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भाग लिख्या ही अेहड़ा, ऊपर वाळो भी कांई करतो

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक करसी हो। लगो-लग दो तीन बरसां सू काळ रे चालतां खेती में कीं आवक नहीं हो रेयी ही। घर रो चूलों चलावणों दौरौ हौग्यो हो। वौ उनाळू साख सारू चैथा वांटा में एक जमीनदार सूं बात करी अर, उण रो बेरौ बंटाई रे हिसाब सूं तै कर लियौ। वे बेरौ सितर हाथ ऊंडौ झेलवौ बेरौ हो। चार जोड़िया बिना वो ताबै आवणौ ही दोरो हौ। इण खातर करसो अेक सेठ कनै गयौ अर उणसूं सूद माथै करजो लियौ। उण रै मन में ही कै चैखी साख होवता हीं माथै सगळी फारगती कर दूं ला। पैले फटकारै ई पूरौ खातौ वाळण सारू करसौ सगळा जाव में वो मिरचा बोय दी। कैणा में तौ जमींदार रौ बांटौ चैथौ हो, पण वो बैजा तंग करण लागग्यौ। रोजीना री मांगा-तांगी में के आज फलांणजी रै मिरचा भेजणी, आज ढींकड़जी रै अर आज पूछडंजी रै, यूं कर नै सगळौ बांटौ आधा सूं ईं करणौ पड़ियौ। दूबळा नै सौ दोखा व्ळिया करै। जोग री बात, पछै मिरचा में रोग व्हैगौ, की दावा री झपट लागगी, कीं ठाकर री गिरै अर कीं भाव धापनै मोळौ रेगौ। करसौ तौ लेणा में साव कळग्यौ। भूंडै ढाळै पड़ग्यौ। कमायो कीं नीं, सूद ऊपर सूं। रिपिया में जोखौ राखणियौ, अैड़ौ भोळौ सेठ ई कोनीं हौ। करसा री च्यारूं जोड़िया, थोड़ौ घणौं गैणौ गांठौ, वित-मवेसी, कपड़ा-लत्ता, बरतन-बासण सूंकाम नीं सरियौ तौ सेठ करसा रै डील रा गाभा ई उतार दिया। पौतियौं अंगरखी अर पगरखियां धुराधुर खुलायली। फगत गोड़ा सूं अेक वेंत ऊंची फोटोड़ी झीर-झीर व्हियोड़ी धोती राखी। पण लैणौं नीं उतरियौ ? करसौ घणौ ई रोयौ, कळपियौ पण सेठजी अेक लाल-छदांम छोड़ण नै ई त्यार नीं हा। करसो घणी बेईज्जती अर कूटण रा डर सूं रात रा आप रो झंूपौं छौड़नै छानै छिपतौं मंदिर में जाय नै छिपग्यौ। जांणियौ झांझरकै पौर रात थकां उठा सूं ठेको देय ने निकळ जावूंला। जीव रौ उकारळियौड़ी वौ पारसनाथ जी री पूतळी रै लारै लुकग्यौ। अंधारा में पूतळी साव नागी-तड़ंग। पूतळी रा माथा माथै हाथ फेरनै वो होळै सूं ड़रतै ड़रतै कह्यौं, भाया, थूं दो बेरा करिया दीसै। म्हारै अेक फोटोड़ी धोतड़ी तौ है, थारै तो वा ई कोनी। भगवान भी मन रे मांय हंस नै रेय ग्या, करता भी काई, करसे रा भाग चितरगुप्त भी ऐड़ा हीं लिख्या हा।


अकल सू बणा लियो भाई

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रौ बेटौ ब्याव करनै सासरा सू पाछौ आवतौ हौ। बेटा रा सारा वाळा घणौ दायाजौ दियौ। बारात गाजां-बाजां रै सागै उठा सूं वहीर व्ही। अेक धाड़ैती उण बारात नै लूटण रौ मतौ करियौ। वौ छौटा-मोटी लूट करतौ हौ। वौ सौ मिनखा रौ जत्थौ बणायौ। मौका री घाटी देखनै वठै आपरौ मोरचै लगायौ। सेठ रै कानां में ईं इण बात री भणक पड़गी। बारात पांच सो मिनखा री ही। गांव जावण रौ मारग ई अेक इज हौ। बाराज दूजा मारग सूं नीं जा सके। जै धाड़ैती मारेचां लियां बैठा है तौ वे अक भी जणा नै जीवतौ नीं छोड़ैला। वै मन में सोच लियौ के औ ब्याव घणौं मूघौ पड़ैला। खून-खराबै सूं सुगन बिगड़ैला। बींदणी रै कीं व्हैगौ तौ मूंड़ौ दिखावण जोग ई नीं रैवैला। इण वगत अकल हीं काम आवैला। सेठजी विचार करण लागा। थौड़ी देर पछै बोझ उतरग्यौ। सगळा जांनिया नै विस्वास दियौ के डरण री जरूरत नीं है। सेठा री अकल माथै सगळां नै ई भरोसौ हौ। सैठ बींदणी अर बंदी रै साथै सबसू आगै वाळा रथ में बैठ्या। बारात घाटै पूगी। सेठ तौ पूरौ जाब्तौ करियों बैठा हा। घाटा रै बीच में धाड़ैत आड़ा फिरिया। सेठ तौ निरभै बींदणी नै लेयनै रथ सूं हैटै उतरिया। वांरा दोनूं हाथां में दोय थाळ हां, अेक में मैवो-मिस्ठान, मिसरी अर पतासा भरियोड़ा हां। दूजा थाळ में इक्कीस मोहरां पळकती हीं। सेठ कह्यौ-म्हारीं आ बींदणी आपरै खोळै है। अर म्हारी तरफ सूं आपनै औ मामूली निजराणौ हैं। कबूल करौ। सेठ री बात सुणतां ई ठाकर तलवार अळगी फंेक ली। कह्यौ-म्हारी लाड़ल बेटी, दूधां न्हावौ अर पूतां फळौ। सेठां सांम्हीं देखनै केवण लागा-सेठां, आ बींदणी म्हारै खोळै है, पण बेटी रै दायजा री कीं चीज म्हैं निजरांणा में कबूल नीं करूंला। इणरौ घर रौ पांणी पीवणौ ई म्हारै वास्ते निखेद हैं। पछै ठाकर सेठां रा मोर थापलनै कह्यौ-सेठां, थें अेक बोल र्में इं म्हनै फंसा दियौ। पण, कोई बात नीं, बणी सो भाग री। अबै थै म्हारी तरफ सूं बेटी रै सारू अेक सौ अेक रिपिया कबूल करौ। पछै आपरो जत्थौ लेयनै बारात रै सागै व्हिर व्हिया। घरै पूगियां पछै सेठ ठाकरां नै पाठा नीं जावण दिया। आपरै साथै ई धंधा में भेळा राख दिया। दोनूं भाई व्ळै ज्यूं ऊमर भर भेळा रह्या।


सेठ यूं निभाई सोगन

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ नै कांदा घाणा भावता हां। वो तीसूं तारीख कांदां रौ सांग खावता। घर वाला पैला तौ काया व्हिया, पर हौळे-हाळे हेवा व्हैगिया। टेकर उण गांव में संत पधारिया। आगती-पागती सूं लोग उणरा परवचन सुणण सारू आया। केई दिनां तकयूं हीं चालतौ रियौ। संत अेक-अेक साहूकार नै खावण-पीवण री सोगन-सपथां दिराई। जोग री बात के उण कांदा वाला सेठ नै संत कांदा खावण री सोगन दिराई। सेठ कह्यौ-महाराज, आप फरमावों तौ धांन छोड दूं पण म्हारा सूं कांदा मरियां ईं नी छूटे। संत कह्यौ-मरियां पछै तौ सगळी चीजां अठै ई छूट जावैला। जीवतां छोड़णी आपरै हाथै हैं। संत ई हठी अणहूंता हा। कह्यौ छोड़णौ व्है तो कांदा छोड, नीतर थारौ मन व्है ज्यूं कर। संठ नै सेवट कांदां छोडण सारू मनवायनै ईं मान्या। सोगन लियां पंछै सेठ घरै आयौ। सेठाणी सू पूछयौ-आज साग कांई करियौ ? सेठाणी बोली-इण में पूछण री कांई बात। साग तौ कांदा रौ ई बणायौ है। सेठ कह्यौं- आज तौ म्हनैं संत कांदां नीं खावण री सोगन दिरायदी। सेठाणी कह््यौ-संत किया देखण नै आवै। अपारै सोगन ई खाय खेवणी अर कांदां ई खाय लेवणा। पण सेठ कह्यौ-आ बात तौ मन मांनै कोनी। सोगन खाई जकौ तौ अबै पालणी ई पड़सी। थें दूजौ साग बणा दियौ। सेठाणी कांम करण में माठी ही। कह्यौ-अबै कुण चूल्हौ चेतावै। आज-आज जो जिमलै, नीतर मन में रैय जावेला। तौ ई सेठ रौ मन नीं मानियौ। भूख अणहूंती लागोड़ी है। दोय पापड़ छमक दियौ। सेठाणी फेर ओजौ ताकियौ। बोली-पापड़ा रो सागकरूंला, जितरै आपरी भूख मर जावैला। सौगण खावणी तौ साचा मन सूं खावणी। मन में आवणौ ता आधौ खावणौं है। कांदां रा नांव सूं तौ थारै लाळा पड़ै। म्हारौ कैणौं मानौ आज आज तौ खायलौ। सेठ रै मन में तौ खावण री ही इज। सेठाणी रै इता कैवणा सूं वौ कह्यौ-थ्हारी मरजी व्है तौ औ साग लै आवौ। पण अेक उपाय कर, धेकची रै ढकणौ काठौ लगायणै कौरौ झोळ-झौळ आवण दौ। कांदां मत आवण दीजौ। सेठाणी कह्यौ-हां, आ गळी तौ थें नांकी काढी। झोळ में तौ मुसाला, पांणी अर बघार घी रौ है। माराजा आंरी तौ थ्ज्ञानै सोगन दिराई कोनी। म्हैं अैड़ी सुथराई सूं झोल घालूला कै तासळी में कांदां रौ फुतरकौ ई नीं आवण दूं। झौळ रै सागै कांदां ई पड़ता गिया। इण तरै वौ आपरी सोगन निभाई।