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अब बता सेठाणी मगज किण रौ फिरियोड़ो हो

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक सेठ रै दोय घड़ी रात थकां उठ जाय करतो। निवरत व्हिया पछै पूजा पाठ करातौ। सिरावण करने अंधारै-अंधारै दुकान खोल देवतो। अेकर तड्के उठ्या अर दांतण - करता नै साम्ही बोरियां रै कनै अेक चोर लुक्योड़ो दिख्यौ। सेठ सोच्यौ, हाको करियां तौ काम बिगड़ै। सेठाणी दांतण वास्तै तंबाखू रौ गुल लाई। सेठांणी रै पाखती आजतां ई वै बाल्टी रा पांणी सूं कुरळौ भरनै सेठाणी माथे थूक दियौ। सेठाणी बोली - दीखे कोनी कांई ? गाभा सूगला कर दिया। लो हथाळी मांडौ म्है कपड़ा बदळनै आवूं। पण सेठ नीं तो जवाब दियौ अर नीं गुल लेवण सारू हथाळी ई मांड़ी। पछै दूजों कुरळौ वै चोर माथै थुक्यौ। सेठाणी नै हाल चोर री ठाह नीं पड़ी ही सेठ तीजो कुरळौ सेठाणी माथै थूक दियौ। सेठाणी फैर कह्यौं, म्हारों साज-सरीखों बैस आलौ कर दियौ। पण सेठ तौ कीं सुणी हीं होनी। मूंडौ नीचै करियां बारी-बारी सूं अेक कूरळौ सेठाणी माथै थूकता गिया। सेठाणी नै अणहूंती रीस आई। सेठां नै झिड़कती बोली-राम मार्या, थांनै आज आ कांई ऊंधी सूझी। बावळा तौ नीं व्हैगा। सेठ तो अेक कुरळौ चोर माथै अर अेक सेठाणी साम्हीं मूंडौ करनै थूकता ई गिया। चोर रासगळा गाभा भीगग्या तौ ई वौ आपरी ठौड़ सूं हिल्यौ कोनी। वौ जाणियौ सेठां रौ मगज फिरग्यौ है। सेठाणी थांभा रै ओलै ऊभनै बोली - गीगला रा बाबूजी, आज थानै औ कांई हिडकियौं सूझयौ। पण सेठ तौ कीं सुणी होनी। कुरळा थूकता रह्या। सेठाणी सेवट घर सूं बारै निकळी। आडौसियां-पाडौसियां नै भेळा करिया। चार पां जणा दौड़नै आया। सेठ बगना व्हियौड़ा बोरियां रै पाखती कुरळा थूकै हा। सेठ तौ किणी रै ई साम्हीं नीं देखियौ। बाल्टी सूं धोबा भर-भरनै पांणी मूंड़ा में लेवै अर साम्हीं कुरळा थूके। सेठाणी रोवण ढूकी। लोग पूछ हीं लियो, भला आदमी बात व्हैजकी बतावौं तौ खरी। सेठ-बोल्या, म्हैं तो सेठाणी रौ गाढ देखणौ चावतौ। वारै खातर म्है रात-दिन कळपूं अर वै म्हारा कुरळा ई झेल नीं सकिया। ओ चोर ई बापड़ौ चोखों, जकौ बोलों-बालों म्हारां कुरळा झेले। सियाळा री रात में भीजग्यौं तौ ई मूंड़ा सूं सिसकारी कांई करले। आ कैयनै वै थोड़ा मुळकिया अर बोरियां रै पसवाड़े लुक्योड़ा चोर साम्हीं हाथ रौ इसारौ करियौ। सगळा पाड़ौसी ढूका जको मार-मारनै उणरौ फूस काढ न्हाकियौ। पछै सेठ सेठाणीं रै साम्हीं देखने कह्यौं - अबै बोलौ, मगज म्हारौ फिरियौ के थारै फिरियौ।