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बगसीस में मिनख नै दी अेड़़ी घोड़ी

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक जमींदार रे घरै छौरो व्हियौ। वै घणा राजी व्हिया। अेक मिनख जमींदार रै दौळौं व्हैगियौ। कह्यों-अंदाता, अबकै तौ मोटी बगसीसी लेयनै जावूंला। जमींदार ई लारौ छुड़ावण सारू रीस में अेक अलांम घोड़ी बगसीस में दे दी। मिनख आपरै घरै गियौ। घोड़ी तौ अणहूंती अलाम ही ही। मारग में मिनख नै माथै ई नीं बैठण दियौ। लगांम झेलियां मिनख पाळौ-पाळौ आपरै घरे पूगौ। घोड़ी रोजीना रा दोय सेर दांणौ खाव जाती, पण असवारी वास्तै अड़ण ई नीं देवै। अेक खराब लत घोड़ी में फेर। कनौती भेळी, करनै फटाक लात मार देवे। बारी-बारी सूंमिनख रै सगळा घरवालां नै वा परसाद चखाय दियौ। पछै घरवाळां नै ई ठाह पड़गी। जद घोड़ी कनोती भेळी करण लागै तद वै आग ई रेवै, नेड़ा नी जावै। गांवतरै मांगणी करणनै जावै तद घोड़ी माथै चढ़या फिर तौ मिनख तौ लाख कमाया। पण वा तौ पूठा माथै ई हाथ नीं धरण दै। कदै ई ठोड़-कुठौड़ ठरकाय दी तौ जीव सवाय में जावैला। मिनख रा पड़ौस में अेक कुबदी मिनख रैवतौ हौ। मिनख नै ई कुमत सूझी जकौ उण सूं सला विचारी। कह्यो-भाया, घोड़ी असवारी नं करण दै जकौ तौ भरपाई पण लातां मार-मारनै सैंग घरवाळां रा हाड़का खोळा कर दिया। घोड़ी री इण लात मारण री लत रौ तौ कीं उपाव बता। कुबदी-लात मारती वगत घोड़ी कांई करतब करै-पूछ हिलावती व्हैला के खारी निजर सूं जोवती व्हैला। म्हनै घोड़ी रौ रंग-ढंग तौ बता। तद मिनख कह्यौ-लात मारती वगत वा कन्नौती भेळी करै अर कनौतौ भेळी, व्हैतां ई वा लात फटकार देवै। कुबदी कह्यौ-तौ इण में इत्ती सोचै जितरी कांई बात, घोड़ी री सगळी खोडत्र तौ उणरी कनौती में है। जे थूं उणरी कनौती बोच न्हाकै तौ फेर की टंटौ नी। कनौती बोचियां पछै वा नीं तौ कनौती भेळी करैला अर नीं लात मारेला। मिनख कद घोड़िया धारी ही। कुबदी रै कैतां ई ईं उणरै पूरी जचगी। घरे आतां ई वौ किणी नै पूछ्यौं नीं कोई ताछ्यौ। कतरणी सूं कुचदेणई घोड़ी रा कांन बोच लिया। घोड़ी घणा ईतडफडाटा करिया, पण वौ तौ उणनै सफा बूची करा दी। कांन बोचणा मिनख रै हाथ हा पण लातां मारणी तौ घोड़ी री मरजी माथै हीं। पैला कनौती भेळी करतां पांण जाच पड़ जावती के घोड़ी लात मारैला। पण अबै वा ई ठाह नीं पड़ै। भरोस ासूं पाखती जावै अर लप लात दै। अबै तौ लात खायां ई लात रौ पत्तौ पड़ै।