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नींबू रै आसरे पूग ग्यौ रावळा मंे कुबदी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक धरमसाळा में अेक मिनख रैवतौ हौ। वो आपरा खूजियां में हरदम नींबू राखतौ। आवतौ जकौ मारगू उठै रोटी खावतौ तौ वौ उणरै पाखती बैठनै बातां करणी सरू कर देवतौ। आगला नै राजी करण सारू वौ उणरै मनभावती बातां करणी सरू कर देवतौ। आगला नै राजी करण सारू वौ उणरै मनभावती बातां करतौ, पण हरेक रै साम्हीं नींबू रा बखांण तौ करतौ ई। दुनिया में अमरफळ हैतौ ओ नींबू। नींबू खाया कोई मांदगी नैड़ी आवै नीं। पैळा री कोई मांदगी व्है तौ नींबू खाया तुरंतमिट जावै। धरमसाळा में कोई पीळिया रौ रोगी आवतौ तौ वौ कैवतौ के पीलिया तौ हांकरतां नींबूं सूं मिटै। रातिंदा वाळा नै, निकाळा वाळा नै, आधा-सीसी रौ माथौ दूखण वाळा नै, मस्स री तक लीफ वाळा नै अर सरणा चालती व्है जका नै इत्याद मांदगिया सारू वौ नींबू रै रस री दवाई बतावलौ। धौला बाळां वाळा नै कैवतौ नींबू सं पाछा काळा बाळ आय जावै। नींबू खाया ऊमर बधै। यू वौ नाई नींबू रा बखांण करतौ करतौ चक्कू सूं नींबू बंधार लेवतौ अर मौकौ देखनै बातां बातां में मुसाफिर री साग-सब्जी में नींबू निचोय देवतौ। नींबू निचोयां पछै कैवतौ-सवाद है जकौ तौ इण नींबू में इज है। नींबू सूं साग की रौ-कीं बण जावै। आफ तूमार तौ जोवौ। लियाज रै मारिया मुसाफिर उणनै साग घाल देवता। रोट्या खंवाड़ देवता। फगत नींबू रै आसरै वौ मजा में आपरौ गुजारौ कर लेवतौ। होळै-होळै लोगां नै उणरी चालाकी री ठाह पड़गी गी। प्एा रोटी रै सारू कुणं माजनौ पाड़ै। मिनख रा नींबू भरै पड़ता ई गिया। मिनख अेक ठाकर सूं दो-तीन वळा रोटियां खायली। चैथी बार वौ ई ठाकर धरमसाळा में फेर आयौ। अबकै उणरै साथै छोटकियौं कंवर ई हौ। कंवर री आंख मंे केई बरसां सूं फूलौं पड़ियौड़ो हो। मिनख तौ आपरी आदत मुजब आंख में फूलौ देखनै कह्यौ, ई नींबू रा रस सूं तौ आंख रौ औ फूलौ हाकरतां मिट जावै। आ बात कैयनै वौ तुरंत नींबू बधारनै सागरी धेकची मंे रस निचोय दियौ। ठाकर रौटी खावण् रौ मतौ करियौ ई हौ। पण मिनख री बात अजोगती सुणनै वांनै रीस आयगी। जंतराय दिया। पण मिनख रीस करी नी। साम्हीं हंसतौ हंसतौ कैवण लागौ ठाकरसा, के तौ म्हारीं मां मार-मारनै रोटी जीमावती ही के आज आप मार-मारनै रोटी खवाड़ौ हौ। मिनख री बात सुणनै ठाकरसा नै ई हंसी आयगी। कह्यौ-इण कुबदी में तौ घाटौ नीं है। वै उणनै मनवार रै सागै ठिकांणा में लेयग्या।