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दिल्ली रै कुड़कै मांय फस्यौडा राजस्थान रा मिजळा नेता!

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

आज म्हनैं इण बात रौ पक्को पतियारौ व्हैग्यौ कै राजस्थानी भासा नैं रिगदोळणिया फगत इण प्रदेस रा ही वै मिजळा राजनेता है जिका वोटां री फसल तो इण भासा में काटै, पण विधायक अर मंत्री बणतां ही आप री औकात भूल जावै। कुल मिलाय नैं भारत रा नेतां राजस्थान रै नेतावां नैं जिण कुड़कै में फसा’र छोडग्या आज तकात वै उण कुड़कै सूं बारै निकळ नीं सक्या है। हिन्दी रा गंंुण गावणिया इण नेतावां रा पौत नैं इणा नैं कितोक ज्ञान है आज सगळौ चवड़ै आयग्यौ। आज रै भास्कर में छप्यै अेक समाचार मुजब राजस्थान रौ जूनौ ’िाक्षा मंत्री काळी चरण सर्राफ आ कैवै कै हिन्दी रास्ट्रभासा है! अबार रौ ’िाक्षा मंत्री मास्टर भंवरलाल आ कैवै कै हिन्दी राजस्थान री मातृ भासा है।

दूजै कांनी राजस्व मंत्री हेमाराम आप री न्यारी पूंपाड़ी बजावंता आ कैवै कै राजस्थानी भासा हरैक ठौड़ न्यारी-न्यारी बोली जावै। अबै इण कुमाणसा नैं आ कुण समझावै कै प्रकृति रौ नैम है कै 12 कोस पछै बोली बदळ जावै अर ओ नैम संसार री हरैक भासा पर लागू व्है। इण लोगां नैं ओ भी ज्ञान कोनी कै भासा अर बोली में कांई फरक व्है। भासा अर बोली मे फरक नी कर सकै वै गैलां में कांई घटै। जिण भांत अेक-अेक मिणियो जोड़ण सूं माळा बणै, उणी भांत कैई बोलियां रै पांण भासा बणै अर जद इण में साहित्य रौ सिरजण व्है वा भासा बण जावै। हिन्दी भासा में बोलचाल रा 97 पंजीकृत सरूप काम में लेईजै अर राजस्थानी में 73 सरूप काम मे लेईजै इणी भांत असमिया में 2, बंगला में 15, गुजराती में 27, कन्नड़ में 32, कोंकणी में 16, मलयालम में 14, मराठी में 65, तमिल में 22, तेलुगु में 36, उर्दू में 9 क’मीरी में में 5 नेपाळी में 4, संथाळी में 11, पंजाबी में 29, सिंधी में 8, बिहारी में 34, अे सगळा वां बोलियां रा न्यारा-न्यारा सरूप है अर इण बोलियां सूं अे भासावां बणीजी है। इण लोगां नैं राजस्थानी रै लूंठै साहित्य रौ अंगाई ज्ञान कोनी। आखी जगत बिरादरी इण भासा री धाक मानै।

राजस्थान री यूनिवर्सिटिया में तो इण रौ साहित्य पढाईजै ई है इण रै सागै ही अमरीका री सिकागो यूनिवर्सिटी में भी पढाईजै। अमरीका री ओबामा सरकार भी आप रै अठै इण भासा नैं मानता दे राखी है। आ तो वा भासा है जिण में मीरां मेड़तणी गिरधर गोपाळ नैं रिझायौ है, इणी भासा में भगवान करमा रौ खीचड़ौ खायौ है। इण भासा रौ बखाण कठै तांई करां इण रौ कोई पार कोनी। पण इण सूं ओ साफ लखाव व्है कै लारलै साठ बरसां सूं जिण हिन्दी माध्यम सूं अे नेता भण्या-गुण्या है वांरौ डोळ नै वारौ ज्ञान चवडै+ आयग्यौ है। इण प्रदेस रा नेतावां रौ ही ज्ञान जद इत्तौ ओछो नैं कंवळौ है तद सोचो कै इण प्रदेस में इण अधकिचरी भणाई में भण्या आम लोगां रौ ज्ञान कित्तौक बध्यौ हुसी। अे मिजळा नेता नीं चावै कै प्रदेस रा टाबर आप री उण वीर भासा में भणै, जिण रै रसपाण सू खागां खड़क उठै अर लोग बळती लाय में कूद पड़ै। जदि ओ हुंवतो तो आज आ विगत नीं होवंती, इण रोळ राज रा टप्पू कदै चकीज जांवता अर मायड़ भासा रौ अपमान भी नीं होंवतो अर लोग इण अन्याव नैं मून धार नैं नीं सैंवता। वै खागां लेय’र इण रोळ राज रै सांमी आ भिड़ता।

मतलब भारत रा राजनेतावां नूंवै उपनिवेसवाद री अेक भासा ’’हिन्दी’’ माडाणी अठै रा लोगां पर थरपदी। किणी भी संस्कृति नैं खतम करणी है तो अेक सीधो सो हथियार है कै उण री भासा नैं खतम कर दो, संस्कृति रा भट~टा मतोमत ही तळै बैठ जासी। राजस्थान रा राजनेता आप री चाल में कामयाब व्हैग्या। इण नेतावां री लूण हरामी रौ अेक नमूनौ निजर है- कै किण भांत इण लोगां हिन्दी रा पांवडा इण प्रदेस में पधरावण रा जतन करण सारू राजस्थान री जन गणना रा आंकड़ा में हिन्दी नैं पटराणी बणावण रा सगळा ं पड़पंच रच लिया। 1951 री जनगणना मुजब राजस्थानी भासा बोलणियां री संख्या 1,34,01,630 ही अर 1961 में राजस्थान री आबादी में 26 प्रति’ात रौ बधापौ व्हियौ पण राजस्थानी बोलणियां री संख्या में फगत 11 प्रति’ात रौ ही बधापौ दीखै। 1961 री जन गणना में राजस्थानी बोलणियां री संख्या 1,49,33,016 दिखाईजी है। इणी भांत आवण वाळी हरैक जन गणना मे राजस्थानी बोलणिया री संख्या नैंं अे बटटै खाते में नाखता थकां इण नैं हिन्दी रै खाते में खतावंता-खतावंता दिल्ली री इण आस नैं पूरी कर दी कै राजस्थान हिन्दी भासी प्रदे’ा है।

मतलब राजस्थान नैं दिल्ली रौ उप निवे’ा बणावण री सगळी जरूरतां पूरी करली जद ही तो राजस्थान रौ ’िाक्षा मंत्री कैवै कै राजस्थान री मातृ भासा हिन्दी है। इण भांत राजस्थान नैं अेक चरणोई बणा’र समूचै भारत रा गोघां नैं अठै चरण री खूली छूट मिलगी। राजस्थानी भासा नैं आठवीं अनुसूचि में भेळण री मांग बरसां सूं चालती रैयी है, अर राजस्थान री विधान सभा 2003 में अेक प्रस्ताव सरब सम्मति सूं पारित कर नैं भेज चुकी है ओ प्रस्ताव भी सरकार किण मजबूरी रै पांण पारित करवायौ आ बात जगचावी व्है चुकी है। राजस्थानी भासा आठवीं अनुसूचि में जद कदै भी भिळै, पण राजस्थान सरकार खुद कनैं इण भांत रा अधिकार है कै वा अेक रात में प्राथमिक ’िाक्षा रौ माध्यम राजस्थानी नैं बणा सकै। पण सरकार ओला रैयी है अर कोई नैं कोई नूंवौ विवाद खड़ो कर नैं इण मामला नैं Åंडै कुअै में न्हाखण सारू ताफड़ा तोड़ रैयी है। राजस्थान रा राजनेता आम जन री नीं सुण नैं वां अधिकारियां री सला पर काम कर रैया है जिका नीं चावै कै राजस्थानी अठै रै राजकाज अर ’िाक्षा री भासा बणै।

नेतावां खनै आप री सोचण-समझण री सगळी Åरमा खतम व्हैगी। वै तो उणी मारग पर चालै जिका वांरा पीअे अर सेकzेटरी बतावै। जिका सगळा लोग बारै रा है, कैई अेक राजस्थानी मूळ रा है भी तो वांरी कठैई चलै कोनी। अे नेता इण अधिकारियां रै हाथं री कठपुतलियां है, अे जिंया नचावै अै बिंया ई इज नाचै। फैर तो अठै रौ राम ही रूखाळौ है अर इण भासा में कीं तो इसौ है नैं आप री वा लूंठाई है कै अे मिजळा नेता अर वै बारला अधिकारी लाख फिटापणौ करलौ इण भासा री लूंठाई अर अमरता नैं कम नीं कर सकै।
विनोद सारस्वत,
बीकानेर