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पूरबियै परदेस

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

Banwari Sharma ओजी ओ हदक मिजाजी ओ ढोलाh मतना सिधाऔ पूरबियै परदेस रैवो नै अमीणै देस | पूरबियै मैं तपै रै तावड़ौ, लूवां लाय लगाय घूंघट री छांयां कुण करसी, कुण थांनै चँवर डुळाय ओजी मिरगानैणी रा ढोला, मतना सिधाओ पूरबियै परदेस, रैवो नै अमीणै देस | पूरबियै मैं डांफर बाजै, ठंड पड़ै असराळ सेज बिछा कुण अंग लगासी, पिलँग पथरणौ ढाळ ओजी पिया प्यारी रा ढोला, मतना सिधाऔ पूरबियै परदेस, रैवो नै अमीणै देस | पूरबियै मैं बसै नखराळी, कांमणगारी नार कांमण करसी मन बिलमासी, झांझर रै झिंणकार ओजी चन्नावरणी रा ढोला, मतना सिधाऔ पूरबियै परदेस, रैवो नै अमीणै देस | चैत महीनै रुप निखरतां, क्यूं छोडौ घरबार च्यार टकां की थारी नोकरी, लाख टकां की नार ओजी नणदलबाई रा ओ वीरा, मतना सिधाऔ पूरबियै परदेस, रैवो नै अमीणै देस |