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समझ्यौं भोळौ, पण निकल्यौं गजब रौ गौळौ

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

थळी रौ अेक वासी अेकर नेड़ा रा गांव में आयौ। उठै रौ थाट देखनै वौ तौ हाक्यौ-बाक्यौं व्हैगौ। वौ अेक बेरा माथै आयौ तौ उणरी अकल ई कह्यौं को करियौं नीं। थळियौं चकन-बकन व्हियौ। वै बेरा रा सागड़ी कनै आयौ। वो सागड़ी ने इचरज सूं पूछ्यौ-आ घड़लिया रौ तौ सेड़ौ ई कोंनी। कितीक लाबीं हैं ? सागड़ी कोतकियौ हौ। थळिया री बात सुणनै वौ जोर सूं हंसियौ। कह्यौं-थनै ईती ई ठाह कोनी ? घड़लिया री आ माळ तौ सात पंयाळ उंडी हैं, पछै किकर सेड़ौ आवै। बात सुणनै थळिया रौ तौ माथै ई चकरीजगौ। बेरा माथै उणीगंाव रा च्यार पांच मिनख बैठा हा। थळियां री भौळप माथै वै ई हंसिया। फरे पूछ्यौ-पण आं घड़लिया बौल्यौ-घड़लिया भरे थारौ बाप। थारा बाप नै घड़लिया भरण सारू राख्या हूं। थळियौं कह्यौं-म्हारो बाप मांय बैठौ सीयां नी मरतौ व्हैला ? सागड़ी कह्यो-थनै बाप माथै दया आवती व्है तौ थ्हारी कांगल दे दै। थळियौं लप उतारनै सागड़ी नै आपरी कांबल झिलाय दीवी। मिनख हंसिया तौ कह्यौ-बाप सूं बती कांबल थोड़ी ई हैं। थळियौं कांबळ गमायनै राजी-खुसी व्हीर व्हैगौ। सागड़ी कह्यौ-थळिया कितरा नाढ़ व्हैं। फागण उतरतां वौ थळियौं पाछौ उण बेरा माथै आयौ। सगळा लोग बेरा माथै पूगा। थलियौं कह्यौ-म्हारा बाप घड़लिया नीं भरतौ तौ गवूं रौ अेक दांणौ ई नीं व्हैतौ। इण सारू साख री आधी पांती रौ हकदार म्हैं हूं। थळियां रीबात सुणतां पांण सागड़ी रौ मूंड़ौ थाप खायग्यौं। म्हारौ बात कित्तौ दौरौ दिनां तक घड़लिया भरी, अबै औ पांती देवतौ दौरौ क्यंू व्है ? बेरा रो धणी छान सूं काबळ लायनै थळिया रै साम्ही करतौ बौल्यौ-आ लै थारी कांबली, म्हैं तौ कोगत करी ही। थळिये कह्यौ-अबै मानूं जैड़ौ म्हैं ई कोंनी। म्हैं तौ माथौ बाढ़िया ई म्हारी पाती नी छौड़ूं। इण गांव में मिनख बसता व्हैला तौ म्हारा न्याव करैला, नीतर म्है खुद निवेड़ लेस्यू। मरणौ तेवड़नै ई अठै आयौ हूं। लोग कह्यौ-बात तौ न्याव री कैवै हैं। पैला ठागौ करियौं जकौ अबै भुगतै। तेवड़ी कांबळ लेवती वगत उणनै आ बात सोच लेवणी हीं। बस्ती रा सगळा मिनख थळिया रै विळू रहया। सागड़ी घणौ ई रौयौ-रीक्यौं के म्हारी धूड़ खांणी व्हैगी, माफी चांवू। पण थळियौं तौ अेक ई सुणी नीं। झख मारनै आपरै हाथ छुरी-छैक आधौ आध पांती करनै थळियां सूं नीठ आपरौ लारौ छुड़ायौ।