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राजस्थानी भासा

Rao GumanSingh Rao Gumansingh


भासा राजस्थान री, रहियां राजस्थान।
राजस्थानी रै बिना, थोथो मान 'गुमान'॥
आढो दुरसौ अखौ, ठाढ़ा कवि टणकेल।
भासा बिना न पांगरै, साहित वाळी बेल॥
पीथल बीकाणै पुर्णा, जाणै सकल जिहान।
पातल नै पत्री पठा, गहर करायौ ग्यान॥
सबद बाण पीथल लगै, मन महाराणा मोद।
अकबर दल आयो अड़ण, हलदी घाट सीसोद॥
धर बांकी बांका अनड़, वांका नर अर नार।
इण धरती रा ऊपना, प्रिथमी रा सिंणगार॥
धन धरती धन ध्रंगड़ो, धन धन धणी धिणाप।
धन मारु धर धींगड़ा, जपै जगत ज्यां जाप॥
रचदे मेहंदी राचणी, नायण रण मुख नाह।
जीतां जंग बधावस्यां, ढहियां तन संग दाह॥
नरपुर लग निभवै नहीं, आज काल री प्रीत।
सुरपुर तक पाळी सखी, प्रेम तणी प्रतीत॥
मायड़ भासा मान सूं, प्रांत तणी पहिचांण।
भासा में ईज मिलैह, आण काण ऒळखांण॥
मायड़ भासा जाण बिण, गूंगो ग्यान 'गुमान'।
तीजा गवरा होळीका, हुवै प्रांत पहिचांन॥
भाइ बीज राखी बंधण, गीत भात अर बान।
बनौ विन्याक कामण्या, विण भासा न बखान॥

4 comments:

  1. मदन देवासी सरनाउ ने कहा…

    मदन देवासी सरनाउ सांचौर [जालोर], सरनाऊ
    मानसरोवर सूं उड़ हंसौ, मरुथळ मांही आयौ
    धोरां री धरती नै पंछी, देख-देख चकरायौ

    धूळ उड़ै अर लूंवा बाजै, आ धरती अणजाणी
    वन-विरछां री बात न पूछौ, ना पिवण नै पाणी

    दूर नीम री डाळी माथै, मोर निजर में आयौ,
    हंसौ उड़कर गयौ मोर नै, मन रौ भेद बतायौ

    अरे बावळा, अठै पड़्यौ क्यूं, बिरथा जलम गमावै
    मानसरोवर चाल’र भाया, क्यूं ना सुख सरसावै

    मोती-वरणौ निरमळ पाणी, अर विरछां री छाया
    रोम-रोम नै तिरपत करसी, वनदेवी री माया

    साची थारी बात सुरंगी, सुण सरसावै काया
    जलम-भोम सगळा नै सुगणी, प्यारी लागै भाया

    मरुधर रौ रस ना जाणै थूं, मानसरोवर वासी
    ऊंडै पाणी रौ गुण न्यारौ, भोळा वचन-विलासी

    दूजी डाळी बैठ्यौ विखधर, निजर हंस रै आयौ
    सांप-सांप करतौ उड़ चाल्यौ, अंबर में घबरायौ

    मोर उतावळ करी सांप पर, करड़ी चूंच चलाई
    विखधर री सगळी काया नै, टुकड़ा कर गटकाई

    अब हंस नै ठाह पड़ी आ, मोरां सूं मतवाळी
    मानसरोवर सूं हद ऊंची, धरती धोरां वाळी

  2. मदन देवासी सरनाउ ने कहा…

    सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,
    सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,
    दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,
    काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,
    जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,
    रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,
    रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,
    तन्हाई में सहारा है दोस्ती, मझधार में किनारा है दोस्ती,
    जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,
    किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,
    हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,
    हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
    कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की वरना इस जमीं पर "खुदा" है दोस्ती
    गमसा [राव गुमानसिंघ जी ] मैं आपको बोत बोत धन्यवाद देना छाता हू आपकी वेब सईद देखी है बोत आचा लगा , मैं भी बोलता हू की हमारे जालोर ज़िले का समाचार देते है राव गुमानसिंघ जी को बोत बोत धन्यावाद
    मदन देवासी सरनाउ

  3. तेज़ाराम देवासी सरनाउ ने कहा…

    गमसा [राव गुमानसिंघ जी ] आपने बोत आचि कोशीस की है और जालोर ज़िला की ख़बर देते रहिए जी

  4. मदन देवासी सरनाउ सांचौर ने कहा…

    सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,
    सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,
    दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,
    काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,
    जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,
    रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,
    रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,
    तन्हाई में सहारा है दोस्ती, मझधार में किनारा है दोस्ती,
    जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,
    किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,
    हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,
    हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
    कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की वरना इस जमीं पर "खुदा" है दोस्ती
    गमसा [राव गुमानसिंघ जी ] मैं आपको बोत बोत धन्यवाद देना छाता हू आपकी वेब सईद देखी है बोत आचा लगा , मैं भी बोलता हू की हमारे जालोर ज़िले का समाचार देते है राव गुमानसिंघ जी को बोत बोत धन्यावाद
    मदन देवासी सरनाउ