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* भ्रष्टाचार रा कुंडलिया * -

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

घोटाळा धोखाधङी,रिश्वत भ्रष्टाचार ।
भली चुणी रे भायलां,लोकतंत्र सरकार ॥
लोकतंत्र सरकार , देश नै दी बरबादी ।
म्हैनतकश नै मार,चोरटां नै आजादी ॥
मजा करै मरदूद,करणिया धंधा काळा ।
खुलतां ई दब जाय,फाइलां में घोटाळा ॥१॥

भ्रष्टाचारी म्हैकमा,भ्रष्टाचारी राज ।
भ्रष्टाचारण रै बिना,सरै न कोई काज ॥
सरै न कोई काज,नौकरी लगै न सोरी ।
नोट टेकियां टाळ,बदळियां व्हैणी दोरी ॥
क्रोङौं खर्च चुणाव लङै जिथ सत्ताधारी ।
डूबै मुलक भलाय,न धापै भ्रष्टाचारी ॥२॥

राजा अफसर माफिया,भूमि हङपणहार ।
तस्करिया आतंकिया,चौङा फिरै बजार ॥
चौङा फिरै बजार,संत भोपा बटमारा ।
नोटां री थपकार सुणै ,नाचै दरबारा ॥
बिकै मीडिया न्यूज,बजाय र थोथा बाजा ।
मूंडै मांग्या दाम लेय,बिकजावै राजा ॥३॥

सिंघ विसा राजा कठै,रजवट रापटरोळ ।
पद पाय र पसरै पदा, ठाला गाडर टोळ ॥
ठाला गाडर टोळ,साख चट जाय समूळी ।
मिनखां नै गिट जाय,समझ कर गाजर मूळी ॥
कोयक जे कानून रुखाळा मिळै कदीसा ।
अेकाधौ पज जाय,जियां पजिया सिंघवी सा ॥४॥
               
               --- नवल जोशी