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इण तरै बैमाता रा लेख व्हिया साचा

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक राजा रै कोई टाबर नीं हौ। एक दिन वौ सैर माथै निकलियौ तो उणनै रास्ता में ‘बेमाता‘ मिळी। राजा रै पूछण पर बेमाता कह्यौं जिण मिनख रै करम में जो लिख दूं, वैड़ौ हीं व्है। राजा नै उण माथै विसवास नीं व्हियौ। वौ मजाक करतौ पूछियौ के बता त्हारा भाग में कई है ? बेमाता कह्यौं थ्हारी बेठी रै सागै त्याव करता टैम थ्हारी मौत व्हैला। राजा उणरी बात सुण हंसण लागौ अर कह्यौं त्हारै तो कोई टाबर नीं है, त्या किण सूं करूंला। जेगा री बात, थोड़ा दिनां पछै रानी गरभवती व्हिई। राजा रै मन में शक पैदा व्हियौ। राजा रैमन में शक पैछा व्हियौ। वौ सोचियौ औ छोरौ व्हैला तौ राख लूं लां, अर छोरी व्हिई तो मरवा दूं ला। विधि रा लेख सूं रानी रै छोरी व्हिई। राजा नै दासी सूं कह्यौं, बाई को मुकलादेओ (मार डालो)। राजा छोरी नै खाड़े में डलवा दी। थोड़ी टैम पछै वठै एक कुत्हार और कुत्हारी आया। उणरै टाबर नी हा। कुत्हारी छोरी नै उठाय ली अर घरै ले आई। टैम रे सागै छोरी मोटी व्हिई। एक दिन राजा रा दो घोड़ा अस्तबल सूं छूट नगर में गिया परा। वे उण कुत्हार रै घर में घुस गिया। कुत्हार छोरी सूं कह्यौ, बेटी इन घोड़ा ने बारै निकाल दे। छोरी दोनूं घोड़ा री पीठ माथै थपकी लगाई अर अणनै घर सूं बारै निकाल दिया। छोरी रै हाथ री थपकी लगाती हीं घोड़ा री पीठ माथै सोना रा पंजां उभर गिया। दूजी पीठ माथे चांदी रा पंजा। घोड़ा पाछा गिया। राजा घोड़ौ री पीठ माथै सोना-चांदी रौ पंजो उभरियौ देखियौ तो उणनै घणौ अचत्भौ व्हियौ। पंजा देख वो अणुमान लगायौ कै अे किणी किशोरी हाथ है। वौ मन में ठान लियौ के इण छोरी सूं त्याव करूंला। दूजै दिन वो खेाज शुरू कर दी।गांव में जीमण रौ आयोजन करियौ उणमें जद वा छोरी घोड़ो री पीठ पर थपकी लगाई तौ सुनहला अर रूपहला पंजा उभर आया। राज उणनै राक ली। कुत्हार सूं कह्यौं आपरी लड़की रौ त्याव त्हासूं कर दौ। कुत्हार घणौ ना कह्यौं पण राजहठ रै सामीं एक नीं चाली। लड़की नै जद आ बात ठा पड़ी कै त्याव रचावण वालौ उणरौ बाप हैं तौ वा कह्यौंः- जल्दी पढ़ रे बामणा, बेगों पढ़ रै बामणा, फेरा लेसी बाप और बेटी। वा दो तीन बार आ बात किदी। राजा नै जब पूरी बात ठा पड़ी तौ पश्चाताप में उणरी मौत व्हैगी।


राजा रा बिल्ली ने यूं भुलायों दूध पीवणौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक राजा नै बिल्लिया पालणै रो घणे चाव हो,। अेक दिन राजा आप रै खास दरबारियौं नै बुलाय र सगळा ने अेक अेक बिल्ली दीवी अर कह्यौ, इण बिल्लियां नै आप रै घरै ले जावो अर इण रो पालन करौ। जिको भी खरचो लागौ, राज रै खजानै सूं ले य लो। छै म्हीना पछै जिका री बिल्ली सबसूं मोटी ताजी व्हैला, उण नै ईनाम दियौ जावैला। सगळा दरबारी आप आप रै घरे बिल्लियां लेय नै गिया परा। हर काईआप री बिल्ली नै घणो लाड़कोड़ सूं दूध पिला-लिपा र पालण लागा। हरेक दरबारी रै मन रै मांय एक हीं बात हीं कै उण री बिल्ली सबसू मौटी व्हैला, इण वास्ते ईनाम उण ने हीं मिलेळा। पण अेक दरबारी ऐहड़ो भी हो, जिको मन रै मांय सोच्यो कै दूध बिल्ली नै क्यूं पिलाऊं, वो राजा रै खरचे सूं दूध आप रै पेटमें पूगावण लाग्यो। बिल्ली नै पीवण नै कीं कोनी मिल्यो तो वा सूख नै कांटा व्हैगी। छै म्हिना पूरा होवण रे माय दस दिन बचिया तो वो दरबारी उबलते दूध रौ प्याला भरयोअरबिल्ली की गरदन पकड़र उबलते दूध रे मांय उण रो मुड़ो घाल दियो। बिल्ली रो मुड़े बळ ग्यौ। वो दस दिनां तक यूं हीं करतो रह्यो। अब बिल्ली दूध रै नाम सूं हीं डरण लाग ग्यी। छह म्हीना पूरा व्हिया तो सगळा दरबारी आप आप री बिल्ली लेय र दरबार में पूग्या। सगळी बिल्लियां खूब मोटी-ताजी हीं, पण अेक बिल्ली आज मरै, कालै मरै जेहड़ी होय री हीं। बिल्ली री ऐहड़ी सूरत देख राजा लाल पीळो व्हैग्यौ। वै पूछ्यौ, थूं इण बिल्ली ने एहड़ो मुरदार कीकण बणा दिया, राज सूं खरचों कोनी मिल्यो कां ? दरबारी बोल्यों, अनदाता इण मैं म्हारौ कोई अपराध कोनी। आप रा मंत्री म्हनै ऐहड़ी बिल्ली दीवी जिकी दूध पीवे हीं कोनी। राजा अचरज में भरग्यों, पूछ्यों, बिल्ली दूध नीं पीवै, आ बात हो ही नीं सकै। दरबारी कह्यौं, हाथ कंगन नै आरसी कांई अर पछठै लिखै ने फारसी कांई, उणी टैम बिल्ली रे आगे गरम दूध रो प्यालो मंगवाय र राखीज्यो, बिल्ली दूध ने देखता हीं उछल नै दूर जाय नै बैठ ग्यी। राजा ने भरोसो व्हैग्यो, वो सोची कै इण दरबारी रै सागै अन्याव व्हियौ है, इण वास्ते ईनाम इण नै ही दियो जावे। इण री बिल्ली दूध पीवती तो आ सबसूं मोटी व्हैती।


समझी रै वीरा समझी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक बिणियांणी नै गुदळक पड़ता हाजत व्ही तौ वा थोड़ी सूं पाछी वळती वगत अेक चोर उणरै आड़ी फिरियौ। बिणियांणी गैणा-गाठा संू पीळी-जरद व्हियोड़ी ही। चोररै तौ जांणै अणचींती माया हाथै लागी। लुगारी अबळा जात हैं, जोर सूं धाकल करतां ईं सगळौ गपी लपौलप उतारनै देय देवैला। चोर ई धाकलता ईं बिणियांणी मुळकती थकी बोली-बावळा, थोड़ौ हौळै बोल। म्हनै डरावण री जरूरत कोनीं। इता गैणा सूं ईं राजी मत व्है। थारी हीमत व्है तौ म्हनै ई साथै लै चाल। घर मंे दोय ओडी गैणौं फेर पड़ियौ है। म्हनै वौ ई जुगती सूं लावण दै। अपा दोनां रै आखी ऊमर खायां ईं नीं खूटै। म्हारा भाग रौ आज थूं नांमी मिळियौ। हाक मत कर, सेठनजी नै खुड़कौ व्हैगौ तौ पछै रांझौ पड़ जावैला। घर रै मांय सगळी पूंजा लेयनै आय जावूंला। बोल, थारी, कांई मंसा है ? थूं कैवै तो है ज्यूं ई चालूं परी अर थू कै तौ सगळौ माल उचकायनै चालां। चोर जांणियौ के आज तौ सांप्रत लिछमी तूठी। उणनै तौ अेड़ौ मौकौ ऊमर में हाथ नीं आवैला। हौळौ सूं सुरपुर करतौ बोल्यौ-म्हैं तो थूं कैवै ज्यूंक रण नै त्यार हूं। इणी बाड़ा मंे बैठौ उड़ीकू। कैड़ीक हुंस्यारीं सूं सगळौ कांम करै। बिणियांणी बौली-म्हैं इक्कीस आनां तौ मतै ई आई रैवूंला। पण कदास अैड़ौ ई धांदौ पड़ जावै तौ थूं सांम्हला झिरोखा हेटै ऊभनै म्हनै हौळौ-हौलै हेलौ पाड़ लीजै। म्हारौ नांव समझाी है। म्हैं झिरोखा री बाती सूं पोटळी थरकाय देवूंला। माल-मत्ता थनै सूपियां पछै म्हैं कोई मिस बणायनै बाड़ा मेंआय जावूंला। कैडीक सावचेती राखै। बाड़ा में सावळ चापळियोड़ी रैजै, कोई देख नीं लेवै। म्हारौ नांव समझी हैं, याद राखजौ। बिणियांणी तौ आ कैयनै निरांत सूं आपरी हवेली में गी परी अर चोर बाड़ा में चापळनै बैठग्यौ। आज उणरा मन में खुसी रौ पार नीं हौ। वौ बैठौ-बैठौ मन में मंसूबा बाधण लागौ कै धरै जावतां ई अेक पक्की हवेली चुणावूंला। उणरी सीख रै मुजब वौ तीन घड़ी पूठै झिरोखा हेटै उभनै हौळै-हौळै हेलौ मारण लागौ - समझी, अे समझी। इत्ता में झरोखा री बारी खुली। समझी बारै मूंडौ काढ़नै बोली-समझी रे वीरा समझी। नीं तो घाणा खांवा अ नीं कुबैला बारै जावं। अबै थां में समझ व्है तौ बोलौ-बोलौ बाड़ा सूं बारै जातौ रैजै नींतर घणौ पिछतावैला। चो रै मंसूबा री सगळी हवेली घुड़गी। वौ फीटौ पड़ै उठा सू सीकड़ मनाई, जांणै हवेली उणरै माथै पडै़।

अेड़ी करी बांणिया रै घरे चैरी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक चोर बाणिया रै घरै रूई री चोरी करण नै गियौ। चारे नै इण बात रौ सुराग हौ के भखारीं में रूई पड़ी है। वौ जांणियौ के रूई री अेक मोटी गांठ बांध लूं तौजळम सुधर जावैला। सियाळा रा दि हा। वौ हौळे-हौळे हालतौ भखरी रै कने पूरा ग्यौ। भखारी रै अेक बाजू भैंस ऊभी हीं। वौ भैंस रै पाखती ई रूई बांधण सारू आपरौ खेसलौ बिछायौ। पण बिछावता ई खेसला नै तौ कोई उठा सूं खांच लियौ। चोर जांणियौ भैंस खायगी। कीं बात नीं। खेसला नै चिगळैला जित्तै पोतियौं बिछायनै उण में रूई बांधलूं। वौ दोवडौ-तेवड़ौ करनै आपरौ पोतियौं पाछौ उणी ठौड़ बिछायौ। रूई री बाथ भरी जित्तैं तौ फेर कोई उणरो पोतियों खांच लियौ। जांणियौं के फेर भैंस खायगी। अबै कांई उपाव करै। बिछावण सारू ठौड़ आ इज हीं। रूई रा लोभ में, खेसलौं अर पोतियौं गमायौ। अंारी कसर तौ काढ़णी हीं। रात री वगत, कुण दैखेै। वो आपरी धोती खोलनै बिछाय दी। काठी बाथ भरनै वौ धौती माथै रूई धरण लागौ के जित्तैं फेर धोती कुण ई खांचली। साव नागौ-तडं़ग उठै ई ऊभौ रह्यौं। रूई रा लोभ में सगला गाभा ई गमाय दिया। आ भैंस हैं के डाकण। गाभौ तौ देख्यौड़ौं छोड़े नीं। वौ सोच करतौ चितबंगियौं सौ ऊभौं हौ के उणनै अेक टाबर री बोली सुणीजी-दादोजी, म्हनै बेक नवी बात सुणावौ। भंवरिया, थनै तौ बातां आगै रात रा सूवता नै झक पड़ै नीं, दिन रा जागता नै झक पड़ै नीं। अै कोई बाता हैं ? म्हनै घड़ी आधा घड़ी ई सावळ सूवण दै कोंनी। दादोजी तौ चोर रै आवतां ई जागग्या हा। वै आपरै हाथां ई उणरा सगळा गाभा खींच्या हा। रूई री नीगैदास्ती वै भखारीं में ई सूवता हा। अर बांता सुणन सारू भंवरियौं वारै पाखती सूवतौ हौं। वै कह्यौं फगत अेक बात सुणावूंला। भंवरियौ मान गियौ। दादोजी चोर रै सागै बीती बात सुणाई। कह्यौ-रूई लेवण सारू खेसलो, पौतियौं धोती बिछाई तौ वा डाकण म्हारा सगळा गाभा खायगी। भंवरियौ पूछ्यौं - सगला गाभा उतारियां पछै थे कैड़ा दीखता हा। दादोजी दीयौ झूपायनैं उण चोर साम्हीं इंसारौ करनै कह्यौं बैटा, म्हैं साव इण जैड़ो दीखतौ हौं। चोर तौ फीटौ पड़ने नागौ ई उठा सू भाग गियौ।


मारिया पछै नीं छोडिया रूपिया

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक महंत अेक बांणिया सूं ठागौ करने दस हजार रिपिया झाड़ लिया। बाणियौ घणी ई हाथा-जोड़ी करौ पण महंत तौ पाछी अेक लाल-छद्ाम ई उणनै नीं बताई। बाणिये कह्यौ, मरियां पछै ई अै रिपिया नीं छोडूंला आ जांणज्यौं। उण दिन सूं ईं वौ बांणियौं तौ गिणनै गांठ बांध लीवी। पण कदै ई वौ मूंडै दरसाई कोंनी। रोज रामदुंवारै जावतौ। महंतजी री अणहूंती हाजरी साजतौ। महंतजी लारली सगळी बातां बिसारने गांणिया सूं घणा ई राजी व्हैगा। बांणियौ तौ मन में बात दबायोड़ी राखी, पण महंतजी सांचाणी ई उण दिन वाळी बात आई गई करग्या। बांणियौं खासो बूढ़ों हौ। घणकरौ मांदौ ई रैवतौ। पण वौ रांमदुवारा री हाजरी बजावतौ। अेक दिन बांणिया नै कुजरबौ ताव चढ़ियौ, पण वणै रामदुंवारै गयौ। आवणै उणरै सारै हौ पण पाछौ जावणौ सारै नीं रह्यौ। उणनै आछी तरै जाच पड़गी के आ आखरी घड़ी है। महंतजी ई लखग्या। कह्यौ, भाया, अबै रामजी रौ नांव लै, वौ ई साथै चालैला। बाणियौं कह्यौ- महंतजी मरणौ तो हैं, म्हैं मरण रौ सौच नीं करू। पण म्हनै रात सपनौ आयौ के म्हारौ आधौ सांस कुपाळी में अटक्यौं रैवैला अर आधौं कागलियां में। इण सूं म्हारी मुगती नीं व्हैला। आप मेहरबानी करनै अेक चन्नण री लांठी फाड़ी म्हारी कुपाळी अर अेक तीखी फाड़ी म्हारा कागलिया में ठौक दौ। आखरी वगत म्हनै आपरै हाथा सूं उबारलौ। महंतजी ई जांणियौं जै इणरी मुगती व्है तो चन्नण री दोय फाड़िया ठोरण में म्हनै कांइ जोर आवै। वै चंन्नण रा दोय तीखा फाड़ा उड़नै उणरै मरिया पछै अेक कुपाळी अर अेक कागलिया में ठोक दिया। बांणिया रै दैव लोक होवण री बात सुणी तौ उणरा घरवाळा रांमदुवारै आया। तीन मोट्यार बेटा हा। सेठां री हालत देखी तो वांनै रीस आई। महंत नै पूछयौं तौ वै खुद आपरै मुंडा सूं मंजूर करयौ के सेठा रै कैवणा रै मुजब ई मुगती रौ उपाव करियौ। बेटा कह्यौ - मुगती रो औ उपाव तौ म्हैं आज थारैं मूंडै ई सुणियौ। थें म्हारै भाईजी री हित्या करी हो। म्हैं तो राजाजी नै फरियाद कराला। महंतजी घणी ई हाथा-जोड़ी करी, पण सेठ रा बेटा नीं मांनिया। सेवट लोग बीच में पड़िया अर चाळीस हजार रिपिया में राजीपौ करियौ। उण दिन रा बौल वानै याद आया के मरियां पछै ई रिपियां नीं छोडूंला।


अेडा दिया ब्याज माथै रिपिया

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक बिणयांणी ही। उणरै आगै-लारै कोई नीं हौ। लुगाई री जात हीं, दूजौ वौपार सज नीं आवै, इण खातर वा ब्याज रौ ई धंधौ करणै सावळ समझियौ। लोगां रै जरूरत व्हैती तौ वे बिणियांणी रै घरै आयनै रिपिया लै जावता। पण रिपिया पाछा देवती वगत वै उणनै अवस फोड़ा घालता। कीकर करनै बिणयांणी निसेवार आपरौ खरचो-खातौ काढ़ लेवती। अेकर अेक मिनख उण बिणियांणी कना सूं रिपिया मांगण नै आयौ। हाथ जोड़ने बौल्यौ-सेठांणीजी, म्हारी लाज अबै थारै हाथ हैं। बेटी ने सीख देवणी हैं। सौ रिपियां रौ जाणै जितौं अड़ाव हैं। कातीरा लाटां में दूध सूं खोळनै आपरा रिपिया भरै पालूंला। वौ खंजिया मांय सूं रिपिया काढ़नै बौल्यौ-औ अेक महीना रौ ब्याज आगू लौ अर म्हनै सौ रिपिया साझौ। म्हैं जांणूला के थें म्हनैं नवौ जलम दियौ। सेठांणी नै नवा जलम री बात इती समझ में नीं आई जित्ती पांच रिपिया देखने आई। महीना रौ पांच रिपिया ब्याज अर वौ ई आगूंच। वा तौ तुरंत उण जाट नै सौ रिपिया नगद गिण दिया। जाट घणा-घणा गुण गावतौं उठा सूं वहींर व्हियौं। दूजैं दिन घड़ी दिन चढ़िया वौ जाट सेठांणी कनै फेर आयौ। अेक धौळी-धक्क नवी पावली उणरै साम्हीं करनै कह्यौं आपरा सौ रिपियां सूं सगळै काम सार लियौ। फगत पांच रिपिया ई भेळा देवूंला। आ लौ ब्याज री आगुंच पावली अर म्हनैं सटकै पांच रिपिया देवौ। जान तौ वहींर व्हियोड़ी बारणै ऊभी हैं। पावली रौ ब्याज सुणनै बिणियांणी तौ झट लोभ में आयगी। मन में राजी व्ही औ आसांमी तौ नांमी थपियौ। बापड़ौं आगूंज ब्याज झिलावैं। वा तौ उणनैं कैतां पांण पांच रिपिया दे दिया। जाट तौ रिपिया लियां पछै बिणियांणी रै घर साम्हीं पाछौ मूंड़ौ ई नीं करियौ। सेठाणी उणनै रिपियां री भुळावण देवण सारू गी, पण जाट तौ मौळौ-मौळौ जवाब दियौ। गोता खाय-खायनै सेठांणी रै पगां पांणी पड़ग्यौ। अेक दिन सेठांणी काठी काई होयनै चिड़ती थकी बोली-थनै थोड़ी घणी ईलाज को आवै नीं। जाट बोल्यौ - सेठांणीजी, उण दिन वै रिपिया थें म्हनैं अर म्हारीं गरज सारू को दिया हा नीं, थे रिपिया दिया हा आगूंच ब्याज। अबै कांन खोलनै साफ सुणलौ। सौ ने लेग्यौं पंजौ, अर पंजा नै लैग्यौ पाव। अब के हैं बिणियांणी, थू आव भलाई जाव।


नींबू रै आसरे पूग ग्यौ रावळा मंे कुबदी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक धरमसाळा में अेक मिनख रैवतौ हौ। वो आपरा खूजियां में हरदम नींबू राखतौ। आवतौ जकौ मारगू उठै रोटी खावतौ तौ वौ उणरै पाखती बैठनै बातां करणी सरू कर देवतौ। आगला नै राजी करण सारू वौ उणरै मनभावती बातां करणी सरू कर देवतौ। आगला नै राजी करण सारू वौ उणरै मनभावती बातां करतौ, पण हरेक रै साम्हीं नींबू रा बखांण तौ करतौ ई। दुनिया में अमरफळ हैतौ ओ नींबू। नींबू खाया कोई मांदगी नैड़ी आवै नीं। पैळा री कोई मांदगी व्है तौ नींबू खाया तुरंतमिट जावै। धरमसाळा में कोई पीळिया रौ रोगी आवतौ तौ वौ कैवतौ के पीलिया तौ हांकरतां नींबूं सूं मिटै। रातिंदा वाळा नै, निकाळा वाळा नै, आधा-सीसी रौ माथौ दूखण वाळा नै, मस्स री तक लीफ वाळा नै अर सरणा चालती व्है जका नै इत्याद मांदगिया सारू वौ नींबू रै रस री दवाई बतावलौ। धौला बाळां वाळा नै कैवतौ नींबू सं पाछा काळा बाळ आय जावै। नींबू खाया ऊमर बधै। यू वौ नाई नींबू रा बखांण करतौ करतौ चक्कू सूं नींबू बंधार लेवतौ अर मौकौ देखनै बातां बातां में मुसाफिर री साग-सब्जी में नींबू निचोय देवतौ। नींबू निचोयां पछै कैवतौ-सवाद है जकौ तौ इण नींबू में इज है। नींबू सूं साग की रौ-कीं बण जावै। आफ तूमार तौ जोवौ। लियाज रै मारिया मुसाफिर उणनै साग घाल देवता। रोट्या खंवाड़ देवता। फगत नींबू रै आसरै वौ मजा में आपरौ गुजारौ कर लेवतौ। होळै-होळै लोगां नै उणरी चालाकी री ठाह पड़गी गी। प्एा रोटी रै सारू कुणं माजनौ पाड़ै। मिनख रा नींबू भरै पड़ता ई गिया। मिनख अेक ठाकर सूं दो-तीन वळा रोटियां खायली। चैथी बार वौ ई ठाकर धरमसाळा में फेर आयौ। अबकै उणरै साथै छोटकियौं कंवर ई हौ। कंवर री आंख मंे केई बरसां सूं फूलौं पड़ियौड़ो हो। मिनख तौ आपरी आदत मुजब आंख में फूलौ देखनै कह्यौ, ई नींबू रा रस सूं तौ आंख रौ औ फूलौ हाकरतां मिट जावै। आ बात कैयनै वौ तुरंत नींबू बधारनै सागरी धेकची मंे रस निचोय दियौ। ठाकर रौटी खावण् रौ मतौ करियौ ई हौ। पण मिनख री बात अजोगती सुणनै वांनै रीस आयगी। जंतराय दिया। पण मिनख रीस करी नी। साम्हीं हंसतौ हंसतौ कैवण लागौ ठाकरसा, के तौ म्हारीं मां मार-मारनै रोटी जीमावती ही के आज आप मार-मारनै रोटी खवाड़ौ हौ। मिनख री बात सुणनै ठाकरसा नै ई हंसी आयगी। कह्यौ-इण कुबदी में तौ घाटौ नीं है। वै उणनै मनवार रै सागै ठिकांणा में लेयग्या।