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सेठ यूं निभाई सोगन

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ नै कांदा घाणा भावता हां। वो तीसूं तारीख कांदां रौ सांग खावता। घर वाला पैला तौ काया व्हिया, पर हौळे-हाळे हेवा व्हैगिया। टेकर उण गांव में संत पधारिया। आगती-पागती सूं लोग उणरा परवचन सुणण सारू आया। केई दिनां तकयूं हीं चालतौ रियौ। संत अेक-अेक साहूकार नै खावण-पीवण री सोगन-सपथां दिराई। जोग री बात के उण कांदा वाला सेठ नै संत कांदा खावण री सोगन दिराई। सेठ कह्यौ-महाराज, आप फरमावों तौ धांन छोड दूं पण म्हारा सूं कांदा मरियां ईं नी छूटे। संत कह्यौ-मरियां पछै तौ सगळी चीजां अठै ई छूट जावैला। जीवतां छोड़णी आपरै हाथै हैं। संत ई हठी अणहूंता हा। कह्यौ छोड़णौ व्है तो कांदा छोड, नीतर थारौ मन व्है ज्यूं कर। संठ नै सेवट कांदां छोडण सारू मनवायनै ईं मान्या। सोगन लियां पंछै सेठ घरै आयौ। सेठाणी सू पूछयौ-आज साग कांई करियौ ? सेठाणी बोली-इण में पूछण री कांई बात। साग तौ कांदा रौ ई बणायौ है। सेठ कह्यौं- आज तौ म्हनैं संत कांदां नीं खावण री सोगन दिरायदी। सेठाणी कह््यौ-संत किया देखण नै आवै। अपारै सोगन ई खाय खेवणी अर कांदां ई खाय लेवणा। पण सेठ कह्यौ-आ बात तौ मन मांनै कोनी। सोगन खाई जकौ तौ अबै पालणी ई पड़सी। थें दूजौ साग बणा दियौ। सेठाणी कांम करण में माठी ही। कह्यौ-अबै कुण चूल्हौ चेतावै। आज-आज जो जिमलै, नीतर मन में रैय जावेला। तौ ई सेठ रौ मन नीं मानियौ। भूख अणहूंती लागोड़ी है। दोय पापड़ छमक दियौ। सेठाणी फेर ओजौ ताकियौ। बोली-पापड़ा रो सागकरूंला, जितरै आपरी भूख मर जावैला। सौगण खावणी तौ साचा मन सूं खावणी। मन में आवणौ ता आधौ खावणौं है। कांदां रा नांव सूं तौ थारै लाळा पड़ै। म्हारौ कैणौं मानौ आज आज तौ खायलौ। सेठ रै मन में तौ खावण री ही इज। सेठाणी रै इता कैवणा सूं वौ कह्यौ-थ्हारी मरजी व्है तौ औ साग लै आवौ। पण अेक उपाय कर, धेकची रै ढकणौ काठौ लगायणै कौरौ झोळ-झौळ आवण दौ। कांदां मत आवण दीजौ। सेठाणी कह्यौ-हां, आ गळी तौ थें नांकी काढी। झोळ में तौ मुसाला, पांणी अर बघार घी रौ है। माराजा आंरी तौ थ्ज्ञानै सोगन दिराई कोनी। म्हैं अैड़ी सुथराई सूं झोल घालूला कै तासळी में कांदां रौ फुतरकौ ई नीं आवण दूं। झौळ रै सागै कांदां ई पड़ता गिया। इण तरै वौ आपरी सोगन निभाई।