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छबीस दूहा पूंछ आळा--ओम जी पुरोहित"कागद"

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

चरका मरका चाबतां 

चंचल होगी चांच ।
फीका लागै फलकिया
अकरा सेकै आंच ।
करमां रो कीट लागै ।

2

नेता नाटक मांडिया
ले नेता री ओट ।
नेता नै नेता चुणै
जनता घालै बोट ।।
लोक सिधारो परलोक ।।

3

लोक घालै बोटड़ा
नेता भोगै राज ।
लोकराज रै आंगणै
देखो कैड़ा काज ।।
जोग संजोग री बात।।

4

हाकम रै हाकम नहीँ
चोर न जामै चोर ।
नेता तो नेता जणै
नीँ दाता रो जोर ।।
नेता जस अमीबा ।।

5

चोरी जारी स्मगलिँग
है नेता रै नाम ।
आं कामां नै टाळगै
दूजो केड़ो काम।।
आप बिकै नी बापड़ा ।।

6

जनता हाथां हार कर
हाट करावै बंद।
फेर ऐ खुल्ला सांडिया
खूब खिंडावै गंद ।।
जिताओ बाळो आगड़ा।।

7

चोळा बदळै रोज गा
चालां रो नीँ अंत ।
भाषण देवै जोर गा
वादां में नीँ तंत।।
कियां घड्या रामजी ।।

8
नेता मरियां कामणी
माता मरियां पूत।
बो इज होवै पाटवी
जो मोटो है ऊत ।
मारो साळां रै जूत ।।

9

बोट घलावै बापजी
दे कंठां मेँ हाथ
जीत बजावै ढोलड़ा
अणनाथ्या हे नाथ ।।
पोल मेँ बजावै ढोल ।।

10

बाजो बाजै जीत गो
नेता घर मेँ रोज ।
हारै जनता बापड़ी
भूखी टाबर फोज ।।
घालो ओज्यूं बोट।।

11

नेता खावै धापगै
जनता भूखी भेड़ ।
पांच साल मेँ कतरगै
पाछी चाढै गेड़ ।।
राम ई राखसी टेक ।।

12

नेता मुख है मोवणां
धोळा धारै भेस ।
जीत्यां जावै आंतरा
हार्‌यां करै कळेस ।।
दे बोट काटो कळेस ।।

13

पाटै बैठ्या धाड़वी
नितगा खोसै कान ।
नेता भाखै आपनै
चोखो पावै मान ।।
नमो कळजुगी औतार ।।

14

सेडो चालै नाक मेँ
मुंडै काढै गाळ ।
नेता मांगै बोटड़ा
कूकर गळसी दाळ ।।
रामजी ई रुखाळसी ।।

15

लोकराज रै गोरवैं
खूब पळै है सांड ।
चरणो बांरो धरम है,
बांध्यां राखो पांड ।।
करणी तो भरणी पड़ै।।

16

काळू ल्यायो टिगटड़ी
बणग्यो काळूराम ।
जनता टेक्या बोटड़ा
जैपर बण्यो मुकाम ।।
इयां ई तिरै ठीकरी ।।

17

धापी आई परण गै
नेता जी रै लार ।
नेता राखै चोकसी
बा टोरै सरकार ।।
पतिबरता है बापड़ी।।


18

नेता पूग्यो सुरग मेँ
धापी रै
गी लार।
ओ'दो मांग्यो लारलां,
धापी देगी धार।।
धणी री तो ही कुरसी।।

19
नेता चाबी झालगै,
दी कूए मेँ न्हाख ।
लोकराज रै बारणै,
अब तूं बैठ्यो झांख ।।
फसा ली कुतड़ी कादै।।

20

लोगां पूछी पारटी
नेता होग्यो मौन ।
नेता पूछी पारटी
कर नेता नै फोन ।।
बदळी तो कोनीँ आज।।

21

बेल्यां मांगी पारटी
नेता मारी डांट।।
पारटी म्हारी आपग,
है देवणगी आंट ।।
पारटी बदळै क देवै ।।

22

बोट घालो धपटवां,
नीँ तो करस्यूं झोड़।
नीँ छोडूंला गांव मेँ,
भाज्या फिरस्यो खोड़।।
बोट सूं कटसी पापो ।।

23

नेतावंश विशेष है,
औ’दै रो हकदार ।
नेतण जाम्यौ सेडलौ,
बणसी बो सरदार ॥
ऊंदर जामसी ऊंदर ॥

24

नेता फ़ळ तलवार रो,
बधै बुढापै धार ।
आडौ पटकै राज नै,
जे खा जावै खार ॥
और के खाडा खोदै ॥

25

नेता भासण ठोकियो,
ढीली करगै राफ़ ॥
म्हानै टेको बोटडा़,
पाणी देस्यां साफ़ ॥
जा पछै नै’र बंद है ॥

26

नेता टोरी बातडी़,
दे वादां री पांड ।
अबकै आपां जीतगै,
करस्यां खेत कमांड ॥
छावनी खोली छेकड़ ॥

4 comments:

  1. ललित शर्मा ने कहा…

    चोखा दुहा है भाई जी...
    राम राम

  2. डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

    इण दूहा री लाइना मांय तो सगळै जीवन री समझ मिल जावै
    है सा.....

  3. ललित शर्मा ने कहा…

    उम्दा लेखन के लिए आभार


    आपकी पोस्ट ब्लॉग4वार्ता पर

  4. सुनील गज्जाणी ने कहा…

    घणी खम्मा !
    आच्छा दूहा सारु मोकली बधाई !
    घणी खम्मा !