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अेड़ी करी बांणिया रै घरे चैरी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक चोर बाणिया रै घरै रूई री चोरी करण नै गियौ। चारे नै इण बात रौ सुराग हौ के भखारीं में रूई पड़ी है। वौ जांणियौ के रूई री अेक मोटी गांठ बांध लूं तौजळम सुधर जावैला। सियाळा रा दि हा। वौ हौळे-हौळे हालतौ भखरी रै कने पूरा ग्यौ। भखारी रै अेक बाजू भैंस ऊभी हीं। वौ भैंस रै पाखती ई रूई बांधण सारू आपरौ खेसलौ बिछायौ। पण बिछावता ई खेसला नै तौ कोई उठा सूं खांच लियौ। चोर जांणियौ भैंस खायगी। कीं बात नीं। खेसला नै चिगळैला जित्तै पोतियौं बिछायनै उण में रूई बांधलूं। वौ दोवडौ-तेवड़ौ करनै आपरौ पोतियौं पाछौ उणी ठौड़ बिछायौ। रूई री बाथ भरी जित्तैं तौ फेर कोई उणरो पोतियों खांच लियौ। जांणियौं के फेर भैंस खायगी। अबै कांई उपाव करै। बिछावण सारू ठौड़ आ इज हीं। रूई रा लोभ में, खेसलौं अर पोतियौं गमायौ। अंारी कसर तौ काढ़णी हीं। रात री वगत, कुण दैखेै। वो आपरी धोती खोलनै बिछाय दी। काठी बाथ भरनै वौ धौती माथै रूई धरण लागौ के जित्तैं फेर धोती कुण ई खांचली। साव नागौ-तडं़ग उठै ई ऊभौ रह्यौं। रूई रा लोभ में सगला गाभा ई गमाय दिया। आ भैंस हैं के डाकण। गाभौ तौ देख्यौड़ौं छोड़े नीं। वौ सोच करतौ चितबंगियौं सौ ऊभौं हौ के उणनै अेक टाबर री बोली सुणीजी-दादोजी, म्हनै बेक नवी बात सुणावौ। भंवरिया, थनै तौ बातां आगै रात रा सूवता नै झक पड़ै नीं, दिन रा जागता नै झक पड़ै नीं। अै कोई बाता हैं ? म्हनै घड़ी आधा घड़ी ई सावळ सूवण दै कोंनी। दादोजी तौ चोर रै आवतां ई जागग्या हा। वै आपरै हाथां ई उणरा सगळा गाभा खींच्या हा। रूई री नीगैदास्ती वै भखारीं में ई सूवता हा। अर बांता सुणन सारू भंवरियौं वारै पाखती सूवतौ हौं। वै कह्यौं फगत अेक बात सुणावूंला। भंवरियौ मान गियौ। दादोजी चोर रै सागै बीती बात सुणाई। कह्यौ-रूई लेवण सारू खेसलो, पौतियौं धोती बिछाई तौ वा डाकण म्हारा सगळा गाभा खायगी। भंवरियौ पूछ्यौं - सगला गाभा उतारियां पछै थे कैड़ा दीखता हा। दादोजी दीयौ झूपायनैं उण चोर साम्हीं इंसारौ करनै कह्यौं बैटा, म्हैं साव इण जैड़ो दीखतौ हौं। चोर तौ फीटौ पड़ने नागौ ई उठा सू भाग गियौ।