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डींगल......

Rao GumanSingh Rao Gumansingh


"विश्व में तमिल को छोड़कर कोई भी ऐसी भाषा नहीं है जो डींगल के बराबर समृद्ध हो. इसमें श्रृंगार और शौर्य का अदभुत मिश्रण है." राजस्थान में शायद ही कोई ऐसा हो जिसकी प्रशस्तियों में डींगल के गीत ना हों. (कोट खिसै देवल डिगै, वृख इंधण व्हे जाय। जस रा आखर जेहिया, जातां जुगां न जाय॥).... (घायल गत घूमैह, रै भूमी मारवाड़ री। राळो रुं रुं मेह, साहित इमरत सूरमों॥)