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दिल्ली रा ठग अर मिनख

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

एक मिनख गंगाजी गियौ। पूरी तैयारी रै सागै। हरद्वार सूं पाछौ वहीर व्हियौ तौ उणरै जची के दिन दिल्ली निजरां सूं देखलूं तो कैड़ौक व्है। अबै तौ म्हारा ई फुल गंगाजी में आवैला। खुद रै आवण रौ तौ मौको पाछौ नीं बणैला। राजी-राजी वौ हरद्वार सूं आवण रै वगत दिल्ली उतरग्यौ। दिल्ली देखणै वौ घणौ राजी व्हियौ। ऊंचा मैला, पक्की सड़कां अर सुरंगा बाग-बगीचा। जमना रै काठै बसियोड़ी। आ नगरी तौ सुरगापुरी नै ई मात करै। मिनख नगरी देखण में मस्त हौ के तीन च्यार लफंगा उणरै लारै पड़ग्या। वौ ग्वार व्है ज्यूं दिखतौ हौ। पैली वळा दिल्ली आयौ हौ। वौ तौ आपरै मन परवांण धौळी-धौळी सै दूध जांणतौ। मिनख जात रौ पतियारौ करतौ। पण लफंगा तौ अैड़ा भोळा मिनखा री इज टौय में रैवे। वै उणरै लारै-लारै अटकळ विचारता, निरी दूर लारौ करता रह्या। मिनख अेकांत ठौड़ देखनै बैठग्यौ। उगां नै औ ई मिस लाधौ। तुरंत उणनै पजावण री विचारली। मिनख ऊभौं व्हियौ तौ वै उणरै दौळा व्हैगा। कह्यौ-थू पवितर आतमा रौ अपमान व्हियौ। थारी मौत तौ नीं आई। कोतवाळ कनै चाल। दस साल जेळ में पंड़ियौ सिडै़ला। बूढ़ो है, पण इतौं ई होस नीं। मिनख कह्यौ-म्हैं गांव रौ अबूझ हूं, म्हनै ठाह कोनीं। भूल संू गलती व्हैगी, हाथ जोड़नै माफी चावूं। कीं डंड भरणौ व्है तौ पावली-आठ आंनी अठै ई लै लिरावौ। म्हनै कोतवाळ करै मत घसीटौ। कीकर ई पिंड छूटै जकी बात करौ। थांनै आसीस देवूंला। ठग कह्यौ-बदमास, थूं पवितर आतमा री कीमत चार आनां ईक रै। आ तौ फैल जुलम री बात हैं। थनै कोतवाळी में लै जांवणी ई पड़सी। थूं जांण करनै आ पाप करियौ। मिनख हाथ जोड़तो बौल्यौ-म्हनै इण में कांई हाथ आवै ! आप हुकम दिरावै तौ आ सगळी ठौड़ म्हारै हाथां सफ कर दूं। पण ठग किणरां मानै। सगळा दोळा व्हिया जकौ रोवता-ई उणरौ सैंग माल मतौ खोस लियौ। फगत पैरण नै धोतड़ी लारै छोड़ी। मिनख जांणियौ के इता में ईं पिंड छूटौ। दस बरस री जेळ तौ भुगतणी नीं पड़ै। पण उणरा मन में पूरौ बैठग्यौ। कठैई फेर गलती व्हैगी तो अबकै लारौ नीं छूटैला। इण विचार सूं पूछयो-अबै तौ म्हनै सावळ रिह्यौ।