राजिया रे दूहा सारु http://rajiaduha.blogspot.com क्लिक करावें रज़वाड़ी टेम री ठावकी ख्यातां रो ब्लॉग आपरै सांमै थोड़ाक टेम मा आरीयो है वाट जोवताईज रौ।

कविता ना व्यापार॥

Rao GumanSingh Rao Gumansingh

🌺कविता🌺
कवि नांही छोटा बडा, रंक किंवा उमराव।
सबकी अपनी कल्पना, अपने अपने भाव॥1
कवि कवि होता है सखे! , क्या आला क्या तुच्छ।
अपनी अपनी पसंद से, गढता पुष्पित गुच्छ॥2
कविता मन की कल्पना, कल्पक की सुकूमार।
मंचौ की महिमा नही,
कविता ना व्यापार॥3

कविता केवल ना विषय, नहीं शब्द लय भाव।
जन जन की पीडा अनत, मन के गहरे घाव॥4
कविता इक संवेदना, मन की गहरी सोच।
वह उमडेगी चित्त मे, जब जब लगे खरोंच॥5
कवि न केवल जात इक , या ना व्यक्ति विशेष।
जिस का अंतस हो दुःखी, वह कविता दरवेस॥6

ना निषाद ने क्रोंच पर, ताना होता तीर।
कविता कैसे चीखती, रामायण बन वीर॥7

छंद नही लय भी नही, ना मुक्तक अतुकांत।
कविता कोलाहल कभी, कभी तथा वह शांत॥8
कविता नहीं वियोग है, कविता ना संयोग।
पीडा की संवेदना-अभिव्यक्ति का रोग॥9
कविता ना विग्यान है, ना दर्शन उपदेस।
कविता केवल दर्द है, बांटत कवि दरवेस॥10
वैतालिक