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मणिहारी लादै मनै, मूंघो चुड़लो मोल

Rao GumanSingh Rao Gumansingh


सती री बाँतः-
मणिहारी लादै मनै, मूंघो चुड़लो मोल।
पति रण खेतां पौढियो, हण अरियांह हरोळ॥
पाणी सौ सौ हाथ पर सींच सींच कर सीर।
प्रीत मीत रा फूलड़ा, अरपण कीध अखीर॥
सती तणा सतरी सखी, स्रवणां हूँत सुणीह।
ज्वाला बिच तन जाळतां, दरसण करै दूणीह॥
सती समौवड़ कुण सधै, ऒपम अवर अयाणं।
बैठ विमाणां इम बळी, उमां रुप अहनांण॥
सन्देसो रथ सांड़िये, मांड़यो कागळ माय।
मिलणां बहनाँ मेलिया, साथणियां समझाय॥
फरवट आंख फरक्क, खड़ियो तायल करहलो।
उगताँ पैल अरक्क, सन्देसो जा सौंपियो॥

1 comments:

  1. J.K.ChArAn.. (Jai Shree Karni) ने कहा…

    hukum....jai shree karni.......excellent blog designed by u....i like ur style and creativity....keep it up....