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सपना री बातां गम गी आंख्या खुलतां

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

अेक मिनख रात रा सपना देख्यौ के उणरै कनै एक गाडोलिया लुहार आयो अर उण रै नारकिया रो मौल पूछ्यों। वो मिनख गोडोलिया लुहार नै कह्यों, थूं ईं मोल कर। गाडोलिया लुहार मिनख नै कह्यों, थारी चीज हैं तो इण रौ मोल थूं ही बता। घणी झोड़ रै पछै मिनख नारकिया रा तीन-बीसी रिपिया मांगिया। पण गाडोलियों लुहार उणरा पचास रिपिया धामिया। मिनख कह्यों, म्हैं तीन-बीसी सूं अेक कौडी ई कम नीं लूवं। गाडोलिया लुहार कह्यों, म्हैं पचास रिपिया सूं अेक छदाम बती नीं देंवू। थारी मरजी है तो बोल। निरी ताळ झिकाळ व्ळैती रैयी। सेवट गाडोलिया लुहार आपरी नौळी सूं पचपन रिपिया कळदार गिणिया अर नारकिया री राहड़ी में हाथ घालियौ। पण मिनख पचपन रिपियां सूं राजी नीं व्हियों। वो गाडोलिया लुहार रौ हाथ झटकतौ थकौ बोल्यौ, बाब री सोगन, जे तीन बीसी सूं राती छदाम ई कम लूेवूं तौ। दोनां री झड़पा-झड़प् में मिनख री नंीद खुलगी। वो परेशान व्हेग्यो। अरे ओ म्हैं कांई कर्यो। नींद खुलतां ई पैली बाम उणरा मन में आई के मुरख पणै में पचपन रिपिया गमा दिया। अबारा पचपन रिपिया आ जावता तो जोरदार काम व्है जावतो। वौ सौच्यौ कै, पचपन रिपिया इण नारकिये रा कांई बुरा हैं। वो झट पाछी आंख्यां मींची अर, हाथ धकै करतौ बौल्यौ-ला पचास ई दै। उण नै कीं कोनीदिख्यौ, वौ गैला व्हैग्यौ; आंख्याा मीचियोड़ों हीं हथाळी मेंरिपियां रौ परसन नीं व्हियौं तौ वो थोड़ो हाथ आगै बधायनै कह्यौ, नाराज क्यूं व्है रिया हो, रामा धरमी री बात, लाओं अबै चालीस ई दे दो, काम चला लेवूंला। पण चाळीस भी कठै पडया हा। वौ सूतो-सूतो, जोस सूं आख्या मींचनै आगै सिरकतो कह्यों, अबै सौदो तूट व्है है, ला तीस ई दै, अइ ओ नारकियों हाथ मैं पकड़। पण उठै कोई हाथ कोनी दिख्यो। वो फेर उतावळोै पड़ने बौल्यो, ला बीस रिपिया हीं दे दे, अरे, दस ई दे दे। चाल, अंत बात करां, लां पांच ईदै। मिनख जाणियौं पांवू रौ तौ रिपियों ई वतौ। सेवट आंख्यां मींच्योड़ौ ई मांचा सू उभौ व्हियौ अर आप रो पूरौ हाथ धकै करनै कह्यों, अबै नटियौ तौ थन्ने रामसापीर री सौगण हैं। ला अेक रूपियौं कोई कोनी हो, सपना री बातांग, गम गी आंख्या खुलता...। तठै तो पचपन रिपिया मिल रह्या हैं और अबै एक रिपिया कोनी मिल्यौ।


1 comments:

  1. ललित शर्मा ने कहा…

    चदंन सिंघ जी चोखी कहाणी सुणाई, सारी बातां सुपना ही थी, राम-राम