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बाबा थारै बेरणै

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

मन ऊजळ ऊजळ वरण,शरण ऊजळी सेव ।
अरण रुणीचौ ऊजळौ,(जिथ)तपै त्रिलोकी देव ॥
हर भजतां हर राखतां,हर पाळै हर कोय ।
हुकम टाळ हलणौ कियां,रामदेवरै होय ॥
जोत जागरित जोयलो,अमर आस्था ईश ।
दूहा रामापीर रा ,जबर रच्या जगदीश ॥
हर कोई हेलौ करै ,(तो) हाजर हाथोहाथ ।
आय र मेटै आपदा,राम रुणीचा नाथ ॥
जणौ जणौ जग जातरू,परतख पार न पाय ।
रामदेव राखै जिनैं,रुणीचै रम जाय ॥
तेवङियां तकदीर रा,तट ताळा खुल जाय ।
रामदेव राजी हुयां,जग जाळा कट जाय ॥
पिंड पीङा परतख मिटै,प्रगट कटै पम्पाळ ।
रजी रुणीचै राज री,भाल लगाय र भाळ ॥
सुख सांयत सरसै सकल,खुलै करम री रेख ।
राम रुणीचै राज रौ,ध्यान लगाय र देख ॥
कुण ऊँचौ नीचौ कुणी,कुण गोतर कुण न्यात ।
रामदेव रा जातरू,रामदेव री जात ॥
जगधारा जित जाय कर,हरधारा रळ जाय ।
घन्न धणी रै देवरै,जमधारा थम जाय ॥
धर्म अधर्मी लोगङा,राज रंक दरवेश ।
हाथ जोङ हाजर हुवै,देव धणी रै देश ॥
मन हंसा मोती चुगै,ईश करै असनान ।
रामसरोवर राम रौ,मानसरोवर मान ॥
जम रै हाथां जेवङी,काळ कळू विकराल ।
पीर पगलिया पूज नर,तिर जावै तिरकाल ॥
जूंणी जोखम जातरा,जगत जीव भरमांण ।
भजै रामसा पीर सो,नर पावै निरवांण ॥
हर गावै ध्यावै हरी,संत गिरस्थ फकीर ।
हरजस जुम्मा जागरण,रामसरोवर तीर ॥
दुख दोरप कर दूबळा,भव रा भोग भगाय ।
राम धणी रौ ध्यान धर,रामसरोवर न्हाय ॥

अंतस दीजै आस्था,उर दीजै उजळास ।
बाबा थारै बेरणै,अथ इतरी अपदास ॥
-- नवल जोशी