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समझी रै वीरा समझी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक बिणियांणी नै गुदळक पड़ता हाजत व्ही तौ वा थोड़ी सूं पाछी वळती वगत अेक चोर उणरै आड़ी फिरियौ। बिणियांणी गैणा-गाठा संू पीळी-जरद व्हियोड़ी ही। चोररै तौ जांणै अणचींती माया हाथै लागी। लुगारी अबळा जात हैं, जोर सूं धाकल करतां ईं सगळौ गपी लपौलप उतारनै देय देवैला। चोर ई धाकलता ईं बिणियांणी मुळकती थकी बोली-बावळा, थोड़ौ हौळै बोल। म्हनै डरावण री जरूरत कोनीं। इता गैणा सूं ईं राजी मत व्है। थारी हीमत व्है तौ म्हनै ई साथै लै चाल। घर मंे दोय ओडी गैणौं फेर पड़ियौ है। म्हनै वौ ई जुगती सूं लावण दै। अपा दोनां रै आखी ऊमर खायां ईं नीं खूटै। म्हारा भाग रौ आज थूं नांमी मिळियौ। हाक मत कर, सेठनजी नै खुड़कौ व्हैगौ तौ पछै रांझौ पड़ जावैला। घर रै मांय सगळी पूंजा लेयनै आय जावूंला। बोल, थारी, कांई मंसा है ? थूं कैवै तो है ज्यूं ई चालूं परी अर थू कै तौ सगळौ माल उचकायनै चालां। चोर जांणियौ के आज तौ सांप्रत लिछमी तूठी। उणनै तौ अेड़ौ मौकौ ऊमर में हाथ नीं आवैला। हौळौ सूं सुरपुर करतौ बोल्यौ-म्हैं तो थूं कैवै ज्यूंक रण नै त्यार हूं। इणी बाड़ा मंे बैठौ उड़ीकू। कैड़ीक हुंस्यारीं सूं सगळौ कांम करै। बिणियांणी बौली-म्हैं इक्कीस आनां तौ मतै ई आई रैवूंला। पण कदास अैड़ौ ई धांदौ पड़ जावै तौ थूं सांम्हला झिरोखा हेटै ऊभनै म्हनै हौळौ-हौलै हेलौ पाड़ लीजै। म्हारौ नांव समझाी है। म्हैं झिरोखा री बाती सूं पोटळी थरकाय देवूंला। माल-मत्ता थनै सूपियां पछै म्हैं कोई मिस बणायनै बाड़ा मेंआय जावूंला। कैडीक सावचेती राखै। बाड़ा में सावळ चापळियोड़ी रैजै, कोई देख नीं लेवै। म्हारौ नांव समझी हैं, याद राखजौ। बिणियांणी तौ आ कैयनै निरांत सूं आपरी हवेली में गी परी अर चोर बाड़ा में चापळनै बैठग्यौ। आज उणरा मन में खुसी रौ पार नीं हौ। वौ बैठौ-बैठौ मन में मंसूबा बाधण लागौ कै धरै जावतां ई अेक पक्की हवेली चुणावूंला। उणरी सीख रै मुजब वौ तीन घड़ी पूठै झिरोखा हेटै उभनै हौळै-हौळै हेलौ मारण लागौ - समझी, अे समझी। इत्ता में झरोखा री बारी खुली। समझी बारै मूंडौ काढ़नै बोली-समझी रे वीरा समझी। नीं तो घाणा खांवा अ नीं कुबैला बारै जावं। अबै थां में समझ व्है तौ बोलौ-बोलौ बाड़ा सूं बारै जातौ रैजै नींतर घणौ पिछतावैला। चो रै मंसूबा री सगळी हवेली घुड़गी। वौ फीटौ पड़ै उठा सू सीकड़ मनाई, जांणै हवेली उणरै माथै पडै़।