उठै देवण नै तो राम रो नाम हो। अबै वौ पछतावण लाग्यो, तो संख बौल्यौं वा हीं संखी सोहणी, म्है संख ढपोल। लेण देण ने कीं कोनी, हामल भरू किरोड़।


राया रा भाव रातै ही गया

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रै घरै रात रै चोर घुस ग्यौ। सेठ-सेठाणी, सूता हां, पण चोर री खड़खड़ाहट सूं आंख खुलगी। चोर नै आयं देख, सेठ सौच्यौ, चोर रै कनै हथियार व्हियो तो मार नाखेला। सेठ डरपोक जरूर हो, पण बाणिया बुद्धि तो विरासत में ही मिल्या करै, सो वो आप री लुगाई सूं बातां लाग ग्यौ। केवण लाग्यों, नींद नी आ रेयी है, थनै म्हारै मन री बात केवूं, अबकै साल आपां रामसापीर रै धोक देवण पाळा जावांला। सेठाणी हुंकारौ भरियौ। उबासी खायनै वा पळकां उघाड़ी तौ उण नै चोर दिया ग्यो। जे हाकौ करै तो पाड़ोसियां सूं पैला चोर सुणै। पाड़ौसी आवै जद तक तौ चार मार जावै। दोनां रै टूंपौ दै दियौ तौ। सेठाणी समझ गी कै सेठ जी नै भी ठाह पड़ ग्यी है। वा भी बातां मंे लाग गी। घर री बातां चाल पड़ी। चोर सोच्यौ, सेठ-सेठाणी री बातां रै मांय जरूर काम री पत लागेला। वौ एक खंभे से लारै छिप नै बाता सुनण लाग्यौ। सेठजी कह्यौं, अरे भागवान, वै राया री दोनूं बोरिया आढ़ोड़ी साळ में सावळ राख्योड़ी तो है नी ? सेठाणी पड़ूतर दियो, म्हारै तौ सावचैते ई उतरग्यौ। ध्यान ई नीं रह्यौ, वै बोरियां तो बारलै चैक में हीं राख्योड़ी पड़ी है। सेठजी कह्यौं-थूं बावळी है, थने ठाह कोनी रायां रौ भाव चांदी सूं ईं ऊॅंचा चढ़ग्या है। दस रिपिया मण हो ग्या है। सेठाणी कह्यौं-थै नाराज क्यूं व्है रिया हौ, अबार आड़ोड़ी साळ में रखवा दूं ? सेठ थोड़ो ढीलो पड़यो, बोल्यो, अबै रात रा रैवण दे, दिनूगे देखालां। चोर बातां सुणी तौ घणौ राजी व्हिया। मन में सोच्यौ-अबै तौ रायां बजार में हीं मिलैला, यू सोच चोर रायां री दोनूं बोरिया उठायने ले ग्यौ। चोर उठां सी पार व्हिया तो सेठ अर सेठाणी री आंख्या लागी। दूजै दिन चोर रायां ले यर बजार में फिरियौं पण उण नेै दस रिपिया मण में रायां रा लैवाल कोनी मिल्या। चोर जांणियौ के बांणिया म्हनै लूटणी चावै। वो राया दूजी बोरियां में घाल र उण से ठ री दूकान पूग ग्यौ, जठै सूं चोरी करी ही। सेठ री दूकान चढ़ता हीं, सेठ चोर ने पेचाण लियौ। सेठ कह्यौं-बजार में आज राया रा भाव एक रिपियें मण रा है। चोर कह्यौ, काल तो लोग बाग रात नै रायां रा भाव चांदी जैड़ा बतावै हा। सेठ कह्यौ, अरे बावळा, राया भाव रातै वाळा तो रातै ही गया, अब दिन उग ग्यौ.......।